Breast Implants : ऐक्ट्रैस और मौडल शर्लिन चोपड़ा की खूबसूरती ही नहीं, उन की फिजिक के पीछे भी दुनिया दीवानी होती है, ऐसे में शर्लिन अकसर कई अलग बातों को ले कर सुर्खियों में बनी रहती हैं. इस बार ऐक्ट्रैस ने हाल ही में एक सर्जरी करवाई है, जिसे ले कर वे खूब सुर्खियां बटोरीं. यह सर्जरी उन्होंने अपनी नैचुरल फिजिक को वापस पाने के लिए 825 ग्राम के इंप्लांट्स को हटा दिया, क्योंकि इस से उन्हें क्रोनिक पीठदर्द, गरदन, छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.
इस सर्जरी के बाद ही शर्लिन के ब्रैस्ट अपने नैचुरल रूप में वापस आ पाए हैं और अब वे रिलीफ फील कर रही हैं.
ब्रैस्ट इंप्लांट्स यानि स्तन प्रत्यारोपण का विचार आते ही कई महिलाओं के मन में जिज्ञासा, बेहतर रूपरंग की आशा और संभावित जोखिमों को ले कर झिझक का मिश्रण होता है. कई महिलाएं अपने शरीर की छवि को बेहतर बनाने और अपने रूपरंग के बारे में अधिक आत्मविश्वास महसूस करने के लिए इसे चुनती हैं, तो कुछ महिलाओं को स्तन कैंसर के उपचार के हिस्से के रूप में मैस्टेक्टौमी (ब्रैस्ट हटाने की सर्जरी) जैसी महत्त्वपूर्ण सर्जरी के बाद इंप्लांट की आवश्यकता होती है, जिसे हर स्त्री करवाना पसंद करती है.
इस बारे में मुंबई की कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हौस्पिटल की कंसल्टेंट, प्लास्टिक सर्जन डाक्टर काजी अहमद कहते हैं कि ब्रैस्ट इंप्लांट्स आज की तारीख में फैशन और ग्लैमर पसंद लड़कियां अधिकतर करवाती हैं और बाद में उन्हें कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है. वजह कुछ भी हो, यह बेहद महत्त्वपूर्ण है कि इस प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों को अच्छी तरह समझ लिया जाए, मसलन इंप्लांट कितने सुरक्षित हैं? कौन इन्हें लगवा सकता है और इस की दीर्घकालिक देखभाल में क्या शामिल है?
सुरक्षित होता है ब्रैस्ट इंप्लांट्स
आज तकनीक और सर्जिकल पद्धतियों में प्रगति के कारण ब्रैस्ट इम्प्लांट्स काफी सुरक्षित है. आधुनिक प्रत्यारोपण आमतौर पर एक टिकाऊ, मैडिकल ग्रेड बाहरी खोल के अंदर उच्च गुणवत्ता वाले सिलिकन जैल से बने होते हैं. इस खोल की मज़बूती और शरीर के साथ अनुकूलता के लिए गहन जांच की जाती है. जब यह प्रक्रिया किसी प्रशिक्षित और बोर्ड प्रमाणित प्लास्टिक सर्जन द्वारा एक मान्यता प्राप्त अस्पताल या क्लिनिक में की जाती है, तो इसे कम रिस्क वाली प्रक्रिया माना जाता है.
इस के आगे डाक्टर कहते हैं कि सभी सर्जरी में कुछ हद तक रिस्क हमेशा ही होता है. ब्रैस्ट इंप्लांट सर्जरी के बाद सूजन, अस्थायी दर्द या जकड़न, निप्पल की संवेदना में बदलाव, या हलके निशान जैसे सामान्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं. उचित देखभाल के बाद ये आमतौर पर ठीक हो जाते हैं. गंभीर जटिलताएं, जैसेकि संक्रमण, इंप्लांट का फटना या कैप्सुलर कौन्ट्रैक्चर (जब टिश्यू इंप्लांट के चारों ओर कठोर हो जाते हैं), दुर्लभ हैं, लेकिन संभव हैं. एक अच्छा डाक्टर आप को इन संभावित समस्याओं के बारे में समझाएगा, फालोअप के बारे में गाइड करेगा और सुनिश्चित करेगा कि आप की अपेक्षाएं वास्तविक हों.
