देश में यों तो पर्यटन के सैकड़ों ठिकाने हैं लेकिन दक्षिण भारत के टूरिस्ट स्पौट्स टूरिज्म एजेंसियों और घुमक्कड़ों की रेटिंग में सब से अव्वल रहते हैं. ऐसा इसलिए है क्योंकि साउथ इंडिया में देश के हर मौसम, मिजाज और माहौल के हिसाब से ऐसी कई जगहें हैं जो दुनियाभर के ठौर ठिकानों का सारा आनंद एक ही जगह मुहैया करा देती हैं.

अगर आप साउथ इंडिया का रुख कर रही हैं तो किसी एक शहर घूमने के बजाय एक कौरिडोर को कवर करें ताकि आप को बिना कोई बड़ा रास्ता या रूट बदले घूमने की नई नई जगहें और शहर मिल जाएं. इस मामले में दक्षिण भारत का ब्यूटी कौरिडोर सब से उचित विकल्प है. इस रूट में आप बेंगलुरु घूमने जाते हैं तो आप को इस कौरिडोर में आगे चल कर मैसूर, ऊटी और कूर्ग भी घूमने को मिलेंगे. यह रूट दक्षिण के सब से सुंदर रूटों में शुमार है, जहां एकसाथ आप को बहुतकुछ देखने को मिल जाएगा. यदि आप बेंगलुरु में हैं तो यहां से मैसूर मात्र 149 किलोमीटर की दूरी पर है. मैसूर से ऊटी 125 किलोमीटर है और ऊटी से कूर्ग 107 किलोमीटर है. हालांकि कई पर्यटक बेंगलुरु से मैसूर तो आ जाते हैं लेकिन उस के बाद ऊटी जाने के बजाय कूर्ग जाते हैं. आप के पास दोनों विकल्प हैं. लगभग 20-30 किलोमीटर का फर्क है मैसूर से. फिर देर किस बात की, उठाइए अपना बैग और निकल पडि़ए इस ब्यूटी कौरिडोर को नापने.

बेंगलुरु के हाईटैक दर्शन : देश की सिलीकौन वैली और आईटी सिटी के नाम से मशहूर कर्नाटक का हाईटैक शहर बेंगलुरु नैचुरल और टैक्नो टच के फ्यजून से लैस है जहां ऐतिहासिक स्थलों, मंदिरों, मौल, गगनचुंबी इमारतें सब देखने को मिल जाते हैं. यहां से मुथयाला माधुवु, मैसूर, श्रवणबेल गोला, नागरहोल, बांदीपुर, रंगनाथिटु, बेलूर और हैलेबिड जैसे पर्यटन स्थलों तक भी आसानी से पहुंचा जा सकता है.

1537 में बसे इस शहर में कब्बन पार्क और संग्रहालय ऐतिहासिक महत्व के हैं. इस के अलावा सचिवालय, गांधी भवन, टीपू सुल्तान का सुमेर महल, बांसगुडी तथा हरे कृष्ण मंदिर, लाल बाग, बेंगलुरु पैलेस, साईं बाबा का आश्रम, नृत्यग्राम, बनेरघाट अभयारण्य कुछ ऐसे स्थल हैं जहां घूम कर आप बेंगलुरु का मिजाज पूरी तरह से समझ जाते हैं.

यहां के दक्षिण में बसवनगुडी मंदिर का निर्माण करीब 500 साल पहले कराया गया था. यहां 15 फुट ऊंची और 20 फुट लंबी नंदी की प्रतिमा है और इसे ग्रेनाइट के सिर्फ एक चट्टान के जरिए बनाया गया है. पूजापाठ के चक्कर में पड़ने के बजाय इस की स्थापत्यकला और हिस्टोरिकल फैक्टर के लिए इसे देखा जा सकता है. ऐसे ही शिव मंदिर, उत्तर बेंगलुरु के राजाजीनगर में स्थित कृष्ण और राधा का मंदिर दुनिया का सब से बड़ा इस्कौन मंदिर है.

