Development sector careers : नूरिया भारती एयरटेल फाउंडेशन में सीईओ हैं, जो इंडियन ऐजुकेशन सिस्टम में ठोस बदलावों की पहल और सुधार के लिए जानी जाती हैं. आज गृहशोभा के यूनिवर्सिटी औफ लाइफ सेगमैंट में हम उन के इंटरव्यू के जरीए उन की कैरियर जर्नी के आधार पर स्टूडैंट्स के लिए  बनाने के लिए बहुत सी गाइडैंस और एडवाइज लाए हैं :

डैवलपमैंट सैक्टर में जाना है तो स्कूल के किन सब्जैक्ट में पकड़ रखें?

मैथ जानना जरूरी है क्योंकि डाटा ऐनालिसिस, इंपैक्ट असैसमैंट, इवैल्यूएशन जैसी जगहों पर मैथमैटिक्स की पकड़ काम आती है. इंग्लिश या लैंग्वेज की क्योंकि अगर आप की लैंग्वेज सही होगी तो आप अच्छे से बातचीत कर पाएंगे, खुद को प्रेजैंट कर पाएंगे, अपनी बात सामने रख पाएं. साथ ही आज के दौर को देखें तो सब से बड़ा सब्जैक्ट है टैक्नोलौजी और डिजिटल का ज्ञान. आज कोई भी फील्ड हो टैक्नोलौजी ऐंड डिजिटल स्किल सब से क्रिटिकल फैक्टर हैं, जिन में डिजिटल सेफ्टी, साइबर सिक्यूरिटी, साइबर अवेयरनैस, सोशल मीडिया अवेयरनैस यह सब 100% लाइफ स्किल बन गया है. तो यह आप जितना ज्यादा हो सके सीखें क्योंकि टैक्नोलौजी तेज रफ्तार से बदल रही है.

और एक और बहुत ही अहम चीज है प्यार जो आप को सोशल सैक्टर से हो. चाहे आप एसयूपी वर्क से हों, कम्युनिटी वर्क से हों, आप को यहां घंटों धूप में खड़ा रहना पड़ता है और यह कोई सब्जैक्ट नहीं है जो स्कूल वाले सिखाएं. यह प्यार है जो आप के अंदर से आता है.

कौन सी कालेज डिगरी इस कैरियर में विशेषता रखती है?

डैवलपमैंट सैक्टर में साइकोलौजी डिगरी, ऐजुकेशन सैक्टर की डिगरियां जैसे पीएचडी, बीएड, मास्टर औफ सोशल वर्क, डैवलपमैंट स्टडीज में एमए, जर्नलिज्म और बीएससी भी बहुत जरूरी है ताकि अगर आप डैवलपमैंट सैक्टर में प्राथमिक या ग्रामीण स्तर पर मैडिकल ऐड से जुड़े हैं तो आप दवाइयों की, उन के सही रखरखाव आदि की समझ रख सकें. जो एनजीओ सैक्टर से जुड़े हों उन्हें थोड़ी ला की पढ़ाई या नौलेज होनी चाहिए. इस तरह आप डैवलपमैंट सैक्टर के जिस किसी सैक्टर या फील्ड से जुड़े हों या कैरियर बनाना चाहते हों उस फील्ड की पढ़ाई, नौलेज या स्पेशलाइजेशन जरूरी है.

बैस्ट कालेज चुनने का मानदंड क्या होना चाहिए?

सब से पहले फैकल्टी को देखें क्योंकि मैं ने जो भी कालेज में सीखा है अपनी कैरियर लाइफ में उतारा है और उस के पीछे मेरी ऐक्सीलैंट फैकल्टी का हाथ है. वे बहुत हार्डवर्किंग थे, बहुत सारा ज्ञान रखते थे और उन्होंने अपना ज्ञान हम में इंवैस्ट किया ताकि हम सफलता हासिल करें. हमारे बीच सवालजवाब होते थे जिस में वह हमें उत्साहित करते थे.

साथ ही देखें कि कालेज कितनी पारदर्शिता दिखा रहा है अपने टीचर्स, फैसिलिटी, इन्फ्रास्ट्रक्चर, कंप्लायंस आदि के बारे में. कालेज की चली आ रही प्रतिष्ठा भी देखें. मगर यह भी देखें कि वह समय के साथ अपडेटेड है या नहीं. इस समय की ऐकैडमिक सुविधा, प्रोग्राम आदि उपलब्ध है या नहीं, अभी की क्या परफौर्मैंस है.

कौन सी स्किल्स इस क्षेत्र में सफलता दिलाती हैं?

इंटीग्रिटी स्किल, टैक्नोलौजी स्किल, कम्युनिकेशन स्किल ये सब आनी बहुत जरूरी हैं, साथ ही जो सब से क्रिटिकल स्किल्स हैं वे हैं स्टेक होल्डर शिप, क्रिटिकल थिंकिंग ऐंड प्रौब्लम सौल्विंग ताकि आप हर मुश्किल में खड़े हो सकें, जवाब दे सकें. जैसे अगर आप के सामने कोई श्रमिक आर्थिक रूप से पीडि़त परिवार यह कहे कि ‘हम अपने बच्चे को स्कूल क्यों भेजें? वह किसी दुकान में, मेकैनिक के पास काम करेगा तो कम से कम 500-600 रुपए मिलेंगे. तो स्कूल क्यों आएं जहां से कोई कमाई नहीं. ‘‘तब आप उस के इस सवाल का जवाब दे सको. साथ ही यहां रेसिलिएंस की बहुत जरूरत है ताकि

आप खुद को हर परिस्थिति में ढाल सको, खुद को संभाल सको क्योंकि अगर आप यहां 360 दिन काम करते हैं तो 150 दिन आप को रोने को मिलेगा.

