‘‘हैलोपापा, मेरा कैंपस सलैक्शन हो गया है,’’ ऐश्वर्या ने लगभग चिल्लाते हुए कहा. उस से अपनी खुशी छिपाए नहीं छिप रही थी.

‘‘बधाई हो बेटा,’’ पापा की प्रसन्नता भरी आवाज सुनाई दी, ‘‘किस कंपनी में हुआ है?’’

‘‘रिवोल्यूशन टैक्नोलौजी में. बहुत बड़ी सौफ्टवेयर कंपनी है. इस की कई देशों में शाखाएं हैं,’’ ऐश्वर्या ने खुशी से बताया, ‘‘कालेज में सब से ज्यादा पैकेज मुझे मिला है. ज्यादातर बच्चों को तीन से साढ़े तीन लाख रुपए तक के पैकेज मिले हैं, लेकिन मुझे साढ़े चार लाख रुपए का पैकेज मिला है. लेकिन…’’

‘‘लेकिन क्या?’’

‘‘यह कंपनी 2 साल का बौंड भरवा रही है. समझ में नहीं आ रहा क्या करूं?’’

‘‘दूसरी कंपनियां भी तो कम से कम 1 साल का बौंड भरवाती ही हैं. अगर अच्छी शुरुआत मिल रही है तो 2 साल का बौंड भरने में कोई बुराई नहीं है, क्योंकि 2 साल बाद अगर कंपनी बदलती हो तो तुम्हें इस से ऊपर का जंप मिलेगा जबकि तुम्हारे दूसरे साथियों को मुश्किल से उतना मिल पाएगा जितने से तुम शुरुआत कर रही हो,’’ पापा ने राय दी.

‘‘थैंक्यू पापा, आप ने मेरी उलझन दूर कर दी.’’

ऐश्वर्या लखनऊ के एक इंजीनियरिंग कालेज की छात्रा थी. हर सेमैस्टर में टौप करती थी. सभी उस की प्रतिभा का लोहा मानते थे. सभी को विश्वास था कि सब से अच्छा पैकेज उसी को मिलेगा.

2 दिन बाद जब ऐश्वर्या घर पहुंची तो पापा ने उसे गले से लगा लिया. मम्मी ने उस के ऊपर आशीर्वादों की बौछार करते हुए पूछा, ‘‘तुम्हारी पोस्टिंग कहां होगी?’’

‘‘बैंगलुरु में?’’

घर में जश्न का माहौल था. खुशियों के बीच छुट्टियां कब बीत गईं पता ही नहीं चला. ऐश्वर्या जब नौकरी जौइन करने पहुंची तो कंपनी की भव्यता देख दंग रह गई. बैंगलुरु के आई टी हब में एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग की छठी मंजिल पर कंपनी का शानदार औफिस था.

 

सुबह 10 बजे कंपनी के सभी कर्मचारी मिनी औडिटोरियम में 15 मिनट तक मैडिटेशन करते उस के बाद अपनेअपने कार्यस्थल पर चले जाते. जूनियर कर्मचारियों के लिए हाल में छोटेछोटे क्यूबिकल्स बने थे, जबकि मैनेजर और ऊपर के अधिकारियों के लिए कैबिनों की व्यवस्था थी. किंतु सभी क्यूबिकल्स और कैबिनों की साजसज्जा एक ही तरह की थी, जिस से कंपनी का ऐश्वर्य झलकता था.

ऐश्वर्या की नियुक्ति प्रोजैक्ट मैनेजर सुशांत की टीम में हुई थी. उस की गिनती कंपनी के प्रमुख अधिकारियों में होती थी. अपनी काबिलीयत के बल पर उस ने बहुत तेजी से तरक्की की थी.

पहले ही दिन उस ने ऐश्वर्या का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘ऐश्वर्याजी, मेरी टीम कंपनी की लीड टीम है. कंपनी के सब से महत्त्वपूर्ण प्रोजैक्ट हमारी टीम को ही मिलते हैं. मुझे विश्वास है कि आप के आने से हमारी टीम और मजबूत होगी.’’

