NEET career options : आज भी भारत में मांबाप का पहला सपना बच्चे को डाक्टर या इंजीनियर बनते देखना ही होता है. मगर इन दोनों प्रोफैशन के पीछे की रेस साल दर साल जटिलता के साथ बढ़ती ही जा रही है. भारत में हर साल करीब 20 से 24 लाख स्टूडैंट्स नीट की परीक्षा में बैठते हैं जबकि सीट्स करीब 1 लाख 30 हजार होती हैं, जिन में सरकारी सीट्स करीब 60 हजार और प्राइवेट 70 हजार के करीब हैं यानी यह एटैंप्ट स्टूडैंट्स का केवल 5% या 6% ही है.

ऐसे में हर स्टूडैंट तो क्या आधे स्टूडैंट के लिए भी सीट नहीं है और यदि सीट्स बढ़ें भी तो भी मानदंड इतने कड़े हैं कि हर स्टूडैंट्स उसे पार नहीं कर पाता. इसलिए नीट क्वालिफाइड न होने की सूरत में दूसरे विकल्पों का भी महत्त्व समझें.

कम अंक और ऐग्जाम क्लीयर न होने में अंतर

यदि अंक कम हैं तो आप को सीट नहीं मिलती लेकिन आप क्वालिफाइड तो होते हो इसलिए उस समय में काउंसलिंग सैशन, प्राइवेट मैडिकल कालेज, डीम्ड यूनिवर्सिटीज, बीडीएस, आयुष कोर्सेज या एमबीबीएस अब्रौड के लिए अप्लाई कर सकते हैं. हां, यह भी सच है कि अब यहां आप की रैंक या अंक और बजट के आधार पर ही कालेज का औप्शन रहेगा.

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वहीं दूसरी तरफ नीट क्लीयर न होने पर भारत में एमबीबीएस में एडमिशन तो मुमकिन नहीं है और यदि कोई यह सोचे कि वह विदेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर वापस भारत आ कर प्रैक्टिस कर सकता है तो यह भी मुमकिन नहीं क्योंकि भारत में मैडिसिन प्रैक्टिस के लिए नीट क्वालीफाई करना अनिवार्य है. इसलिए अपने कैरियर औप्शन का चयन नीट के क्वालिफाइड होने या न होने के आधार पर ही करें.

अगर नीट क्वालिफाइड हो गया तो परेशानी या शंका की वजह नहीं रहती. इसलिए विचार इस पर किया जाए कि यदि नीट क्लीयर नहीं हुआ तो क्या करें?

पहला औप्शन ड्रौप ईयर या फिर से नीट की तैयारी: यहां स्टूडैंट्स अपने वर्तनाम एटैंपट को ध्यान में रख, अपनी गलतियोंकमियों को देखपरख, उन पर काम कर फिर से नीट के लिए तैयारी कर सकते हैं. नीट में अधिकतम आयु या एटैंपट की सीमा नहीं है तो यदि आप को अपनी मेहनत पर भरोसा है तो आप दोबारा या कई बार एटैंपट कर सकते हैं.

दूसरे औप्शंस या विकल्पों का चयन करें: आज नीट क्लीयर न होने पर भी उज्ज्वल भविष्य के बहुत सारे कैरियर औप्शन हैं, जिन में मैडिकल और हैल्थ सैक्टर के साथसाथ नौनमैडिकल और कई बायोलौजी एंडटेक फील्ड्स के ही हैं जैसे:

मैडिकल और हैल्थकेयर

बी.औप्टम/बीएससी औप्टोमेटरी/ बीएएसएलपी: बैचलर औफ औप्टोमेट्री या बैचलर औफ औडियोलौजी ऐंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलौजी में एडमिशन के लिए नीट की आवश्यकता नहीं होती है. भारत में कई जगह स्टूडैंट्स को 12वीं कक्षा पीसीबी/पीसीएम की परीक्षा के बाद एडमिशन मिल जाता है तो कई जगह सीयूईटी की परीक्षा देनी होती है.

बीएससी नर्सिंग: नीट परीक्षा केवल एआईआईएमएस, बीएचयू जैसे टौप केंद्रीय और सरकारी इंस्टिट्यूट में बीएससी नर्सिंग के प्रवेश के लिए आवश्यक है. मगर कई स्टेट इंस्टिट्यूट, प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटी में नीट की आवश्यकता नहीं होती है.

बी फार्मा यानी बैचलर औफ फार्मेसी: इस की पढ़ाई के लिए भी नीट के मानदंड की आवश्यकता नहीं होती. स्टूडैंट्स 12वीं कक्षा की परीक्षा में उत्तीर्ण हो इस कोर्स में एडमिशन ले सकते हैं और फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्री में अच्छा कैरियर बना सकते हैं.

