सुबह 10 बजे के करीब मैं नेहा से मिलने उस के घर पहुंची. उस ने सुमित की जिंदगी से निकलने का फैसला क्यों किया है, मैं यह जानना चाहती थी.

मेरे सवाल को सुन कर वह बहुत परेशान हो उठी. कुछ देर खामोश रहने के बाद उस ने बोलना शुरू किया, ‘‘अनु दीदी, उस की शराब पीने की आदत उस का स्वास्थ्य भी बरबाद कर रही है और हमारे बीच भी ऐसी खाई पैदा कर दी है, जिसे भरने में मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है,’’ और वह रोंआसी हो उठी.

‘‘क्या वह बहुत पीने लगा है?’’ मैं ने चिंतित लहजे में पूछा.

‘‘दीदी, सूरज डूबने के बाद उस के लिए शराब पीने से बचना संभव ही नहीं. घर में उस के मम्मीपापा दोनों पीते हैं. सुमित दोस्तों के यहां हो या क्लब में, शराब का गिलास उस के हाथ में जरूर नजर आएगा. बिजनैस बढ़ाने के लिए पीनापिलाना जरूरी है, वह इस उसूल को मानने वाला है. यह बात अलग है कि अब तक वह अपने बिजनैस में 10 लाख से ज्यादा रुपए डुबो चुका है.’’

‘‘तुम तो उसे दिल से प्यार करती थीं?’’

‘‘वह तो आज भी करती हूं दीदी, पर अब उस का साथ निभाना नामुमकिन हो गया है.’’

‘‘प्यार में बड़ी ताकत होती है, नेहा. तुम्हें यों हार नहीं माननी…’’

‘‘दीदी, आप मुझ पर कोशिश न करने का इलजाम न लगाओ, प्लीज,’’ उस की आंखों में आंसू भर आए, ‘‘मैं ने सुमित के सामने हाथ जोड़े… गिड़गिड़ाई… रोई… नाराज हुई… गुस्सा किया पर उस ने शराब छोड़ने के झूठे वादे ही किए, छोड़ी नहीं.

 ‘‘मैं ने उस से बोलना छोड़ा, तो वह सुधरने के बजाय मारपीट और गालीगलौज पर उतर आया… एक नहीं कई बार उस ने मुझ पर हाथ उठाया.’’

कुछ देर खामोश रहने के बाद मैं ने उस से पूछा, ‘‘वह शराब पीना छोड़ दे, तो क्या तुम उसे अपनी जिंदगी में दोबारा लौटने दोगी?’’

‘‘दीदी, मुझे झूठी आशा मत बंधाइए.’’

‘‘तुम मेरे सवाल का तो जवाब दो.’’

‘‘मैं ने तो सुमित के साथ ही जिंदगी गुजारने का सपना देखा है, दीदी. पर अब कभी शादी न करने का विचार मुझे जंचने लगा है… प्रेम पर से मेरा विश्वास उठ गया है,’’ वह बहुत उदास हो उठी.

‘‘तुम शाम को क्लब आओ, नेहा. मैं अभी सुमित से मिलने जा रही हूं. उस से क्या बात हुई, तुम्हें शाम को बताऊंगी,’’ उस का हाथ प्यार से दबा कर मैं उठ खड़ी हुई थी.

कुछ देर बाद सुमित के घर में व्याप्त तनाव को मैं ने अंदर कदम रखते ही महसूस किया. उस के पिता सुरेंद्र अंकल गुस्से से भरे थे. सीमा आंटी की सूजी आंखें साफ बता रही थीं कि वे कुछ देर पहले खूब रोई हैं.

 

सुमित से मैं करीब 3 महीने बाद मिल रही थी. उस का चेहरा मुझे सूजा सा नजर आया. आंखों के नीचे काले गड्ढे थे.

वे सब मुझे घर का सदस्य मानते थे. चिंता के कारण को अंकल और आंटी मुझ से ज्यादा देर छिपा नहीं पाए.

