12वीं की परीक्षा के बाद कैरियर की सोच रहे हैं, तो प्रो. मालबिका को पढ़े

शिक्षण एक आम पेशा नहीं, जहां आप का उद्देश्य सिर्फ अच्छा वेतन, कैरियर, उन्नति हो बल्कि शिक्षक के रूप में हमारी जिम्मेदारी युवाओं को प्रेरित करना है...

March 3, 2026

शिक्षण एक आम पेशा नहीं, जहां आप का उद्देश्य सिर्फ अच्छा वेतन, कैरियर, उन्नति हो बल्कि शिक्षक के रूप में हमारी जिम्मेदारी युवाओं को प्रेरित करना है.भारत की 2 सब से प्रमुख यूनिवर्सिटीजअशोका यूनिवर्सिटी और प्रैसिडैंसी यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर रहीं प्रोफैसर मालबिका सरकार हमेशा से अपने ऐकैडमी क्षेत्र में एक स्टूडैंट और एक प्रोफैसर के रूप में हमेशा से अवल रहीं.

 

साथ ही आज प्रोफैसर मालबिका के नाम पर 2 किताबें, ‘कासमास ऐंड करैक्टर इन पैराडाइस लौस्टऔरमोनेटस सवेइलहैं. आज प्रोफैसर मालबिका सरकार के साथ उन के जीवन, शिक्षा और कैरियर को जानते हुए हम उनके सफर से उन स्टूडैंट्स के लिए कुछ प्रेरणा लाना चाहेंगे जो आज अपने कैरियर के निर्णायक मोड़ यानी कक्षा 12वीं की परीक्षा के बाद अपने आगे के कैरियर की सोच रहे हैं.

 


परिवार और अपनी शिक्षा के बारे में बताएं?

मेरे पिता भारत के सर्वश्रेष्ठ डाक्टर थे. वे पहले न्यूरोलौजिस्ट थे, जिन्होंने यह सुनिश्चित किया कि घर सुंदर किताबों से भरा रहे. इसलिए छोटी उम्र से ही मुझे  पढ़ने, चीजों को जानने का चाव रहा, साथ ही मेरी मां संगीत में बहुत प्रतिभाशाली थीं. वे एक बहुत अच्छी प्रोफैशनल गायिका थीं. अत: संगीत में रुचि विरासत में मिली. मैं ने 2 वाद्ययंत्र बजाने सीखे. घर में एक सुंदर बगीचा, मां की गाती मधुर आवाज और किताबों से भरा घर, ऐसा बचपन रहा मेरा.

 

मुझे  याद है स्कूल के दिनों में मैं इतना साहित्य पढ़ती थी कि स्कूल में अध्यापक मजाक में कहते थे कि वे क्लास नहीं लेंगे मालबिका क्लास लेगी क्योंकि वह बहुत पढ़ीलिखी है. मुझमें आगे भी पढ़ने की जिज्ञासा थी इसलिए मैं ने ग्रैजुएशन के रूप में अंगरेजी साहित्य को चुना. मैंने भारत के सब से पुराने और उच्च यूनिवर्सिटी प्रैसिडैंसी कालेज में पढ़ाई की फिर मैं कैंब्रिज यूनिवर्सिटी गई.

 

वहां जा मैं ने महसूस किया कि मैं ने जो कुछ प्रैसिडैंसी कालेज में सीखा था, वह इतना मूल्यवान था कि उस ने मुझे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने का रास्ता दे दिया और उस समय मुझे पता चला कि मेरे लिए साहित्य और शिक्षा का क्षेत्र बहुत ही अच्छा है और उस समय महिलाओं के लिए कैरियर के इतने विकल्प थे भी नहीं जितने आज के समय में मौजूद हैं

 

प्रैसिडैंसी कालेज से मिले ज्ञान, सब से अच्छे प्रोफेसरों का संग, उन से सीखना मेरे बहुत काम आया. इन सब ने मुझे एक मजबूत आधार दिया और जब कैंब्रिज विश्वविद्यालय गई तो मेरी हमेशा जिज्ञासु रहने की प्रवृत्ति किसी सीमा में नहीं रही. बल्कि मैं ने अंगरेजी साहित्य के साथ यहां बहुत चीजों के बारे में पढ़ा, सीखा.

