सास: यह रिश्ता है कुछ खास

अंकुश की मां अपनी बहू दीपा के व्यवहार से बहुत दुखी रहती थीं. दीपा उन्हें पोते से मिलने नहीं देती थी. पहले अलग घर लिया और अब एक शहर में रहने के बावजूद बच्चे को उन से दूर रखती. अंकुश ने जब मां का पक्ष ले कर बीवी से जिरह की तो उस ने हर महीने एक बार दादी को पोते से मिलने की अनुमति दी. इस के अलावा न कोई फोन पर बातचीत और न गिफ्ट का आदानप्रदान.

अगर सास बिना बताए बच्चे से मिलने आ जाती तो वह मुंह बना लेती. दीपा का यह रवैया अंकुश की मां को बहुत तकलीफ देता. इधर अंकित के मन में भी दादी के लिए प्यार और लगाव कम होता जा रहा था. वह महीने में 1-2 बार भी दादी से मिलने से कतराने लगा था.

समय के साथ अंकुश की मां ने इसी तरह जीना सीख लिया था. मगर एक दिन परिस्थितियां बदल गईं. उस दिन दीपा की तबीयत खराब हो गई थी. मेड भी छुट्टियों पर थी. दीपा ने अपनी बहन को फोन किया तो उस ने ऐग्जाम की वजह से हैल्प के लिए आने को इनकार कर दिया. दीपा की मां के पैरों में भी चोट लगी थी इसलिए वह नहीं आ सकीं.

दीपा ने अंकुश को अपनी समस्या बताई तो अंकुश ने सु  झाव दिया, ‘‘अंकित को मां के पास छोड़ देता हूं ताकि वे उस के खानेपीने का खयाल रख सकें. खुद भी वहीं खा कर तुम्हारे लिए खाना लेता आऊंगा.’’

दीपा को थोड़ी शर्मिंदगी महसूस हुई. उसे लग रहा था कि सास हैल्प करने से मना कर देंगी. मगर अंकुश को विश्वास था कि मां सब संभाल लेंगी. ऐसा ही हुआ. सास ने न सिर्फ अंकित और अंकुश को संभाला बल्कि दोपहर में समय मिलने पर आ कर दीपा का घर भी साफ कर दिया. दीपा को फल काट कर खिलाए और सिर पर प्यार से हाथ फेरती हुई बोलीं, ‘‘तु  झे जब भी जरूरत हो मु  झे याद कर लेना.’’

दीपा की आंखें भर आईं. प्यार से उन का हाथ थामते हुई बोली, ‘‘आप के जैसी प्यारी मां के साथ मैं ने ज्यादती की. आप को अंकित से दूर रखा जबकि आप से ज्यादा प्यार उसे कौन कर सकता है? अपनों के साथ की अहमियत तकलीफ में ही पता चलती है.’’

इस घटना के बाद दीपा बिलकुल बदल गई. उसे सम  झ में आ चुका था कि सास कितने काम की हैं. साथ न रहते हुए भी उन्होंने उसे सहारा दिया था और इसलिए अब दीपा ने अंकित को दादी से मिलने पर लगी रोक हटा ली. वह खुद कोशिश करती कि अंकुश दादी से बातें करे और उन का प्यार महसूस करे. वह सम  झ चुकी थी कि दादी का प्यार हमेशा उस का साथ देगा.

सास की असलियत समझें

अकसर बहुएं सास की अहमियत नहीं सम  झ पातीं और उन्हें घर और बच्चों से दूर करने का प्रयास करने लगती हैं. मगर समय के साथ जब उन्हें अपनी गलतियों का एहसास होता है तो वे अपने किए पर बहुत पछताती हैं.

एक और घटना पर गौर करें

राजदेव ने मु  झे फोन किया और बोला, ‘‘मेरे बेटे राहुल की शादी हो रही है और पता है, सब से अच्छा क्या है?’’

‘‘क्या?’’ मैं ने उत्सुकतावश पूछा.

‘‘लड़की का उस की मां के साथ अच्छा रिश्ता नहीं है.’’

उस का जवाब सुन कर मैं चौंक उठी, ‘‘मगर आप इस के लिए खुश क्यों हैं?’’

‘‘क्योंकि वह लड़की हमारे परिवार का हिस्सा बनना चाहती है. मां से अच्छे रिश्ते न होने का मतलब है वह छुट्टियों में अपनी मां के पास जाने की जिद नहीं करेगी,’’ राजदेव ने हंसते हुए बताया.

मैं सोच में पड़ गई और धीरे से बोली, ‘‘शायद आप सही ही कह रहे हो. लड़की अकसर मायके जाने की जिद करती है ताकि अपना सुखदुख मां के साथ बांट सके. कुछ समय उन की ममताभरी हाथों का खाना खा सके. अकसर मां ही सास से अलग होने की सलाह देती है और मां के भरोसे ही बहुएं अपनी सास की अवहेलना करनी शुरू कर देती हैं क्योंकि परेशानी के समय उन्हें मां का सहारा होता है.

‘‘मेरी बहू ने भी तो ऐसा ही कुछ किया और मु  झे मेरे बेटे और पोते से भी दूर कर दिया. उस ने तो अपनी मां के घर के पास किराए का घर ले लिया और मु  झे मेरे पति के साथ पुश्तैनी घर में अकेला छोड़ दिया. पर जब लड़की का अपनी मां से रिश्ता ही सही नहीं तो वह वहां जाएगी क्यों?’’

