सिरदर्द को न करें नजरअंदाज

बदलती जीवनशैली, काम का तनाव, डिप्रेशन, खराब लाइफस्टाइल और एंग्जाइटी की वजह से सिरदर्द की समस्या आजकल  काफी बढ़ गई है. कई बार मानसिक तनाव की वजह से भी सिर में दर्द रहता है, लेकिन अगर लगातार सिरदर्द बना रहे और हर दिन ये समस्या महसूस हो तो लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. इस प्रकार का सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है.

इसके अलावा जो लोग माइग्रेन जैसी समस्या से पीड़ित हैं. उसमें ब्रेन ट्यूमर होने की जोखिम रहती हैं. कई बार माइग्रेन का दर्द समझकर लोग ध्यान नहीं देते हैं लेकिन बार-बार सिरदर्द की समस्या हो, तो उसे नजरअंदाज न करें. इसलिए समय रहते विशेषज्ञ की सलाह लेना काफी जरूरी होता हैं

मुंबई की झायनोव्हा शाल्बी मल्टिस्पेशालिटी रुग्णालय के न्यूरोलॉजिस्ट, डॉ आकाश छेडा कहते है कि देशभर में ब्रेन ट्यूमर के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इस बीमारी का समय रहते निदान और इलाज नहीं हुआ, तो जानलेवा साबित हो सकता हैं. ब्रेन ट्यूमर के मरीजों में सिरदर्द एक सामान्य लक्षण है, अक्सर सामान्य सिरदर्द वाले मरीजों को ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा रहता हैं, लेकिन लोगों के  लिए यह पहचान करना मुश्किल होता हैं कि उनको जो सिरदर्द हो रहा है, वह सामान्य दर्द है, माइग्रेन का दर्द है या ब्रेन ट्यूमर के कारण दर्द हो रहा हैं. इस बारें में लोगों में जागरूकता पैदा करना काफी जरूरी हैं. ब्रेन ट्यूमर आमतौर पर उन लोगों को प्रभावित करता हैं, जो 40 से 60 वर्ष की आयु वर्ग में आते हैं.

ब्रेन ट्यूमर और माइग्रेन के दर्द को पहचानने के लक्षण

ये लक्षण कुछ इस प्रकार है,

माइग्रेन में सिर के एक तरफ दर्द होता है, ये किसी भी समय हो सकता है. माइग्रेन अक्सर युवावस्था में शुरू होता है और 35 से 45 वर्ष की आयु के लोगों को सबसे अधिक प्रभावित करता है, लेकिन अगर किसी को सुबह-सुबह बहुत तेज सिरदर्द होना और इसके ही साथ उल्टी भी आना, तो यह ब्रेन ट्यूमर का लक्षण हो सकता हैं. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों में मतली, उल्टी, नींद न आना, मिजाज में बदलाव, बोलने और सुनने में असमर्थता, गंध में बदलाव की समस्या होती हैं. किसी भी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना काफी जरूरी होता हैं,

दे सकता है सिरदर्द, ब्रेन ट्यूमर का संकेत

सिरदर्द तब होता है, जब एक बढ़ता हुआ ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के आसपास की निरोगी कोशिकाओं पर दबाव डालता है या ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे सिर में दबाव बढ़ जाता है और सिरदर्द होने लगता है. इसके अलावा, सुबह के समय सिरदर्द होना, कुछ लोगों को नींद के वक्त भी असहनीय दर्द का सामना करना पडता है और यह सिरदर्द भी माइग्रेन के दर्द की तरह महसूस होता है. इतना ही नहीं सिर के पिछले हिस्से में गर्दन में ब्रेन ट्यूमर के कारण गर्दन में भी दर्द हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर अगर सिर के अगले हिस्से में हो, तो सिर दर्द भी आंखों में दर्द या साइनस के दर्द जैसा महसूस होता हैं.

इसके आगे डॉ. आकाश कहते है कि ब्रेन ट्यूमर दो तरह के होते है, जैसे

मैलिग्नेंट ट्यूमर

इस ट्यूमर में कैंसर की कोशिकाएं होती हैं. कैंसर के कारण सिर में असहनीय दर्द होता हैं. यह कैंसर कोशिका सिर के अन्य हिस्से में भी  फैलती हैं. कई बार कैंसर जेनेटिक होता है, ऐसे में अगर परिवार में से किसी को ब्रेन ट्यूमर या कैंसर है, तो यह बच्चों में भी ट्रांसफर हो सकता है.