ब्रैस्ट इंप्लांट से कैंसर का खतरा नहीं
सब से महत्त्वपूर्ण बात यह है कि ब्रैस्ट इंप्लांट से स्तन कैंसर नहीं होता है. हालांकि, दुर्लभ मामलों में बीआईए-एएलसीएल (ब्रैस्ट इंप्लांट से जुड़ा एनाप्लास्टिक लार्ज सेल लिंफोमा) नामक एक प्रकार का कैंसर कुछ प्रकार के टैक्सचर्ड इंप्लांट से जुड़ा पाया गया है. अच्छी खबर यह है कि इस प्रकार के टैक्सचर्ड इंप्लांट को भारत सहित अधिकांश देशों में बड़े पैमाने पर बंद कर दिया गया है.
लंबे समय तक सुरक्षित रहने के लिए नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराते रहना और ब्रैस्ट में किसी भी असामान्य बदलाव के प्रति जागरूक रहना महत्त्वपूर्ण है.
स्त्री की सुंदरता और ब्रैस्ट इंप्लांट
बहुत सी स्त्रियां पूरी तरह से शारीरिक सौंदर्य बढ़ाने के उद्देश्य से ही करवाना चुनती हैं. यह एक व्यक्तिगत निर्णय है और जब सही कारणों से किया जाता है, तो यह पूरी तरह से वैध और स्वीकार्य है.
कुछ महिलाएं गर्भावस्था या वजन घटाने के बाद खो चुकी वौल्यूम को वापस पाना चाहती हैं. कुछ यूथ अपने शरीर के आकार के साथ बेहतर समरूपता या संतुलन चाहती हैं. यह महिला का अपना शरीर और अपना अधिकार है कि वह अपनी सुंदरता और आत्मविश्वास के लिए क्या चुनती है और इस की आजादी उन्हें होने की जरूरत है.
प्लास्टिक सर्जन अकसर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक तैयारी पर जोर देते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि स्त्री भावनात्मक रूप से स्थिर हों, उन की उम्मीदें वास्तविक हों, साथ ही वह अपने शरीर में सहज और खुशी महसूस करे.
ब्रैस्ट इंप्लांट का आदर्श उम्र
ब्रैस्ट वृद्धि के लिए, आमतौर पर कोई सख्त ऊपरी आयु सीमा नहीं होती है, बशर्ते व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा हो.
सर्जन आमतौर पर तब तक इंतजार करने की सलाह देते हैं जब तक ब्रैस्ट पूरी तरह से विकसित न हो जाएं, जोकि 18 वर्ष की आयु के बाद होता है. कई महिलाएं अपने 30, 40 या 50 की उम्र में भी सफलतापूर्वक इंप्लांट का विकल्प चुनती हैं। अगर उन का सामान्य स्वास्थ्य अच्छा है और स्तन की जांच सामान्य है, तो वे इसे करवा सकती हैं.
करवाएं जरूरी जांच
जब आप इंप्लांट सर्जरी करवाने का मन बनाते हैं, तो औपरेशन से ठीक पहले डाक्टर आप की अच्छी तरह से जांचपड़ताल करते हैं और औब्जर्व कर देखते हैं कि आप का शरीर सर्जरी के लिए फिट है या नहीं.
सर्जरी के लिए आप की फिटनैस, एनेस्थीसिया के लिए आप की उपयुक्तता और औपरेशन के बाद ठीक होने की आप की क्षमता उम्र से कहीं ज्यादा माने रखती है.
