REVIEW: निर्वाण इन में आदिल हुसेन का शानदार अभिनय

रेटिंग: तीन स्टार

निर्माताः मैजिक आवर फिल्म्स (सिंगापुर) के सहयोग से स्ट्राय फैक्ट्री,  अनकॉम्ड बुद्धा,  स्टॉप व्हिंगिंग (औस्ट्रेलिया) और हरमन वेंचर्स

निर्देशकः विजय जयपाल

कलाकारः आदिल हुसेन, संध्या मृदुल, राजश्री देशपांडे, संदीप महाजन, राज शर्मा, राजीव शर्मा

अवधिः एक घंटा 42 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्मः सिनेमाप्रिन्योर डॉट कॉम पर 11 दिसंबर से

‘नेटफ्लिक्स’पर मौजूद लोकप्रिय तमिल फिल्म‘‘रिवीलेशंस’’ के तीन साल बाद लेखक व निर्देशक विजय जयपाल हिंदी भाषा की मनोवैज्ञानिक हॉरर फिल्म‘‘निर्वाण इन’’लेकर आए हैं, जिसमें आदिल हुसेन, संध्या मृदुल और राजश्री देशपांडे की प्रमुख भूमिकाएं हैं. इस फिल्म का 2019 में ‘‘24 वें बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’’में विश्व प्रीमियर हो चुका है. ‘निर्वाण इन’एशियन प्रोजेक्ट मार्केट  ’के तहत बुसान में चुनी गई एकमात्र भारतीय फिल्म रही. इसके अलावा इस फिल्म को प्रतिष्ठित एशियाई सिनेमा फंड से सम्मानित किया गया. अब यह फिल्म 99 घंटों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘सिनेमाप्रिन्योर डॉट कॉम’’पर 11 दिसंबर 2020 से देखी जा सकती है. आदिल हुसेन का जानदार अभिनय और संध्या मृदुल व राजश्री देशपांडे का शानदार अभिनय फिल्म को खास बना देता है. यह फिल्म एक अंधेरे अतीत से भागे हुए व्यक्ति के अशांत, उदास मन की मनोवैज्ञानिक जांच करती है.

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कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में असम के माजुली निवासी लोक नर्तक व नाविक जोगी (आदिल हुसैन) के इर्दगिर्द घूमती है. जो कि अपनी कुछ समस्याओं से त्रस्त होकर एक दिन अचानक आत्महत्या करने का फैसला कर लेता है. इस प्रयास में वह तो जीवित बच जाता है, मगर उसकी नाव पर सवार सभी बच्चों,  पुरूषों व महिलाओं की मौत हो जाती है. इस घटना से जोगी अपराध बोध से ग्रस्त हो जाता है. जबकि उनके नृत्य के गुरू कहते है, ‘भगवान हमेशा आपके साथ रहेंगे. ’फिर वह हिमाचल प्रदेश के मनाली में विचित्र पर्वत स्थल में ‘निर्वाण इन’रिसोर्ट में प्रबंधक के रूप में कार्य करने लगते हैं. पर उसकी स्थिति जल से निकली मछली की तरह है. इस रिसोर्ट में पहले दिन से ही उसे कई अलौकिक घटनाओं का सामना करना पड़ता है. उसे अपना अतीत सामने प्रतीत होता है. उसके अतीत के लोग होटल में पहुंचने लगते हैं और बहुत अजीब तरह से व्यवहार करते हैं, जबकि एक रहस्यमय नकाबपोश व्यक्ति उसे जंगल में घूरता रहता है, मगर हमेशा जोगी की समझ से बच जाता है. जैसे ही वह रिसोर्ट में रह रही फिल्म निर्माता लीला (संध्या मृदुल) के करीब जाना शुरू करता है, तभी वहां पर नौकरी करने मोहक महिला मोहिनी (राजश्री देशपांडे)पहुॅच जाती है. जो कि जोगी को छेड़ना शुरू कर देती है. जबकि जोगी को लगता है कि मोहिनी बदला लेने व उसकी हत्या करने आयी है, मगर मोहिनी कहती है कि वह तो उसे नुकसान पहुॅचाने के बारे में सोच भी नही सकती. जिस गॉंव में यह रिसोर्ट है, वहां पर बुरी आत्माओं में विश्वास करने वाले लोग हंै और महिलाओं के उपर से  भूत भगाने के अनुष्ठान गहरी जड़ें हैं. अनजान घटनाओं की एक श्रृंखला दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रास्ता देती है, जब तक कि रिसॉर्ट में आतंक को ढीला नहीं किया जाता है. इन सब के बीच जोगी वर्तमान और भयावह अतीत से भ्रमित और पस्त पकड़ा जाता है, फिर वह एक बड़ा कदम उठाता है.