‘‘जी हां, हेमाजी, आप के साथ जो हुआ उसे याद कर ही मु  झे इस लड़की के साथ बेटे का रिश्ता जोड़ना अच्छा लग रहा है,’’ राजदेव ने बताया.

जीवन आसान बन जाता है

सच है, जब एक लड़की दुलहन बन कर नए घर में आती है तो उसे अपनी मां का बहुत सहारा होता है. वह मां को हर बात बता कर उन की सलाह लेती रहती है. मगर एक बहू को इस बात का एहसास होना चाहिए कि मां के साथसाथ सास का सपोर्ट भी उसे काफी फायदा पहुंचा सकता है. यदि वह अपनी मां का खयाल रखती है तो अपने पति की मां का सम्मान करना भी उसी का कर्तव्य है.

वैसे भी याद रखें कि शादी के बाद एक लड़की बीवी के साथसाथ एक बहू भी बनती है. ऐसे में पति का प्यार पाने के साथसाथ सास ससुर के साथ भी बहू का रिश्ता अच्छा होना चाहिए. आप सास से   झगड़े कर के पति के साथ सुखी नहीं रह सकतीं. थोड़ा कंप्रोमाइज कर यदि आप सास के साथ भी सही तालमेल बैठाने में कामयाब हो जाती हैं तो फिर आप का जीवन काफी आसान हो जाएगा. सास आप के बहुत काम आती है. भले ही वह घर में साथ न रहती हो फिर भी यदि वह उसी शहर में आसपास है तो आप को बहुत तरह से आराम मिल सकता है. खासकर बच्चे को संभालने और बेहतर व्यक्तित्व देने में में सास बहुत मदद करती हैं.

यूरोपीय देश चेक रिपब्लिक में साल 2007 में बच्चों के बरताव और बड़े होने पर किरदार के बीच रिश्ता तलाशने का रिसर्च हुआ. मनोवैज्ञानिकों ने इस के लिए 12 से 30 महीने के बच्चों पर रिसर्च की. इन्हीं बच्चों को 40 बरस की उम्र में फिर से परखा गया. इन सभी की शख्सियत के बहुत से पहलू सामने आए. जो लोग बचपन में ज्यादा सक्रिय और बोलने वाले थे बड़े होने पर वे आत्मविश्वास से लबरेज पाए गए. यानी बच्चे को बचपन में जैसा माहौल मिलता है उस का बहुत गहरा असर बड़े होने के बाद भी उस के पूरे व्यक्तित्व पर पड़ता है. यही वजह है कि अगर बचपन में बच्चे को एकल परिवार में अकेलेपन से गुजरना पड़े तो बड़े हो कर वह स्वार्थी और अक्खड़ इंसान बनेगा. लेकिन बचपन में दादादादी का प्यार, दुलार और संस्कार मिलें तो वह खुशमिजाज और संतुलित व्यक्तित्व का स्वामी बनेगा.

सास की सलाह मानें

सास आप के साथ हैं तो संभव है कि थोड़ाबहुत आपसी कलह चलता रहे. मगर यदि वे उसी शहर में कुछ दूर रहती हैं तो दूरी आप दोनों के बीच की यह कलह को कम करने में मददगार साबित होगी. मगर इस दूरी की वजह से दादीपोते के बीच दूरी न आने दें. आप का अपनी सास से मेल न जमता हो तो भी इस का खामियाजा बच्चे को न भुगतने दें. बच्चे के जन्म के बाद के कुछ सालों में आप को अपनी सास के सपोर्ट की जरूरत काफी रहती है.

इसलिए सास को कभी बच्चे को ले कर जलीकटी न सुनाएं. वह बच्चे को ले कर कुछ सलाह देती हैं तो उन की बात पर गौर करें और उन की सलाह को अमल में लाएं. आखिर उन्हें बच्चे को पालने का अनुभव आप से ज्यादा है.

सुरक्षा को ले कर निश्चिंतता

आजकल हर दूसरी महिला जौब कर रही है. ऐसे में उसे सुबहसुबह औफिस के लिए निकल जाना होता है और शाम तक लौट कर आना होता है. बच्चा थोड़ा बड़ा है तो उस का आधा समय स्कूल में बीत जाता है पर स्कूल से लौट कर या तो बच्चे को खाली घर में अकेले रहना होता है या किसी मेड के भरोसे समय बिताना होता है. ये दोनों ही औप्शन उतने सुरक्षित नहीं.

यही वजह है कि औफिस में रहते हुए भी महिला का मन घर में बच्चे के पास बना रहता है और वह उस की चिंता में परेशान रहती है. इस से उस के काम पर भी असर पड़ता है. इस के विपरीत यदि बच्चा अपने दादा या दादी के पास रहे तो महिला बेफिक्र अपना काम कर सकती है. दादी के पास बच्चा पूरी तरह सुरक्षित रहता है और उस का मन भी लगा रहता है. दादी थोड़ी पढ़ीलिखी है तो वे उसे खाली समय में पढ़ा भी सकती हैं.

