गृहशोभा विशेष

अश्विन के तो मन में लड्डू फूट रहे थे. कैसी होगी वह, गोरी या गेहुआं रंग? फोटो में तो बहुत ही आकर्षक लग रही है. कितनी सुंदर मुसकान है. बाल भी एकदम काले. खैर, अब 2 घंटे ही तो बचे हैं इंतजार की घडि़यां खत्म होने में. दिल्ली से मुंबईर् मात्र 2 घंटे में ही तो पहुंच जाते हैं हवाईजहाज से.

अश्विन दिल्ली का निवासी है और 2 साल पहले ही उस ने अपना नया व्यवसाय शुरू किया है. उस की लगन व मेहनत से उस का काम आसमान की बुलंदियों को छूने लगा है.

अत: उस के मातपिता ने सोचा झट से सुंदर लड़की देख कर उस का विवाह कर दिया जाए और लड़की भी ऐसी, जो उस के कारोबार में हाथ बंटा सके. सो उन्होंने अखबार में इश्तिहार दे दिया- ‘‘आवश्यकता है सुंदर, पढ़ीलिखी, आकर्षक लड़की की.’’

बदले में जवाब आया सोहा के पिता का, जो अश्विन जैसा लड़का ही अपनी बेटी के लिए ढूंढ़ रहे थे. लड़का उन की बेटी की काबिलीयत को समझे और उस का परिवार भी खुले विचारों वाला हो. बड़े अरमानों से पाला था उन्होंने अपनी बेटी को. एमबीए करवाया था ताकि विवाह उपरांत वह अपने पैरों पर खड़ी हो सके. इस के अलावा उस ने घुड़सवारी, तैराकी भी सीखी थी. एनसीसी में भी सी सर्टिफिकेट लिया था उस ने और ऐरो मौडलिंग में भी गोल्ड मैडल लिया था. सो सोहा के पिता ने अश्विन के पिता से अपनी बेटी के रिश्ते की बात चलाई और उस की शिक्षा व अन्य खूबियों की जानकारी अश्विन के पिता को दे दी.

अश्विन के पिता ने उसे सोहा के बारे में बताते हुए पूछा, ‘‘बेटा, यदि तुम्हें इस लड़की के गुण व शिक्षा पसंद हो तो आगे बात चलाऊं?’’

‘‘जी डैड, आप बात आगे बढ़ा सकते हैं,’’ अश्विन ने कहा.

अश्विन के पिता ने सोहा के पिता को फोन कर कहा, ‘‘विमलजी, मेरे बेटे को आप की बेटी की शिक्षा व खूबियां बड़ी पसंद आईं. अब आप जल्द से जल्द सोहा के और फोटो भेज दीजिए या फिर फेसबुक आईडी दे दीजिए ताकि एक बार दोनों एकदूसरे को देख लें और बात आगे बढ़ाई जा सके.’’

सोहा ने भी फेसबुक आईडी देना ही उचित समझा ताकि एकदूसरे से मिलने से पहले दोनों एकदूसरे को परख लें.

सोहा की फेसबुक आईडी पा कर अश्विन ने उसे फ्रैंड्स रिक्वैस्ट भेज दी. सोहा ने

भी उसे सहर्ष स्वीकार लिया.

जब अश्विन ने सोहा को फेसबुक पर देखा तो देखता ही रह गया. इतनी खूबसूरत और आकर्षक, उस का रहनसहन उस के पोस्ट देख कर तो वह उस पर लट्टू ही हो गया. दोनों ने 1-2 बार चैट किया. अश्विन तो उस की अंगरेजी लिखी पोस्ट पढ़ कर और भी ज्यादा प्रभावित हो गया. उत्तर भारतीय हो कर भी उस की अंगरेजी बहुत अच्छी थी. सो दोनों ने आपस में मिलने का फैसला किया और फिर अपनेअपने मातापिता को अपनाअपना फैसला सुना दिया.