लेखन व निर्देशनः

यह लेखक व निर्देशक की कुशलता का ही परिचायक है कि फिल्म‘‘निर्वाण इन’’आम हॉरर फिल्मों से हटकर है. फिल्म शुरूआत में धीमी और शिथिल है, मगर धीरे धीरे प्रभावशाली होती जाती है. इंटरवल के बाद तो फिल्म कुछ ज्यादा ही बेहतर बन जाती है. यह फिल्म लोक कथा की जड़ता के साथ एक डरावनी कहानी की परंपराओं को जोड़ती है. इस प्रक्रिया में, फिल्म शाब्दिक और रूपक के बीच चमकती है. निर्देशक फिल्म में अंत तक रहस्य व हॉरर को बनाए रखते हैं. मगर कुछ सवालांे के जवाब अधूरे छोड़ दिए गए हैं. वैसे जब तक मोहिनी को फिल्म के हाशिये पर नहीं रखा जाता, तब तक जोगी के साथ उनकी केमिस्ट्री फिल्म को जीवंत करती है. निर्देशक की निर्देशकीय कुशलता के परिणाम स्वरूप यह फिल्म मनुष्य के मस्तिष्क के गंभीर चिंतन के साथ ही अपराध बोध व मृत्यु ग्रस्त व परेशान आत्मा का आकर्षक वायुमंडलीय अनुभव है. फिल्म में अपराध बोध से ग्रस्त इंसान की जीवन शैली के ही साथ उसकी मनोवैज्ञानिक मानसिक स्थिति,  डर, शक आदि का सटीक चित्रण है. यह फिल्म एक किरदार की धीमी यात्रा है, जो यथार्थवाद और रहस्य के बीच की रेखा को धुंधला करती है.

फिल्मकार ने बिना किसी भाषणबाजी या नाटकीयता के यह सवाल उठाया है कि ‘आखिर कोई भी इंसान अपने जीवन को ही नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन को भी खत्म करने का फैसला कैसे कर सकता है?’

फिल्मकार ने असम को नदी, पहाड़, नाव और अखाड़े (जहां पर जोगी असमिया लोक नृत्य भोआ किया करते थे.) को सटीक रूप से उकेरा है.

फिल्म हिंदी भाषा में है, मगर बीच में कुछ दृश्यों में असमिया भाषा है.

फिल्म के एडीटर की कमजोरी के चलते फिल्म प्रारंभ में  लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती है. दृश्य जल्दी दिखाई देते हैं और अचानक अतीत के भ्रम में डूब जाते हैं और कहानी को पटरी से उतार देते हैं.

फिल्म के कैरामैन जयनाथ मथावन बधाई के पात्र हैं.

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अभिनयः

आदिल हुसेन ने मानसिक यातना से गुजर रहे इंसान जोगी के किरदार को अपने अभिनय से जीवंतता प्रदान की है. जोगी स्पष्ट असमिया उच्चारण के साथ हिंदी बोलता है. ऐसे किरदार को प्रमाणिक बनाना आदिल हुसेन जैसे कलाकार के ही वश की बात है. किरदार के साथ न्याय करने के लिए चेहरे के भाव और टकटकी का आदिल हुसेन ने भरपूर उपयोग किया है.

मोहक, रहस्यमयी व डरावनी मोहिनी के किरदार में राजश्री देशपांडे का अभिनय उत्कृष्ट है. उनके हर कृत्य से शक उभरता है. जबकि लीला के छोटे किरदार में भी संध्या मृदुल अपना प्रभाव छोड़ जाती हैं. अन्य सहयोगी कलाकार ठीक हैं.

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