 

मैं कई अन्य विभागों में अन्य विषयों को सुनती, उन्हें पढ़ती और किसी भी स्टूडैंट के लिए यह बहुत आवश्यक है कि वह किसी एक विषय तक सीमित नहीं रहे बल्कि एक बहुविषयक्ता को अपनाए अर्थात अपने विषय के साथ दूसरे और भी विषयों में रुचि ले, उन्हें पढ़े सीखे. प्रोफैसर के रूप में चुनौतियां क्या हैं और आप इस का आनंद कैसे लेती हैं?

 

मेरे प्रोफैशन में सब से चुनौतीपूर्ण हिस्सा वह था जब मैं एक विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफैसर थी. मैं उस समय सिर्फ 30 साल की थी और तभी मु? पश्चिम बंगाल राज्य के राज्यपाल जो मु? जानते भी नहीं थे उन्होंने मु? सर्वोच्च पद ऐग्जिक्यूटिव कौंसिल पर नियुक्त किया क्योंकि उन्होंने सुना था कि मैं एक लोकतांत्रिक व्यक्ति हूं इसलिए उन्होंने मु? पर भरोसा किया.

 

जब मैं वहां गई तो मैं अकेली महिला थी. बाकी सभी लोग पुरुष थे जो मु? से अपेक्षा करते थे कि मैं वहां बस बैठूं, कुछ कौफी पीऊं लेकिन मैं अपने हक के लिए खड़ी रही. सही को सही और गलत को गलत कहा और इस तरह मैं अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा सफल रही. वहीं अगर मैं सब से आनंदमय पलों की बात करूं तो वह अपने स्टूडैंट्स के साथ बिताया समय रहा क्योंकि एक यूनिवर्सिटी प्रोफैसर के रूप में हमेशा युवाओं के संपर्क में रहना, मु? भी युवा महसूस कराता है.

 

आज मेरे कुछ स्टूडैंट औक्सफोर्ड और कैंब्रिज में प्रोफेसर हैं और कभी यात्रा करते मिल जाते हैं तो कहते हैं कि प्रोफैसर, मैं आप का स्टूडैंट था और जब वे बताते हैं कि वे बड़ी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में ऊंचे पदों पर हैं तो बड़ी खुशी होती है. शिक्षण एक आम पेशा नहीं, जहां आप का उद्देश्य सिर्फ अच्छा वेतन, कैरियर उन्नति हो बल्कि शिक्षक के रूप में हमारी जिम्मेदारी युवाओं को प्रेरित करना, उन्हें सलाह देना, उन्हें और भी बेहतर करने के लिए तैयार करना है और मु? अपने प्रोफैशन पर बहुत गर्व है.

 


सफलता पाने के लिए क्या करना चाहिए?

मैं ने बहुत सी मूल्यवान चीजें सीखीं. मगर एक चीज जो हमेशा आप को सफल बनाने में बहुत मददगार सीख है वह है एकदूसरे का सम्मान और मैं चाहूंगी कि आज के स्टूडैंट्स अपने ऐकैडमिक और स्किल्स के साथ इस सीख को भी सीखें क्योंकि किसी भी इंसान के सफल बनने में दूसरे के प्रति किया सम्मान, आदरभाव आप को खुद में और अच्छा इंसान बनने में मदद करता है, साथ ही आगे बढ़ने में आप को सब का साथ चाहिए होता है, एक टीम वर्क की आवश्यकता होती है.

 


लड़कियों के लिए कल और आज का फर्क क्या है?

मुझे लगता है कि आज लड़कियां काफी बेहतर जगह पर हैं क्योंकि पढ़ाई के अलावा भी बहुत सारे विकल्प हैं. अगर आप महिला क्रिकेट को देखें तो देखिए कितना अच्छा प्रदर्शन किया उन्होंने. इंग्लैंड में महिला फुटबौल वेंबली नामक मैदान पर खेला जाता है जो फुटबौलरों के लिए स्वर्ग जैसा है. वहां खेल रही महिलाओं को देखने के लिए पूरा स्टेडियम पुरुषों और महिलाओं से भरा हुआ था जो तालियां बजाने आए थे.