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पिरामिड वैली : बेंगलुरु से करीब 30 किलोमीटर दूर पिरामिड वैली में नैचुरल ब्यूटी का दीदार होगा. प्राकृतिक सुंदरता, पहाडि़यां, जल निकाय आदि इस की खूबसूरती में चारचांद लगा देती हैं.

चुन्ची फौल्स और बन्नेरुघट्टा जैव उद्यान : अपने नाम की तरह अनूठे इस झरने की दूरी बेंगलुरु से

55 किलोमीटर है. पिकनिक के शौकीनों की यह मनपसंद जगह है. इसी के पास बन्नेरुघट्टा जैव उद्यान करीब 104 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है. इस के तहत वन विभाग के अनेक श्रेणी

के संरक्षित वन हैं. 1971 में स्थापित इस उद्यान में प्रकृति रिजर्व, चिडि़याघर, बच्चों का पार्क, मत्स्यालय, मगरमच्छ पार्क, संग्रहालय, तितली पार्क, सांप पार्क और यहां तक कि पालतू जानवर भी हैं.

इनोवेटिव फिल्म सिटी : यह जगह पर्यटन में मनोरंजन तलाशने वालों के लिए है. बेंगलुरु मैसूर स्टेट हाइवे-17 पर बनी फिल्मसिटी सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक खुलती है. एक व्यक्ति का 299 से 499 रुपए तक का पास बनता है जिस में इनोवेटिव स्टूडियो,  म्यूजियम, 4डी थिएटर, टौडलर डेन, लुइस तुसाद वैक्स म्यूजियम और थीमबेस्ड रैस्टोरैंट घूम सकते हैं. वन्नाडो सिटी डायनासोर वर्ल्ड भी रोमांचित करता है.

वेनकटप्पा आर्ट गैलरी : आर्ट्स प्रेमियों के लिए यहां की आर्ट गैलरी में लगभग 600 पेंटिग्स प्रदर्शित की गई हैं. पेंटिंग्स के अलावा यहां नाटकीय प्रदर्शनी का कलैक्शन भी शानदार है.

बेंगलुरु पैलेस : इस पैलेस की वास्तुकला तुदौर शैली पर आधारित है. जाहिर है करीब 800 एकड़ में फैले इस महल को बेंगलुरु का सब से आकर्षक पर्यटन कहना गलत नहीं होगा. इस के आगे एक गार्डन है, जिसे इंगलैंड के विंसर कास्टल की तर्ज पर बनाया गया है.

नेहरू प्लैनेटेरियम : नेहरू प्लैनेटेरियम 1989 में नगर निगम द्वारा स्थापित किया गया था. आकाशगंगाओं का विशाल रंगचित्र इस तारामंडल के प्रदर्शनी हौल में दिखाई देता है. साइंस सैंटर और एक विज्ञापन पार्क भी यहां है.

टीपू पैलेस : अगर आप को टीपू पैलेस देखना है तो चले आइए बेंगलुरु के सब से व्यस्त मार्केट कृष्णा राजेंद्र नगर (केआर मार्केट). यह पैलेस बेंगलुरुमैसूर राज मार्ग पर है. इतिहास की जानकारी रखने वालों को यह जगह खासी भाती है. इस महल की वास्तुकला व बनावट मुगल जीवनशैली को दर्शाती है. इस पैलेस का निर्माण हैदर अली ने करवाया जबकि इसे पूरा टीपू सुल्तान ने किया था. यह पूरे राज्य में निर्मित कई खूबसूरत महलों में से एक है.

आजकल धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले टीपू के नाम को इतिहास से मिटा देने पर उतारू हैं. यहां आएं तो खुद टीपू सुल्तान के बारे में कुछ जानकारी अवश्य लें.

रामनगरम : बेंगलुरु से मैसूर जाते हुए शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर राजमार्ग पर स्थित रामनगरम काफी दिलचस्प जगह है. फिल्म ‘शोले’ की शूटिंग यहीं हुई थी. अगर आप भी इस फिल्म के दीवाने हैं तो चले आइए रामनगरम. इसे रेशम का शहर भी कहा जाता है. यह बेंगलुरु के दक्षिण पश्चिम में लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. कनार्टक के अन्य भागों की तरह यहां भी गंग, चोल, और मैसूर के राजाओं ने राज किया. वर्ष 1970 के दौरान ‘शोले’ फिल्म की शूटिंग इस स्थान पर हुई और इस स्थान को प्रसिद्धि मिली.