उस के बाद दोनों के मातापिता ने दिन तय किया कि कब और कैसे मिलना है. आजकल पहले वाला जमाना तो रहा नहीं कि रिश्तेदारों को सूचना दो, परिवार के सब सदस्य इकट्ठे हों. अब तो सब से पहले घर के लोग व लड़कालड़की मिल लेते हैं. वह भी घर में नहीं होटल या रेस्तरां में ही देखनादिखाना हो जाता है. अब पहले जैसी औपचारिकता कौन निभाता है?

अब अश्विन और उस के मातापिता सोहा को देखने जयपुर जा रहे थे. अश्विन मन ही मन सोच रहा था यह देखनादिखाना तो मात्र एक औपचारिकता है. सोहा तो उस के मन में पूरी तरह बस गई है. तभी विमान परिचारिका की आवाज से उस के विचारों की शृंखला टूटी. वह कह रही थी, ‘‘आप क्या लेंगे सर शाकाहारी या मांसाहरी खाना?’’

जवाब में अश्विन ने कहा, ‘‘शाकाहारी ही लूंगा,’’ और फिर अश्विन ने तुरंत अपनी ट्रे टेबल खोली. परिचारिका ने अश्विन को शाकाहारी खाने की ट्रे देते हुए कहा, ‘‘सर, बाद में कौफी सर्व करती हूं.’’

अश्विन ने मुसकरा कर कहा, ‘‘जी, बहुतबहुत धन्यवाद.’’

खाना व कौफी पूरी होतहोते ही विमान परिचारिका ने घोषणा की, ‘‘हम छत्रपति शिवाजी इंटरनैशनल एअरपोर्ट पर उतरने वाले हैं. आप सभी से निवेदन है कि अपनीअपनी सीट बैल्ट  बांध लें.’’

एअरपोर्ट से अश्विन ने प्री पेड टैक्सी बुक की और पहुंच गए उस होटल में जहां दोनों परिवारों का मिलना तय हुआ था. वहां सोहा के पिता ने उन के लिए पहले से ही टेबलें बुक की हुई थीं.

वहां पहुंचते ही मैनेजर अश्विन से बोला, ‘‘सर आप की टेबलें वहां बुक हैं और वहां मेहमान आप का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.’’

अश्विन धीरे से बुदबुदाया, ‘‘इंतजार तो हम भी बेसब्री से कर रहे हैं.’’

तभी सोहा के पिता उन्हें लेने होटल लौबी में आ पहुंचे. दोनों परिवारों ने एकदूसरे का अभिनंदन किया.

अश्विन ने सोहा की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हाय आई एम अश्विन.’’

सोहा ने भी वहीं खड़े हो कर कहा ‘‘हाय आई एम सोहा, नाइस टू मीट यू.’’

अश्विन ने सोहा को जितना सोचा था उस से भी ज्यादा आकर्षक पाया. उस की वह मनमोहक मुसकान, हलकी सी लजाई आंखें जिन में नीले रंग का आईलाइनर ऐसा लग रहा था मानो आसमान ने अपनी सुरमई छटा बिखेरी हो. फीरोजी रंग के टौप में वह बेहद सुंदर लग रही थी. हाथ में महंगी घड़ी थी सिल्वर चेन वाली और दूसरे हाथ में फीरोजी रंग का चौड़ा सा ब्रेसलेट. कानों में छोटेछोटे स्टड्स पहन रखे थे. फिर उस के काले एवं सीधे बाल कमर तक लहरा रहे थे. अश्विन की नजर तो उस के चेहरे पर टिक ही गई थी. जैसे ही सोहा उस की तरफ देखती वह मुसकरा देता. वेटर आ कर मौकटेल दे गया था. वह खत्म करते हुए अश्विन के पिता ने सोहा के मातापिता से कहा, ‘‘चलिए अब हम लौबी में चलते हैं ताकि ये दोनों भी अकेले में आपस में बातचीत कर सकें.’’

सभी लोग लौबी की तरफ चल दिए. तब अश्विन ने सोहा को अपने कारोबार के बारे में बताते हुए कहा, ‘‘यदि तुम्हें मैं शादी के लिए पसंद हूं तो बात आगे बढ़ाएं अन्यथा तुम इस रिश्ते को अस्वीकार भी कर सकती हो.’’