मुझे लगता है कि महिला खेलों ने बहुत प्रगति की है और कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए अब बहुत सारे विकल्प खुल गए हैं जो पहले कभी नहीं थे. आज अन्य सभी कैरियर, कौरपोरेट कैरियर, विज्ञापन में कैरियर, पत्रकारिता में, विज्ञान क्षेत्र, बैंक, इतने सारे क्षेत्रों में अब महिलाओं के लिए बहुत सारे कैरियर विकल्प खुले हैं.

 


मैं स्टूडैंट्स को उन के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने के लिए हमेशा एथलीटराजर बैनिस्टर की कहानी सुनाती हूं कि जब राजर मैदान में उतरे तो उन्होंने दाएबाए नहीं देखा. अपना ध्यान सिर्फ सीधा दौड़ने और 4 मिनट के रिकौर्ड को तोड़ने पर लगाया. ठीक वैसे ही स्टूडैंट्स को दूसरे क्या कर रहे हैं, किस ने क्या बोला जैसी बातों को तूल देते हुए सिर्फ अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए.

 


एक महिला को वर्क लाइफ बैलेंस किस तरह बैठाना चाहिए?

‘‘एक महिला का पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच तालमेल बनना बहुत जरूरी है. मुझे याद है मैं ने अपने 9 साल जो अशोक विश्वविद्यालय में बिताए थे उस समय में हर हफ्ते कोलकाता और सोनीपत के बीच यात्रा करती थी. सभी ने कहा कि आप इतनी अधिक यात्रा कैसे कर सकते हैं? लेकिन मैं ने इस बारे में कुछ नहीं सोचा. तुम्हें पता है, यह बस या लोकल ट्रेन पकड़ने जैसा है, ठीक है? हवाईअड्डे पर जाएं, उड़ान भरें, यात्रा करें, वापस आएं.

 

मैं ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि मेरे लिए अपने परिवार के साथ रहना महत्त्वपूर्ण था, साथ ही विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण कार्य करना भी महत्त्वपूर्ण था. इसलिए मैं आज भी महिलाओं और गर्ल स्टूडैंट्स से कहती हूं कि मोबिलिटी यानी कहीं दूर आनेजाने की वजह से अपनी पढ़ाई, अपने प्रोफैशन से पीछे हटें. बस एक बार यह आप के दिमाग में जाए तो आप के रास्ते में बाधाएं खड़ी नहीं होंगी. ठीक ऐसे ही महिलाओं को कामकाजी रहना चाहिए. चाहे आप के पति आप से ज्यादा कमाते हों लेकिन सैल्फ इंडिपैंडैंट रहना भी जरूरी है.

 

एक अच्छी बैलेंस लाइफ में पति का कमाना और पत्नी का घर देखना जरूरी नहीं. आप दोनों साथ कमा सकते हो. आज तो प्रोफैशन में आप को बहुत सी छूट है. मैटरनिटी लीव, पैटरनिटी लीव आदि मिल रही है. इसलिए इन छूटों का सही इस्तेमाल करें. अपने प्रोफैशन और परिवार में तालमेल बनाएं. बच्चों के साथ खुद पर भी ध्यान दें, साथ ही अगर आप के पास कोई चुनौती है जैसेकि आप का बच्चा अगर किसी शारीरिक या मानसिक समस्या में है तो खुद को और मजबूत करें.

 

मुझे याद है जब मैं कैंब्रिज के एक प्रोफैसर को बता रही थी कि मेरे एक दोस्त के सामने इस तरह की चुनौती है तो उन्होंने मुझसे कहा कि दोस्त से बात करो और उसे बताओ कि वह इसे खुद पर हावी नहीं होने दे सकती क्योंकि इसे सोचते रहने से कोई भला नहीं होगा. इसलिए उसे इस चिंता को भूल कर इस से आगे बढ़ना ही होगा.

