सवाल

मेरे बेटे की उम्र 21 वर्ष है. वह गलत दोस्तों की संगति में आने की वजह से शराब और सिगरेट की लत का शिकार हो गया है. अब तो स्थिति यह हो गई है कि वह अपनी एडिक्शन की तलब पूरा करने के लिए चोरी भी करने लगा है. घर में किसी के भी पैसे बिना बताए उठा लेता है. मैं उस की इस स्थिति को देखते हुए खुद तनाव में आ गई हूं. कुछ समझ नहीं आता कि क्या करूं. कैसे उस को एडिक्शन से मुक्ति दिलाई जाए?

जवाब

जब हम एडिक्शन यानी लत की बात करते हैं तो इस का सीधा संबंध दिमाग से होता है. लत किसी भी चीज की हो सकती है. आप को यह समझना होगा कि एडिक्शन एक लत या आदत नहीं बल्कि बीमारी होती है. रही बात आप के बेटे की तो पूरी केस हिस्ट्री देखने के बाद उस की शारीरिक और मानसिक स्थिति का आकलन किया जा सकता है. उस से पता चलेगा कि शराब के कारण उस के शरीर पर कितना बुरा असर हुआ है. दूसरा यह पता लगाना भी जरूरी है कि शराब की वजह से डिप्रैशन या अन्य तरह की समस्या तो नहीं है. पहले उस की काउंसलिंग होगी फिर इलाज शुरू किया जाएगा.

आप घबराएं नहीं. एडिक्शन से आजाद होना मुश्किल तो है लेकिन नामुमकिन नहीं. अगर सही उपचार द्वारा कोशिश की जाए तो नशे की लत को छुड़ाया जा सकता है. टीएमएस थेरैपी के द्वारा नशे की लत को छुड़ाने में 100% रिजल्ट मिले हैं.

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पीयूष ने दोनों बैग्स प्लेन में चैकइन कर स्वयं अपनी नवविवाहित पत्नी कोकिला का हाथ थामे उसे सीट पर बैठाया. हनीमून पर सब कुछ कितना प्रेम से सराबोर होता है. कहो तो पति हाथ में पत्नी का पर्स भी उठा कर चल पड़े, पत्नी थक जाए तो गोदी में उठा ले और कुछ उदास दिखे तो उसे खुश करने हेतु चुटकुलों का पिटारा खोल दे.

भले अरेंज्ड मैरिज थी, किंतु थी तो नईनई शादी. सो दोनों मंदमंद मुसकराहट भरे अधर लिए, शरारत और झिझक भरे नयन लिए, एकदूसरे के गलबहियां डाले चल दिए थे अपनी शादीशुदा जिंदगी की शुरुआत करने. हनीमून को भरपूर जिया दोनों ने. न केवल एकदूसरे से प्यार निभाया, अपितु एकदूसरे की आदतों, इच्छाओं, अभिलाषाओं को भी पहचाना, एकदूसरे के परिवारजनों के बारे में भी जाना और एक सुदृढ़ पारिवारिक जीवन जीने के वादे भी किए.

हनीमून को इस समझदारी से निभाने का श्रेय पीयूष को जाता है कि किस तरह उस ने कोकिला को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लिया. एक सुखीसशक्त परिवार बनाने हेतु और क्या चाहिए भला? पीयूष अपने काम पर पूरा ध्यान देने लगा. रातदिन एक कर के उस ने अपना कारोबार जमाया था. अपने आरंभ किए स्टार्टअप के लिए वैंचर कैपिटलिस्ट्स खोजे थे.  न समयबंधन देखा न थकावट. सिर्फ मेहनत करता गया.

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उधर कोकिला भी घरगृहस्थी को सही पथ पर ले चली.

‘‘आज फिर देर से आई लीला. क्या हो गया आज?’’ कामवाली के देर से आने पर कोकिला ने उसे टोका.

इस पर कामवाली ने अपना मुंह दिखाते हुए कहा, ‘‘क्या बताऊं भाभीजी, कल रात मेरे मर्द ने फिर से पी कर दंगा किया मेरे साथ. कलमुंहा न खुद कमाता है और न मेरा पैसा जुड़ने देता है. रोजरोज मेरा पैसा छीन कर दारू पी आता है और फिर मुझे ही पीटता है.’’

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