बिनाइन ट्यूमर 

यह ट्यूमर कैंसर का नही होता हैं. इस ट्यूमर के फैलने का खतरा भी नहीं होता, लेकिन समय रहते इलाज होना काफी जरूरी है, अन्यथा बीमारी का खतरा बढ सकता हैं.

असल में ब्रेन ट्यूमर का कोई निश्चित कारण अभी तक नहीं पता चल पाया हैं. हालांकि स्वस्थ जीवनशैली,  इस परेशानी से व्यक्ति को कुछ हद तक दूर रख सकती है. साथ ही इसके लक्षणों के प्रति भी जागरूक होना आवश्यक है. ब्रेन ट्यूमर की बीमारी अधिक उम्र या ज्यादा चिंता करने वालों को हो, ऐसा जरुरी नहीं. यह बीमारी किसी को भी हो सकती हैं. इसलिए अगर आपको लगातार सिर दर्द और उल्टी की शिकायत है, तो इसे नजरअंदाज ना करें. तुरंत डॉक्टर की सलाह ले और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं.

ब्रेन ट्यूमर के 10 सामान्य लक्षण

क्या आपको लगातार सिरदर्द, मितली, धुंधला दिखाई देना और शारीरिक संतुलन में परेशानी हो रही है? इन लक्षणों को नजर अंदाज ना करें, यह ब्रेन ट्यूमर जैसी बड़ी समस्या हो सकती है. ब्रेन ट्यूमर में दिमाग में कोई बहुत सी कोशिकाएं या कोई एक कोशिका असामान्य रूप से बढ़ती है. सामान्यतः दो तरह के ब्रेन ट्यूमर होते हैं कैंसर वाला (घातक) या बिना कैंसर वाला (सामान्य) ट्यूमर.

दोनों ही मामलों में दिमाग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं, जो कि कई बार घातक सिद्ध होता है. इसके साथ सबसे बड़ी परेशानी है कि इसके कोई विशेष कारण नहीं हैं, केवल कुछ शोधकर्ताओं ने इसके कुछ रिस्क फैक्टर्स का पता लगाया है.

ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन बढ़ते उम्र के साथ इसका जोखिम भी बढ़ जाता है. कई मामलों में तो यह आनुवांशिक कारण हो सकता है और कई बार किसी केमिकल के ज्यादा इस्तेमाल या रेडिएशन से हो सकता है. बहुत से लोगों को पता ही नहीं चलता है कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है क्यों कि उनमें कोई लक्षण दिखाई ही नहीं देते हैं.

जब ये ट्यूमर बड़ा हो जाता है और स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ जाता है तब लोग चैक-अप करवाते हैं और तब इसका पता चलता है. हम आपको इसके 10 लक्षणों से अवगत करा रहे हैं, जिनको जानने की आवश्यकता है.

1. सिरदर्द

यह ब्रेन ट्यूमर का सबसे बड़ा लक्षण है. यह दर्द मुख्यतः सुबह होता है और बाद में यह लगातार होने लगता है, यह दर्द तेज होता है. यदि ऐसा लक्षण दिखाई दे तो जांच कराएं.

2. उबाक या उल्टी का मन होना

सिरदर्द की तरह यह भी सुबह होता है, खास तौर पर जब व्यक्ति एक जगह से दूसरी जगह जाता है तब यह ज्यादा होता है.

3. कम दिखना

जब किसी को आक्सिपिटल के आस पास ट्यूमर होता है तो चीजें कम दिखाई देती हैं. उन्हें धुंधला दिखाई देने लगता है और रंगों व चीजों को पहचानने में परेशानी होती है.

4. संवेदना कम महसूस होना

जब किसी व्यक्ति के दिमाग के पराइअटल लोब पे ट्यूमर होता है तो उसे अपनी बाजुओं और पैरों पर संवेदना कम महसूस होती है, क्यों कि ट्यूमर से कोशिकाएं प्रभावित होती हैं.