जब सोहा ने नजरें झुकाए मूक स्वीकृति दे दी तो अश्विन ने कहा ऐसे नहीं, तुम्हें मुंह से हां या न में जवाब देना होगा.

सोहा ने ‘‘हां’’ कह दिया. फिर क्या था जैसे ही दोनों के मातापिता वहां आए सोहा व अश्विन ने अपना फैसला उन्हें सुना दिया था. दोनों परिवारों ने एकदूसरे का मुंह मीठा करवाया. फिर चट मंगनी और पट ब्याह. 1 ही महीने में दोनों पतिपत्नी बन गए.

दिल्ली में बहू की मुंह दिखाई बड़ी शानोशौकत से हुई. सभी रिश्तेदार व मित्र अश्विन व सोहा को अपनेअपने घर आने का न्योता दे कर चले गए.

सोहा जब अश्विन के घर में रहने लगी तो अश्विन को उस में एक कमी नजर आई, जिस पर अश्विन का ध्यान ही नहीं पड़ा था. वह थी सोहा की ऊंचाई. सोहा करीब 5 फुट 2 इंच लंबी थी. जबकि अश्विन 6 फुट. जब सोहा अश्विन के पास खड़ी होती तो उस के कंधे तक भी न पहुंचती. अश्विन को मन ही मन लगने लगा कि सोहा इतनी ठिगनी है? उस का पहले क्यों नहीं ध्यान पड़ा सोहा की लंबाई पर? वह सोचने लगा कि लोग क्या कहेंगे कि उस ने क्यों इतनी ठिगनी लड़की से शादी की? कितनी बेमेल सी जोड़ी है देखने में. लेकिन वह समझ ही नहीं पाया कि यह सब कैसे हो गया?

उस ने सोहा से पूछा, ‘‘सोहा, तुम्हारी लंबाई कितनी है?’’

‘‘5 फुट डेढ़ इंच.’’

‘‘तो फिर तुम बाहर जाती हो तब तो इतनी ठिगनी नहीं लगती,’’ अश्विन ने कहा.

सोहा गाते हुए बोली, ‘‘यह हाई हील्स का जादू है मितवा,’’ और फिर मुसकरा कर अश्विन से लिपट गई. अश्विन ने भी उस के होंठों को चूमना चाहा. किंतु वह तो उस के कंधे से भी नीचे थी. सो अश्विन को ही झुकना पड़ा उस के होंठों का रसास्वादन करने के लिए.

लेकिन जब सोहा ने बदले में उचक कर उस के होंठों को चूमा तो अश्विन उस के प्रेम में डूब गया और 5 फुट डेढ़ इंच को भूल गया.

अग दिन अश्विन और सोहा को दोस्तों से मिलने जाना था. सभी ने मिल

कर एक होटल में डिस्को पार्टी रखी थी. अश्विन को लगता कि कहीं उस के दोस्त न सोचें कि अश्विन ने सोहा में बाकी सब देखा तो उस की लंबाई पर क्यों ध्यान नहीं दिया? लेकिन जब सोहा लाल रंग का ईवनिंग गाउन, पैरों में पैंसिल हील्स पहन कर अश्विन के साथ गाड़ी में आगे की सीट पर बैठी तो अश्विन उसे देखता ही रह गया. वह बारबार मन में सोचता कि सब कुछ है सोहा में यदि कुदरत थोड़ी लंबाई और दे देती तो सोने पर सुहागा हो जाता. पर फिर मन ही मन सोचता कि हाई हील्स हैं न. जैसे ही सोहा और अश्विन होटल पहुंचे अश्विन के दोस्तों और उन की पत्नियों को अपना इंतजार करते पाया. जब सोहा ने बड़े ही आकर्षक तरीके से सब के हालचाल पूछे और चटपटी बातें कीं तो वह सब के दिलों पर छा गई. डिस्को में जब सब एकदूसरे की बांहों में बांहें डाले नाच रहे थे तो अश्विन ने देखा सोहा तो हाई हील्स पहने ठीक उस के कान तक पहुंच गई है और उस ने भी डिस्को की मध्यम रोशनी में मौका पा कर उस के माथे को चूम लिया.

