बाढ़: बिंदास अनीता ने जब फंसाया अपने सीधेसादे डाक्टर पति अमित को?

लेखिका- नमिता दुबे

अनिता बचपन से मनमौजी, महत्त्वाकांक्षी और बिंदास थी. दोस्तों के साथ घूमना, पार्टी करना और उपहार लेनादेना उसे बहुत पसंद था. बहुतकुछ करना चाहती थी, किंतु वह अपने लक्ष्य पर कभी केंद्रित न हो सकी. बमुश्किल वह एमबीए कर सकी थी, तब उस के मातापिता अच्छे दामाद की खोज मे लग गए.

उस समय अनिता मानसिकतौर पर शादी के लिए तैयार नहीं थी. अपनी लाड़ली की मंशा से अनजान पिता जब सीधेसादे अमित से मिले तो उन्हें मुराद पूरी होती दिखी.

अमित डाक्टर था. वह प्रैक्टिस करने के साथ ही एमएस की तैयारी कर रहा था. अमित के पिता की 7 वर्षों पहले एक दुर्घटना में मौत हो गई थी. अमित का बड़ा भाई अमेरिका मे डाक्टर था, वह विदेशी लड़की से शादी कर वहीं बस गया था. घर में सिर्फ मां थी जो बहुत ही शालीन महिला थी और गांव के घर में रहती थी. इस विश्वास के साथ कि उस घर में उन की लाड़ली सुकून से रह सकती है, उन्होंने अमित से अनिता की शादी तय कर दी. अमित पहले तो शादी के लिए तैयार ही नहीं था किंतु अनीता के पापा में अपने पापा की छवि की अनुभूति ने उसे राजी कर लिया.

डाक्टर अमित को जीवन के थपेड़ों ने बचपन में ही बड़ा बना दिया था. पिता की मृत्यु के बाद मां को संभालते हुए डाक्टरी की पढ़ाई करना आसान न था. अमित आधुनिकता से दूर, अपने काम से काम रखने वाला अंतर्मुखी लड़का था. उस की दुनिया सिर्फ मां तक ही सीमित थी.

शादी के बाद अमित पत्नी अनिता को ले कर भोपाल आ बसा. उस ने अनिता को असीम प्यार और विश्वास से सराबोर कर दिया. अल्हड़ अनिता आधुनिकता के रंग में रंगी अतिमहत्त्वाकांक्षी लड़की थी. वह खुद भी नहीं जानती थी कि वह चाहती क्या है? अनिता अपने पिता के इस निर्णय से कभी खुश नहीं हुई, किंतु परिवार के दबाव में आ कर उसे अमित के साथ शादी के लिए हां कहना पड़ा.

अमित अपनी एमएस की तैयारी में लगे होने से अनिता को ज्यादा समय नहीं दे पा रहा था. वह उस की भावनाओं का सम्मान तो करता था लेकिन वक्त की नज़ाकत को देख उस ने अनिता को समझाया कि, बस, 2 वर्षों की बात है, उस का एमएस पूरा हो जाए, फिर उस के पास समय की कमी नहीं होगी. तब दोनों जीवन का भरपूर आनंद लेंगे.

क्लब, दोस्तों और पार्टियों मे समय बिताने वाली अनिता को अमित के साथ चल रही नीरस ज़िंदगी रास नहीं आ रही थी. अमित का पूरा फोकस पढ़ाई पर था. वह चाहता था अनिता भी आगे पढ़े. उस ने उसे प्रोत्साहित भी किया. उस की हर इच्छा पूरी करता, उस के सारे नखरे उठाता था क्योंकि कहीं न कहीं उसे समय न दे पाने की मजबूरी उसे परेशान करती थी.

अमित की भावनाओं से बेखबर अनिता बहुत मनमौजी होती जा रही थी. वह कई रातें अपनी दोस्तों के साथ होस्टल मे बिताने लगी. उसे पता ही नहीं चला वह कब गलत संगत मे फंस चुकी थी. उस की सहेलियां अमित को ले कर ताने भी मारतीं. अब उसे भी अमित से नफरत होने लगी थी. इस के लिए अब वह अपने मांपिता को जिम्मेदार समझने लगी. जितना अमित उस के प्यार को समेटने की कोशिश करता, उतनी ही उस में नफरत की आग भड़क उठती.

अमित की परीक्षा नजदीक आ गई थी. इधर अनीता का व्यवहार पल में तोला पल में माशा होता. कभी तो वह अमित को मोहब्बत के सुनहरे सब्जबाग दिखाती, कभी सीधे मुंह बात भी न करती.

एक दिन अमित की नाइट ड्यूटी थी. तब अनिता ने अपनी दोस्त सारिका को अपने घर बुला लिया. दोनों ने दिनभर पिक्चर देखी और खूब गपें मारीं. रात में बहुतरात तक लैपटौप पर पिक्चर देखती रहीं. सुबह जब अमित हौस्पिटल से लौटा तब दोनों नींद से उनींदी हो रही थीं.

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नाइट ड्यूटी से लौटा अमित थका हुआ था. अनिता पति अमित को वहीं खीच लाई जहां सारिका सो रही थी. पलभर के लिए तो अमित सकपका गया, फिर संभलते हुए कहा कि तुम आराम करो, मैं बाहर सोफे पर सो जाऊंगा. उसे समझ पाना अमित के लिए मुश्किल हो रहा था.

