सोलर इंडस्ट्री में करियर कैसे बनायें
ऋतु ने अपनी खोज करते रहने की चाह से बौटनी की डिगरी की और एमबीए तक की राह पूरी कर आज सोलर पावर इंडस्ट्री का एक जानामाना चेहरा बनी है.
आज भी बहुत सी महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों में अपना कैरियर छोड़ देती हैं. जब कुछ महिलाओं ने अपनी अद्भुत प्रतिभा और कड़ी मेहनत से उन कार्यक्षेत्रों में नाम कमया है अपना एक मुकम्मल औदा बनाया है जो सिर्फ पुरुषप्रधान माने जाते थे. ठीक ऐसी ही एक अग्रणी महिला है ऋतु लाल. ऋतु ने अपनी खोज करते रहने की चाह से बौटनी की डिगरी की और एमबीए तक की राह पूरी कर आज सोलर पावर इंडस्ट्री का एक जानामाना चेहरा बनी है. ऋतु लाल के जीवन के सफर में उन की शिक्षा और कैरियर चुनाव और सफलता पर उन से सार्थक बातचीत कर हम स्टूडैंट्स और उन के परिवारों के लिए कुछ ऐसे पहलू रखना चाहते हैं जिन से स्टूडैंट्स के कैरियर में कुछ अच्छा बदलाव आ सके.
फैमिली और अपने बचपन के बारे में कुछ बताएं?
मैं एक न्यूक्लीअर फैमिली में पलीबढ़ी हूं. मेरे पिता सिविलसर्विस में थे. समयसमय पर उन का ट्रांसफर होता रहता था. अत: मैं बचपन से बहुत अलगअलग वातावरण में रही. कभी सिक्किम, कभी कोलकाता, कभी दिल्ली. उस समय में यानी 80 के दशक में ध्यान भटकाने के लिए कोई टैलीविजन या ऐसी और कोई चीज नहीं थी. इसलिए 4 साल की उम्र से ही मु?ा में पढ़ने की आदत विकसित हुई, जिस ने मेरी कल्पना को बढ़ाया.
मुझे अगाथा क्रिस्टी बहुत पसंद थीं. कौमिक्स जैसे अमर चित्र कथा, आर्ची, टिनटिन पढ़ना भी बहुत पसंद था. मुझे याद है जब हर महीने रीडर्स डाइजैस्ट आती थी, तब मेरी बहन के साथ इस बात पर ?ागड़े होते थे कि इसे पहले कौन पढ़ना चाहता है, टाइम पत्रिका के साथ भी यही झगड़ा होता था क्योंकि उस में जम्ंबल वर्ड और अन्य पहेलियां आती थीं.
आप की प्रारंभिक शिक्षा कहां से हुई?
उस समय मुझे नहीं पता था कि मैं क्या करना चाहता हूं लेकिन मैं पढ़ने में तेज थी इसलिए विज्ञान चुना साथ ही बायो में मजा आता था. फिर जब आगे की पढ़ाई की बात आई तो मुझे एहसास हुआ कि मु?ो फिजिक्स में उतना मजा नहीं आ रहा था, इसलिए इंजीनियरिंग परीक्षाओं के लिए पढ़ाई करने का कोई मतलब नहीं है. विज्ञान पसंद है एक विषय के रूप में.
मुझे बायोलौजी बहुत पसंद थी लेकिन उस में कैरियर का मेरा उद्देश्य नहीं था. मगर मेरी चिकित्सा में कोई दिलचस्पी नहीं है. एमबीबीएस की किताबें रटना और किसी भी प्रकार की सर्जरी के बारे में नहीं सोचती थी. मैं ने कुछ विकल्प देखे जैसे इतिहास, पत्रकारिता कैरियर बनाने के लिए. मगर मेरा रुझान विज्ञान की तरफ ही था लेकिन मुझे डाक्टर नहीं बनना था यह क्लीयर था. अत: उस समय विज्ञान में मेरे सामने बौटनी आई और मैं ने अपनी ग्रैजुएशन की और एमबीए इसलिए किया क्योंकि उस समय मेरे बहुत सारे दोस्त यह कर रहे थे.