मैसूर की शाही सैर

बेंगलुरु से करीब 150 किलोमीटर दूर बसा मैसूर रंगीन सांस्कृतिक माहौल, शाही किस्सों और खानेपीने के  दिलचस्प ठिकानों से लैस है. विश्व में अपनी तरह का अकेला सेंट फिलोमेना चर्च मैसूर में ही स्थित है.

मैसूर पैलेस : इसे महाराजा पैलेस के नाम से भी जानते हैं. हिंदू और मुसलिम वास्तुशिल्प का अनूठा संगम यह महल धूसर रंग के ग्रेनाइट पत्थरों से निर्मित है. गोल गुबंद सोने के पत्र से जड़ा हुआ है. यहां का प्रमुख आकर्षण है मैसूर की आकृति का स्वर्ण सिंहासन.

जगनमोहन पैलेस : वर्ष 1861 में बने इस पैलेस को मैसूर पैलेस के पास ही देखा जा सकता है. फिलहाल इसे आर्ट के शौकीनों के लिए एक रौयल आर्ट गैलरी में बदल दिया गया है.

वृंदावन गार्डन : प्राकृतिक सौंदर्य और आधुनिक तकनीक का संगम वृंदावन गार्डन शहर के केंद्र से 19 किलोमीटर दूर है. कावेरी नदी के पास स्थित इस गार्डन को कृष्णाराज सागर बांध के नीचे बनाया गया है जो अपनेआप में उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का नायाब नमूना है. यहां आ कर डासिंग फौआरे और बोटिंग का लुत्फ उठाना न भूलें.

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बांदीपुर वन्यप्राणी उद्यान: वन्यजीव का लुत्फ उठाने वाले बांदीपुर वन्यप्राणी उद्यान जरूर देखें. यहां बारहसिंगे, चितकबरे हिरण, हाथी, बाघ और तेंदुओं को प्रकृति के साथ अठखेलियां करते देखा जा सकता है. शहर से 80 किलोमीटर दूर स्थित इस उद्यान की सैर हाथी, जीप या ट्रक के अलावा नाव द्वारा भी की जा सकती है. जून से सितंबर तक यह उद्यान अनेक प्रकार के पक्षियों के कलरव से गूंजता रहता है. यह कई प्रजातियों के पशुपक्षियों से भरा पड़ा है. उद्यान में सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक भ्रमण किया जा सकता है.

सोमनाथपुरम मंदिर : दक्षिण भारत के मंदिर पूजापाठ के कर्मकांड से लैस हैं, इसलिए इस क्षेत्र में न पड़ें लेकिन इन की बनावट और वास्तुकला के लिए सोमनाथपुरम मंदिर को एक बार निहार सकते हैं.

चामुंडी हिल्स : मैसूर से 11 किलोमीटर दूर और तकरीबन 34,89 फुट ऊंचाई पर है चामुंडी हिल्स. कहते हैं कि करीब 300 साल पहले इसे मोटर मार्ग के जरिए बनाया गया था. 1,000 कदम चढ़ाई से पहाडि़यों के ऊपर तक जा कर आप को रोमांच महसूस होगा.

ऊटी की नैचुरल ब्यूटी

उत्तर भारतीय जब भी साउथ इंडिया जाते हैं, उन की घुमक्कड़ी की लिस्ट में ऊटी सब से ऊपर होता है. मैसूर से ऊटी 125 किलोमीटर है. कई साल पहले मिथुन चक्रवर्ती जब अपना फिल्मी कैरियर छोड़ ऊटी में होटल व्यापारी बन जा बसे तब यह इलाका खास चर्चा में रहा. फिल्म की शूटिंग के लिए यह सब से अच्छी जगह मानी जाती है. नीलगिरी की पहाडि़यों में बसा ऊटी तमिलनाडु का सब से उम्दा हिल स्टेशन है.