औफिस से जल्दी लौटने की अनिवार्यता नहीं

कामकाजी महिलाओं का आधा ध्यान अपने बच्चों पर ही रहता है. वह औफिस से जल्दी से जल्दी निकल कर अपने बच्चे के पास जाना चाहती हैं क्योंकि उन्हें चिंता लगी रहती है कि वह क्या कर रहा होगा, कुछ खाया होगा या नहीं. मगर यदि उस ने बच्चे को सास के पास छोड़ा है तो फिर उसे जल्दी भागने की टैंशन नहीं रहती. उस के लिए जरूरी काम से कुछ दिनों के लिए बाहर जाना भी संभव हो जाता है.

अगर आप की सास साथ नहीं रहती है तो भी आप बच्चे का उस से प्यार बढ़ा सकती हैं. छोटी छोटी कोशिशों से आप उन्हें एकदूसरे के करीब आने में मदद कर सकती हैं. इस के लिए आप कुछ बातों का खयाल रखें:

द्य हर संडे आप बच्चे की बात वीडियो कौल पर अपनी दादी से कराएं. जब बच्चा दादी से बात कर रहा हो तो जरूरी नहीं कि आप वहां बैठ कर बच्चे को निर्देश देती रहें. आप अपने काम में व्यस्त हो जाएं फिर देखें बच्चा कैसे खुल कर दादी से बातें करता है.

द्य पोतेपोतियों की फरमाइशें पूरी करने में दादी को एक अलग ही आनंद आता है. इस बात की चिंता कतई न करें कि उन के रुपए खर्च होंगे या फिर बुढ़ापे में उन्हें बाजार जाना पडेगा. उलटा ऐसा कर के दादी की तबियत और चंगी हो जाएगी.

अनमोल रिश्तों की डोर को जरा प्यार से संभाले

भारत में तलाक के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है. 10 साल पहले जहां भारत में 1 हजार लोगों में 1 व्यक्ति तलाक लेता था, वहीं अब यह संख्या 1,000 पर 13 से ज्यादा हो गई है. तलाक याचिकाएं पहले से दोगुनी मात्रा में जमा हो रही हैं. खासकर मुंबई, बैंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ जैसे बड़े शहरों में यह ट्रैंड ज्यादा देखने को मिल रहा है. इन शहरों में मात्र 5 सालों में तलाक फाइल करने के मामलों में करीब 3 गुना वृद्धि दर्ज की गई है.

2014 में मुंबई में तलाक के 11,667 केस फाइल किए गए जबकि 2010 में यह संख्या 5,248 थी. इसी तरह 2014 में लखनऊ और दिल्ली में क्रमश: 8,347 और 2000 केस फाइल किए गए जबकि 2010 में यह संख्या क्रमश: 2,388 और 900 थी.

तलाक के मामलों में इस बढ़ोतरी और दंपती के बीच बढ़ते मतभेदों की वजह क्या है? क्यों रिश्ते टिक नहीं पाते? ऐसे क्या कारण हैं जो रिश्तों की जिंदगी छोटी कर देते हैं?

इस संदर्भ में अमेरिका के मनोवैज्ञानिक और मैरिज ऐक्सपर्ट जौन गौटमैन ने 40 सालों के अध्ययन और अनुभवों के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि मुख्य रूप से 4 ऐसे कारक हैं, जिन की वजह से दंपती के बीच संवादहीनता की स्थिति पैदा होने लगती है. इस स्थिति के 6 सालों के अंदर उन का तलाक हो जाता है.

आलोचनात्मक रवैया:

वैसे तो कभी न कभी सभी एकदूसरे की आलोचना करते हैं पर पतिपत्नी के बीच यह आम बात है. समस्या तब पैदा होती है जब आलोचना करने का तरीका इतना बुरा होता है कि चोट सीधे सामने वाले के दिल पर लगती है. किसी भी हाल में एक जना दूसरे को गलत साबित करने के प्रयास में लग जाता है. उस पर इलजामों की बौछार करने लगता है. ऐसे में कई दफा पतिपत्नी एकदूसरे से इतनी दूर चले जाते हैं कि फिर लौटना कठिन हो जाता है.

घृणा:

जब आप के मन में जीवनसाथी के लिए घृणा और तिरस्कार के भाव उभरने लगें तो समझ जाएं कि अब रिश्ता ज्यादा दिन टिकने वाला नहीं. घृणा प्रदर्शन के तहत ताने देना, नकल उतारना, नाम से पुकारना जैसी कितनी ही हरकतें शामिल होती हैं, जो सामने वाले को महत्त्वहीन महसूस कराती हैं. इस तरह का व्यवहार रिश्तों की जड़ों पर चोट करता है.

बचाव करने की आदत:

जीवनसाथी पर इलजाम लगा कर खुद को बचाने का रवैया जल्द ही रिश्तों के अंत की वजह बनता है. पतिपत्नी से अपेक्षा की जाती है कि वे हर स्थिति में एकदूसरे का सहयोग करें. मगर जब वे एकदूसरे के ही विरोध में खड़े होने लगें तो उन का रिश्ता कोई नहीं बचा सकता.

संवादहीनता:

जब व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति उदासीनता की चादर ओढ़ लेता है, संवाद खत्म कर देता है और उस की बातों को नजरअंदाज करने लगता है, तो दोनों के बीच आई यह दीवार रिश्ते में मौजूद रहीसही जिंदगी भी खत्म कर देती है.