तब मैं ने फाइनैंस और मार्केटिंग में एमबीए किया. यानी मैं बैंकों में एफएमसीजी में मैं ने लगभग हर जगह जौब के लिए आवेदन किया. कुछ समय बाद मैं एक एफएमसीजी में फाइनैंस से जुड़ गई. कंपनी को स्मिथक्लाइन बीचम कहा जाता था. उस में हौर्लिक्स जैसे ब्रैंड थे और वह मेरा पहला काम था. मैं राजकोष और वित्त में शामिल हुई. 2 साल के भीतर, मैं रणनीतिक सोर्सिंग और खरीद की ओर बढ़ी क्योंकि उन्होंने मु?ा में एक मजबूत बातचीत का कौशल देखा. मेरी नैगोशिएशन स्किल्स बहुत अच्छी थी.
कैरियर के टर्निंग पौइंट्स कहां रहे?
एक समय था जब मैं अपने पद के बदलाव पर खुश नहीं थी. मैं ने अपने सीनियर से इस पर चर्चा की. मैं ने कहा, ‘‘मुझे खरीदारी या प्रोक्योरमैंट के लिए क्यों ले जा रहे हैं? मुझे वहां भीड़ पसंद नहीं है.’’ तब उन्होंने मुझे से कहा कि मुझे एक बार यह कार्य देखना चाहिए. अगर पसंद नहीं आया तो मैं वापस आ सकती हूं और यह कार्य अब ग्लोबल स्तर पर बढ़ रहा है तो मुझे यह आगे बढ़ने का कदम सोचना चाहिए. मैं ने उन की बात मानी. बाद में मुझे मेरा प्रोक्योरमैंट कैरियर बहुत पसंद आया.
कुछ समय बाद मेरे सामने एक सोलर स्टार्टअप सामने आया, जिस के संस्थापक संजीव मुझे जानते थे. दोस्तों के जरीए मिले और सोलर स्टार्टअप की बात रखी. तब सिर्फ मैं ने ही नहीं बल्कि मेरे पति ने भी एक प्रस्तुति बनाई और उन के समक्ष पेश की जो उन्हें बहुत पसंद आई और हम ने उस कंपनी में बहुत छोटा निवेश किया. मगर मुझे वह स्टार्टअप एक व्यावसायिक विचार के रूप में अधिक पसंद आया. तब मैं उन के पास गई और बोला कि आप जानते हैं संजीव मैं नवीकरणीय ऊर्जा या सोलर ऊर्जा के बारे में कुछ भी नहीं जानती. मैं यह भी भूल गई हूं कि बिजली की माप की इकाई क्या है लेकिन मैं बोर्ड पर आना चाहती हूं. मैं यहां व्यावसायिक भूमिकाएं निभा सकती हूं.
तब उन्होंने कहा कि हम अभी आप को सैलरी नहीं दे सकते हैं. इस पर मैं ने कहा कि ठीक है. पहले हम काम शुरू करते है. उस समय यह व्यापार केंद्र एक कमरे से संचालित हो रहा था. 4 लोग थे. 2 संस्थापक, 1 तकनीकी व्यक्ति और 1 वित्त व्यक्ति था. उस समय में मैं अपने छोटे बच्चे के साथ अपना प्रोफैशन भी संभालती थी. मु?ो अपना काम बहुत पसंद था. मैं दूसरी फील्ड का ज्ञान रखती थी. उस समय सोलर का कोई ज्ञान नहीं था. लेकिन मैं ने इसे एक सीखने का मौका सम?ा और सोलर से जुड़ी हर बात, ग्राहक, टैक्नोलौजी, उद्योग, मुद्दे, चुनौतियां, एक देश के रूप में हमें क्या करने की आवश्यकता है, खतरे क्या हैं, जोखिमों से कैसे बच सकते हैं, हर चीज को जाना और समझ.
वूमन की वर्कफोर्स और चुनौतियों को आप किस तरह देखती हैं?
मैं ने देखा कि ऊर्जा एक पुरुषप्रधान उद्योग है. यहां बहुत कम महिला सीईओ और सीएक्सओ हैं. वहां मैं ने महिलाओं के लिए भी पहल की. सोलर उद्योग और उस के बाहर भी, कुछ प्रबंधन संस्थानों के लिए जो बहुत अच्छी तरह से स्थापित नही हैं मैं ने वहां सलाहकार की भूमिकाएं निभाई हैं. आज कंपनियों और उद्योगों में एक ऐसा कार्य वातावरण तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है जो लैंगिक विविधता को बेहतर बनाने में मददगार हो. मगर दुखद सचाई यह है कि फिर भी महिलाएं अल्पसंख्यक हैं.