सुमित को नाराजगी से घूरते हुए सुरेंद्र अंकल ने मुझे बताया, ‘‘अनु, यह पहले ही लाखों रुपए का नुकसान करा चुका है. अब 20 लाख रुपए की और मांग है नवाबजादे की. यह किसी लायक होता तो मैं कहीं से इंतजाम जरूर करता पर इस को फिर अपने दोस्तों की सलाह पर चल कर नुकसान उठाना है. मुझे अब 1 रुपया भी नहीं लगाना इस के बिजनैस में.’’

‘‘बेकार की बातें कर के अपना और मेरा दिमाग मत खराब करो डैड. आप की रकम मैं साल भर में लौटा दूंगा,’’ सुमित बड़ी कठिनाई से अपने गुस्से को काबू में रख पा रहा था.

‘‘इस बार इस की मदद कर दीजिए,’’ अपनी पत्नी के इस सुझाव की प्रतिक्रिया में सुरेंद्र अंकल ने उन्हें बेहद गुस्से से देखा.

‘‘महत्त्वपूर्ण फैसले शांत मन से करने चाहिए, क्रोध या टकराव की भावना के वश में हो कर नहीं, अंकल. सुमित की परेशानी आप हल नहीं करेंगे तो कौन हल करेगा?’’ इन के झगड़े के बीच मैं खुद को बड़ा असहज व परेशान महसूस कर रही थी.

‘‘इस की मुसीबत की जड़ इस के वे दोस्त हैं अनु, जिन्हें शराब पी कर मौजमस्ती करने के अलावा कोई काम नहीं है और वह लड़की नेहा, जो इसे दुत्कारती रहती है और यह है कि उस के आगेपीछे घूमे जा रहा है… अरे, क्या कमी है इस के लिए अच्छी लड़कियों की? मैं एक से एक…’’

‘‘मुझे कोई दिलचस्पी नहीं है आप की किसी भी एक से एक बढि़या लड़की में. मेरा इस घर में दम घुटता है,’’ कह कर सुमित झटके से उठा और बाहर चला गया.

मैं उठ कर उस के पीछे भागी. वह मुझ से भी बात करने के मूड में नहीं था. शाम को क्लब में मिलने का वादा कर के वह अपनी फैक्टरी चला गया.

बाद में सुरेंद्र अंकल ने मुझ से सुमित की शिकायतें दिल भर कर कीं. सीमा आंटी जब भी अपने बेटे का पक्ष लेतीं, दोनों के बीच फौरन झगड़ा शुरू हो जाता.

लंच मैं ने अंकलआंटी के साथ ही किया. वे दोनों बीयर पीते हुए खा रहे थे.

‘‘सोलन में तो बहुत ठंड पड़ती है. तुम ने वहां भी अब तक ड्रिंक लेना शुरू नहीं किया है, अनु?’’ सीमा आंटी ने अपना बीयर का गिलास भरते हुए पूछा.

‘‘नहीं, आंटी,’’ मैं ने जबरदस्ती मुसकराते हुए जवाब दिया.

सुरेंद्र अंकल ने पहली बार वार्त्तालाप में हिस्सा लेते हुए हंस कर कहा, ‘‘जिंदगी के हर मोड़ पर आजकल जबरदस्त कंपीटीशन है. युवावर्ग टैंशन का शिकार है और उसे दूर करने के लिए पीना उस की जरूरत बन गया है.’’

‘‘आज का युवावर्ग कम पिएगा अगर हम ड्रिंक करने को सामाजिक स्वीकृति देना बंद कर दें. पीने को सामाजिक जीवन का स्वीकृत हिस्सा बना कर हम ठीक नहीं कर रहे हैं. इस से होने वाले नुकसानों को मुझे गिनाने की जरूरत नहीं है,’’ मैं ने जज्बाती अंदाज में अपने दिल की बात कही.

उन दोनों ने मेरी बात सुन कर भी अनसुनी सी कर दी. अपनी किसी गलती को सच्चे मन से स्वीकार कर के बदलाव लाना क्या आसान काम है?