‘‘सर, मैं आप की अपेक्षाओं पर खरी उतरने की पूरी कोशिश करूंगी,’’ ऐश्वर्या के चेहरे से भरपूर आत्मविश्वास झलक उठा.

सुशांत ने सच ही कहा था. कंपनी के सब से महत्त्वपूर्ण प्रोजैक्ट उस की टीम को ही

मिलते थे, इसलिए सभी को दूसरों की अपेक्षा मेहनत भी ज्यादा करनी पड़ती थी. देखते ही देखते पहला महीना बीत गया. ऐश्वर्या को ज्यादा काम नहीं दिया गया. इस बीच वह काम को समझतीसीखती रही.

पहली तनख्वाह मिलने पर उस ने पूरे 25 हजार की खरीदारी कर डाली और फिर हवाईजहाज से लखनऊ पहुंच गई.

‘‘मम्मी, यह देखिए बैंगलौरी सिल्क की साड़ी और पशमीना शाल दोनों आप पर बहुत खिलेंगी,’’ ऐश्वर्या ने मम्मी के कंधों पर साड़ी रखते हुए कहा.

साड़ी और शाल वास्तव में बहुत खूबसूरत थी. मम्मी का चेहरा खिल उठा.

‘‘पापा, आप के लिए गरम सूट और घड़ी,’’ कह ऐश्वर्या ने 2 पैकेट पापा की ओर बढाए.

सूट पापा के मनपसंद रंग का था और घड़ी भी बहुत खूबसूरत थी. पापा का चेहरा भी खिल उठा.

‘‘तुम ने कितने की खरीदारी कर डाली?’’ मम्मी ने पूछा.

‘‘ज्यादा नहीं, सिर्फ 25 हजार की,’’ ऐश्वर्या मुसकराई.

सुन मम्मी की आंखें फैल गईं, ‘‘अब पूरे महीने का खर्चा कैसे चलाओगी?’’

‘‘जैसे पहले चलाती थी. पापा जिंदाबाद,’’ ऐश्वर्र्या खिलखिला पड़ी.

‘‘हांहां क्यों नहीं. अभी मेरे रिटायरमैंट में6 महीने बाकी हैं. तब तक तो अपनी  लाडली का खर्चा उठा ही सकता हूं,’’ पापा ने भी ठहाका लगाया.

2 दिन बाद ऐश्वर्या बैंगलुरु  लौट गई. अगले दिन लंच के बाद उस के सीनियर ने उसे एक टास्क दिया, जिसे पूरा करतेकरते 7 बज गए, लेकिन टास्क पूरा नहीं हुआ. कंपनी के ज्यादातर कर्मचारी चले गए थे, पर ऐश्वर्या अपने काम में जुटी रही. जानती थी कि यह काम आज ही पूरा होना जरूरी है.

‘‘मैडम, आप अभी तक घर नहीं गईं?’’ अपने चैंबर से निकलते सुशांत की नजर उस पर पड़ी.

‘‘सर, एक छोटा सा टास्क था, जो पूरा नहीं हो पाया. लेकिन मैं कर लूंगी.’’

‘‘लाइए मैं देखता हूं क्या है?’’ सुशांत ने कहा.

ऐश्वर्या कंप्यूटर के सामने से हट गई. सुशांत ने चंद पलों तक स्क्रीन पर खुले प्रोग्राम

को देखा, फिर उस की उंगलियां तेजी से कीबोर्ड पर चलने लगीं.

करीब 5 मिनट बाद सुशांत मुसकराया, ‘‘लीजिए आप का टास्क पूरा हो गया.’’

जिस काम को ऐश्वर्या कई घंटों से नहीं कर पा रही थी उसे सुशांत ने 5 मिनट में ही पूरा कर दिया. ऐश्वर्या उस की प्रतिभा की कायल हो गई.

‘‘थैंक्यू सर,’’ ऐश्वर्र्या ने कृतज्ञता प्रकट की.

‘‘इस की जरूरत नहीं,’’ सुशांत हलका सा मुसकराया, ‘‘थैंक्स के बदले क्या आप मेरे साथ 1 कप कौफी पीना चाहेंगी?’’

