First aid kit for seniors : बुजुर्गों के साथ घूमने जाते समय हमें बहुत कुछ सोचना पड़ता है ताकि ट्रिप को टैंशन भरा नहीं, बल्कि यादगार बनाया जा सके. इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि एक छोटी से भूल उस अनजान जगह में हमें मुसीबत में डाल सकती है. इसलिए बुजुर्ग साथ में हों तो ऐक्स्ट्रा केयर और तैयारी करने में कोई बुराई नहीं है.
फर्स्ट एड किट सहित रखें ये सामान
ऐक्सपर्ट की मानें तो जब कभी किसी लंबी दूरी की यात्रा पर जाएं तो मैडिकल इमरजैंसी किट साथ रखना न भूलें. यह किट मुश्किल वक्त में आप की जान बचा सकते हैं.
हर शख्स के पास एक फर्स्ट एड किट जरूर होना चाहिए, जिन में दवाओं को ले कर ऐक्सपर्ट कहते हैं कि किट में ऐंटासिड या एसिडिटी की दवाएं, पैरासिटामोल, हैंड सैनिटाइजर और ऐंटीसैप्टिक दवाएं जरूर रखें. इस के साथ लंबी दूरी की यात्रा में दुर्घटना होने की आशंका ज्यादा होती है इसलिए फर्स्ट एड बौक्स में बर्न क्रीम, गौजपैड, बैंडएड और ऐंटी जर्म क्रीम भी जरूर रखें.
प्रिस्क्रिप्शन वाली दवाएं
डाक्टर द्वारा परामर्श जितनी जरूरत हो, उस से कम से कम 5-7 दिन की अतिरिक्त दवाएं रखें. कुछ पता नहीं चलता कब ज्यादा की जरूरत पङ जाएं.
दवाओं की परची
डाक्टर द्वारा लिखी गई मूल परची और उस की फोटोकौपी साथ रखें. कई बार दवा खराब हो जाएं, खो जाएं या फिर वहां ज्यादा रुकना पढ़ जाए तो ऐसे में अगर और दवाओं की जरूरत तो अपने पास दवा की परची होनी चाहिए ताकि कोई परेशानी न हो.
पिल बौक्स
यात्रा पर चलने से पहले आप एक बौक्स खरीद कर लाएं और चिट लगा कर सुबह, दोपहर और शाम की दवाओं को व्यवस्थित कर के बुजुर्गों को समझाएं ताकि अगर कभी वे होटल में आराम करना चाहें और आप घूमने जा रहे हों तो उन्हें कोई परेशानी न हो.
बैंडएड और पट्टियां
छोटीमोटी चोटें तब लगती हैं जब आप को उन की उम्मीद नहीं होती, जैसेकि नए जूतों से छाले पड़ना या लंबी पैदल यात्रा के दौरान छोटा कट लगना. यहीं पर बैंडएड काम आते हैं, जो दर्द से राहत देते हैं. ऐसे में इन्हें भी पैक करना न भूलें. छोटी चोट या कटने के लिए भी इन का इस्तेमाल किया जा सकता है.
गौज रोल/कौटन
कुछ कट या खरोंच में सिर्फ बैंडएड काम नहीं आते हैं. उन्हें और अधिक देखभाल की जरूरत होती है. ऐसे में गौज रोल/कौटन काफी काम आते हैं, जो घावों को ढंकने या चीजों को साफ करने के लिए अच्छे होते हैं. ऐसे में इन्हें रखना न भूलें.
ऐंटी एलर्जिक दवाएं
त्वचा पर होने वाली खुजली व चकत्तों से राहत पाने के लिए ऐंटी एलर्जिक दवाएं, ऐंटी फंगल क्रीम, एलोवेरा जैल और बर्न क्रीम रखना भी जरूरी है. कटने, छिलने आदि में उपचार के लिए सोफरामाइसीन जैसे ऐंटी बैक्टीरियल या ऐंटीबायोटिक ओइटमैंट जरूर रखें.
ऐंटासिड
ट्रिप के दौरान हम सभी नईनई डिशेज ट्राई करते हैं, जिस कारण एसिडिटी, सीने में जलन या पेट फूलने जैसी परेशानी होने लगती है. ऐसे में ऐंटासिड, जो एक प्रकार की दवा है, इन समस्याओं से काफी राहत देती है. इसलिए इसे भी फर्स्टएड किट में रखना न भूलें.
पेनकिलर दवाएं
सब से जरूरी किसी दवा की जरूरत होती है तो वह है दर्दनिवारक दवाएं. फिर वह चाहे सिरदर्द, पेटदर्द, जौइंट पेन की दवा हो या सूजन आदि के दौरान लिए जाने की. ऐसे में आप डाक्टर की सलाह पर कुछ दवाओं को अपने बौक्स में इमरजैंसी दवाओं के रूप में रख सकते हैं.
पेट की समस्या की दवाएं
पेट खराब होना, दस्त, उबकाई, अपच, बदहजमी के लिए पैप्टोबिस्मौल का इस्तेमाल किया जाता है. ईनो, पुदीनहरा, डाइजीन भी रखें. पैरासिटामोल, एवोमिन, कोरैक्स जैसी सामान्य दवाइयां भी जरूरत के समय काफी काम आती हैं.
ऐंटी इचिंग लोशन : कैलामाइन लोशन कीड़े के काटने या रैशेज होने पर.
वैसलीन या पैट्रोलियम जैली : रूखी त्वचा या फटी एड़ियों के कारण होने वाले दर्द को रोकने के लिए.
कैंची, सैफ्टी पिन और सुई यदि आवश्यक हो या संभव हो, तो ब्लड प्रैशर मौनिटर या मशीन, ब्लड शुगर मीटर.
मोच आने पर क्या करें
अगर आप बुजुर्गों के साथ कहीं घूमने गए हैं और अचानक से कहीं उन का पैर मुङ गया और मोच आ जाए तो ऐसी स्थिति में आप को पता होना चाहिए कि क्या करना चाहिए. इलाज का सब से अच्छा तरीका है कि तुरंत कहीं से भी बर्फ लें और उस मोच वाली जगह पर रुकरुक कर 15 मिनट सिंकाई करें. इस से काफी आराम आएगा. फिर किसी डाक्टर को दिखाएं.
किसी गुफा आदि में जाने पर दम घुटने लगें
कई बार हम घूमने जाते हैं, तो वहां बानी गुफाओं और कैव्स को देखने जाते हैं. ऐसे में अगर बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो, तो आप उन्हें झुकने के लिए बोलें. इस के बाद आप अपने एक हाथ उस के पेट पर और दूसरे हाथ की हथेली का उपयोग कर के पीठ और कंधे के नीचे 4-5 बार थोड़ा तेजी के साथ दबाएं. आप पेट यानि नाभि के ऊपर एक मुट्ठी रखें और दूसरी मुट्ठी से पसलियों की तरफ 5 बार धक्का दें. इस से घुटन दूर हो जाएगी. इस के बाद आप उन्हें डाक्टर के पास ले जा सकते हैं.
आंख में कोई चोट लग जाए
अगर कैमिकल ऐक्सपोजर है, तो अपनी आंखों को न रगड़ें. तुरंत पानी से आंखों को धो लें और ऐसा करते समय चिकित्सा सहायता प्राप्त करें. आंखों पर पट्टी न बांधें. अगर आंखों पर झटका लगा है, तो एक ठंडा सेंक लगाएं, लेकिन आंखों पर दबाव न डालें. यदि कोई चोट लगी हो, खून बह रहा है या नजर में परिवर्तन होता है, तो तुरंत डाक्टर को दिखाएं.