शाम को सुमित की शराब पीने की लत ने जो रंग दिखाया, उसे मैं गहरे दुख और अफसोस के साथ ही बयान कर रही हूं.

ऐन वक्त पर पापा के एक दोस्त उन से मिलने आ गए, इस कारण हम उस शाम क्लब कुछ देर से पहुंचे थे. हौल में प्रवेश करने से पहले ही सुमित की नशे में लड़खड़ाती गुस्से से भरी आवाज हमारे कानों तक पहुंची. अंदर का दृश्य देख कर हमारा दिमाग घूम गया.

सुमित को 4 लोगों ने पकड़ रखा था. उस के सामने नेहा अपने मम्मीपापा के साथ खड़ी डरीसहमी नजर आ रही थी.

अपनी और नेहा व उस के परिवार की इज्जत को ताक पर रख सुमित चिल्ला रहा था, ‘‘आई लव यू, नेहा. तुम मुझ से दूर होने की सोचना भी मत… तुम्हारे बिना मैं जिंदा नहीं रह सकता…’’

उस ने अपने को आजाद कराने के लिए पूरी ताकत लगाई, तो अपना संतुलन खो कर गिर पड़ा. भीड़ में उपस्थित कई लोग मुसकराने लगे.

क्लब सैक्रेटरी ने नेहा के पापा से कहा, ‘‘आप मेरे साथ आइए, सर. क्लब में ऐसा गंदा, बेहूदा व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा. मैं सख्त कार्यवाही करूंगा.’’

‘‘तुम मेरे पास रुको, नेहा,’’ सुमित ने खड़े हो कर उन सब का रास्ता रोकने की कोशिश की.

‘‘इसे बाहर का रास्ता दिखाओ और जब इस के पिताजी आएं, तो उन से कहना कि मुझ से मिलें,’’ ऐसी हिदायत क्लब के सुरक्षाकर्मियों को दे कर क्लब सैक्रेटरी उन तीनों को लाइब्रेरी में ले गया. चारों सुरक्षाकर्मी सुमित को जबरदस्ती बाहर ले चले.

‘‘मुझे छोड़ो, यू इडियट्स. मेरी भी यहां रुकने में कोई दिलचस्पी नहीं है,’’ सुमित ने झटका दे कर खुद को उन की पकड़ से आजाद किया और डगमगाते कदमों से मुख्यद्वार की तरफ बढ़ा.

‘‘सुमित, रुको,’’ वह मेरी बगल से गुजरा तो मैं ने उस का बाजू थाम कर उसे रोकने का प्रयास किया.

‘‘मुझे छोड़ो, अनु,’’ उस ने तेज झटके से मेरा हाथ हटाया और गुस्से से भरी आवाज में बोला, ‘‘यह मरेगी मेरे हाथों.’’

मैं ने पल भर को उस की आंखों में झांका था. आंखों में मुझे जो वहशीपन नजर आया, वह इस बात का सुबूत था कि यह इनसान इस वक्त किसी के भी साथ मारपीट और कैसी भी बदतमीजी कर सकता है.

‘‘इस ने शराब नहीं छोड़ी, तो नेहा को इस से कभी कोई रिश्ता नहीं रखना चाहिए,’’ मां की इस टिप्पणी से मैं पूरी तरह से सहमत थी.

सुमित इस वक्त नशे और भावनात्मक उथलपुथल का शिकार था. मैं ने अपने बड़े भैया अरुण से उस के साथ रहने की प्रार्थना की, तो वे फौरन सुमित के पीछेपीछे बाहर चले गए.

कुछ देर बाद सुरेंद्र अंकल और सीमा आंटी भी आ गए. उन्हें वहां हुए तमाशे की जानकारी फौरन मिल गई. दोनों लाइब्रेरी में क्लब सैक्रेटरी और नेहा व उस के मातापिता से मिलने चले गए.

घंटे भर के अंदर सुरेंद्र अंकल मामले को ठंडा करने में सफल हो गए. नेहा अपने मातापिता के साथ घर चली गई. सुमित और अरुण भैया से फोन पर संपर्क न स्थापित हो पाने के कारण हम सब की चिंता बढ़ती जा रही थी.