बीपीटी यानी बैचलर औफ फिजियोथेरैपिस्ट: इस कैरियर प्रोग्राम में भी नीट की जरूरत नहीं होती है, साथ ही आज के लाइफस्टाइल से बढ़ती बौडी ऐंड मसल प्रौब्लम्स के साथ रैग्युलर लाइफ लाइफस्टाइल और मैडिकल ऐंड स्पोर्ट्स सेक्टर में फिजियोथेरैपिस्ट के लिए बहुत स्कोप हैं.

बीएससी न्यूट्रिशन ऐंड डाइटेटिक्स: आज आप न्यूट्रिशन ऐंड डाइटेटिक्स में बैचलर डिगरी की पढ़ाई कर सकते हैं जो मुख्य रूप से भोजन योजना (मील प्लानिंग) और उन उपचारात्मक आहारों (थेरैप्यूटिक डाइट) पर फोकस है. मधुमेह (डायबिटीज), हृदय रोग, गर्भवती महिलाओं आदि के उत्तम स्वास्थ्य के लिए छोटेबड़े हर हौस्पिटल, क्लीनिक, मैडिकल ऐंड हैल्थकेयर सर्विसेज में न्यूट्रिशनिस्ट ऐंड डाइटीशियन की जरूरत रहती है.

बायोलौजी और साइंस के अलग विषयों के साथ टैक्निकल औप्शन

माइक्रोबायोलौजी ऐंड हैल्थ लैब प्रैक्टिस: क्लीनिकल लैब प्रैक्टिस भी बहुत अच्छा औप्शन है. आज जितनी जरूरत हास्पिटल की है और जितनी अधिक मांग डाक्टर्स की है उतनी ही मांग अच्छे लैब वर्कर, टैक्नीशियन, असिस्टैंट, थेरैपिस्ट की भी है जो रेडियोलोजी, पैथोलौजी, ओटी टेक आदि में काम कर सकें. इस के लिए स्पैशलाइज्ड बीएससी, बायोकैमिस्ट्री आदि की पढ़ाई करनी होती है.

बायो इनफौर्मेशन और टैक्नोलौजी: यह कोर्स डीप स्टडीज जैसे रिसर्च आदि के लिए अच्छा है.

बीएससी जेनेटिक्स एंड मौलिक्यूलर बायोलौजी: इन कोर्स में एडमिशन ले कर स्टूडैंट्स डीएनए, जीन थेरैपी और बायोलौजिकल रिसर्च पर अध्ययन कर सकते हैं. इस से बड़ी मैडिकल साइंस ऐंड रिसर्च इंडस्ट्री में उन्हें अच्छा कैरियर मिल सकता है.

नौनमैडिकल औप्शन

साइकोलौजी: आज साइकोलौजी का क्षेत्र बढ़ रहा है. हौस्पिटल से ले कर प्राइवेट प्रैक्टिस और बहुत से सरकारी और प्राइवेट संस्थान में साइकोलौजिस्ट की मांग है. साइकोलौजी की पढ़ाई आप साइंस या आर्ट्स किसी भी बैकग्राउंड के साथ कर सकते हैं. आप बैचलर या मास्टर कर अपना अच्छा कैरियर बना सकते हैं.

डाटा साइंस ऐंड इनफौर्मेशन: यहां साइंस के विषयों के साथ स्टैटिस्टिक्स और कोडिंग की पढ़ाई कर के भी अच्छा भविष्य बनाया जा सकता है. आज जैसेजैसे मैडिकल सैक्टर डैवलप हो रहा है, उस में टैक्नोलौजी और डिजिटल स्किल्स भी ऐड हो रही हैं. इसलिए डाटा साइंस और इनफौर्मेशन के स्कोप भी बढ़ते जा रहे हैं. आज हर बड़ी मैडिकल इंडस्ट्री का अपना डाटा बेस मौजूद है.

ये सब कोर्सज कराने के छोटेबड़े इंस्टिट्यूट खुले हुए है. कुछ सिर्फ बोर्ड लगा कर सर्टिफिकेट देते हैं पर कुछ अच्छे पैसे ले कर अच्छे ट्रेनरों से अच्छी पढ़ाई कराते हैं. गूगल सर्च करने पर बहुत से पते मिल जाएंगे पर एक बार उस जगह विजिट किए बिना पेमैंट न करें क्योंकि फ्रौड के मामले बहुत चल रहे हैं. कुछ बड़ी प्राइवेट यूनिवर्सिटीज भी छोटे कोर्स करा कर सर्टिफिकेट दे देती हैं. अत: कैरियर बनाने के लिए कैसी भी जगह हो वहां से ट्रेनिंग अपनी अफोर्ड करने के शक्ति के साथ लें.                –