कुछ और कारण

 क्वालिटी टाइम: इंस्टिट्यूट फौर सोशल ऐंड इकोनौमिक चेंज, बैंगलुरु द्वारा की गई एक रिसर्च के अनुसार पतिपत्नी के अलगाव का सब से प्रमुख कारण ड्युअल कैरियर कपल (पतिपत्नी दोनों का कामकाजी होना) की लगातार बढ़ती संख्या है. इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि 53% महिलाएं अपने पति से झगड़ती हैं, क्योंकि उन के पति उन के साथ क्वालिटी टाइम नहीं बिताते, वहीं 31.7% पुरुषों को अपनी कामकाजी पत्नियों से शिकायत है कि उन के पास परिवार के लिए समय नहीं है.

सोशल मीडिया: हाल ही में अमेरिका में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि सोशल मीडिया में अधिक समय देने की प्रवृत्ति और तलाक दर में पारस्परिक संबंध है. जितना ज्यादा व्यक्ति सोशल मीडिया में ऐक्टिव होता है, परिवार टूटने का खतरा उतना ही ज्यादा होता है.

इस की मुख्य रूप से 2 वजहें हो सकती हैं. पहली यह कि सोशल मीडिया में लिप्त रहने वाला व्यक्ति पत्नी को कम समय देता है. वह सारा समय नए दोस्त बनाने व लाइक्स और कमैंट्स पाने के चक्कर में लगा रहता है. दूसरी यह कि ऐसे व्यक्ति के ऐक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स होने के चांसेज बढ़ जाते हैं. सोशल मीडिया पर फ्रैंडशिप ऐक्सैप्ट करना और उसे आगे बढ़ाना बहुत आसान होता है.

धर्म का असर रिश्तों पर

सामान्यतया रिश्तों में कभी खटास और कभी मिठास का दौर चलता ही रहता है. मगर इस का मतलब यह नहीं कि आप अपनी गलतियों पर ध्यान न दें और समाधान के लिए पंडेपुजारियों के पास दौड़ें. पंडेपुजारी पतिपत्नी के रिश्ते को 7 जन्मों का बंधन बताते हैं. रिश्तों को बचाने के लिए वे सदा स्त्री को ही शिक्षा देते हैं कि वह दब कर रहे, आवाज न उठाए.

दरअसल, धर्मगुरुओं की तो मंशा ही होती है कि व्यक्ति 7 जन्मों के चक्कर में फंसा रहे और गृहकलेषों से बचने के लिए तरहतरह के धार्मिक अनुष्ठानों व क्रियाकलापों में पानी की तरह पैसा बहाता रहे.

स्त्रियां ज्यादा भावुक होती हैं. जपतप, दानपुण्य में विश्वास करती हैं. इसी का फायदा उठा कर धर्मगुरु उन से ये सब करवाते रहते हैं ताकि उन्हें चढ़ावे का फायदा मिलता रहे.हाल ही में एक परिवार इसलिए बरबाद हो गया क्योंकि गृहक्लेष से बचने के लिए घर की स्त्री ने तांत्रिक का दरवाजा खटखटाया.

गत 25 मई को दिल्ली के पालम इलाके में एक बेटे ने अपनी मां की चाकू घोंप कर बेरहमी से हत्या कर दी. 63 साल की मां यानी प्रेमलता अपने बेटेबहू के साथ रहती थी. हर छोटीबड़ी समस्या के समाधान के लिए वह तांत्रिकों और ज्योतिषियों के पास जाती. घर में आएदिन होने वाले झगड़ों के निबटारे के लिए भी वह तांत्रिक के पास गई और फिर उस के बताए उपायों को घर पर आ कर आजमाने लगी. यह सब देख कर बहू को लगा कि वह जाटूटोना कर रही है अत: उस ने यह बात पति को बताई. फिर इसी बात को ले घर में खूब झगड़ा हुआ और बेटे ने सब्जी काटने वाले चाकू से मां पर हमला कर दिया.

मजबूत बनाएं रिश्ता 

रिश्ते बनाना बहुत सहज है पर उन्हें निभाना कठिन. जौन गौटमैन के मुताबिक रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए कपल्स को इन बातों का खयाल रखना चाहिए:

लव मैप का फंडा: लव मैप मानव मस्तिष्क का वह हिस्सा है जहां व्यक्ति अपने जीवनसाथी से जुड़ी हर तरह की सूचना जैसे उस की परेशानियों, उम्मीदों, सपनों समेत दूसरे महत्त्वपूर्ण तथ्यों व भावनाओं को इकट्ठा रखता है. गौटमैन के मुताबिक दंपती लव मैप का प्रयोग एकदूसरे के प्रति अपनी समझ, लगाव और प्रेम प्रदर्शित करने में कर सकते हैं.

साथ दें सदा: जीवनसाथी के जीवन से जुड़े हर छोटेबड़े मौके पर उस के साथ खड़े रहें. पूरे उत्साह और प्रेम के साथ उस के हर दुखसुख के भागीदार बनें.

महत्त्व स्वीकारें: किसी भी तरह का फैसला लेते वक्त या कोई भी महत्त्वपूर्ण काम करते समय जीवनसाथी को भूलें नहीं. उस की सहमति अवश्य लें.

