एक बार एक मधुमक्खी ने मेरी गर्दन पर डंक मारा तो मेरे पति फौरन घर के भीतर से आलू का आधा टुकड़ा काट कर लाए और फिर उसे डंक वाली जगह पर रख दिया. ऐसा करने से डंक का असर कम करने में मदद मिलती है, लेकिन कुछ दिनों तक दर्द बना रहता है.

राजीव और सोनिया एक बार बच्चों के साथ पिकनिक मनाने गए थे. बच्चों में से किसी ने वहां ततैयों के छत्ते पर पत्थर मार दिया. फलस्वरूप ततैयों के झुंड ने सभी को कई डंक मारे. ये लोग कई दिनों तक बीमार रहे. अच्छी बात यह रही कि इन में से कोई भी जहर के प्रति ऐलर्जिक नहीं था, क्योंकि जो जहर के प्रति ऐलर्जिक होते हैं उनकी तो एक ही डंक में जान पर बन आती है.

मधुमक्खी भी हैं खतरनाक

जब मधुमक्खी काटती है, तो वह मर जाती है, क्योंकि उस का डंक उस के पेट का हिस्सा होता है. डंक मारते समय यह व्यक्ति के शरीर में ही टूट जाता है. यदि डंक को शरीर से न निकाला जाए तो जहर फैलने लगता है और बहुत दर्द होता है.

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