बोटैनिकल गार्डन : करीब 22 एकड़ में फैले बोटैनिकल गार्डन में 650 से भी ज्यादा दुर्लभ किस्म के पेड़पौधों के साथसाथ अद्भुत और्किड, रंगबिरंगे लिली के फूल, खूबसूरत झाडि़यां व 2,000 साल पुराने पेड़ के अवशेष देखने को मिलते हैं. बौटनी में दिलचस्पी रखने वालों के लिए यह किसी संग्रहालय से कम नहीं है. मई के महीने में ग्रीष्मोत्सव में शरीक होंगे तो और मजा आएगा. तब फूलों की प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिन में स्थानीय प्रसिद्ध कलाकार भाग लेते हैं.

ऊटी झील : ऊटी लेक में बाग और झील का अद्भुत संगम दिखता है. लेक के चारों ओर फूलों की क्यारियों में इंद्रधनुषी रंगों के फूल यहां की खूबसूरती में चारचांद लगाते हैं. झील में मोटरबोट, पैडलबोट और रो-बोट्स में बोटिंग का लुत्फ भी उठाया जा सकता है. ढाई किलोमीटर लंबी इस लेक में फिशिंग का अनुभव शानदार है.

डोडाबेट्टा चोटी : नीलगिरी के सब से ऊंचे पर्वत का रुतबा लिए डोडाबेट्टा चोटी से पूरे शहर का विहंगम नजारा देखते ही बनता है. प्रकृति का पैनोरोमा शौट लेना हो तो यही से लें.

कालहट्टी जलप्रपात : झरनों के मामले में साउथ इंडिया का कोई मुकाबला नहीं है. जाहिर है ऊटी का कालहट्टी जलप्रपात भी ऐसा ही एक नायाब प्रपात है. 100 फुट ऊंचा यह प्रपात ऊटी से केवल 13 किलोमीटर की दूरी पर है. झरना देखने के बाद कालहट्टीमसिनागुडी की ढलानों पर जानवरों की अनेक प्रजातियां, मसलन चीते, सांभर और जंगली भैंसा देखना न भूलें.

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कोटागिरी हिल : ऊटी से 28 किलोमीटर की दूरी पर यह हिल चाय बागानों के चलते आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. नीलगिरी के 3 हिल स्टेशनों में से यह सब से पुराना है. ऊटी और कून्नूकी के मुकाबले यहां की आबोहवा ज्यादा सुहावनी मानी जाती है. यहां आए तो यहीं के रिसोर्ट में रुक कर प्रकृति की गोद में जाएं.

कूर्गसोती पहाडि़यों पर बसा धुंध का जंगल

ब्यूटी कौरिडोर के इस आखिरी पड़ाव में आप चाहें तो ऊटी से पहले यानी मैसूर से सीधे यहीं आ कर फिर ऊटी जा सकते हैं या फिर ऊटी के बाद आखिर में इस मनोरम स्थल का लुत्फ उठा सकते हैं. मैसूर से 120 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कूर्ग को कोडागू भी कहा जाता है. इस का अर्थ है सोती पहाडि़यों पर बसा धुंध जंगल. स्कौटलैंड और इंडिया के नाम से मशहूर कूर्ग को देखने के लिए देशदुनिया से लोग आते हैं.

नागरहोल वाइल्डलाइफ सैंचुरी : जंगल का रोमांच तलाश रहे हैं तो मादिकेरी से करीब 110 किलोमीटर

दूर नागरहोल वाइल्डलाइफ सैंचुरी है. यहां बिजोन, हाथी, हिरण, सांभर, मंगूज, लोमड़ी, बाघ, पैंथर या कोबरा जैसे कई जानवर व पक्षी दिख जाते हैं. फोरैस्ट डिपार्टमैंट के सौजन्य से सुबह व शाम जंगल सफारी की जा सकती है.

तलाकावेरी : ऐंडवैंचर के शौकीन यहां आ कर मध्य जून से मध्य सितंबर के दौरान कावेरी नदी में वाटर राफ्टिंग का मजा ले सकते हैं.