 

करीब 11 बजे अरुण भैया का फोन आया, ‘‘हमारी फिक्र मत करो. सब ठीक है. सुमित मेरे साथ है और 2-3 घंटों के बाद मैं उसे उस के घर छोड़ दूंगा.’’

क्लब से हम सब लोग सुरेंद्र अंकल के यहां आ गए. सुमित और अरुण भैया को ले कर सभी बुरीबुरी आशंकाएं व्यक्त कर रहे थे.

वे दोनों करीब 3 बजे रात घर लौटे. सुमित की हालत देख कर हम सब भौचक्के रह गए. उस के कपड़े जगहजगह से फटे हुए थे. दाहिनी आंख सूजी हुई थी. चेहरे पर जख्मों व खरोंचों के निशान थे. अरुण भैया का हाल इतना बुरा नहीं था, पर दोनों की हालत देख कर यह अंदाजा लगाना कठिन नहीं था कि उन का कहीं जबरदस्त झगड़ा हुआ है.

सुमित बहुत परेशान नजर आ रहा था. किसी से बिना बोले वह अपने कमरे में चला गया.

अरुण भैया ने संक्षेप में हमें बताया कि नशे की हालत में ड्राइव कर रहे सुमित ने कार को एक तिपहिया स्कूटर से टकरा दिया था. गलती स्कूटर चालक की थी, पर सुमित को नशे में देख कर सब ने उसे ही कुसूरवार मान लिया था.

स्थिति इस कारण ज्यादा बिगड़ी क्योंकि सुमित पहले ही जबरदस्त गुस्से का शिकार बना हुआ था. मैं ने उसे बहुत नियंत्रण में रखना चाहा, पर वह उस चालक से उलझता ही चला गया.

पहले हाथ सुमित ने छोड़ा और फिर उसे कई लोगों के थप्पड़, घूंसे सहने पड़े. नशे में धुत्त कोई अमीरजादा आम इनसान से दुर्व्यवहार करे, यह बात जनता को उत्तेजित कर गई और सुमित दुर्घटना का कुसूरवार न होते हुए भी बुरी तरह पिट गया.

पुलिस की जिप्सी घटनास्थल पर पहुंच गई. पुलिस दोनों को थाने ले आई. वहां स्कूटर चालक व सुमित दोनों को लौकअप में बंद कर दिया. थाने में 5 घंटे बिताने के बाद अब हम घर लौट पाए हैं.

‘‘तुम ने मुझे फौरन फोन क्यों नहीं किया?’’ सारी बात सुन कर सुरेंद्र अंकल ने गुस्से से कांपती आवाज में भैया से प्रश्न किया.

‘‘सुमित ने ऐसा करने से मना किया था,’’ अरुण भैया ने रूखे से स्वर में जवाब दिया.

सुमित के मातापिता उस के कमरे की तरफ चले गए. कुछ देर बाद सीमा आंटी और सुरेंद्र अंकल हमारे पास और भी ज्यादा दुखी हालत में लौटे. उन दोनों से सुमित ने बात करने से इनकार कर के अपने कमरे का दरवाजा खोलने से मना कर दिया था.

अरुण भैया घर लौटना चाहते थे, पर मैं ने सुमित से मिल कर जाने की जिद पकड़ ली.

‘‘वह दरवाजा नहीं खोलेगा,’’ सीमा आंटी की इस चेतावनी को नजरअंदाज कर मैं सुमित से मिलने चल पड़ी.

सुमित और मैं साथसाथ बड़े हुए हैं. हम दोनों के बीच दिल का गहरा रिश्ता है. मैं ने सिर्फ 1 बार उस से कहा और उस ने दरवाजा खोल दिया.

सुमित सिर झुकाए खामोश पलंग पर बैठ गया. मेरी समझ में बात शुरू करने का कोई तरीका नहीं आया तो मैं उस का हाथ पकड़ कर खामोश उस के पास बैठ गई.