ऐश्वर्या भी काफी थक गई थी. उसे भी कौफी या चाय की जरूरत महसूस हो रही थी, इसलिए उस ने हामी भर दी.

 

सुशांत उसे एक महंगे रैस्टोरैंट में ले गया. वहां हाल के साथसाथ टैरेस में भी बैठने की व्यवस्था थी. सुशांत सीधे टैरेस में आ गया. वहां अपेक्षाकृत भीड़ कम थी और शांति भी थी. टैरेस से बाहर के दृश्य बहुत खूबसूरत नजर आ रहे थे. शहर की जगमगाती लाइटें देख कर लग रहा था जैसे सितारे जमीं पर उतर आए हों.

‘‘ऐश्वर्याजी, कंपनी की तरफ से 2 इंजीनियर 1 साल के लिए अमेरिका भेजे जा रहे हैं. आप ने उस के लिए आवेदन क्यों नहीं दिया? कौफी की चुसकियां लेते हुए सुशांत ने पूछा.’’

‘‘सर, मैं बिलकुल नई हूं, इसलिए आवेदन नहीं किया.’’

‘‘बात नए या पुराने की नहीं है. बात प्रतिभा की है और इस मामले में आप किसी से कम नहीं हैं. आप को आवेदन करना चाहिए. 3 लाख प्रति माह के साथसाथ कंपनी की तरफ से बोनस भी मिलेगा. 1 साल बाद जब लौटेंगी तो आप की मार्केट वैल्यू काफी बढ़ चुकी होगी,’’ सुशांत ने समझाया.

‘‘लेकिन सर, मैं बहुत जूनियर हूं. क्या मेरा चयन हो पाएगा?’’

‘‘उस की चिंता छोडि़ए. यह प्रोजैक्ट मेरा है. कौन अमेरिका जाएगा और कौन नहीं, इस का फैसला मुझे ही करना है.’’

ऐश्वर्या सोच में पड़ गई. वह तत्काल कोई निर्णय नहीं ले पा रही थी.

तब सुशांत ने कहा, ‘‘कोई जल्दी नहीं है. आप अच्छी तरह सोच लीजिए. कल शाम हम फिर यहीं मिलेंगे. तब आप अपना फैसला सुना दीजिएगा.’’

ऐश्वर्या घर लौट आई. ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे यह मौका उपयुक्त लगा. पापा 6 महीने बाद रिटायर होने वाले थे. उस का पैकेज तो साढ़े चार लाख रुपए सालाना का था, लेकिन हाथ में केवल 30 हजार ही प्रतिमाह आते थे. इतने में अपना खर्चा चलाना मुश्किल था, घर की मदद करना तो दूर की बात थी.

वह अगले दिन शाम को जब रैस्टोरैंट में पहुंची तो सुशांत टैरेस में उस की प्रतीक्षा कर रहा था. हलकाहलका संगीत बज रहा था. शाम बहुत ही खूबसूरत थी.

ऐश्वर्या ने जब अमेरिका जाने की इच्छा जताई तो सुशांत ने कहा, ‘‘बहुत सही निर्णय लिया है आप ने. वहां से लौटने के बाद आप के कैरियर में चार चांद लग जाएंगे. मैं कोशिश करूंगा कि वहां की हमारी सहयोगी कंपनी आप के रहने की व्यवस्था भी कर दे.’’

यह सुन ऐश्वर्या का चेहरा प्रसन्नता से खिल उठा कि अमेरिका में रहना सब से महंगा है.

अगर उस का इंतजाम हो जाए तो 1 साल में काफी पैसे बचाए जा सकते हैं. अत: उस ने कृतज्ञता भरे स्वर में कहा, ‘‘सर, आप जो मेहरबानी कर रहे हैं, समझ में नहीं आता कि उसे मैं कैसे चुका पाऊंगी.’’

‘‘आप चाहें तो उसे आज ही चुका सकती हैं,’’ सुशांत ने कहा.

‘‘कैसे?’’ ऐश्वर्या ने अपनी बड़ीबड़ी पलकें ऊपर उठाते हुए पूछा.

