Marital rape in India : भारत में वैवाहिक बलात्कार को अभी तक कानूनन अपराध नहीं माना गया है क्योंकि आईपीसी की धारा 375 (अब बीएनएस की धारा 63) का अपवाद 2 विवाहित महिला की सहमति को वैवाहिक अनुबंध के तहत मान कर चलता है. केंद्र सरकार ने इसे एक सामाजिक मुद्दा बताते हुए और इस के दुरुपयोग की आशंका के चलते इसे अपराध न बनाने का रुख अपनाया है, हालांकि कई याचिकाओं के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट से इसे असंवैधानिक घोषित करने और महिलाओं की शारीरिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 21) के तहत सजा दिलाने की मांग भी की जा रही है.
मैरिटल रेप है अपराध
इस दिशा में याचिका कर्ताओं का मानना है कि यह अपवाद महिलाओं के मौलिक अधिकारों (समानता, गरिमा और शारीरिक स्वायत्तता) का हनन है. विवाह को एक 'अनुबंध' मान कर पति को पत्नी के शरीर पर 'अधिकार' की मान्यता देना गलत है. यदि सहमति नहीं है, तो चाहे वह वैवाहिक संबंध हो, वह बलात्कार (हिंसा) है.
100 से अधिक देशों में वैवाहिक बलात्कार को अपराध माना जा चुका है. भारत सरकार और कुछ रुढ़िवादी मान्यताओं के अनुसार, इसे अपराध बनाने से विवाह की संस्था अस्थिर हो सकती है. दिल्ली और कर्नाटक हाई कोर्ट के परस्पर विरोधी फैसलों के बाद मैरिटल रेप को क्रिमिनलाइज करने (अपराध घोषित करने) की मांग वाली याचिकाएं वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जबकि इसे जल्दी से जल्दी न्याय मिलन आवश्यक है.
इसी कड़ी में रेड डौट फाउंडेशन की सोशल वर्कर सुप्रीत के. सिंह पिछले कई सालों से काम कर रही हैं. वे मैरिटल रेप के अपवाद को खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. उन्होंने 4 किलोमीटर में फैली ‘इन्फिनिट साड़ी’ अब तक बनाई गई दुनिया की सब से लंबी साड़ी है, जिसे मुंबई के रौयल ओपेरा हाउस में अनावरण किया गया और भारतीय दंड संहिता से वैवाहिक बलात्कार अपवाद उठाने की मांग की गई. उन में सभी स्त्रियों के सिग्नेचर होंगे, जो मैरिटल रेल को गुनाह मानती हैं.
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