तनाव करें दूर: पतिपत्नी के बीच तनाव लंबे समय तक कायम नहीं रहना चाहिए, जीवनसाथी आप की किसी बात से आहत है तो मीठे शब्दों का लेप जरूर लगाएं. एकदूसरे के साथ सामंजस्य बनाए रखें. कंप्रोमाइज करना सीखें.

दूरी न दें बढ़ने: कई दफा पतिपत्नी के बीच का विवाद इतना गहरा हो जाता है कि पास आने के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं. साथी स्वयं को अस्वीकृत महसूस करता है. दोनों इस बारे में बात तो करते हैं पर कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकाल पाते. हर वादविवाद के बाद वे और ज्यादा कुंठित महसूस करते हैं.

गौटमैन कहते हैं कि कभी ऐसा मौका न आने दें. पतिपत्नी के बीच विवाद इसलिए बढ़ता है क्योंकि उन की बातचीत में मधुरता, उत्साह और लगाव का अभाव होता है. वे समझौता नहीं करना चाहते. इसी वजह से भावनात्मक रूप से भी एकदूसरे से दूर हो जाते हैं. यह दूरी कितनी भी बढ़ जाए पर एक कपल को यह जरूर पता लगाना चाहिए कि विवाद के मूल में क्या है और उसे कैसे दूर किया जाए.

पार्टनर को अच्छा महसूस कराएं: पतिपत्नी को इस बात का खयाल रखना चाहिए कि उस के जीवनसाथी को क्या पसंद है, वह किस बात से खुश होता है. समयसमय पर जीवनसाथी के साथ बीते खुशनुमा लमहों का जिक्र करें ताकि वही प्यार आप फिर से महसूस कर सकें.

जीवनसाथी का सम्मान करें

 अगर आप अपनी शादी को कामयाब बनाना चाहते हैं, तो आप को अपने जीवनसाथी का सम्मान करना होगा. इस के लिए आप को अपने जीवनसाथी को महसूस कराना होगा कि आप उसे अपने बराबर समझते हैं और उस की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए ही आप कोई निर्णय लेते हैं. आप को अपने जीवनसाथी की गोपनीयता का भी सम्मान करना चाहिए.

आप को अपने पति या पत्नी के प्रति दयालु, प्यार भरा और समझदारी भरा व्यवहार करना चाहिए. यदि आप का कोई एक दिन बुरा बीता हो और जिस की परछाई आप अपनी जिंदगी पर स्पष्ट रूप से देख रहे हों तो आप साथी से माफी मांगने की पहल करें. आप ने उन से शादी की है इसलिए आप उन के साथ कैसा भी बुरा व्यवहार कर सकते हैं, यह सोचने के बजाय, साथी को सम्मान दें.

– शैली माहेश्वरी गुप्ता, मिसेज यूनिवर्सल ऐलिगैंस, 2017

 अच्छे रिश्ते के लिए जरूरी बातें 

सफल रिश्ते के लिए क्या करें जिन से जीवनसाथी के साथ वैवाहिक जीवन सुखद बीते, आइए जानते हैं:

विश्वास: आप अपने जीवनसाथी पर कितना यकीन कर सकते हैं, वह अपनी बातों पर कितना टिका रहता है जैसी बातें रिश्ते का भविष्य तय करती हैं.

ड़ाव: औथर रोनाल्ड ऐडलर 4 तरह के जुड़ाव का जिक्र करते हैं जिस से हम स्वयं को जीवनसाथी के साथ जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. पहला फिजिकल, दूसरा इमोशनल, तीसरा इंटलैक्चुअल और चौथा शेयर्ड ऐक्टीविटीज.

सहजता: रिश्ते में सहजता होनी जरूरी है. आप स्वयं सोचिए कि जब आप पार्टनर के साथ होते हैं तो क्या आप का बैटर सैल्फ बाहर आता है? पार्टनर के साथ रहते हुए आप खुद को सहज महसूस कर पाती हैं? यदि ऐसा है तभी आप का रिश्ता लंबा खिंच सकता है.

सम्मान: जौन गौटमैन ने अपने 20 सालों के अध्ययन के बाद निष्कर्ष निकाला कि तलाक की सब से अहम वजह है एकदूसरे के प्रति सम्मान का अभाव.

एकदूसरे का सम्मान करने के बजाय जब मन में नकारात्मक भाव, आलोचनात्मक रवैया और कटाक्ष करने की प्रवृत्ति पैदा होने लगे तो समझ जाएं कि रिश्ते का अंत नजदीक है. कम्यूनिकेशन स्टडीज में इसे ‘टफ टु ए पर्सन ऐंड सौफ्ट औन द इशु’ कहा जाता है.

बात बढ़ाएं नहीं: झगड़े हर घर में होते हैं, मगर उन्हें लंबा न खिंचने दें. कुछ लोग झगड़े के दौरान पागलों की तरह चीखतेचिल्लाते हैं. ऐसे में जरूरी बातें गौण हो जाती हैं और दंपती बेमतलब की बातों में उलझते चले जाते हैं. भावनात्मक रूप से उन का रिश्ता बिलकुल जड़ हो जाता है.

मन से करीब रहेंगे तभी समस्या का समाधान होगा और आप का रिश्ता पूर्ववत हो जाएगा और आप पूरी तरह साथी को माफ कर पाएंगे.

