मैं खुद पर इतराई थी
मैं खुद पर इतराई थी

अपने स्वाभिमान के आगे सीमा ने शुभा की अंत:भावनाओं का सम्मान न किया. इस के बावजूद, शुभा ने सीमा के प्रति अपना स्नेह यथावत रखा. बिछड़ कर अरसे बाद मिली तो शुभा ने सीमा पर अपना स्नेह उड़ेलना चाहा, लेकिन सोनेचांदी से लदी सीमा, उस अपार स्नेह से वंचित रह गई.

केतकी
केतकी

घर का बंटवारा क्या हुआ, राधा ने अपनी देवरानी कमला से ही नहीं, अपने देवर व बच्चों से भी संबंध तोड़ लिया था. लेकिन अचानक ही एक घटना ने उन का हृदय परिवर्तन कर दिया. पर परदे के पीछे महत्त्वपूर्ण भूमिका तो उन की बहू केतकी ने ही निभाई थी.

मेरे बेटे की गर्लफ्रैंड
मेरे बेटे की गर्लफ्रैंड

जब राहुल व स्वाति की नजदीकियां बढ़ीं तो इस के चर्चे घर में ही नहीं बल्कि पूरी सोसायटी में होने लगे. राहुल के मातापिता को लगने लगा कि अब स्वाति ही उन की बहू बनेगी पर क्या ऐसा हुआ? या फिर...

कही अनकही
कही अनकही

तन्वी ऐसी हरकतें करती कि मां नेहा को दुख पहुंचता. वहीं, मकान मालकिन मीनू हमदर्दी जतातीं तो तन्वी उन्हें भी डपट देती. फिर भी मीनू डटी रहीं और एक दिन उन्होंने ऐसा स्नेह जताया कि तन्वी कहीअनकही सब कह गई.

मेरे हिस्से की कोशिश
मेरे हिस्से की कोशिश

मां की मृत्यु के बाद अनुज ने पिता की दोबारा शादी करवा कर घर संवारने की कोशिश तो की, पर अपने ही पूर्वाग्रहों का शिकार हो गया. फिर वह कैसे समझा कि रिश्ते निभाने के लिए सब को कोशिश करनी पड़ती है?