किसी दुर्घटना में पैर का कटना हो या अन्य किसी भी अंग का कटना, एक गहरा मानसिक आघात लगा कर जाता है. कई बार लोगों को लगता है कि कल तक हम दौड़ रहे थे, खेल रहे थे, लेकिन आज छोटीमोटी जरूरतों तक के लिए किसी और पर निर्भर हो गए हैं. यह बेचारगी उन्हें न जीने देती है और न मरने. जिंदगी से हर उम्मीद हर इच्छा मानो मौत के इंतजार में बदल जाती है.
माना जिंदगी ने आप से बहुत कुछ छीन लिया है लेकिन जिंदगी खत्म नहीं हुई है. एक नई शुरुआत करने की जरूरत है तब जिंदगी पटरी पर फिर से आ जाएगी.
पर्वतरोहिणी अरुणिमा सिन्हा को तो आप जानते ही होंगे. ट्रेन दुर्घटना में पैर गंवाने के बाद वे माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली विकलांग महिला बनीं. वहीं सुधा चंद्रन एक मशहूर नृत्यांगना, जिन्होंने एक्सीडेंट में पैर खोने के बाद ‘जयपुर फुट’ की मदद से फिर से नृत्य किया.
ध्यान रखिए, आप की पहचान आप की टांग से नहीं, बल्कि आप की इच्छाशक्ति से है. इसलिए आप के साथ भी कुछ ऐसा हो गया है तो हिम्मत न हारें, बल्कि अपने शरीर के जख्मों के साथ मन पर लगे जख्मों को भी भरने की कोशिश करें.
मन पर लगे जख्मों को कैसे भरें
यह वह सवाल है जो इस स्थिति से गुजरने वाले हर शख्स के मन में आना स्वभाविक है. आप को बारबार अपनी स्थिति पर अफसोस होगा. आप चाहेंगे कि काश, वक्त को पीछे मोड़ दें जहां आप पूरी तरह स्वस्थ हैं. इन सब भावनाओं को बहने दें.
फैंटम लिंब पेन को समझें
पैर कटने के बाद भी मरीज के अंदर उस का एहसास जिंदा रहता है. उसे लगता है कि मेरे पैर में दर्द और खुजली है. यह मस्तिष्क के न्यूरांस की वजह से होता है. इसे जान कर घबराएं नहीं. थेरैपिस्ट से बात करना आप को ‘फैंटम लिंब पेन’ (कटे हुए हिस्से में दर्द महसूस होना) और डिप्रैशन से लड़ने में मदद करेगा.
मिरर थेरैपी का सहारा लें
डाक्टर अकसर एक शीशे का उपयोग करते हैं जिस में आप अपने स्वस्थ पैर को देखते हैं. इस से दिमाग को यह संदेश जाता है कि सब ठीक है, जिस से ‘फैंटम पेन’ कम होता है.
जो हुआ उसे बदला नहीं जा सकता, अब आगे बढ़ना है इस बात को स्वीकार करें कि यह शारीरिक कमी अब आप की जिंदगी का हिस्सा है, जिसे आप बदल नहीं सकते. इस सच को जितनी जल्दी आप स्वीकार कर लें उतना ही अच्छा है. इसलिए मानसिक रूप से तनाव में रहने से कुछ हासिल नहीं होगा. इसलिए अपने गम से बाहर आएं और आगे इस कमी के साथ कैसे जिया जा सकता है इस पर विचार करें.
सपोर्ट ग्रुप्स से जुड़ें
सपोर्ट ग्रुप्स दरअसल, ऐसे ग्रुप होते हैं जिस में लोग आप के जैसी स्थिति का सामना कर रहे होते हैं. उन से मिल कर आप को एहसास होगा कि यह विपदा केवल आप पर ही नहीं टूटी है बल्कि और भी बहुत से लोग हैं जो इस दुख से गुजर रहे हैं और आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं. उन्हें देख कर आप को विश्वास होगा कि आप भी फिर से सबकुछ कर सकते हैं.
विक्टिम नहीं सर्वाइवर बनें
यह न सोचें कि एक्सीडेंट ने मेरी पूरी जिंदगी तबाह कर दी. अब मैं किसी काम का नहीं रह गया. मैं सब पर बोझ बन गया हूं… इस के विपरीत सोचें कि अच्छा हुआ मेरी जान तो बच गई. अगर मुझे कुछ हो जाता तो मेरा परिवार कैसे जीता?
बल्कि यह सोचें कि अब नई जिंदगी कैसे शुरू कर सकता हूं? अपने परिवार के काम कैसे सकता हूं? मैं जिंदगी से हार क्यों मानूं जब उस ने मुझे एक और मौका दिया है… इस सोच के साथ आगे बढ़ेंगे तो अपने दुख से निकल पाएंगे.