वापस जाते सभी कहने लगे, ‘‘अश्विन, सोहा को देख कर ऐसा लगता है कि तुम्हें गड़ा खजाना हाथ लगा है.’’

अश्विन मन में सोच रहा था कि वह कितना असहज हो रहा था, सोहा की लंबाई को ले कर, लेकिन आज की सोहा की पैंसिल हील्स ने तो सब समस्या ही खत्म कर दी.

हां, जब वह घर में होता तो उस का ध्यान जरूर सोहा की लंबाई पर जाता. एक दिन उस ने अपनी मां से कहा, ‘‘मम्मी, क्या तुम्हारी नजर नहीं गई थी सोहा की लंबाई पर? यह कितनी ठिगनी है.’’

उस की मां ने कहा, ‘‘अश्विन, लेकिन उस के दूसरे गुण भी तो देखो, सर्वगुणसंपन्न है मेरी बहू. इतनी पढ़ीलिखी हो कर भी कितना अच्छा व्यवहार है इस का.’’

‘‘हां, वह तो है,’’ अश्विन बोला.

‘‘तो फिर तुम इतना क्यों सोच रहे हो इस बारे में? आजकल तो इतनी अच्छी हाई हील्स मिलती हैं तो लंबाई कम होने की चिंता क्यों?’’ मम्मी ने कहा.

शादी को 1 महीना होने आया था. अब सोहा को दफ्तर का काम भी संभालना था. सो अश्विन की मामी ने फोन कर के कहा, ‘‘अश्विन बेटा, 1 बार तो ले आओ सोहा को हमारे घर. फिर दफ्तर जाने लगेगी तो कहां समय मिलेगा.’’

‘‘जी, मामीजी आते हैं हम दोनों,’’ अश्विन ने कहा.

गृहशोभा विशेष

अगले ही दिन मामीजी के घर जाने की तैयारी. सोहा ने काले रंग की क्रेप की साड़ी जिस पर सुनहरे रंग के धागों से बौर्डर पर कढ़ाई की थी पहन ली. साथ में पहनीं सुनहरी वेज हील्स.

जब सोहा गाड़ी तक जाने के लिए पैरों को संभालते हुए चल रही थी तो उस की कमर में जो बल पड़ रहा था, उसे देख अश्विन उसे छुए बिना न रह सका और फिर वह बोला, ‘‘वाह कमाल की हैं तुम्हारी हाई हील्स. जब इन्हें पहन कर चलती हो तो मोरनी सी लगती है तुम्हारी चाल.’’

सोहा बदले में बस मुसकरा दी. मामीजी के घर पहुंच कर सोहा ने पैर छू कर उन्हें प्रणाम किया और फिर मिठाई का डब्बा उन के हाथों में थमाते हुए बोली, ‘‘मामीजी, बहुत ही सुंदर है आप का घर और आप ने सजाया भी बहुत खूब है. कितना साफसुथरा है. कैसे कर लेती हैं आप इस उम्र में भी इतना मैंटेन?’’

मामीजी तारीफ सुन कर फूली न समाईं बोलीं, ‘‘तुम भी तो कितनी गुणी हो, कितनी होशियार…’’

एक बात तो अश्विन पूरी तरह समझ गया था कि सोहा को हर रिश्ते को निभाना बखूबी आता है. झट से किसी को भी शीशे में उतार लेती है वह. खैर, मामीजी के घर खापी कर दोनों जब रवाना होने लगे तो मामीजी बोलीं, ‘‘सोहा, तुम पर यह काली साड़ी बहुत फब रही है और तुम्हारी ये हाई हील्स भी मैचिंग की खूब जंच रही हैं… अलग ही निखार आ जाता है जब साड़ी के साथ हाई हील्स पहनो.. वैसे कहां से लेती हो तुम ये हील्स?’’