5. शरीर का संतुलन बनाने में परेशानी

जब किसी को ट्यूमर होता है तो उसके शरीर का संतुलन नहीं बन पाता है, क्यों कि यदि सेरिबैलम में ट्यूमर है तो वह मूवमेंट को प्रभावित करता है.

6. बोलने में परेशानी

यदि किसी को टैंपोरल लोब में ट्यूमर होता है तो बोलने में परेशानी होती है, सही तरह बोला नहीं जाता है.

7. रोजाना के कामों में गड़बड़ी करना

पराइअटल लोब में ट्यूमर होने पर संवेदना प्रभावित होती है, इससे व्यक्ति को दैनिक क्रियाओं में परेशानी होती है.

8. व्यक्तिगत और व्यवहारिक बदलाव

जिन्हें फ्रन्टल लोब में ट्यूमर होता है वे अपने व्यवहार पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं. इन्हें नई चीजें सीखने में परेशानी होती है.

9. दौरे पड़ना

ब्रेन ट्यूमर में दौरे पड़ना एक आम समस्या है. जब भी दौरा पड़ता है तो व्यक्ति बेहोश हो जाता है.

10. सुनने में समस्या

जिन लोगों को दिमाग के टैंपोरल लोब में ट्यूमर होता है उन्हें सुनने में परेशानी होती है, कभी कभी सुनना पूरी तरह प्रभावित हो जाता है.

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अब ब्रेन ट्यूमर लाइलाज नहीं

22 वर्षीय निधि को कुछ समय से सिर दर्द, दाएं हाथ, पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी आदि कई चीजे हो रही थी. फॅमिली डॉक्टर ने पहले इसे एसिडिटी बताया, फिर विटामिन्स की कमी आदि न जाने कितने दिनों से यही चल रहा था, लेकिन कुछ ठीक नहीं हो रहा था, केवल दर्द की दवा लेने से सिर दर्द कम होता था, ऐसे करीब 4 से 5 महीने बीत गए, पर निधि को आराम न था. एक दिन निधि की सहेली की माँ निधि से मिलने आई और उन्होंने निधि को किसी अस्पताल में ले जाकर किसी न्यूरोसर्जन से बात करने की सलाह दी. निधि को अस्पताल ले जाने पर उसकी खून की जांच के साथ-साथ (MRIScan)भी की गयी, जिसमें मस्तिष्क के बाएं भाग में ट्यूमर पाया गया. मस्तिष्क के नाजुक भागों को बचाने के लिए, निधि को तुरंत Awake Brain Surgery के द्वारा ऑपरेट किया गया, जिसमें रोगी की होश और अलर्ट रखते हुए ही सर्जरी की जाती है. इसके बाद बायोप्सी से कैंसर ग्लायोमा ग्रेड 4 ( Glioma WHO – IV ) के जाँच की पुष्टि होने पर मरीज का कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी से इलाज किया गया. अब निधिपूरी इलाज के बाद बेहतर चल सकती है, अपने दाएं हाथ का प्रयोग कर सकती है और उसके बोलने में भी सुधार आया है. ऑपरेशन के 12 महीने पश्चात किया हुआ एमआरआई स्कैन, कैंसर को कंट्रोल में दिखाता है, जो अच्छी बात है. निधि का जीवन फिर से सामान्य हो गया.ये सही है कि समय पर ब्रेन ट्यूमर का पता लगने पर इलाज़ भी संभव है.

समझे ब्रेन ट्यूमर को

असल में मस्तिष्क, शरीर का अभिन्न अंग है, जिसका काम पूरे शरीर की क्रियाओं को संचालन करना होता है. ब्रेन, कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है. शरीर के अन्य भागों की तरह, यह भी कई प्रकार के ट्यूमर से ग्रसित हो सकता है. ब्रेन ट्यूमर से स्वस्थ मस्तिष्क पर दबाव बढ़ने के कारण उसको  हानि पहुंच सकती है. इसलिए प्राथमिक लक्षण उत्पन्न होने पर, तुरंत न्यूरो विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए.

कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जन डॉ. अक्षत कयाल कहते है कि ब्रेन के सभी ट्यूमर कैंसर युक्त नहीं होते, लगभग 50 प्रतिशत ट्यूमर कैंसर रहित होते है, जिनका समय पर इलाज मरीज को पूर्ण रूप से स्वस्थ कर सकता है. कैंसर युक्त ब्रेन ट्यूमर ( Glioma स्टेज 3 एवं 4 ) का इलाज अत्यावश्यक है. इनके शीघ्र इलाज से मरीज को दीर्घायु प्रदान कर सकते है और उस मरीज की कार्य क्षमता एवं जीवन की गुणवत्ता को भी अधिक बढ़ा सकते है.

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ब्रेन ट्यूमर के लक्षण

स्कल के अंदर सीमित जगह होने के कारण, कोई भी ट्यूमर, मौजूदा जगह में अपने लिए अतिरिक्त स्थान बनाने की कोशिश करता है, जिससे मस्तिष्क पर दबाव पड़ता है और इसके लक्षण प्रकट होने लगते है. अधिकतर मरीजों में सिर दर्द, उल्टी, नजर का धुंधलापन, दोहरा दिखाई देना ( डिप्लोपिया ) एवं मिर्गी के दौरे, प्रमुख लक्षण होते है. अन्य असामान्य लक्षण जैसे चेहरे का तिरछापन, शरीर के दाएं या बाएं भाग में कमजोरी, बोलने, सुनने और निगलने में परेशानी आदि है.

ब्रेन ट्यूमर की जाँच

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अक्षत कयाल आगे कहते है कि मरीज के लक्षणों के आधार पर ब्रेन ट्यूमर की डायग्नोसिस की जातीहै. डायग्नोसिस की पुष्टि करने के लिए एमआरआई स्कैन ( MRI Scan ) की आवश्यकता होती है, जिसकी सलाह न्यूरो सर्जन,मरीज की जांच करने के बाद ही दे सकता है. जिन मरीजों में कोई लक्षण नहीं होते, उनमें ब्रेन ट्यूमर की डायग्नोसिससंदेह के आधार पर एमआरआई स्कैन कर पता करते है.

ब्रेन ट्यूमर का इलाज

  • किसी भी ब्रेन ट्यूमर के इलाज में ऑपरेशन की भूमिका प्रमुख रहती है.अधिकतरन्यूरो सर्जन, ऑपरेशन के द्वारा, सुरक्षित तरीके से ट्यूमर का अधिकतम भाग निकालते है.
  • छोटे कैंसर मुक्त ट्यूमर्स को समय-समय पर एम आर आई स्कैन ( MRI Scan ) द्वारा निगरानी में रखा जा सकता है और इसे फोकस रेडिएशन से नष्ट भी किया जा सकता है.
  • बड़े टयूमर, सर्जरी के द्वारा सुरक्षित रूप से पूरी तरह निकाले जा सकते है. ब्रेन के ट्यूमर, जिनमें कैंसर होने की संभावना होती है, उन्हें भी सर्जरी द्वारा सुरक्षित रूप से अधिक से अधिक निकाल दिया जाता है. इसके बादबायोप्सी की रिपोर्ट के आधार पर बची हुई ट्यूमर का कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी द्वारा इलाज किया जाता है. इससे मरीज की लॉन्ग लाइफ और अच्छी कार्य क्षमता मिल सकती है.

इसके अलावा देश के सभी बड़े शहरों में  ब्रेन ट्यूमर के ऑपरेशन की सुविधा, सरकारी एवं गैर सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध है. देश के महानगरों में,  ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए विश्व स्तरीय टेक्नोलॉजी उपलब्ध है. इन शहरों के सभी बड़े अस्पतालों में , ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी न्यूरो नेविगेशन, इंट्राऑपरेटिव एम आर आई, न्यूरो एंडोस्कोपी, इंट्राऑपरेटिव न्यूरोमोनिटरिंग, फंक्शनल एम आर आई, आदि के साथ की जाती है. अगर ब्रेन के नाजुक भाग से ट्यूमर की निकटता पाई जाती है, तब सर्जरी मरीज के होश में रहते हुए ही की जाती है. उपरोक्त सभी विधियां, मरीज के ट्यूमर को सुरक्षित रूप से निकालने में मददगार साबित होती है. ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी का प्राथमिक उद्देश्य, मरीज को उत्तम कार्य क्षमता के साथ लम्बी आयु प्रदान करना होता है.

