गृहशोभा विशेष

प्रदूषण से हिल स्टेशन भी अछूते नहीं है. आज से 10-15 साल पहले हिल स्टेशनों की स्थिति आज के मुकाबले कहीं अच्छी हुआ करती थी. सिर्फ हिल स्टेशन ही नहीं भारत में ऐसी ज्यादातर जगह हैं, जो पहले की अपेक्षा कहीं ज्यादा प्रदूषित हो चुके हैं. बहरहाल, आज विश्व पर्यावरण दिवस है. ऐसे में कई ऐसी जगह हैं, जिन्हें इको टूरिज्म के लिए जाना जाता है.

माथेरन, महाराष्ट्र

माथेरन, महाराष्ट्र के राजगढ़ जिले में स्थित है और यह एक छोटा हिल स्टेशन है. माथेरन मुंबई से 90 किलोमीटर और पुणे से करीब 120 किलोमीटर दूर है. भारत सरकार का पर्यावरण मंत्रालय इस इलाके को इको सेंसेटिव जोन घोषित कर चुका है. यह भारत के उन कुछ इलाकों में शामिल है जहां वाहनों के आने पर प्रतिबंध है जिसके कारण यहां प्रदूषण नाम की समस्या है ही नहीं और यह इलाका शांत और हरा भरा बना रहता है. यहां 38 ऐसी जगह हैं, जहां से आप इलाके की खूबसूरती को निहार सकते हैं.

थेनमाला, केरल

थेनमाला भारत का पहला योजनाबद्ध तरीके से बसा इको टूरिज्म डेस्टिनेशन है. यह तीन जोन में बंटा है कल्चर जोन उन लोगों के लिए है जो खाने के शौकीन हैं और स्थानीय भोजन का स्वाद चखना चाहते हैं. एडवेंचर जोन उन लोगों के लिए है जो अपने डर की सीमा को परखना चाहते हैं इसमें कई एडवेंचर एक्टिविटी शामिल होती है जबकि लेजर जोन उन लोगों के लिए है जो प्रकति के बीच सुकून भरा समय बिताना चाहते हैं.

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कुर्ग, कर्नाटक

कुर्ग को भारत का स्कौटलैंड भी कहा जाता है यह स्थान अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है. कुर्ग सभी प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है. कुर्ग, कौफी उत्पादन के लिए भी जाना जाता है और यह कर्नाटक का सबसे ज्यादा प्राकृतिक खूबसूरती से भरा हिल स्टेशन है. पेड़ों से ढकी पहाड़ियां, झरने और नदी इस स्थान को एकदम जादुई बना देती हैं.

मावल्यान्नौंग, मेघालय

इस गांव को एशिया के सबसे साफ सुथरे गांव का तमगा मिल चुका है. इस इलाके में प्लास्टिक बैग पर पूरी तरह प्रतिबंध है और स्मोकिंग भी प्रतिबंधित है. यहां जगह-जगह बांस के डस्टबिन रखे हैं जिनमें सारा कूड़ा डाला जाता है यहां तक की पेड़ों से गिरने वाली पत्तियां और लकड़ी भी इसी में डाली जाती है. यहां नदियों के ऊपर पेड़ों की जड़ों से बने पुल हैं जिन्हे यूनेस्को विश्व विरासत का दर्जा दे चुका है.

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किन्नौर, हिमाचल प्रदेश

एयर क्वालिटी के मामले में किन्नौर भारत में पहले स्थान पर है भारत में किन्नौर की हवा को सांस लेने के लिए सबसे साफ सुथरा माना गया है. किन्नौर को लैंड औफ गौड भी कहा जाता है. यह शिमला से करीब 235 किलोमीटर दूर है सतलुज, बस्पा और स्पिती नदिया यहां से सांप की तरह आड़ी-तिरछी बहती हुई निकलती हैं.

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