मुसीबत में साथ: सफल और लंबे रिश्ते के लिए जरूरी है मुसीबत के समय जीवनसाथी के साथ खड़े रहना. उसे अपने कंधों का सहारा देना. आर्थिक चुनौतियां हों या शारीरिक, अच्छे वक्त के साथसाथ बुरे वक्त में भी एकदूसरे के करीब रहना जरूरी है.

आर्थिक फैसलों पर सहमति: एक अध्ययन के मुताबिक वे पतिपत्नी जो सप्ताह में 1 बार आर्थिक फैसलों पर एकदूसरे के प्रति असहमति दिखाते हैं, के बीच तलाक की संभावना 30% तक बढ़ जाती है.

ऐसे बनाएं सुखद जीवन

 पतिपत्नी की खुशी में आपसी संबंध महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. 30% से ज्यादा नई शादियों का तलाक में अंत होने लगा है. ऐसे में कई ऐसे कदम हैं, जो तलाक के जोखिम को कम करने, समस्याओं से बचने और सेहतमंद रिश्ता बनाए रखने के लिए उठाए जा सकते हैं:

– पतिपत्नी के बीच की भावनात्मक विरक्ति की वजह से ब्रेकअप या तलाक होता है. ऐसे में अपने साथी की भावनाओं को अच्छी तरह से समझना, उस के दृष्टिकोण को सुनना और उसे हंसाने की कोशिश करना जरूरी है.

– शोधकर्ताओं ने पाया है कि बातचीत करने का तरीका समर्पण के स्तर, व्यक्तित्व की विशेषताओं या तनावपूर्ण जिंदगी की घटनाओं से ज्यादा महत्त्वपूर्ण है, जिस से यह अनुमान लगाया जाता है कि खुशनुमा विवाहित जोड़े तलाक तक जाएंगे या नहीं. खासतौर पर संचार के नकारात्मक तरीकों जैसेकि क्रोध और अपमान को अलग होने की संभावना बढ़ने से जोड़ा जाता है.

– अपने साथी की भावनाओं, पसंदों और विचारों की प्रशंसा करनी चाहिए. साथी का सम्मान करना चाहिए. उस के द्वारा किए गए छोटेछोटे कामों के लिए भी धन्यवाद कहना न भूलें.

– जीवन में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है जैसेकि कैरियर की चुनौतियां, सेहत के मामले, भविष्य को ले कर चिंताएं आदि. ये समस्याएं अकसर संबंध को प्रभावित करती हैं. इसलिए पतिपत्नी को पारस्परिक समझदारी और परिपक्वता के साथ इन का सामना करना चाहिए.

– डा. मनीत वालिया, मनोचिकित्सक, केडिहैल्थ

दांपत्य की तकरार, बिगाड़े बच्चों के संस्कार

वैवाहिक बंधन प्यार का बंधन बना रहे तो इस रिश्ते से बढि़या कोई और रिश्ता नहीं. परंतु किन्हीं कारणों से दिल में दरार आ जाए तो अकसर वह खाई में परिवर्तित होते भी देखी जाती है. कल तक जो लव बर्ड बने फिरते थे, वे ही बाद में एकदूसरे से नफरत करने लगते हैं और बात हिंसा तक पहुंच जाती है.

अतएव पतिपत्नी को परिवार बनाने से पहले ही आपसी मतभेद सुलझा लेने चाहिए और बाद में भी वैचारिक मतभेदों को बच्चों की गैरमौजूदगी में ही दूर करना उचित है ताकि उन का समुचित विकास हो सके.

छोटीछोटी बातों से झगड़े शुरू होते हैं. फिर खिंचतेखिंचते महाभारत का रूप ले लेते हैं. ज्यादातर झगड़े खानदान को ले कर, कमतर अमीरी के तानों, रिश्तेदारों, अपनों के खिलाफ अपशब्द या गालियों, कमतर शिक्षा व स्तर, कमतर सौंदर्य, बच्चे की पढ़ाई व परवरिश, जासूसी, व्यक्तिगत सामान को छूनेछेड़ने, अपनों की आवभगत आदि को ले कर होते हैं. यानी दंपती में से किसी के भी आत्मसम्मान को चोट पहुंचती है तो झगड़ा शुरू हो जाता है, फिर कारण चाहे जो भी हो.

1. नीचा दिखाना

चाहे पति हो या पत्नी कोई भी दूसरे को आहत कर देता है. नीता बताती है कि उस का पति हिमांशु आएदिन उस के मिडिल क्लास होने को ले कर ताने कसता रहता है. उसे यह बिलकुल बरदाश्त नहीं होता और फिर वह भी उस के बड़े स्तर वाले खानदान की ओछी बातों की लंबी लिस्ट पति को सुना देती है. तब हिमांशु को यह सहन नहीं होता और कहता है कि खबरदार जो मेरे खानदान के बारे में एक भी गलत बात बोली. इस पर नीता कहती है कि बोलूंगी हजार बार बोलूंगी. मुझे कुछ बोलने से पहले अपने गरीबान में झांक लेना चाहिए.

