वीकेंड पर हर कोई सोचता है कि किसी ऐसी जगह घूमने जाएं, जहां जाकर मूड भी फ्रेश हो जाए और बजट भी ज्यादा न लगे. वहीं बारिश के मौसम में ऐसी जगहों की तलाश रहती है, जहां पर हम एंज्वाय कर सकें. अगर आप भी मानसून डेस्टिनेशन के लिए बेहतरीन औप्शन तलाश रही हैं, तो हम आपको बताते हैं कुछ खास जगहों के बारे में.

मतियाना, हिमाचल प्रदेश

शिमला से 45 किलोमीटर दूर मतियाना हिमाचल प्रदेश का एक छोटा-सा गांव है. मतियाना सेब के बगीचों, फूल के मैदान और शिव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. मौनसून सीजन के दौरान इस इलाके की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है. आप नरकंदा भी जा सकती हैं जो बादलों से ढकी घाटी के लिए जाना जाता है.

दिल्ली से दूरी- करीब 390 किलोमीटर.

क्या देखें- शिव मंदिर, सेब के बागान और फूलों का मैदान.

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बूंदी, राजस्थान

राजस्थान जैसे सूखे राज्य में मौनसून का कोई असर नहीं होता तो आपका अंदाजा गलत है. इसके लिए आपको बूंदी आना होगा. मौनसून के दौरान यहां का नजारा पूरी तरह से बदल जाता है. यहां आपको भीमताल झरना देखने को मिलेगा. इसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं. बारिश के सीजन में इसकी खूबसूरती और बढ़ जाती है.

दिल्ली से दूरी- 485 किलोमीटर दूरी.

क्या देखें- ईश्वरी निवास, बूंदी पैलेस, फूल सागर, तारागढ़ किला और बावड़ियां.

मांडवा, राजस्थान

राजस्थान के शेखावटी इलाके में स्थित मांडवा ऐतिहासिक स्थानों से भरा पड़ा है. इतिहास और कला पसंद लोगों को यह स्थान काफी पसंद आता है. यह दिल्ली के नजदीक सबसे प्रमुख मौनसून वीकेंड गेटवे में शामिल है. यहां कई पुरानी हवेलियां के साथ यहां कई आर्ट गैलेरीज भी है.

दिल्ली से दूरी– 255 किलोमीटर दूरी.

क्या देखें- राम प्रताप नेमानी हवेली, सेवाराम सर्राफ हवेली, मुरमुरिया हवेली, गुलाब राय लाडिया हवेली.

बिलासपुर, हिमाचल प्रदेश

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अगर आपको मौनसून के मजे के साथ थोड़ा एडवेंचर भी चाहिए तो आप बिलासपुर का रुख कर सकती हैं. यहां स्थित गोविंद सागर झील मौनसून सीजन के दौरान जीवंत हो उठती है और इसके चारों ओर बिखरी हरियाली आपको पलकें झपकाने नहीं देगी.

दिल्ली से दूरी- 380 किलोमीटर दूरी.

क्या देखें- लक्ष्मी नारायण मंदिर, गोविंद सागर झील, श्री नैना देवी जी, भाखड़ा बांध.

रूपनगर, पंजाब

पंजाब में बहुत-सी जगह बारिश के दौरान धुंधले और खूबसूरत हो जाती हैं. रूपनगर एक ऐसा ही स्थान है जो निचले हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में सतलुज नदी के किनारे बसा है. इसे पहले रोपड़ कहते थे. यह शहर 11वीं सदी में बसाया गया था और सिंधु घाटी सभ्यता का प्रमुख स्थान है. अगर आप यहां ग्रामीण पर्यटन का मजा लेना चाहते हैं तो आसपास स्थित कटली, बहादरपुर, टिब्बा टपेरियां और रंजीतपुरा जा सकती हैं.

दिल्ली से दूरी- 290 किलोमीटर दूरी.

क्या देखें- तख्त श्री केशगढ़ साहिब, जटेश्वर महादेव मंदिर, विरासत ए खालसा.

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