‘‘देखिए, यह दुनिया गिव ऐंड टेक के फौर्मूले पर चलती है. मांबाप किसी बच्चे को पालतेपोसते हैं, तो बदले में अपेक्षा करते हैं कि बच्चा बुढ़ापे में उन की देखभाल करेगा. एक अध्यापक किसी को शिक्षा देता है, तो बदले में तनख्वाह लेता है. सरकार भी अगर जनता को सुरक्षा और अन्य ढेर सारी सुविधाएं देती है, तो बदले में उस से टैक्स लेती है. इस दुनिया में मुफ्त में कुछ भी नहीं मिलता,’’ सुशांत के चेहरे पर किसी दार्शनिक जैसे भाव उभर आए थे.

ऐश्वर्या की समझ में नहीं आया कि वह कहना क्या चाहता है. अत: उस ने अचकचाते हुए पूछा, ‘‘जी, मुझे क्या करना होगा?’’

‘‘बस कुछ दिनों के लिए मेरी बन जाओ. मैं आप के कैरियर को इतनी ऊंचाइयों पर पहुंचा दूंगा कि लोग देख कर ईर्ष्या करेंगे,’’ कह सुशांत ने सीधे ऐश्वर्या की आंखों में झांका.

ऐश्वर्या को अपने आसपास की चीजें हिलती महसूस हुईं. उस ने हमेशा कालेज में टौप किया लेकिन क्या अब उस की प्रतिभा और काबिलीयत का कोई मोल नहीं? वह बस मांस का एक लोथड़ा है, जिस की कीमत लगाई जा रही है. देह व्यापार का एक सुसंस्कृत  प्रस्ताव उस के सामने था. अपमान से उस की आंखें छलछला आईं.

‘‘ऐश्वर्याजी, कोई जोरजबरदस्ती नहीं. यह एक प्रस्ताव मात्र है. आप मान लेंगी तो ठीक नहीं मानेंगी तो भी ठीक. कंपनी में आप की पोजीशन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. आप पहले की ही तरह अपना काम करती रहेंगी,’’ सुशांत ने अपने स्वर में भरपूर चाश्नी घोलते हुए कहा.

‘‘माफ कीजिएगा सर, आप ने मुझे गलत समझा. मैं बिकाऊ नहीं हूं,’’ अपने आंसुओं को रोकते हुए ऐश्वर्या खड़ी हो गई.

‘‘अरे, आप खड़ी क्यों हो गईं? आराम से कौफी तो पी लीजिए.’’

‘‘ऐश्वर्या ने उस की बात का कोई उत्तर नहीं दिया और तेजी से वहां से चली गई. अपने फ्लैट आ कर वह बुरी तरह फफक पड़ी. उस ने सफलता के लिए शौर्टकट अपनाने वाली बहुत सी लड़कियों के किस्से सुन रखे थे, लेकिन उसे भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा, ऐसा उस ने कभी सोचा भी न था. अब तो उस के लिए इस कंपनी में काम करना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि सुशांत हर कदम पर उस के लिए समस्याएं खड़ी करेगा. तो क्या उसे यह कंपनी छोड़ देनी चाहिए? लेकिन उस ने तो 2 साल नौकरी करने का बौंड भर रखा है.’’

पूरी रात ऐश्वर्या करवटें बदलती रही. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. अगले दिन वह सहमीसहमी सी औफिस पहुंची. उसे पूर्ण विश्वास था कि आज सुशांत किसी न किसी बहाने उसे जलील करेगा, लेकिन उस का व्यवहार तो पहले की ही तरह मृदु और शिष्ट था. ऐसा लग रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो.

1 सप्ताह ऐश्वर्या सहमीसहमी सी रही, फिर सामान्य हो गई. उसे लगा कि शायद सुशांत को अपने किए पर पछतावा होगा. धीरेधीरे महीना बीत गया. कोई खास घटना नहीं हुई.

एक दिन सुशांत ने उसे अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘ऐश्वर्या, यह अमेरिका के हमारे एक खास क्लाइंट का प्रोजैक्ट है. इसे 48 घंटे में पूरा करना है. क्या आप इसे कर पाएंगी?’’

‘‘जी, मैं पूरी कोशिश करूंगी.’’