इंप्लांट के आकार को तय करना है जरूरी
सही इंप्लांट का आकार शरीर के प्रपोर्शन, छाती की चौड़ाई, मौजूदा स्तन टिश्यू, त्वचा की इलैस्टिसिटी और व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर करता है. बड़ा ब्रैस्ट ही ब्यूटी का प्रतीक है, ऐसा मानना सही नहीं, बल्कि संतुलन और आराम सब से महत्त्वपूर्ण है. कंसल्टेशन के दौरान सर्जन आप को परिणाम दिखाने के लिए विशेष साइजिंग तकनीकों का उपयोग करते हैं या ट्रायल इंप्लांट का उपयोग करते हैं, ताकि आप कल्पना कर सकें कि सर्जरी के बाद आप के ब्रैस्ट कैसे दिखेंगे. ब्रैस्ट इंप्लांट का वजन उस के आयतन (सीसी में) पर निर्भर करता है। जहां 100 सीसी सिलिकन इंप्लांट लगभग 0.23 पाउंड (लगभग 100 ग्राम) और सलाइन इंप्लांट लगभग 0.21 पाउंड (लगभग 95 ग्राम) होता है, जिस का मतलब है कि एक सामान्य 300 सीसी इंप्लांट लगभग 285-300 ग्राम या लगभग 1 कप के वजन जितना होता है और यह वजन इंप्लांट के आकार और प्रकार के अनुसार बदलता है.
अच्छी तरह से चुना गया इंप्लांट का आकार, प्राकृतिक रूप, उचित पोश्चर और टिश्यूज पर कम दबाव सुनिश्चित करता है. बहुत बड़े इंप्लांट कभीकभी असुविधा, ढीलापन या भविष्य में सुधारात्मक सर्जरी करवानी पड़ सकती है. इस का लक्ष्य होता है, लंबे समय तक चलने वाला, प्राकृतिक निखार, जो आप के शरीर के फ्रेम के अनुकूल हो और आप की जीवनशैली के अनुसार हो.
इंप्लांट कब हटाना या बदलना जरूरी
ब्रैस्ट इंप्लांट टिकाऊ होते हैं, लेकिन स्थायी नहीं. ये अधिकतर 10 से 20 साल या इस से भी अधिक समय तक चलते हैं, लेकिन कुछ खास स्थितियों में उन्हें हटाने या बदलने की आवश्यकता हो सकती है, जो निम्न है :
-इंप्लांट के फट जाने या लीक हो जाने पर
-इंप्लांट के चारों ओर काफी कड़ापन आ जाने पर, जो अधिकतर कैप्सुलर कौन्ट्रैक्चर के कारण हो सकता है,
-आकार में ध्यान देने योग्य परिवर्तन, असुविधा या संक्रमण होने पर।
-कई वर्षों के बाद केवल आकार में बदलाव चाहने पर आदि कई अवस्थाओं में इंप्लांट्स को हटाना या बदलना पड़ता है. इस के लिए नियमित रूप से अपने सर्जन से संपर्क करना और अल्ट्रासाउंड या एमआरआई जैसे इमेजिंग जांच कराना, समय के साथ आप के इंप्लांट की स्थिति की निगरानी मौनिटर करने में मदद करता है.
अंत में इतना कहना सही होगा कि ब्रैस्ट इंप्लांट सर्जरी को सोचसमझ कर अपनाया जाना चाहिए, ताकि एक सुरक्षित और खूबसूरत बौडी की हकदार बनें.
इतना ध्यान रखें कि हमेशा एक योग्य प्लास्टिक सर्जन की सलाह लें, अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें, प्रक्रिया और रिकवरी के बारे में प्रश्न पूछें, ताकि सर्जरी के बाद की देखभाल के साथ ब्रैस्ट इंप्लांट आप के रूपरंग और आत्मविश्वास दोनों को आने वाले वर्षों तक खूबसूरत तरीके से बढ़ाता रहे.