आप देखो कि कम उम्र में लड़कियों की शादी हो गई, उन्हें बेच दिया गया, लड़कों को पढ़ाई से हटा दिया, लड़के भाग गए यह सब आम दिनों में सुनने को मिलता है. बहुत कम अच्छी खबर आती है और इन्हीं सब के बीच आप को काम करते रहना पड़ता है.

डैवलपमैंट सैक्टर में ऐंपथी, इमोशन और इंटैलिजैंस में कैसे तालमेल बैठाएं?

मैं इसे एक और्डर में कहूंगी कि सब से पहले ऐंपथी फिर इमोशन इंटैलिजैंस और फिर इंटैलिजैंस. पहले आप सामने वाले के लिए ऐंपथी रखें सिंपथी नहीं. उस के बाद उस के इमोशन को सम?ा और फिर उस पर अपनी इंटैलिजैंस लगाओ. अब यहां आप अपनी क्रिटिकल थिंकिंग और प्रौब्लम सौल्विंग स्किल्स को लगाएं. जैसे कोई किसान आप से कहे कि उस का बच्चा 15 दिन स्कूल नहीं आएगा क्योंकि यह फसल काटने का समय है तो आप उस के पिता की जरूरत को सम?ों न कि उस की शिकायत करने चले जाएं. याद रहे कि डैवलपमैंट सैक्टर में आप को ऐक्टिविस्ट नहीं डैवलपर बनना है, प्रोफैशनल बनना है ताकि आप स्थिति को बदल सकें न कि उसे जटिल बना लें.

आप की ऐजुकेशन और कैरियर लाइफ के टर्निंग पौइंट क्या रहे?

मेरी लाइफ का सब से पहला टर्निंग पौइंट जेएमसी कालेज में मेरी साइकोलौजी की पहली क्लास थी जो आज मेरे लिए मेरे जीवन की सब से बैस्ट क्लास है, उस के बाद मुझे इस सब्जैक्ट से प्यार हो गया. दूसरा रहा जब मैं ने ऐजुकेशन सैक्टर में पैर रखा एक टीचर के रूप में. जब मैं ने 23 साल की उम्र में 12वीं क्लास के स्टूडैंट्स को साइकोलौजी पढ़ाई, उन्हें बोर्ड के लिए तैयार किया. तीसरा रहा डा. अंजली प्रकाश के साथ लर्निंग लिंक्स फाउंडेशन में काम करना, उन के साथ देश के 10 लाख टीचर्स को ट्रेंड करना और फिर टर्निंग पौइंट रहा भारती एयरटेल फाउंडेशन, जहां मुझे सबकुछ मिल गया ऐजुकेशन भी, डैवलपमैंट भी.

डैवलपमैंट सैक्टर में कितना स्कोप दिखता है? एआई का इस सैक्टर में क्या प्रभाव है?

डैवलपमैंट सैक्टर के प्रौफिट और नौनप्रौफिट दोनों ही सैक्टर में बहुत स्कोप हैं. आज हर एफएमसीजी डैवलपमैंट प्रोफैशनल्स को ले रही हैं क्योंकि वे जानते हैं कि गांव में, तहसील में कैसे काम करना है, वे वहां के लोकल किराना से ले कर लोगों की जरूरत तक को सम?ाते हैं. डैवलपमैंट सैक्टर में ऐसोसिएट का बहुत काम रहता है तो ऐंट्री लैवल पर मैडिकल यूनिट, स्कूल, ऐग्रीकल्चर, हैल्थकेयर में जाएं, जहां लोग कम हैं और अवसर ज्यादा.

एआई और डैवलपमैंट सैक्टर बड़ी नजदीकी से जुड़े हैं. आज रूरल सैक्टर में एआई मशीन लर्निंग हो रही है वह भी डैवलपमैंट सैक्टर के जरीए हो रही है. जैसे आइडैंटिफिकेशन औफ वीड, पेस्टिसाइड, इंसैक्ट्स और फिर उन की लेबलिंग भी यह सब डैवलपमैंट सैक्टर के प्रोफैशनल्स कर रहे हैं एआई सेक्टर के लिए. जैसे उन के लिए डाटा कलैक्शन भी यह डैवलपमैंट सैक्टर कर रहा है, उन की डाटा ऐनालिसिस में मदद कर रहा है तो यह एक स्ट्रौंग कोलैबोरेशन है.

कैरियर टिप्स

मैथ जानना जरूरी है क्योंकि डाटा ऐनालिसिस, इंपैक्ट असैसमैंट, इवैल्यूएशन जैसी जगहों पर मैथमैटिक्स की पकड़ काम आती है.

आप डैवलपमैंट सैक्टर के जिस किसी सैक्टर या फील्ड से जुड़े हों या कैरियर बनाना चाहते हों उस फील्ड की पढ़ाई, नौलेज या स्पेशलाइजेशन जरूरी है.