‘‘गुड,’’ सुशांत ने कहा, ये कंपनी के खास क्लाइंट हैं, इसलिए ध्यान रहे कि कोई गड़बड़ न हो.

‘‘ओके सर,’’ कह ऐश्वर्या अपनी सीट पर लौट आई. उस ने उस प्रोजैक्ट को आराम से देखा, तो लगा कि यह तो बहुत आसान है. सुशांत सर बेकार में परेशान हो रहे थे. वह इसे आज ही पूरा कर सकती है.

ऐश्वर्या ने काम शुरू कर दिया लेकिन उस का अंदाजा गलत निकला. वह उस प्रोजैक्ट पर जैसेजैसे आगे बढ़ती गई वैसेवैसे उस की जटिलताएं भी बढ़ती गईं. दोपहर तक वह कोई खास काम नहीं कर पाई. उसे लगने लगा कि 2 दिनों में यह काम पूरा कर पाना संभव नहीं है.

वह लंच के बाद सुशांत से इस के बारे में कुछ पूछने गई, लेकिन वह किसी मीटिंग के सिलसिले में बाहर गया था और अगले दिन ही लौटना था. उस ने दूसरे सीनियर्स से भी बात की, लेकिन किसी ने भी पहले कभी ऐसे प्रोजैक्ट पर काम नहीं किया था.

अगले दिन सुशांत ने औफिस आते ही प्रोजैक्ट की प्रगति देखी तो बुरी तरह भड़क उठा, ‘‘यह क्या? आप ने तो कुछ किया ही नहीं? मैं औफिस में नहीं था, तो आप हाथ पर हाथ रख कर बैठी रहीं.’’

‘‘ऐसा नहीं है सर, इस में कुछ प्रौब्लम आ गई थी, जिस के बारे में कोई कुछ नहीं बता पाया. मैं ने दोपहर बाद क्लाइंट को कई बार फोन भी किया, लेकिन उस ने उठाया नहीं,’’ ऐश्वर्या ने सफाई दी.

‘‘ऐश्वर्या, आप होश में तो हैं,’’ सुशांत चीख सा पड़ा, ‘‘आप पढ़ीलिखी हैं. आप को इतनी तमीज तो होनी चाहिए कि जिस समय आप फोन कर रही थीं उस समय अमेरिका में रात होगी और क्लाइंट सो रहा होगा. खैर मनाइए कि उस की नींद नहीं टूटी वरना आप की नौकरी चली जाती.’’

‘‘सर, तो मैं और क्या करती?’’ अपनी बेबसी पर ऐश्वर्या की आंखें छलछला आईं.

‘‘अपने दिमाग का इस्तेमाल करतीं और काम पूरा करतीं,’’ सुशांत ने बुरी तरह डपटा. फिर प्रोजैक्ट को देख कर कुछ बातें बता उसे उस की सीट पर भेज दिया.

ऐश्वर्या ने लाख कोशिश की, लेकिन प्रोजैक्ट उस दिन पूरा नहीं हो पाया. इस से नाराज हो कर सुशांत ने उसे एक मैमो पकड़ा दिया.

धीरेधीरे सुशांत का असली रंग सामने आने लगा था. वह सब से कठिन काम ऐश्वर्या को सौंपता और उस के पूरा न होने पर डांटने के साथसाथ मैमो भी पकड़ाता रहता.

एक दिन सुशांत ने सुबहसुबह ही ऐश्वर्या को अपने चैंबर में बुला कर कहा, ‘‘3 महीने में आप को 11 मैमो मिल चुके हैं. अगर आप ने अपने काम में सुधार नहीं किया तो कंपनी आप को डिसमिस करने के लिए मजबूर हो जाएगी. इसे आप आखिरी चेतावनी समझिएगा.’’

 

अपमानित ऐश्वर्या अपनी सीट पर लौट आई. अगर वह डिसमिस कर दी गई, तो इस दाग के कारण दूसरी कंपनी में नौकरी मिलना असंभव हो जाएगा. एक ही उपाय शेष था कि वह खुद ही यह नौकरी छोड़ दे. लेकिन यह भी आसान न था. उस ने 2 साल का बौंड भर रखा था. उस से पहले नौकरी छोड़ने पर 5 लाख की क्षतिपूर्ति देनी पड़ेगी. कहां से लाएगी इतने रुपए? पापा तो 3 माह बाद रिटायर होने वाले हैं. अपनी बेबसी पर ऐश्वर्या की आंखें छलछला आईं.

