गृहशोभा विशेष

रत में हर राज्‍य के महलों और किलों का अपना अलग ही आकर्षण है. अगर आप प्राचीन कला और धरोहर को देखने का शौक रखते हैं तो इन शानदार किलों को अपनी ट्रैवल लिस्‍ट में जरूर शामिल करें…

1. मेहरानगढ़ किला, राजस्थान

मेहरानगढ़ किला राजस्थान के जोधपुर शहर में है. यह 500 साल से भी ज्यादा पुराना और सबसे बड़ा किला है. यह किला काफी ऊंचाई पर बना है. इसे राव जोधा ने बनवाया था. इस किले में 7 फाटक (दरवाजे) हैं.

हर फाटक राजा के युद्ध में जीतने पर स्मारक के तौर पर बनवाया गया था. इस किले में जायापॉल फाटक राजा मानसिंह ने बनवाया था. किले के अंदर मोती महल, शीश महल जैसे भवनों को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है. चामुंडा देवी का मंदिर और म्यूजियम इस किले के अंदर ही हैं.

2. आगरा का किला, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के आगरा में बने इस किले को यूनेस्को ने विश्व धरोहर में शामिल किया है. पहले यह किला राजपूत राजा पृथ्वीराज चौहान के पास था, बाद में इस पर महमूद गजनवी ने कब्जा कर लिया था. अपने वास्तुशिल्प, नक्काशी और सुंदर रंग-रोगन के कारण यह देश सभी किलों में से सबसे ज्‍यादा सुंदर माना जाता है. इस किले की चहारदीवारी के अंदर एक पूरा शहर बसा हुआ.

सफेद संगमरमर की मोती मस्जिद, दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, मुसम्मन बुर्ज, जहांगीर पैलेस, खास महल और शीश महल उनमें से कुछ खास हैं. मुगल शासक बादशाह अकबर ने 1573 में आगरा के किले के निर्माण की शुरुआत की थी.

3. ग्वालियर का किला, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में स्थित इस किले को राजा मानसिंह तोमर ने बनवाया था. यह उत्तर और मध्य भारत के सबसे सुरक्षित किलों में से एक है. सुंदर स्थापत्य कला, दीवारों और प्राचीरों पर बेहतरीन नक्काशी, रंग-रोगन और शिल्पकारी की वजह से यह किला बेहद खूबसूरत दिखाई देता है. यह गोपांचल पर्वत पर बना है. लाल बलुए पत्थर से बना. इस किले के भीतरी हिस्सों में मध्यकालीन स्थापत्य के अद्भुत नमूने मौजूद हैं.

4. चित्तौड़गढ़ का किला, राजस्थान

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में स्थित यह किला 700 एकड़ जमीन में फैला हुआ है. जमीन से 500 फुट की ऊंची पहाड़ी पर बना यह किला बेराच नदी के किनारे स्थि‍त है. 7वीं सदी से 16वीं सदी तक यह राजपूत वंश का महत्वतपूर्ण गढ़ था. इस किले की विशेषता इसके मजबूत प्रवेशद्वार, बुर्ज, महल, मंदिर, दुर्ग और जलाशय हैं जो राजपूत वास्‍तुकला के बेमिसाल नमूनों में शामिल हैं.

इस किले के सात प्रवेश द्वार हैं. पहला प्रवेश द्वार पैदल पोल के नाम से जाना जाता है जिसके बाद भैरव पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोली पोल, लक्ष्‍मण पोल और आखिर में राम पोल है जो 1459 में बनवाया गया था. किले की पूर्वी दिशा में स्‍थित प्रवेशद्वार को सूरज पोल कहा जाता है. यहां दो प्रसिद्ध जलाशय हैं, जो विजय स्तंभ और राणा कुंभा के नाम से प्रसिद्ध हैं.

5. लाल किला, दिल्ली

लाल किला दिल्ली का एक विश्व प्रसिद्ध किला है. इसका निर्माण तोमर राजा अनंगपाल ने 1060 में करवाया था. बाद में पृथ्वीराज चौहान ने इसे फिर से बनवाया और शाहजहां ने इसे तुर्क शैली में ढलवाया था. लाल बलुआ पत्थरों और प्राचीर के कारण इसे लाल किला कहा जाता है. भारत के लिए यह किला ऐतिहासिक महत्व रखता है.

मुगल शासक, शाहजहां ने 11 वर्ष तक आगरा से शासन करने के बाद तय किया कि राजधानी को दिल्‍ली लाया जाए और यहां 1618 में लाल किले की नींव रखी गई. वर्ष 1647 में इसका उद्घाटन हुआ. करीब डेढ़ मील में फैले इस किले के लाहौर और दिल्‍ली गेट दो प्रवेश द्वार हैं.