बस इसी बात पर हिमांशु उस के गाल पर चांटा रसीद कर देता है. उस के मातापिता को गालियां भी दे देता. फिर तो नीता भी बिफरी शेरनी सी उठती और उस पर निशाना साध किचन के बरतनों की बारिश शुरू कर देती. 5 साल का उस का बेटा मोनू परदे के पीछे छिप कर सब देखने लगता. इस तरह रोज उस में कई बुरे संस्कार पड़ते जा रहे थे जैसेकि कैसे किसी को नीचा दिखा कर चोट पहुंचाई जा सकती है, कैसे मारापीटा जा सकता है, कैसे सामान फेंक कर भी चोट पहुंचाई जा सकती है, कैसे गालियों से, कैसे चीखते हुए किसी को गुस्सा दिलाया जा सकता है.

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2. बात काटना या अनदेखी करना

बैंककर्मी सुदीप्ता हमेशा एलआईसी एजेंट अपने पति वीरेश की बात काट देती है. पति जो भी कुछ कह रहा हो फौरन कह देती है कि नहीं ऐसा तो नहीं है. कई बार सब के सामने वीरेश अपमान का घूंट पी लेता है. कई बार गुस्सा हो कर हाथ उठा देता है तो वह मायके जा बैठती. बच्चों का स्कूल छूटता है छूटे उसे किसी बात का होश नहीं रहता. अपने ईगो की संतुष्टि एकमात्र उद्देश्य रह जाता है.

गृहिणी छाया के साथ ठीक इस के विपरीत होता है. अपने को अक्लमंद समझने वाला उस का प्रवक्ता पति मनोज सब के सामने उस का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ता. उस के गुणों की अनदेखी करता है. उस की कितनी भी सही बात हो नहीं मानता. उस की हर बात काट देता है. उस के व्यवहार से पक चुकी छाया विद्रोह करती तो मारपीट करता. एक दिन लड़ते हुए मनोज बुरी तरह बाल खींच कर उसे घसीटते हुए किचन तक ले आया. अपने को संभालती हुई छाया दरवाजे की दीवार से टकरा गई और माथे से खून बहने लगा. तभी उस की नजर किचन में रखे चाकू पर पड़ी तो तुरंत उसे उठा कर बोली, ‘‘छोड़ दो वरना चाकू मार दूंगी.’’

‘‘तू मुझ पर चाकू चलाएगी… चला देखूं कितना दम है,’’ कह मनोज ने छाया को लात मारी तो चाकू उस की टांग में घुस गया.

टांग से खून बहता देख छाया घबरा उठी. मम्मीपापा की तेजतेज आवाजें सुन कर अपने कमरे में पढ़ रही उन की बेटी तमन्ना वहां आ गई. पापा की टांग से खून निकलता देख वह तुरंत फर्स्टएड बौक्स उठा लाई. फिर पड़ोसिन रीमा आंटी को बुलाने उन के घर पहुंच गई.

तब रीमा का बेटा तमन्ना को चिढ़ाते हुए बोला, ‘‘तेरे मम्मीपापा कितना लड़ते हैं. रोज तुम्हारे घर से चीखनेचिल्लाने की आवाजें आती रहती हैं. झगड़ा सुलटाने रोज मेरी मम्मी को बुलाने आ जाती है. आज मम्मी घर पर हैं ही नहीं. अब किसे बुलाएगी?’’

तमन्ना रोती हुई अपने घर लौट आई. बच्चों में फैलती बदनामी से उस ने धीरेधीरे उन के साथ पार्क में खेलने जाना छोड़ दिया. उस के व्यक्तित्व का विकास जैसे रुक गया. सदा हंसनेचहकने वाली तमन्ना सब से अलगथलग अपने कमरे में चुपचाप पड़ी रहती.

3. जिद, जोरजबरदस्ती

पतिपत्नी के मन में एकदूसरे की इच्छा का सम्मान होना चाहिए अन्यथा जोरजबरदस्ती, जिद झगड़ा पैदा कर सकती है. फिर झगड़े को तूल पकड़ कर हिंसा का रूप धारण करने में देर नहीं लगती, जिस का खमियाजा बच्चों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि जिद जोरजबरदस्ती उन के संस्कारों में घर कर जाती है और वे प्रत्येक काम में इस के उपयोग द्वारा आसानी से सब कुछ प्राप्त कर लेना चाहते हैं और फिर सफल न होने पर हिंसक भी बन जाते हैं.

4. शक अथवा जासूसी करना

पतिपत्नी में एकदूसरे पर विश्वास बहुत महत्त्व रखता है. बातबात पर संदेह, जासूसी उन में मनमुटाव को बढ़ाती है. वे जबतब बच्चों की उपस्थिति में भी घरेलू हिंसा करने लगते हैं. पतिपत्नी में से किसी एक की बेवफाई भी अकसर दूसरे को घरेलू हिंसक बना देती है. अतएव जरा भी संदेह हो तो परस्पर खुल कर बात करें और बिना हिंसा किए बच्चों का ध्यान रखते हुए सही निर्णय लें.