उस की आंखों से आंसू बहने और फिर कंपकंपाती आवाज में शब्द बाहर आने लगे.

‘‘अनु, मैं उस स्कूटर वाले के साथ हवालात में बंद था,’’ उस की आवाज में पीड़ा के गहरे भाव साफ झलक रहे थे, ‘‘वह बीड़ी का धुआं बारबार मेरे मुंह पर फेंक रहा था. मुझे हिंसक नजरों से घूर रहा था… मैं कुछ कहता, तो बात बढ़ती… मारपीट होती… उस का कुछ नहीं जाता और मैं अपनी नजरों में और गिर जाता.

‘‘कल रात मुझे क्लब के सुरक्षाकर्मियों ने भी धक्के दिए… सिपाहियों ने धक्के दिए… गालीगलौज की… जिन की कोई औकात नहीं, उन छोटे लोगों ने मुझे बुरी तरह बेइज्जत किया.

‘‘क्या मैं इतना बुरा इनसान हूं, अनु?

क्यों नहीं कोई मेरा अपना मुझे बेइज्जत होने से बचाने आया? मम्मीपापा कहां थे? तुम कहां थीं? वे सब जो लोग मुझ से दोस्ताना अंदाज में हंसतेबोलते हैं, उन्होंने मेरा साथ क्यों नहीं दिया?’’

‘‘तुम ने अरुण भैया को हमें फोन करने से क्यों रोका था, सुमित? हमें सूचना मिल जाती तो, तुम्हारे बंद होने की नौबत ही न आती,’’ मेरा स्वर भी रोंआसा हो उठा था.

‘‘अरुण भैया झूठ बोल रहे हैं. मैं ने बारबार उन्हें बुलाया, पर वे मुझ से मिलने से कतराते रहे… मैं बहुत गुस्सा हूं उन से.’’

‘‘अब न गुस्सा होओ और न ही दुखी. आज की रात को एक खराब सपने की तरह भूल जाओ, सुमित,’’ मैं ने कोमलस्वर मेंउसे समझाया.

‘‘इस रात को मैं कभी नहीं भूल सकूंगा,  अनु… इतनी बेइज्जती… मेरा तो आत्महत्या करने का मन कर रहा है. कैसे मिलाऊंगा मैं लोगों से नजरें?’’ उस ने पीडि़त स्वर में कहा.

‘‘बेकार की बात मुंह से न निकालो सुमित,’’ मैं गुस्सा हो उठी, ‘‘तुम ने शराब न पी रखी होती तो जो हुआ है, वह कभी न घटता.’’

‘‘जिसे अपनों का प्यार नहीं मिलता, शराब ही तो उसे जीने का सहारा देती है, अनु.’’

‘‘वाह, क्या डायलाग बोला है,’’ मैं व्यंग्यात्मक लहजे में बोली, ‘‘गालियां देने व मारपीट करने के बाद नेहा से प्यार पाने की उम्मीद तुम कर कैसे सकते हो?’’

‘‘क्या नेहा… क्या पापा… क्या मम्मी… मैं किसी के लिए भी महत्त्वपूर्ण नहीं हूं, अनु. इन सब के गलत व्यवहार ने ही मुझे ज्यादा पीने की आदत डलवाई है,’’ वह गुस्सा हो उठा.

‘‘और पीने का नतीजा आज रात तुम ने देख लिया है. अब तो शराब पीने से तोबा कर लो, सुमित.’’

उस ने कोई जवाब न दे कर खामोशी अख्तियार कर ली, तो मैं ने भावुक लहजे में कहा, ‘‘यह शराब तुम्हारे हर रिश्ते में जहर घोल कर हंसीखुशी और प्रेम को नष्ट कर रही है, सुमित. तुम्हें पीना छोड़ना ही होगा.’’

‘‘इस वक्त शराब और अपने लिए सिर्फ नफरत ही नफरत है मेरे मन में अनु, लेकिन पीना छोड़ना आसान नहीं. पहले भी मैं ने कई बार कोशिश की है, पर मेरे दोस्त जोर डाल कर मुझे कमजोर बना देते हैं… शराब छोड़ने का मेरा वादा झूठा ही साबित होगा… मैं फिर हार जाऊंगा अनु.’’ वह और ज्यादा निराश नजर आने लगा.