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मादिकेरी फोर्ट : 19वीं शताब्दी के महल मादिकेरी फोर्ट में एक मंदिर, गिरजाघर, जेल और छोटा संग्रहालय है. यहां से मादिकेरी के खूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों को निहारा जा सकता है.

राजा सीट : यह पार्क सनसैट के मनोरम नजारे के लिए जाना जाता है. हरीभरी घाटी और धुंध में छिपे पहाड़ों का अनूठा सौंदर्य देख कर आप की थकान दूर हो जाती है. पार्क में लेजर शो, कौफी के पौधे आकर्षण का बड़ा केंद्र हैं.

निसारगधमा : हिंदी फिल्मों में इस आइलैंड को कई बार दिखाया गया है मादिकेरी से 30 किलोमीटर की दूरी पर बसे निसारगधमा जाने के लिए पुल से गुजरना पड़ता है. पिकनिक स्पौट बन चुके इस अड्डे में बोटिंग और हाथी की सवारी का अलग आनंद है.

अब्बे फौल्स : आकर्षक जलप्रपातों की लिस्ट में मादिकेरी से 8 किलोमीटर दूर स्थित अब्बे फौल्स का नाम भी शुमार है. झरने की कलकल करती ध्वनि, पास में ही कौफी, इलायची के पौधों की खुशबू और पक्षियों की चहचहाचट का मधुर संगीत भला कहां मिलेगा.

बहरहाल, यह पूरी ट्रिप जल्दी पहुंचने के लिए नहीं है, बल्कि आप को बेंगलुरु से मैसूर, ऊटी और कूर्ग के बीच के मुख्य आकर्षणों से अवगत कराने के लिए है. इसलिए, बिंदास जाइए इस ब्यूटी कौरिडोर की सैर पर और बनाइए अपनी इस यात्रा को हमेशा के लिए यादगार.

ब्यूटी कौरिडोर-कहां शुरू कहां खत्म : ब्यूटी कौरिडोर के लिए आप बेंगलुरु से अपनी यात्रा आरंभ करें. फिर मैसूर, ऊटी होते हुए कूर्ग में पर्यटन को विराम दें. बेंगलुरु से मैसूर 149 किलोमीटर है तो मैसूर से ऊटी 125 किलोमीटर दूर है. यहां से फिर करीब 107 किलोमीटर दूर कूर्ग आता है.

बेंगलुरु : बेंगलुरु इंटरनैशनल एयरपोर्ट शहर के बीच से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित है जो बंगलौर सैंट्रल रेलवे स्टेशन से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर है. कई प्रमुख शहरों से यहां के लिए नियमित रूप से उड़ानें भरी जाती हैं. बेंगलुरु में 2 प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं – बंगलौर सिटी जंक्शन रेलवे स्टेशन और यशवंतपुर जंक्शन रेलवे स्टेशन. ये स्टेशन भारत के कई प्रमुख शहरों से जुड़े हुए हैं. यहां कई बस टर्मिनल भी हैं.

कब और कैसे जाएं मैसूर: यहां सितंबर से फरवरी तक आना सही रहता है. निकटतम हवाई अड्डा बेंगलुरु  है, जोकि मैसूर से 140 किलोमीटर दूर है. यहां से मैसूर जाने के लिए रेल, बस और टैक्सी की सुविधाएं उपलब्ध हैं.

कैसे जाएं ऊटी : कोयंबटूर यहां का निकटतम हवाई अड्डा है. सड़कों द्वारा यह तमिलनाडु और कर्नाटक के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा है, परंतु यहां आने के लिए कन्नूर से रेलगाड़ी या टौय ट्रेन ही जाती है. ऊटी में उदगमंडलम रेलवे स्टेशन है.

कैसे जाएं कूर्ग: नजदीकी एयरपोर्ट मंगलोर है. नजदीकी रेलवे स्टेशन मैसूर (120 किलोमीटर) और मंगलोर हैं. बेंगलुरु, मैसूर, मंगलोर और हासन (करीब 150 किलोमीटर) से नियमित बस सेवाएं और टैक्सी उपलब्ध हैं.

VIDEO : पीकौक फेदर नेल आर्ट

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