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महानगरों के प्राइवेट अस्पतालों में, ब्रेन ट्यूमर के इलाज का खर्च डेढ़ लाख से तीन लाख तक हो सकता है. सरकारी अस्पतालों में यह सर्जरी न्यूनतम खर्च में हो जाती है. प्राइवेट अस्पतालों में भी गरीबी रेखा के नीचे एवं वंचित वर्ग के लिए चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा मदद की सुविधाएं होती है.

आज ब्रेन ट्यूमर का इलाज भारत में आधुनिक तकनीक से सफलतापूर्वक करवाना संभव है.इस तरह की सर्जरी आज पूर्ण रूप से सुरक्षित है.लक्षणों की जल्दी पहचान और जल्द इलाज ही इस रोग के सर्वोत्तम निदान के लिए आवश्यक है.

मैं ब्रेन ट्यूमर सर्जरी और इलाज से जुड़े सवालों के बारे में जानना चाहती हूं?

सवाल

मेरी माताजी की उम्र 61 वर्ष है. उन्हें 1 महीना पहले फर्स्ट स्टेज का ब्रेन ट्यूमर डायग्नोसिस हुआ था. डाक्टर ने सर्जरी द्वारा ट्यूमर निकालने का सुझाव दिया था, लेकिन कोविड-19 के कारण हम सर्जरी नहीं करा पा रहे हैं. उन के लिए खतरा बढ़ तो नहीं जाएगा?

जवाब-

मस्तिष्क हमारे शरीर का एक बहुत ही आवश्यक और संवेदनशील भाग है. जब इस में ट्यूमर विकसित हो जाता है, तो जीवन के लिए खतरा बढ़ जाता है. अगर ट्यूमर हाई ग्रेड है, तो तुरंत उपचार कराना जरूरी है. उपचार कराने में देरी मृत्यु का कारण बन सकती है.

अगर ट्यूमर का विकास बहुत धीमा है तो आप उपचार कराने के लिए थोड़ा समय ले सकते हैं. कोविड-19 के डर से आप सर्जरी कराने में ज्यादा देर न करें, क्योंकि कुछ ट्यूमर इतने घातक होते हैं कि कई लोग ब्रेन ट्यूमर के डायग्नोसिस के 9-12 महीने में मर जाते हैं. समय पर डायग्नोसिस करा लिया जाए तो ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है.

सवाल

मेरे पति को ब्रेन ट्यूमर है. मैं जानना चाहती हूं कि इस के लिए कौन सा उपचार सब से बेहतर है?

जवाब-

ब्रेन ट्यूमर का उपचार उस के प्रकार, आकार और स्थिति पर निर्भर करता है. इस के साथ ही आप के संपूर्ण स्वास्थ्य और आप की प्राथमिकता का भी ध्यान रखा जाता है. अगर ट्यूमर ऐसे स्थान पर स्थित है, जहां औपरेशन के द्वारा पहुंचना संभव है तो सर्जरी का विकल्प चुना जाता है.

लेकिन जब ट्यूमर मस्तिष्क के संवेदनशील भाग के पास स्थित होता है, तो सर्जरी जोखिम भरी हो सकती है. इस स्थिति में सर्जरी के द्वारा जितना ट्यूमर निकाल दिया जाएगा उतना सुरक्षित होता है.

अगर ट्यूमर के एक भाग को भी निकाल दिया जाए तो भी लक्षणों को कम करने में सहायता मिलती है. इस के अलावा ब्रेन ट्यूमर के उपचार के लिए आवश्यकतानुसार, कीमोथेरैपी, रैडिएशन थेरैपी, टारगेट थेरैपी और रेडियोथेरैपी का इस्तेमाल भी किया जाता है.

सवाल

मैं 22 वर्षीय एक कालेज स्टूडैंट हूं. मुझे ब्रेन ट्यूमर है. मैं जानना चाहती हूं कि क्या रेडियो सर्जरी से ब्रेन ट्यूमर का उपचार संभव है?

जवाब-

रेडियो सर्जरी, ब्रेन ट्यूमर का एक अत्याधुनिक उपचार है. यह एक ही सीटिंग में हो जाता है और अधिकतर मामलों में मरीज उसी दिन घर जा सकता है. यह पारंपरिक रूप में सर्जरी नहीं है. इस में कैंसर ग्रस्त कोशिकाओं को मारने के लिए रैडिएशन की कई बीम्स का इस्तेमाल किया जाता है, जो एक बिंदु (ट्यूमर) पर फोकस होती हैं.