 


कैरियर का चुनाव अपनी पसंद और काबिलीयत को देख कर कैसे करें?

मैं संगीत में बहुत अच्छा थी. हवाईयन गिटार मैं ने कांसर्ट स्तर पर प्ले किया था और अंगरेजी साहित्य में भी मैं बहुत अच्छी थी. मगर मैं दोनों नहीं कर सकती थी, इसलिए मैं ने अपनी पसंद चुनी. दूसरे, मेरे पिता एक प्रतिष्ठित डाक्टर हैं जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाने जाते थे. उन्होंने मुझसे पहले ही कहा था कि तुम्हें मेरी तरह डाक्टर बनने की जरूरत नहीं है. अगर तुम डाक्टर बनना चाहते हो तो स्वागत है.

 

अगर तुम कुछ और करना चाहते हो तो वह करो. इसलिए उन्होंने मुझे यह चुनने की पूरी आजादी दी कि मैं क्या करना चाहती हूं. जबकि उस समय ऐसा बहुत कम होता था कि मातापिता अपनी बेटियों को भी स्कूल में प्रवेश की अनुमति दें और आज के समय में जहां शिक्षा के साधन इतने बढ़ गए, इतने सारे विकल्प मौजूद हैं तो मुझे लगता है कि मातापिता को अपने बच्चों को यह विकल्प चुनने की अनुमति देनी चाहिए और लड़कियों के मातापिता के लिए बहुत ही जरूरी है कि वे अपनी बच्चियों को सैल्फ इंडिपैंडैंट बनाएं.

 


आज के स्टूडैंट्स से क्या कहना चाहेंगी?

अगर मुझे कभी वापस अपने जीवन में उस पड़ाव में जाने को मिले, जब मैं 17 साल की स्टूडैंट थी तो तब भी मैं अपने स्वयं से यही कहूंगी कि यह तुम्हारा जीवन है जो तुम्हें जीना है. इसलिए अपने फैसले स्वयं लो. वह चुनें जो तुम्हें पसंद हो, जो तुम करना चाहती हो. इसलिए मैं आज के स्टूडैंट्स से भी यही कहूंगी कि जो आप को पसंद है उस विषय का चयन करें और उस में अपनी पूरी मेहनत लगा दें. आज पूरा विश्व आप के लिए खुला है.


टैक्नोलौजी, इंटरनैट यह सब आप के पास है. लेकिन यहीं तक सीमित रहें. अपनी स्वयं की सोच बढ़ाएं, जिज्ञासा बढ़ाएं. प्रश्न करें और उन के उत्तर तलाश करें. सोशल मीडिया जो अच्छा होने के साथसाथ हानिकारक भी है. इस के प्रति सचेत रहें. आज इन प्लेटफौर्म्स पर बहुत ही दूषित मानसिकता वाला कंटैंट देखने को मिलता है. अत: इस के दुष्प्रभाव से बचें, इस के जाल से खुद को बचाएं और बौद्धिक रूप से विश्व के अच्छे नागरिक बनें.                         

क्विक इंट्रो

जन्मस्थान : कोलकाता
ऐजुकेशन : प्रैसीडैंसी कालेज, कोलकाता, कैंब्रिज यूनिर्सिटी
प्रोफेशन : मैंटौर, टीसीजी क्रेस्ट, भूतपूर्व वाइस चांसलर × प्रोफैसर, अशोका यूनिवर्सिटी
लर्निंग : अच्छे कालेज का फायदा तभी होगा जब आप अपनी स्किल्स पर काम करेंगे और अनुशाषित रहेंगे. टीचिंग का जौब सिर्फ सैलरी के लिए करें. स्टूडैंट्स को इंस्पायर करना, उन्हें गाइड करना और उन का फ्यूचर शेप करने की जिम्मेदारी भी टीचर की ही है. इंटरनैट और नई तकनीक का इस्तेमाल खुद को मल्टीस्किल्ड बनाने के लिए करें.       

मालबिका सरकार प्रोफैसर