Single Women: हम  चाहे जितने ढोल पीट लें कि हमारा देश महान है, हमारी संस्कृति प्राचीन है, हमारे संस्कार सब से आदर्श हैं पर असल में हमारे यहां हरकोई खूंखार है और अपनों को ही लूटना चाहता है. अकेली लड़की के साथ तो हरकोई पूरी लिबर्टी लेना चाहता है.

सपने तो हरकोई देखता है लेकिन क्या सभी के सपने पूरे होते हैं? कैसा होगा उस लड़की का भविष्य जिस के मातापिता बचपन में उसे इस दुनिया में छोड़ गए.

आज मैं आप के सामने अपनी कहानी बताना चाहती हूं. बड़ेबड़े विद्यालयों में नौकरी के लिए आवेदन किया. मेरा खास व्यक्तित्व नहीं था. वजन ज्यादा और छोटा कद जो मेरी नौकरी के आड़े आया. दिल्ली के मयूर विहार फेस-2 के  नामचीन विद्यालय बाल भवन में मेरा साक्षात्कार हुआ लेकिन सफल नहीं हुई. घर के पास प्ले स्कूल में काम किया. अकेली होने के नाते मेरा व्यक्तित्व दबा रहा.

रिश्तेदारों और आसपास के लोगों ने मेरे मातापिता को बोलना शुरू कर दिया कि यामिनी (अपनी लड़की) के लिए लड़का ढूंढो. मेरे मातापिता को इस कार्य में लगना पड़ा. किसी ने मु झ से नहीं पूछा कि बेटा तू क्या करना चाहती है? ऐसा लग रहा था कि सबकुछ मु झ पर थोपा जा रहा है.

मेरे पिताजी ने तो एक बार एक लड़के वालों को बुलाने का न्योता भी दे दिया. मु झे इस बात पर बहुत क्रोध आया कि मेरे बिना पूछे इतना बड़ा फैसला क्यों ले लिया. उस समय बात टल गई. लोगों को शांति नहीं मिली.

लोगों ने बोलना छोड़ दिया

एक पोंगा पंडित के कहने पर मेरे पिताजी ने मेरे लिए कुंडली तक बनवा ली कि कब मेरी शादी का योग है. इस पंडित ने कहा कि 28वें वर्ष में कुछ प्रयास करने से योग बन रहा. उंगली में पुखराज पहने, सोमवार का व्रत करें. जब मु झे पता चला तो मैं ने कुंडली को फाड़ कर जला डाला. शादी के नाम से मेरा पारा चढ़ जाता था. प्ले स्कूल में नौकरी छूट गई क्योंकि उस समय मेरे पिताजी को लकवा मार गया था. करीब 4 साल वे अस्पताल में रहे. घर में 2 महिलाएं, एक आदमी जो बिस्तर पर पड़ा था उसे संभालना कठिन था. 26 मई, 2013 को हृदयाघात से उन की मौत हो गई.

मैं ने सोचा शादी की बात खत्म हो गई लेकिन लोगों ने मेरी माताजी को नहीं छोड़ा. मेरा गुस्सा बरकरार रहा. मेरे व्यवहार को देख कर लोगों ने बोलना छोड़ दिया.

एक बार मेरी माताजी की सहेली ने घर पर रिश्ता लाने के लिए सोचा पर वे नहीं आईं क्योंकि मेरी मां ने उन्हें मेरी शादी में रुचि न होने की बात बता दी. बैंक के काम सिर पर आ गए जो मु झे देखने पड़े. मेरी माताजी को आंखों की तकलीफ थी, मोतियाबिंद बढ़ चुका था. शूगर बीपी की तकलीफ थी. उन की हृदय गति भी धीमी चल रही थी. उन के मुंह में छाले पड़ गए थे. चेहरे पर सूजन आ गई थी. एक दिन वे बाथरूम में फिसल गईं. पड़ोसियों की मदद से उठाया गया. उन के पैरों की ताकत जाती रही.

मेरी माताजी का मुंह बंद होता चला गया. आखिर में उन के मुंह से खून निकलने लगा. अप्रैल, 2023 में उन का निधन हो गया. मेरे भाईबहन नहीं हैं. मृत्यु प्रमाणपत्र में मुश्किल आई क्योंकि उन की मृत्यु घर में हुई थी. मेरे पिताजी वायुसेना में थे तो पैंशन के काम के लिए दरदर भटकना पड़ा.

कभी इस कागज के लिए तो कभी उस कागज के लिए. घर भी अपने नाम करवाना था. हरकोई मु झ से अतिरिक्त सेवा की मांग करता था. जो चरित्र से शरीफ होता था वह रिश्वत मांगता था.

लोगों को मेरी सलाह

इसी सिलसिले में वकील के पास जाना पड़ा, उस में भी समय लगा. इसी बीच मु झे सेहत की समस्या हो गई खून की कमी हो गई, चक्कर आने लगे. वजन इतना बढ़ गया कि साइटिका का दर्द दाहिने पैर में शुरू हो गया. डाक्टर के पास जाना पड़ा, फिजियोथेरैपी करवानी पड़ी. मुझे अपने थोड़े से दोस्तों का सहयोग मिला.

कुछ लोग तो पूछने लगे कि आप ने शादी क्यों नहीं की? मैं ने उन्हें आराम से बताया कि यह मेरा निजी मामला है.

बात यहां तक खत्म नहीं हुई. हमारे कई जानने वालों ने तो मेरी माताजी की मृत्यु के बाद रिश्ते ढूंढ़ने शुरू कर दिए, मैं ने उन से कहा कि मेरी शादी में रुचि नहीं है.

जिंदगी में मैं आगे बढ़ चुकी हूं. काफी दिक्कत के बाद मैं अपने व्यक्तित्व को बना रही हूं. मेरी आप लोगों को सलाह है कि आप पहले अपना कैरियर बनाएं फिर शादी का फैसला लें. वे लोग अपने स्वार्थ के लिए मेरी शादी करवाना चाहते थे. वे लोग हमेशा किसी अधेड़, विधुर या तलाकशुदा को ही लाते जो बेहद गरीब होता है.

असल में उन सब का खयाल था कि जिन के लिए लड़के से मैं शादी करूंगी वह व्यक्ति उस लड़के को पटा कर मकान बिकवा देंगे और मोटी कमीशन खा जाएंगे. ये सब लड़के दूसरे शहरों या कसबों के होते थे जहां वे कैसे रहते हैं, क्या करते हैं, मैं कभी जान नहीं सकती थी.

मु झे सम झ आ गया कि अकेली लड़की के ये हितैशी नहीं हैं. ये गिद्ध हैं जिन की नजर मेरे पेरैंट्स की छोड़ी गई थोड़ी सी प्रौपर्टी पर है.

राइटर -यामिनी बजाज

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