खुद को चैलेंज दें
आज मैं खुद से बिस्तर से व्हीलचेयर पर बैठूंगा. आज मैं 5 मिनट ऐक्सरसाइज करूंगा…हर छोटी जीत आप के दिमाग में डोपामाइन रिलीज करेगी, जिस से आप का आत्मविश्वास बढ़ेगा.
मैं अपना काम खुद करने की कोशिश करूंगा. मुझे ठीक होना ही होगा और इस के लिए मैं पूरी कोशिश करूंगा…अपनों से हैल्प लेने में आप बेचारे नहीं हो जाएंगे.
कई लोग इतने चिड़चिड़े हो जाते हैं कि उन्हें लगता है कि हरकोई उन पर तरस खा रहा है. उन पर एहसान कर रहा है. वे खुद को बेचारा फील करने लगते हैं और इसी वजह से कोई मदद नहीं लेना चाहते और बिना मदद के कुछ कर भी नहीं पाते. इस बात को समझें कि यह आप के अपने हैं और आप का दुख आप के अपनों का भी दुख है इसलिए मदद लेने में न हिचकिचाएं क्योंकि दुख में परिवार और दोस्त ही काम आते हैं.
नकारात्मक विचारों से बचें
दुर्घटना से जुड़ी खबरें या वीडियो देखने से बचें. नकारात्मक विचारों को बदलने की कोशिश करें. उन लोगों के साथ रहें जो आप को दिल से प्यार करते हैं और आप को सकारात्मक सोच देने की कोशिश करते हैं.
कानूनी मदद लें
एक वकील आप को बीमा और मुआवजे की जटिलताओं में मदद कर सकता है, जिस से आप का तनाव कम होगा और आप रिकवरी पर ध्यान दे पाएंगे.
कृत्रिम पैर लगवाएं
आजकल के कृत्रिम अंग इतने उन्नत हैं कि वे काफी हद तक असली पैर की तरह काम करते हैं. एक अच्छे ‘प्रोस्थैटिस्ट’ से मिलें और इस बात को समझने की कोशिश करें कि आप क्या चाहते हैं?
क्या आप दौड़ना चाहते हैं या सिर्फ पैदल चलना चाहते हैं? क्या आप को सिर्फ घर के अंदर चलने या ट्रांसफर (बिस्तर से कुरसी) के लिए पैर चाहिए? क्या आप घर के काम करने के लिए बाहर जाना चाहते हैं और फुटपाथ पर चलना, सीढ़ियां चढ़ना या बाजार जाना चाहते हैं? क्या गाङी ड्राइव करना चाहते हैं आप? वगैरह.
यह सब तय कर लेने के बाद आप कृत्रिम पैर लगवाने के जोखिम और फायदों के बारे में बात करें. ये कितने महंगे होते हैं? एक बार लगवाने के बाद क्या आजीवन चल जाते हैं? या फिर समयसमय पर इन्हें बदला जाता है…वगैरह. आप के मन में जो भी सवाल है उन का समाधान ‘प्रोस्थैटिस्ट’ से मिल कर करें.
कृत्रिम पैर के साथ चलना सीखें
कृत्रिम पैर के साथ चलना सीखने में समय और मेहनत लगती है. शुरुआत में यह थकाऊ हो सकता है, लेकिन अभ्यास से यह आसान हो जाता है.
फिजियोथेरैपी लें
अपनी पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत करें क्योंकि अब शरीर का संतुलन बनाए रखने में इन का बड़ा रोल होगा.
कटे हुए हिस्से की सफाई और मालिश नियमित रूप से करें ताकि संक्रमण न हो और वह प्रोस्थैटिक के लिए तैयार रहे.
घर को अपने लिए तैयार करें
घर के बाथरूम को अपने हिसाब से तैयार करवाएं. वहां टौयलेट सीट के पास और नहाने वाली जगह पर मजबूत धातु के हैंडल लगवाएं.
यदि पैर घुटने के ऊपर से कटा है, तो ऊंची टौयलेट सीट या कमोड चेयर का उपयोग करें ताकि उठनेबैठने में आसानी हो.
खड़े हो कर नहाने के बजाय एक मजबूत वाटरप्रूफ स्टूल या कुरसी पर बैठ कर नहाएं.
अगर आप के घर में कालीन बचे हैं तो उन्हें उठा दें ताकि आप का व्हीलचेयर या फिर नकली पैर उस में न फंसें और कोई चोट न लग जाएं. बाथरूम आदि में फर्श पर फिसलने से बचने वाले रबरमैट बिछाएं.
अगर घर के प्रवेशद्वार पर सीढ़ियां हैं, तो एक छोटा रैंप बनवाएं ताकि व्हीलचेयर आसानी से अंदरबाहर हो सके.
प्रोस्थैटिक पैर के लिए ऐसे जूते चुनें जिन का तलवा रबर का हो और फिसलनरोधी हो. लेस वाले जूतों के बजाय वैल्क्रो वाले जूते पहनना आसान हैं.