‘‘ऐश्वर्या, क्या बात है, इतना परेशान क्यों  हो?’’ तभी स्नेहा ने उस के कंधे पर हाथ रखते हुए पूछा. इन दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई थी.

ऐश्वर्या के होंठ कांप कर रह गए. वह चाह कर भी कुछ न कह सकी. उस की आंखों से आंसू टपक पड़े.

‘‘यहां नहीं, चलो कैंटीन में चल कर बात करते हैं,’’ स्नेहा ने उस का हाथ पकड़ कर खींचा तो ऐश्वर्या उठ खड़ी हुई.

फिर स्नेहा उसे अपने औफिस की कैंटीन के बजाय दूसरी मंजिल पर बनी एक दूसरी

कैंटीन में ले गई. सुबह होने के कारण वहां सन्नाटा था. उस के काफी कुरेदने पर ऐश्वर्या ने सुबकते हुए पूरी बात बताई, जिसे सुन स्नेहा का चेहरा तमतमा उठा.

‘‘इस का मतलब वह यह घिनौना खेल तुम्हारे साथ भी खेल रहा है,’’ स्नेहा ने दांत पीसे.

‘‘तुम्हारे साथ भी का मतलब?’’ ऐश्वर्या की आंखों में आशंका के चिह्न उभर आए.

‘‘उस ने मुझे भी अमेरिका जाने का लालच दिया था. मेरे मना करने पर 2 महीने से मुझे भी बातबात पर परेशान कर रहा है,’’ स्नेहा ने रहस्योद्घाटन किया.

‘‘इस का मतलब जो 2 लड़कियां अमेरिका गई हैं उन्होंने उस की शर्त…’’ ऐश्वर्या ने जानबूझ कर अपना वाक्य अधूरा छोड़ दिया.

‘‘उस की सचाई वे जानें, लेकिन सुशांत की सचाई हम लोगों के सामने है. इसे सबक सिखाना जरूरी है वरना यह लड़कियों को हमेशा इसी तरह खिलौना समझ कर खेलता रहेगा,’’ स्नेहा ने मुट्ठियां भींचते हुए कहा.

‘‘लेकिन हम कर ही क्या सकती हैं?’’

‘‘बहुत कुछ,’’ स्नेहा ने कहा और फिर अपनी योजना समझाने लगी.

उस के बाद दोनों औफिस लौट आईं. थोड़ी देर बाद ऐश्वर्या सुशांत के चैंबर में पहुंच कर बोली, ‘‘सर, मुझ से यहां काम नहीं हो पाएगा.’’

‘‘तो?’’

‘‘अगर अभी भी संभव हो तो मुझे अमेरिका भेज दीजिए. आप की बहुत मेहरबानी होगी.’’

‘‘संभव होना या न होना तो मेरे ही हाथ में है, लेकिन वहां जाने की शर्त आप जानती हैं? क्या आप को वह मंजूर है?’’ सुशांत ने अपनी नजरें ऐश्वर्या के चेहरे पर टिका दीं.

‘‘सर, मैं अभी कुछ कह पाने की स्थिति में नहीं हूं, लेकिन शाम को आप मेरे फ्लैट पर आ जाएं. मैं वहीं सोच कर बताऊंगी.’’

‘‘ओके, बेबी, मैं 8 बजे तक पहुंच जाऊंगा,’’ सुशांत ने अपनी खुशी छिपाते हुए कहा.

ऐश्वर्या से वह दिन काटे नहीं कटा. रहरह कर उस का दिल बुरी तरह धड़कने लगता था. शाम को अपने फ्लैट पर आ गई. नहाने के बाद उस ने एक खूबसूरत साड़ी पहनी और सुशांत का इंतजार करने लगी.