‘‘इस बार नहीं हारने दूंगी मैं तुम्हें,’’ मैं ने मजबूत स्वर में उस का धैर्य बंधाया, ‘‘तुम आज शाम को ही मेरे साथ सोलन चलो. अपने दोस्तों से दूर वहां के स्वस्थ, शांत वातावरण में कुछ दिन गुजारने के बाद तुम अपने भीतर नया जोश, नया उत्साह, नई इच्छाशक्ति पैदा कर सकोगे. तुम एक ऐसा भिन्न इनसान बन कर लौटोगे जिसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए शराब की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. जिसे शराब का नशा जीने के नशे के सामने बेहद फीका लगने लगेगा. बस, अब तुम मेरे साथ चलने से इनकार मत करना, प्लीज.’’

कुछ पल मेरे चेहरे पर नजरें जमाए रखने के बाद उस ने कोमल अंदाज में मेरी आंखों से बह आए आंसुओं को पोंछा और फिर मुसकराने का प्रयास करते हुए बोला, ‘‘मेरी प्यारी दोस्त… मेरी प्यारी बहन, मैं चलूंगा तेरे साथ.’’

‘‘इस के लिए मैं अपने पति को फोन कर देती हूं. वे खुश होंगे तुम्हें मेरे साथ आया देख कर, सुमित. थैंक यू…थैंक यू वैरी मच. अब सब ठीक हो जाएगा, देखना,’’ मारे खुशी के मैं उस की छाती से लग कर रोने लगी.

 

करीब आधे घंटे के बाद हम जब अपने घर लौट रहे थे, तब अरुण भैया ने मेरे मन में कुलबुलाहट मचा रहे मेरे सवाल का जवाब मुझे दिया.

‘‘हां अनु, मैं ने जानबूझ कर सुमित के लौकअप में बंद होने की सूचना नहीं दी थी,’’ भैया गंभीर लहजे में बोले, ‘‘थाने में मुझे मेरे साथ पढ़ा इंस्पेक्टर नरेश मिला. नशे का शिकार सुमित उस के साथ भी बदतमीजी से पेश आया था. उसे सही नसीहत देने के लिए कुछ घंटों के लिए सुमित को लौकअप में उस बदतमीज, दबंग स्कूटर चालक के साथ बंद कर दिया जाए, यह आइडिया मेरे दोस्त इंस्पेक्टर का ही था.

‘‘मैं चाहता तो वह सुमित को जल्दी जाने देता, लेकिन उस की बात मेरी समझ में आई. सुमित लौकअप में गुजारे ये चंद घंटे कभी नहीं भुला सकेगा.’’

मैं ने कुछ देर खामोशी के साथ उन के कहे पर सोचविचार किया तो यह बात समझ में आई कि उन की तरकीब कठोर तो थी पर अपना प्रभाव सुमित के दिलोदिमाग पर छोड़ने में सफल रही. कुछ घंटों के आराम के बाद मैं अपना सामान बांधने में जुट गई.

नेहा के अलावा मैं ने सुमित के कुछ अन्य करीबी दोस्तों को भी फोन पर उस के मेरे साथ सोलन जाने की सूचना दे दी थी. इन सभी की दिली इच्छा थी कि सुमित किसी भी तरह शराब के नशे से मुक्त हो जाए.

हमें रात की बस पकड़नी थी. बसअड्डे तक जाने के लिए टैक्सी का इंतजाम अरुण भैया ने कर दिया. सुमित उसी टैक्सी में अपने मातापिता के साथ बैठ कर हमारे घर 7 बजे के करीब आ गया.

हमारे ड्राइंगरूम में कदम रखते ही वह चौंक पड़ा. उसे विदा करने के लिए उस के 2 अच्छे दोस्त, उस के चाचा का पूरा परिवार और हमारी एक पुरानी स्कूल टीचर अलका मैडम उपस्थित थीं, जिन का सुमित कभी सब से प्यारा शिष्य हुआ करता था.