6. सोनार का किला, राजस्थान

सोनार का किला राजस्थान के जैसलमेर में स्थित है. इस किले की खासियत यह है कि इस पर जैसे ही सुबह सूरज की किरणें पड़ती हैं. यह सोने की तरह दमकता है. इसलिए इसे सोनार का किला कहते हैं. वैसे रेगिस्तान के बीच में स्थित होने से इसे रेगिस्तान का दुर्ग भी कहा जाता है. यह दुनिया के बड़े किलों में से एक है और इसमें चारों ओर 99 गढ़ बने हुए हैं. इनमें से 92 गढ़ों का निर्माण 1633 से 1647 के बीच हुआ था.

जैसलमेर के किले का मुख्य आकर्षण गोपा चौक स्थित किले का पहला प्रवेश द्वार है. यह विशाल और भव्य द्वार पत्थर पर की गई नक्काशी का शानदार नमूना है. दूसरा आकर्षण दुर्ग के अंतिम द्वार हावड़पोल के पास स्थित दशहरा चौक है जो इस दुर्ग का खास दर्शनीय स्थल है. यहां टूरिस्ट खरीददारी कर सकते हैं.

जैसलमेर किले में एक अन्य आकर्षण है राजमहल. यह किले के अंदरूनी हिस्से में बना हुआ है. किसी समय यह महल राजा महाराजाओं के रहने की मुख्य जगह हुआ करती थी. इस वजह से यह दुर्ग का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी है.

7. कांगड़ा किला, हिमाचल प्रदेश

यह किला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में है. इसे कांगड़ा के शाही परिवार ने बनवाया था. यह दुनिया के सबसे पुराने किलों में से एक है और इसे देश के सबसे पुराने किलों में गिना जाता है. इसे नगरकोट या कोट कांगड़ा के नाम से भी जाना जाता है. बाणगंगा और मांझी नदियों के ऊपर स्थित कांगड़ा किला, 500 राजाओं की वंशावली के पूर्वज राजा भूमचंद की ‘त्रिगतरा’ भूमि की राजधानी थी. यह किला धन-संपति के भंडार के लिए इतना प्रसिद्ध था कि मोहम्मद गजनी ने भारत में अपने चौथे अभियान के दौरान पंजाब को हराकर सीधे 1009 ईसवी में कांगड़ा पहुंचा था.

8. गोलकोंडा का किला, हैदराबाद

आंध्रप्रदेश की राजधानी हैदराबाद से 11 किलोमीटर की दूरी पर बने इस किले का निर्माण काकतिया शासकों ने करवाया था. इसे भव्यता और सुंदर संरचना के कारण जाना जाता है. आज भी हजारों की संख्या में पर्यटकों का यहां जमावड़ा देखा जा सकता है.

इस दुर्ग का निर्माण वारंगल के राजा ने 14वीं शताब्दी में कराया था. बाद में यह बहमनी राजाओं के हाथ में चला गया और मुहम्मदनगर कहलाने लगा. 1512 ई. में यह कुतुबशाही राजाओं के अधिकार में आया. फिर 1687 ई. में इसे औरंगजेब ने जीत लिया. ग्रेनाइट की एक पहाड़ी पर बने इस किले में कुल आठ दरवाजे हैं. यह पत्थर की तीन मील लंबी मजबूत दीवार से घिरा है. मूसी नदी इसके दक्षिण में बहती है. दुर्ग से लगभग आधा मील दूर उत्तर में कुतबशाही राजाओं के ग्रेनाइट पत्थर के मकबरे हैं जो टूटी-फूटी अवस्था में अब भी मौजूद हैं.

9. सिंधुदुर्ग का किला, महाराष्ट्र

यह किला मुंबई से 400 किलोमीटर की दूरी पर समुद्र के बीच में बनाया गया था. किले का निर्माण शिवाजी ने 1664 से 1667 के बीच किया था. सिंधुदुर्ग अपनी खूबसूरती की वजह से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है. यह मुंबई के दक्षिण में महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में स्थित है. सिंधुदुर्ग समुद्र के बीच एक छोटे टापू पर बना है.

10. कुम्भलगढ़ का किला, राजस्थान

राजस्थान के राजसमंद में स्तिथ कुम्भलगढ़ फोर्ट का निर्माण महाराणा कुम्भा ने करवाया था. इस फोर्ट की दो खासियत हैं – पहली इस फोर्ट की दीवार विश्व की दूसरी सबसे बड़ी दीवार है जो की 36 किलो मीटर लम्बी है तथा 15 फीट चौड़ी है, इतनी चौड़ी की इस पर एक साथ पांच घोड़े दौड़ सकते है.

दूसरी विशेषता है कि इस दुर्ग के अंदर 360 से ज्यादा मंदिर हैं जिनमे से 300 प्राचीन जैन मंदिर और बाकि हिंदू मंदिर हैं. यह एक अभेध किला है जिसे दुश्मन कभी अपने बल पर नहीं जीत पाया. इस किले की ऊंचे जगहों पर महल, मंदिर और रहने के लिए इमारते बनाई गईं. यहां समतल भूमि का उपयोग कृषि के लिए किया गया वही ढलान वाले भागों का इस्तेमाल जलाशयों के लिए करके इस दुर्ग को पूरी तरह सक्षम बनाया गया.

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