सोहा ने भी खूब खिलखिला कर जवाब दिया, ‘‘मामीजी, आजकल तो हर मार्केट में मिल जाती हैं.’’

मामीजी ने कहा, ‘‘मैं भी लाऊंगी अपनी बेटी के लिए.’’

‘‘अच्छा बाय मामीजी,’’ कह सोहा कार में बैठ गई.

उस की आंखों में देख कर अश्विन ने कहा, ‘‘तो चला ही दिया तुम ने अपनी हाई हील्स का जादू मामीजी पर भी.’’

खैर दोनों घर पहुंचे. अगले दिन से सोहा को दफ्तर जाने की तैयारी करनी थी. सोहा सुबहसुबह दफ्तर जाने के लिए तैयार होने लगी तो अश्विन ने कहा, ‘‘सोहा, आज दफ्तर में तुम्हारा पहला दिन है और मेरे नए क्लाइंट आने वाले हैं. तुम्हें मिलवाऊंगा उन से.’’

सोहा ने झट से हलके चौकलेटी रंग की पैंसिल स्कर्ट जिस में पीछे से स्लिट कटी थी पहना और उस के ऊपर कोटनुमा जैकेट पहन ली. बाल खुले छोड़े. न्यूड कलर की पीप टोज बैलीज पहनीं. उन में से उस के नेलपौलिश लगे अंगूठे और 1-1 उंगली झांकती सी नजर आ रही थी. हाथ में मैचिंग बैग ले कर खड़ी हो गई और बोली, ‘‘तो चलिए अश्विन, आज से आप के साथ मैं काम की शुरुआत करती हूं.’’

दोनों कार में बैठ कर दफ्तर चले गए. वहां जाते ही स्टाफ के लोग उन का ‘गुड  मौर्निंग मैम’, ‘गुड मौर्निंग सर’ कह कर अभिवादन कर रहे थे. दफ्तर के सब लोगों से परिचय के बाद अश्विन ने उसे उस का कैबिन दिखा दिया. थोड़ी ही देर में जब नए क्लाइंट आए तो जिस तरीके से सोहा ने उन से बात की अश्विन देखता ही रह गया. घर में साधारण इनसान की तरह रहने वाली सोहा का दफ्तर में तो रुतबा देखते ही बनता था. जब वह अमेरिकन तरीके से अंगरेजी बोलती तो उस के होंठ देखने लायक होते और उस के बोलने का लहजा सुन कर कोई भी नहीं कह सकता था कि यह 5 फुट डेढ़ इंच वाली सोहा बोल रही है.

अश्विन मन में सोचता ही रह गया कि सोहा को कुदरत ने खूब फुरसत में बनाया है. लंबाई के सिवा कोई कमी नजर ही नहीं आती. वैसे वह भी कोई कमी नहीं क्योंकि मैं पूरा 6 फुट का हूं इसलिए मुझे उस की लंबाई कम लगती है. लेकिन चिंता की क्या बात है? हाई हील्स हैं न.

उस दिन अश्विन ने अपनी मां से कहा, ‘‘मम्मी, सोहा बहुत इंप्रैसिव है. मैं फालतू में उस की लंबाई को ले कर चिंतित था. मैं ने जब सोहा को पहली बार देखा था यदि उस दिन मैं ने इस की लंबाई पर ध्यान दे कर इस से विवाह के लिए मना कर दिया होता तो क्या होता? शायद मैं ने एक हीरे को पाने का अवसर खो दिया होता. अच्छा ही हुआ कि उस दिन सोहा हाई हील्स पहन कर आई थी. मुझे तो उस की हील्स दिखाई भी नहीं दी थीं और लंबाई पर ध्यान नहीं गया था. हम ने यह रिश्ता पक्का कर दिया.’’

अश्विन कमरे में लेटी सोहा के पास जा कर उसे अपनी बांहों में भरते हुए बोला, ‘‘लव यू डार्लिंग…’’

सोहा उसे मुसकरा कर देखती रह गई.