Love Story :  रसोई  की घड़ी ने रात के 11 बजाए तो जैसे पूरे घर की थकान एकसाथ जम्हाई ले उठी. प्रैशर कुकर अभी भी चूल्हे पर ठंडा पड़ा था, उस में बनी दाल अब भी गरम थी. सिंक में कुछ प्लेटें धुलने का इंतजार कर रही थीं.

टीवी वाले कमरे में नीलीपीली रोशनी झिलमिला रही थी पर आवाज बिलकुल धीमी थी.

आशा ने आंच बंद की और फिर हाथ पोंछते हुए टीवी वाले कमरे की ओर देखा.

राहुल सोफे पर आधी करवट लिए मोबाइल में डूबा था. उस की उंगलियां तेजी से स्क्रीन पर चल रही थीं, होंठों पर अनजानी सी मुसकान अठखेलियां कर रही थी.

‘‘खाना रख दूं प्लेट में?’’ आशा ने धीमे से पूछा.

‘‘हूं?’’ राहुल चौंका मानो किसी दूर दुनिया से वापस आया हो, ‘‘अरे नहीं, अभी भूख नहीं है. बाद में खा लूंगा, तुम सो जाओ.’’

‘‘ठंडा हो जाएगा,’’  आशा ने आदतन कहा.

‘‘माइक्रोवेव किसलिए है घर में?’’ राहुल ने बिना नजर उठाए जवाब दिया और फिर उसी मुसकान के साथ कुछ टाइप करने लगा.

आशा कुछ सैकंड उसे देखती रही. वह मुसकान उस ने बहुत बरस पहले देखी थी जब राहुल उस से छिपछिप कर बातें करता था, जब वह उस से मिलने के बहाने ढूंढ़ता था. आज वही मुसकान द्वारा उस के चेहरे पर खिल रही थी.

‘‘ठीक है,’’ उस ने बस इतना कहा और कमरे से लौट आई.

आशा और राहुल की शादी को 8 साल हो चुके थे. शहर के एक छोटे से 2 कमरे के फ्लैट

में उन का जीवन किसी साधारण टीवी सीरियल की तरह चलता रहा. ईएमआई, किराना, औफिस की मीटिंग्स, बिजली का बिल, वीकैंड पर सब्जी की मंडी और साल में एक बार कहीं घूमने की अधूरी प्लानिंग.

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