आज भी बहुत सी महिलाएं पारिवारिक जिम्मेदारियों में अपना कैरियर छोड़ देती हैं. बच्चे, परिवार, बूढ़े मातापिता सब का भार उन पर आ जाता है. आज बहुत से औफिस में फ्लैक्सिबल टाइमिंग है, कुछ वर्क फ्रौम होम की सुविधा भी देते हैं. मगर अधितकतर में यह सुविधा नहीं है. इसलिए महिलाओं को पीछे हटना पड़ता है. इस परेशानी में एक गवर्नमैंट सैक्टर जौब है जो महिलाओं का बहुत हद तक साथ देता है. तो प्राइवेट सैक्टर इस तरह का वर्क फ्रोम होम क्यों नहीं अपनाते. आज भी प्राइवेट सैक्टर का वर्क फ्रोम होम महिलाओं के लिए परेशानी खड़ी कर देता है.
दूसरा है मोबिलिटी इशू. आज भी बहुत से पेरैंट्स अपनी बेटियों को काम के या पढ़ाई के सिलसिले में दूर शहर नहीं भेजते. उलटा उन्हें नौकरी छोड़ने को कहते हैं या औफिस में आ कर प्रश्न करते हैं कि आप मेरी बेटी को कैसे दूसरे शहर भेज रहे हैं. यह बहुत गलत है. अगर आप बेटियों को आगे नहीं बढ़ने देंगे तो उन का भविष्य क्या होगा. आज पढ़नेलिखने के बाद भी वे सैल्फ डिपैंडैंट नहीं हैं तो क्या फायदा उन्हें पढ़ाने का. क्या पढ़ने के बाद भी उन का दूसरों पर फाइनैंशियल डिपैंडैंट रहना ठीक है. क्या लड़कियों के साथ यह गलत नहीं?
स्टूडैंट्स के लिए क्या सुझाव देना चाहेंगी?
अपना विषय, अपना कैरियर चुनते समय पहले तो स्टूडैंट्स यह सम?ों कि उन्हें क्या लेना और क्या नहीं. अगर चुना गया सब्जैक्ट नहीं सम?ा आ रहा, कोई परेशानी है तो उसे समय पर बदल डालो. जो हमारे समय थोड़ा मुश्किल था, हां, अच्छे कालेज से की पढ़ाई का बहुत फर्क पड़ता है. अगर मनचाहे कालेज में एडमिशन नही हुआ तो दूसरे कालेज में एडमिशन लो. निराश मत हो. मैं ने बहुत से ऐसे स्टूडैंट्स देखे हैं जिन्होंने आम यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और बहुत आगे निकले. इसलिए जो सब्जैक्ट लो, जो कालेज हो वहां जम कर पढ़ाई करो क्योंकि वहीं से पहली जौब मिलेगी.
दूसरा हर किसी के लिए सक्सैस, ऐंबिशन का मतलब अलगअलग है, इसलिए हमेशा कंपेटिटिव रहें लेकिन उस के कंपैरेटिव भी बनें. आज पूरी दुनिया में कंपीटिशन है, इसलिए खुद पर काम करें लेकिन थोड़ा ठहर कर आत्मचिंतन भी करें. मैटीरियलिस्टिक चीजों के पीछे ज्यादा न भागें. पेशंस रखें. चाहे कैसी भी परिस्थिति हो खुद पर विश्वास करें. मैं सक्षम हूं, खुद से कहें. अगर कोई काम नहीं हुआ, मार्क कम हैं, नौकरी नहीं मिली तो निराश न हो. कोशिश करते रहें क्योंकि एक दरवाजा बंद होता है तो दूसरा जरूर खुलता है.
क्विक इंट्रो
जन्मस्थान : सिक्किम
ऐजुकेशन : एमबीए, फाइनैंस ऐंड मार्केटिंग
प्रोफेशन : सीनियर वीपी ऐंड हैड इंस्टिट्यूशनल रिलेशन
लर्निंग :
अपने सब्जैक्ट्स का चुनाव सावधानी से करें. यदि सब्जैक्ट चुनने के बाद भी मुश्किल आ रही है तो समय पर उसे बदल लें क्योंकि बाद में ऐसी गलतियां सुधारने का चांस नहीं मिलता.
कंपीटिशन का दौर है तो कंपेटिटिव ऐटिट्यूड ही सफलता दिला सकता है. एमबीए में एडमिशन लेने से पहले यह तय कर लें कि आप को इस स्टडी के बाद कैसा कैरियर चाहिए.
एमबीए करने के बाद स्टार्टअप का इरादा बनाया है तो पहले फाइनैंशियली साउंड होना जरुरी है. इस के लिए पहले जौब जौइन करना जरूरी है.