5. पैसा और प्रौपर्टी

मीनल प्राइवेट कंपनी में अच्छी जौब पर है. सैलरी भी अच्छी है. उस ने पति शैलेश से छिपा कर कई एफडी करा रखी हैं. पति शैलेश की इनकम भी अच्छीखासी है. हाल ही में उस ने एक प्रौपर्टी मीनल के नाम और एक बच्चों के नाम बनाई. अचानक शैलेश के पिता को हार्टअटैक आ गया. तुरंत सर्जरी आवश्यक बताई गई. शैलेश के पास थोड़े पैसे कम पड़ रहे थे. कुछ समय पहले 2 प्रौपर्टीज जो खरीदी थी. शैलेश ने मीनल से सहयोग के लिए कहा तो पहले तो उस ने अनसुनी कर दी. फिर बोली, ‘‘बेटे के नाम से जो शौप ली है उसे बेच क्यों नहीं देते? मेरे इतने खर्चे होते हैं… मेरे पास कहां से होंगे पैसे?’’

‘‘4-5 लाख के लिए 25 लाख की शौप बेच दूं? घर कासारा खर्च मैं ही उठाता हूं. तुम अपना खर्च कहां करती हो?’’

शैलेश पत्नी के दोटूक जवाब पर हैरान था. वह उस की नीयत समझने लगा. उस ने शौप नहीं बेची कहीं से ब्याज पर पैसों का बंदोबस्त कर लिया, साथ ही मकान भी उस के नाम से हटा कर अपने नाम करने की बात कही तो पत्नी ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई. फिर झगड़ा शुरू हो गया और बात हिंसा तक उतर आई.

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घरेलू हिंसा से बच्चों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है, जिस से वे अकसर मांबाप के इन हथकंडों को अपनाने लगते हैं और बिगड़ैल, असंस्कारी बनते जाते हैं. बड़े हो कर अकसर वे परिवार व समाज के साथ सामंजस्य नहीं बैठा पाते तो अंतर्मुखी, उपद्रवी, गुस्सैल, झगड़ालू प्रवृत्ति के बन जाते हैं और कोई भी गलत कदम उठाने के लिए तैयार हो जाते हैं. तब उन्हें रोक पाना बेहद मुश्किल हो जाता है.

बात बहुत न बिगड़ जाए और तीर कमान से न निकल जाए इस के लिए पतिपत्नी को बहुत सूझबूझ से काम लेते हुए अपने मतभेदों, मसलों को अकेले में बैठ कर आपस में आराम से सुलझा लेना ही श्रेयस्कर है. पतिपत्नी ने सिर्फ विवाह ही नहीं किया, घरपरिवार भी बनाया है, बच्चे पैदा किए हैं, परिवार बढ़ाया है, तो अपने इतने हिंसक आचारविचार पर अंकुश लगाना ही होगा. मातापिता का अपने आचारव्यवहार पर संयम रखना बच्चों वाले घर की पहली शर्त है. उन्हें अपने बच्चों के समुचित विकास, संस्कारी व्यक्तित्व और उन्नत भविष्य के लिए इतना बलिदान तो करना ही होगा.

पुरुष भी दिखाते हैं महिलाओं वाले इन 5 कामों में दिलचस्पी

पुरुष और महिला के स्वभाव का जब आंकलन किया जाता हैं तो दोनों की आदतों में बहुत फर्क नजर आता है. लेकिन कहीं ना कहीं पुरुष उन कामों में दिलचस्पी दिखाते हैं जिनके लिए महिलाओं को जाना जाता है, लेकिन पुरुष इसे मानने से कतराते हैं.

आज हम आपको महिलाओं के वो काम बताने जा रहे हैं जिसमें पुरुष अपनी दिलचस्पी दिखाते हैं और मानने से कतराते हैं. तो आइये जानते हैं इन कामों के बारे में.

शौपिंग के होते हैं क्रेजी

शौपिंग का नाम सुनते ही हर किसी के दिमाग में यह बात आती है कि औरतें शौपिंग के बिना नहीं रह सकती. लेकिन पुरुष भी इस मामले में किसी से कम नहीं होते. उन्हें नए-नए और स्टाइलिश कपड़े पहनना बहुत पसंद होता है. खुद को वे लड़कियों से ज्यादा मेंटेन रखना चाहते हैं.

पार्लर जाना होता है पसंद

लड़के लड़कियों की तरह पार्लर जाना भी बहुत पसंद करते हैं. वह पैडीक्योर,हेड मसाज,फेशियल, हेयर आदि बहुत से ट्रीटमेंट भी लेते हैं.

गौसिप में भी पीछे नहीं पुरुष

वैसे तो गौसिप में औरतों का ही नाम लिया जाता है लेकिन पुरुष इसमें पीछे नहीं होते. जब 2 या 4 दोस्त इकट्ठे हो जाते हैं तो राजनीति से लेकर लव लाइफ तक की गौसिप उनकी बातों का हिस्सा बनती है.

कुकिंग करना

महिलाओं को रसोई की रानी कहा जाता है लेकिन यह बात भी सही है कि बेहतर खाना बनाने में पुरुष ज्यादा बेहतर होते हैं. कुछ लड़कों को अलग-अलग फ्लेवर का खाना बनाना अच्छा लगता है.

इमोशनल भी होते हैं पुरुष

अक्सर बात-बात पर रोना महिलाओं की आदत होती हैं. वहीं, बड़ी से बड़ी परेशानी में भी पुरुष आंसू नहीं बहाते लेकिन वह इमोशनल होते हैं. कुछ बातों में वह खुद पर काबू नहीं रख पाते और किसी अपने के सामने रो पड़ते हैं.

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