ठीक 8 बजे घंटी बजी तो उस ने दरवाजा खोला. सामने सुशांत खड़ा था. उस ने भीतर आ कर दरवाजा बंद किया और ऐश्वर्या को प्रशंसात्मक नजरों से देखते हुए बोला, ‘‘साड़ी में तुम्हारी सुंदरता बहुत निखर आई है. बहुत ही दिलकश लग रही हो.’’

ऐश्वर्या ने कोई उत्तर नहीं दिया. सुशांत ने उस के करीब आते हुए कहा, आज की रात यादगार बना दो. मैं तुम्हें निश्चित तौर पर अमेरिका भिजवा दूंगा.

ऐश्वर्या अपने में सिमट कर रह गई. उस के मौन को स्वीकृत मान सुशांत की हिम्मत बढ़ गई. उस ने ऐश्वर्या को अपनी बांहों में भर कर उस पर चुंबनों की बौछार कर दी.

‘‘सर, यह क्या कर रहे हैं आप?’’ ऐश्वर्या कसमसाई.

‘‘तुम्हारे कैरियर को बनाने की तैयारी,’’ सुशांत ने उसे अपने सीने से भींचते हुए अपने अधर उस के अधरों की ओर बढ़ाए.

‘‘कैरियर बनाने की तैयार या जिंदगी बरबाद करने की तैयारी कर रहे हैं आप?’’ ऐश्वर्र्या का स्वर अचानक सख्त हो उठा.

‘‘ऐश्वर्या, इतना करीब आ कर अब लौटना मुश्किल है. मैं प्रोबेशन पीरियड पूरा होते ही तुम्हारी प्रमोशन भी कर दूंगा. बस जो हो रहा है उसे हो जाने दो,’’ सुशांत का स्वर कामवासना से कांप रहा था.

‘‘जरूर हो जाने देती अगर…’’

‘‘अगर क्या?’’

‘‘अगर, इस लैपटौप का वैब कैमरा औन न होता,’’ ऐश्वर्या ने मेज पर रखे लैपटौप की ओर इशारा किया.

लैपटौप को देख सुशांत यों उछला जैसे सांप देख लिया हो. उस ने घबराए स्वर में पूछा, ‘‘क्या इस का कैमरा औन है?’’

‘‘सिर्फ औन ही नहीं है, बल्कि इस कैमरे में हो रही हरकतों की कहीं दूर रिकौर्डिंग भी हो रही है,’’ ऐश्वर्या ने सुशांत को परे धकेलते हुए कहा.

‘‘रिकौर्डिंग हो रही है? सुशांत बुरी तरह घबरा उठा.’’

‘‘हां सुशांत, तुम लोगों को औरत के अंदर जिस्म के अलावा और कुछ दिखाई ही नहीं पड़ता. उस की प्रतिभा, उस की योग्यता का तुम्हारी नजरों में कोई मूल्य नहीं है. जितनी पढ़ाई और मेहनत तुम ने की है उतनी हम ने भी की है, लेकिन तुम पुरुष हो इसलिए आगे बढ़ना तुम्हारा अधिकार है, लेकिन हमें आगे बढ़ने के लिए अपनी अस्मत की कीमत चुकानी पड़ेगी,’’ ऐश्वर्या ने घबराए सुशांत के चेहरे पर एक घृणा भरी नजर डाली, ‘‘लेकिन अब जमाना बदल गया है. तुम इस तरह हमारा शोषण नहीं कर सकते. तुम्हें अपनी जलील हरकतों की कीमत चुकानी पडे़गी.’’

 

यह सुन सुशांत के चेहरे का रंग उड़ गया. उस ने जल्दी से लैपटौप बंद कर दिया.

‘‘इस से कोई फायदा नहीं होने वाला, क्योंकि एक और छिपा कैमरा तुम्हारी रिकौर्डिंग कर रहा है,’’ ऐश्वर्या ने दांत भींचते हुए कहा.

‘‘क्या एक कैमरा और है?’’ सुशांत बुरी तरह घबरा उठा.

‘‘तुम्हारे जैसे धूर्तों से सुरक्षित रहने के लिए क्या यह जरूरी नहीं था?’’ ऐश्वर्या व्यंग्य से मुसकराई, ‘‘तुम्हारा खेल अब पूरा हो चुका है. यह रिकौर्डिंग आज ही कंपनी के चेयरमैन के पास पहुंच जाएगी.’’