उस दिन अनिता अपनी पहली वैडिंग एनिवर्सरी की तैयारी में जुटी थी. उस ने अमित के लिए इम्पोर्टेड महंगी घडी और्डर कर दी थी. अमित भी बहुत खुश था और मन ही मन एक रोमांटिक डिनर प्लान कर चुका था. अमित जल्दी से अपना काम निबटा कर हौस्पिटल से निकल गया. हालांकि परीक्षा होने में सिर्फ 10 दिन थे लेकिन आज वह अपना पूरा दिन अनिता को देना चाहता था, इसलिए ही उस ने नाइट ड्यूटी की थी.

लाल शिफौन की साड़ी पर खुली हुईं घुंघराली व लहराती काली जुल्फ़ें अनिता की सुंदरता में चारचांद लगा रही थीं. अमित जैसे ही घर आया, अनिता की बला की खूबसूरती और उसे बेसब्री से अपना इंतज़ार करते देख मंत्रमुग्ध हो गया. घर में हर सामान बहुत सलीके से रखा था. पूरा घर रजनीगंधा की महक से महक रहा था. अमित के आते ही अनिता बांहों का हार डाल उस से लिपट गई, धीरे से कान में फुसफुसाई, ‘आय लव यू अमित. रियली, आय मिस यू अमित. मिस यू वेरी मच माय डियर.’

अमित इस बदलाव से आश्चर्यचकित था, मन ही मन सोच रहा था कहीं गलती से वह दूसरे घर में तो नहीं आ गया. उस ने खुद को चिकोटी काटी. तभी अनीता ने उसे प्यार से धक्का देते हुए कहा, “अब यों ही बुत बने खड़े रहोगे या…?” “ओह, मैं अभी आया फ्रेश हो कर.” अमित को आज पहली बार अनिता के निश्च्छल प्रेम की अनुभूति हुई थी और वह उस में पूरी तरह डूब जाना चाहता था. अनिता ने जल्दी से 2 गिलास शरबत तैयार किया. जब तक अमित फ्रेश हो कर आया तब तक अनिता अपना शरबत ख़त्म कर चुकी थी. अमित के आते ही उस ने अपने हाथों से उसे शरबत पिलाया. फिर दोनों ने मिल कर केक काटा, साथ ही, अपना वीडियो भी बनाया. और फिर गिफ्ट में अनिता ने अमित को सुंदर घड़ी पहना दी. अमित भी कहां मौका चूकने वाला था, उस ने भी हीरे के लौकेट की प्लेटिनम चेन अनिता को पहना दी.

लेकिन, यह क्या… थोड़ी देर बाद ही अमित उलटियां करने लगा. पूरा कमरा उलटी से भर चुका था. फिर वह धीरेधीरे होश खोते फर्श पर गिर पड़ा. कुछ देर बाद खुद को जख्मी कर, अनिता पड़ोस में रहने वाली आंटी को बता रही थी कि आज अमित नशा कर के आया और देखो आंटी, उस ने मुझे मारा भी!

“अरे, ऐसा तो पहले कभी नहीं हुआ. कहां है वो? मैं उस से जा कर बात करती हूं, कहती हुई आंटी उठ खड़ी हुईं.

“अरे नहीं आंटी, वह तो उलटियां कर के औंधा पड़ा है,” कहती हुई अनिता ने आंटी को रोक दिया.

अमित की ऐसी बदसलूकी पर कोई यकीन नहीं कर रहा था. थोड़ी देर बाद अमित को अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज़ के दौरान पता चला कि यह ज्यादा मात्रा में नींद की गोली का परिणाम है.

अनिता का एक नया रूप सामने आ चुका था. अमित की सज्जनता से सभी परिचित थे, इसलिए अनिता द्वारा लगाए आरोपों को किसी ने भी सच नहीं माना, यहां तक कि अनिता के मांबाप ने भी अमित की खूबियां बताते हुए अनिता को समझाने का असफल प्रयास किया.

बौखलाई अनिता की नफ़रत अब अपने चरम पर थी. अमित कुछ समझ पाता, इस से पहले ही अनिता ने अमित के विरुद्ध मोरचा तान दिया. थाने में घरेलू हिंसा, प्रताड़ना, दहेज़ के केस दायर हो चुके थे. पढ़ाई छोड़ अमित कोर्ट और थाने के चक्करों में उलझ कर रह गया. 10 दिनों बाद होने वाली परिक्षा को पास करने में उसे 2 वर्ष लग गए.

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3 वर्षों बाद 15 लाख रुपए दे कर आपसी सुलह से जैसेतैसे केस निबटा कर अमित जब घर आया तो मां की सूनीनिरीह आंखों से अश्रुधारा बह निकली. आखिर क्या दोष था अमित का? अमित तो जैसा कल था वैसा ही आज भी है, फिर यदि अनिता को अमित उस के ख्वाबों का राजकुमार नहीं लगा था तो अनिता शादी के लिए तैयार ही क्यों हुई? क्या अनिता की महत्त्वाकांक्षा से उस के मांबाप परिचित न थे? आज अमित की मां भी इसी निष्कर्ष पर थी कि लड़की की इच्छाओं को, उस की महत्त्वाकांक्षाओं को समझना चाहिए. कहीं ऐसा न हो कि मांबाप योग्य लड़का देख, अपनी बेटी की शादी कर, अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ लें और उधर लड़की की उछलती महत्त्वाकांक्षाओं की लहरें बाढ़ बन कर, न जाने कितनों को हताहत कर जाएं.

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