इस में विभिन्न प्रकार की तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है जैसे गामा नाइफ या लीनियर ऐक्सेलेटर. इसे रैडिएशन थेरैपी से बहुत बेहतर माना जाता है. इस की सफलता दर 80-90% है और साइड इफैक्ट्स भी बहुत कम होते हैं.

सवाल

मैं ने पिछले साल ब्रेन ट्यूमर के उपचार के लिए कीमोथेरैपी कराई थी. मैं जानना चाहती हूं कि क्या कैंसर रोगियों के लिए कोविड-19 के संक्रमण का खतरा अधिक है?

जवाब-

जो लोग पहले से ही शरीर के किसी भी भाग के कैंसर से जूझ रहे हैं उन में कोविड-19 के संक्रमण का खतरा स्वस्थ लोगों की तुलना में कई गुना अधिक हो जाता है, क्योंकि कैंसर के कारण शरीर अतिसंवेदनशील और प्रतिरक्षा तंत्र अत्यधिक कमजोर हो जाता है. ऐसे में शरीर वायरस के आक्रमण का मुकाबला नहीं कर पाता है.

जो लोग कैंसर का उपचार करा रहे हैं, विशेषकर कीमोथेरैपी, उन के लिए संक्रमण की आशंका अधिक हो जाती है, क्योंकि कीमोथेरैपी में इस्तेमाल होने वाला ड्रग्स प्रतिरक्षा तंत्र को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. इसलिए बहुत जरूरी है कि जो लोग कैंसर से जूझ रहे हैं या उस का उपचार करा रहे हैं, वे कोविड-19 से बचने के लिए सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन करें.

सवाल

मेरे पति को ब्रेन ट्यूमर था, लेकिन उपचार कराने के बाद भी उन्हें दैनिक गतिविधियां करने और बोलने में समस्या हो रही है. क्या करूं?

जवाब-

उपचार कराने के बाद भी अगर दैनिक गतिविधियां करने और बोलने में समस्या हो रही हो तो फिजिकल थेरैपी, स्पीच थेरैपी और औक्युपेशनल थेरैपी की सहायता ली जा सकती है.

अगर ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क के उस भाग में भी विकसित हुआ था, जहां से बोलने, सोचने और देखने की क्षमता नियंत्रित होती है तो कई बार उपचार के पश्चात मरीज की आवश्यकता के आधार पर डाक्टर स्पीच थेरैपी के सैशन लेने का सुझाव दे सकता है. इस के लिए स्पीच पैथोलौजिस्ट का सहारा लिया जा सकता है. मांसपेशियों की शक्ति को पुन: प्राप्त करने के लिए फिजिकल थेरैपी के सैशन दिए जाते हैं. औक्युपेशन थेरैपी, सामान्य दैनिक गतिविधियों को फिर से प्राप्त करने में सहायता करती है.

सवाल

मैं 58 वर्षीय एक घरेलू महिला हूं. 1 साल पहले मुझे ब्रेन ट्यूमर हो गया था. तुरंत उपचार कराने से अब मैं ठीक हो गई हूं. लेकिन मुझे हमेशा डर लगा रहता है कि कहीं ट्यूमर दोबारा विकसित न हो जाए?

जवाब-

अनावश्यक तनाव न पालें औटर अपनी सोच सकारात्मक रखें. अपना ध्यान रखें और डाक्टर द्वारा सुझाई दवाएं उचित समय पर लें और तब तक लेना बंद न करें जब तक डाक्टर न कहे. अगर आप जरूरी सावधानियां बरतेंगी तो दोबारा ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा बहुत कम हो जाएगा.

इस के अलावा जीवनशैली में परिवर्तन लाना जैसे नियमित रूप से ऐक्सरसाइज करना, पोषक और संतुलित भोजन का सेवना करना

और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन, शरीर को अधिक शक्तिशाली और ट्यूमर के विकास के लिए अधिक रिजिस्टैंस बनाता है.

  -डा. मनीष वैश्य

निदेशक, न्यूरो सर्जरी विभाग, मैक्स सुपर स्पैश्यलिटी हौस्पिटल, वैशाली, गाजियाबाद. 

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