‘‘ऐसा मत करना. मेरे छोटेछोटे बच्चे हैं. उन की जिंदगी बरबाद हो जाएगी. वे सड़क पर आ जाएंगे,’’ सुशांत हाथ जोड़ कर गिड़गिड़ाया.

‘‘हम लोग भी तो तुम्हारे बच्चों जैसे ही हैं. तुम्हें हम पर कभी दया नहीं आई,’’ ऐश्वर्या ने मुट्ठियां भींचीं.

‘‘प्लीज, मुझे माफ कर दो. मेरी बीवी बहुत सैंसिटिव है, उसे यह सब पता चलेगा तो वह सुसाइड कर लेगी,’’ सुशांत ने अपना सिर ऐश्वर्या के कदमों पर रख दिया.

 

जिस सर्वशक्तिमान सुशांत नाम से कंपनी के लोग थर्राते थे वह उस के चरणों पर पड़ा था. उस ने सुशांत पर घृणा भरी नजर डाली और फिर बोली, ‘‘मुझे इमोशनली

ब्लैकमेल करने की कोशिश दोबारा न कीजिएगा. जो किया है उस की सजा आप को भुगतनी ही पड़ेगी.’’

‘‘अगर मैं नौकरी से निकाल दिया गया, तो उस की सजा मेरे छोटेछोटे बच्चों को मिलेगी. प्लीज उन के वास्ते मुझे माफ कर दो. मैं वादा करता हूं कि आज के बाद कोई गलत हरकत नहीं करूंगा. अगर तुम कहोगी तो मैं यह कंपनी छोड़ कर भी चला जाऊंगा.’’

ऐश्वर्या कोई तीखा उत्तर देने ही जा रही थी कि तभी उस के मोबाइल की घंटी बज उठी. स्क्रीन पर स्नेहा का नंबर चमक रहा था. उसने मोबाइल औन किया तो उधर से स्नेहा की आवाज आई, ‘‘ऐश्वर्या, यह सही कह रहा है. इस के कुकर्मों की सजा इस के बीवीबच्चों को मिल जाएगी, जबकि उन का इस में कोई दोष नहीं है. मैं ने वैब कैमरे की रिकौर्डिंग सुरक्षित कर ली है. इसे चेतावनी दे कर सुधरने का एक मौका दे दो.’’

‘‘ओके’’ कह ऐश्वर्या ने मोबाइल औफ कर दिया.

चंद पलों तक आंखें बंद कर ऐश्वर्या ने कुछ सोचा, फिर सुशांत पर घृणा भरी नजर डालते हुए बोली, ‘‘तुम्हारे कुकर्मों की सजा तुम्हारे बच्चों को न मिले, इसलिए फिलहाल हम इस रिकौर्डिंग को सुरक्षित रख रही हैं, लेकिन अगर आइंदा तुम्हारे बारे में कभी कोई गलत खबर मिली, तो यह रिकौर्डिंग फौरन सही हाथों में पहुंच जाएगी.

‘‘बहुतबहुत धन्यवाद. मैं कल ही इस कंपनी से इस्तीफा दे दूंगा,’’ सुशांत ने आभार व्यक्त करते हुए कहा.

‘‘उस की जरूरत नहीं है, क्योंकि दूसरी कंपनी में जा कर तुम क्या कर रहे हो, हमें पता नहीं चल पाएगा. इसलिए तुम इसी कंपनी में रहोगे ताकि तुम्हारे जैसे आदमखोरों पर नजर रखी जा सके.’’ लेकिन अब मैं तुम्हारे साथ काम नहीं कर सकती. इसलिए बेहतर होगा कि तुम खुद अपनी टीम बदल लो. कारण जो उचित समझना मैनेजमैंट को समझा देना.

सुशांत के पास ऐश्वर्या की बातों का कोई जवाब नहीं था. बदले हुए जमाने में नारी की शक्ति का उसे भरपूर एहसास हो चुका था. वह अपने पस्त शरीर को अपने कदमों पर घसीटते हुए वहां से चल दिया.

संजीव जायसवाल ‘संजय’