 

सभी ने सुमित को प्यार से गले लगाया और आशीर्वाद देने के साथसाथ हौसला बढ़ाने वाले शब्द भी कहे.

‘‘बड़ों का स्नेह व छोटों से मानसम्मान पाने के लिए खुद को बदल डालो, सुमित.’’ अलका मैडम ने जब सुमित का माथा चूमा, तब उन की आंखों में आंसू झिलमिला रहे थे.

‘‘तुम अपना खयाल रखना, सुमित. मैं कोशिश करूंगा कि शराब से हमारे परिवार के हर सदस्य का नाता टूट जाए,’’ खुद शराब न पीने वाले सुमित के चाचाजी का इशारा अपने बड़े भैयाभाभी की तरफ था.

‘‘मेरे बेटे, मैं समझ गया हूं कि नुकसानदायक चीज कम मात्रा में भी नुकसान पहुंचाती है. हम कम मात्रा को छोड़ दें तो कोई भी सीमा तोड़ कर ज्यादा मात्रा का शिकार कैसे बनेगा? तुम जल्दी से स्वस्थ हो कर आओ… मेरा वादा है कि तुम्हें अपने घर में… हम दोनों के हाथों में कभी शराब नजर नहीं आएगी,’’ अपने बीमार नजर आते युवा बेटे को गले लगाते हुए सुरेंद्र अंकल और सीमा आंटी दोनों आंसू बहा रहे थे.

‘‘हमारे होते हुए तू यहां की फिक्र न करना, यार. हम अंकल के साथ तेरे बिजनैस की देखभाल करेंगे. बस, तू जल्दी से हंसतामुसकराता लौट आ यारों के बीच,’’ अपने दोस्तों की हौसला बढ़ाने वाली बातें सुन कर सुमित पहली बार हौले से मुसकरा पड़ा था.

टैक्सी वाले ने हौर्न बजा कर सब का ध्यान आकर्षित न किया होता, तो ये विदाई की घडि़यां बड़ी लंबी खिंचतीं. जल्दी से सामान रखवाने के बाद हम दोनों टैक्सी में बैठ गए.

शुभकामनाओं के साथ सब ने हाथ हिला कर हमें विदा किया. इस वक्त वहां ऐसा कोई नहीं था जिस की पलकें नम न हों.

कुछ देर खामोश रहने के बाद सुमित ने भरे गले से कहा, ‘‘मैं इन सब लोगों को अब और दुखी नहीं करूंगा… इन्हें निराश नहीं करूंगा. अपने को बदल डालूंगा मैं, अनु.’’

‘‘गुड,’’ मैं मुसकराई, ‘‘तुम्हारा जोश बढ़ाने के लिए एक और चीज है मेरे पास. यह लो,’’ और मैं ने एक कार्ड उसे पकड़ाया, जो नेहा मुझे 2 घंटे पहले आ कर दे गई थी.

‘जल्दी स्वस्थ होने के लिए मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं. मैं तुम्हारा इंतजार कर रही हूं… जल्दी लौटना,’ कार्ड में नेहा द्वारा लिखे गए इन शब्दों को पढ़ सुमित का चेहरा खिल उठा.

मैं ने सुमित का हाथ प्यार से पकड़ा और मुसकराती हुई बोली, ‘‘जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें किसी भी तरह के नशे की जरूरत नहीं होती है, सुमित. जीवन को कर्म के स्तर पर गहराई से जीने का अपना मजा है… अपना नशा है, मेरे दोस्त.’’

‘‘मुझे उस असली नशे के काबिल तुम ही बनाना. सोलन में बंदा तुम्हारा ही हुक्म बजाएगा, मैडम अनु.’’ उस के इस जवाब पर हम दोनों का सम्मिलित ठहाका टैक्सी में गूंजा और सुमित के भावी बदलाव को ले कर मेरा मन आशा और विश्वास से भर उठा.       

– डा. सुधीर शर्मा 

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