नथ: क्या हो पाई मुन्नी की शादी

उस दिन बैंक से नोटिस आया कि बैंक की शाखा का स्थानांतरण हो रहा है. जिन ग्राहकों के लौकर हैं वे उसे खाली कर दें. सो पतिदेव लौकर से सारा सामान उठा कर घर ले आए. जैसे वेतनयाफ्ता, पेंशनप्राप्ता 60-70 वर्षीय बूढ़े के लौकर में कुछ फिक्स डिपौजिट के कागज तथा 2 बेटियों के विवाह उपरांत कुछ बचेखुचे गहनों के नाम पर टूटे कंगन, कान का एक बुंदा या फिर चांदी के सिक्के, इतना ही पड़ा था. उन दिनों, टिन के बने टौफी के डब्बे आया करते थे और वे बड़े उपयोगी सिद्ध होते थे, हमारे पिताजी तथा जेठ आदि सब की शेविंग का सामान उन्हीं डब्बों में सदियों रखा जाता रहा है, आज भी जंग लगे उन डब्बों से बिछुड़ना उन्हें पीड़ा पहुंचा जाता है, और उन्हीं डब्बों में सुरक्षित रखे जाते थे गहनेजेवर. वैसा ही डब्बा, जिस में सफेद रुई, जो अब पीली पड़ गई थी और लाल पतंगी कागज (फटा हुआ), ‘गुदड़ी में लाल’ मुहावरे को चरितार्थ करता हुआ, घर लाया गया तो हम ने अपनी जायदाद के मनोहारी दर्शन किए. एक गले की हंसली, जिस में सोना कम पीतल ज्यादा थी, सुनार ने बेईमानी की थी, कान के 2 झुमके अलगअलग भांति के, एकआध चूड़ी, दोचार अजीबोगरीब दिखने वाली अंगूठियां और अचानक दिखी 9 नगीनों जडि़त नाक की समूची नथ.

‘‘अरे, यह तो वही नथ है जोे रश्मि भाभी ने मेरी शादी पर पहनी थी,’’ अपनी हथेली पर उस को बड़े दुलार से लिटाया, उस का सौंदर्य निहारा. अनुपम रूपमति नथ. उस डब्बे की एकमात्र शोभा. अचानक यादों की बरात हमारी अपनी बरात के साथ, बैंडबाजे के साथ, मानस पर उमड़ पड़ी. याद आया वह दिन जब हमें दुलहन बनाया जा रहा था, नातेरिश्तेदारों से घर भरा था. दादीजी तो रही नहीं थीं, सो घर की सब से बड़ी या यों कहिए चौधराहट छांटने वाली बड़ी ताईजी, पुरखों के गांव से स्पैशली बुलाई गई थीं क्योंकि उन की सब से छोटी देवरानी यानी कि हमारी अम्मा को तो शादीब्याह करने की अक्ल नहीं थी. 7 बच्चों को जन्म देने वाली, उन्हें उच्चतम शिक्षा से पारंगत करने की क्षमता तो अम्मा कर सकती थीं किंतु शादीब्याह में ऊंचनीच का उन्हें क्या ज्ञान धरा था भला? रस्मों की भरमार, दिनभर में पच्चीसों रस्में, उन रस्मों में तो जैसे ताईजी ने पीएचडी कर रखी थी और मजाल कि उन की बात कोई टाल दे. अच्छेभले शिक्षित पिताजी, जो भौतिक शास्त्र के प्रोफैसर थे, न कोई देवीदेवता को मानते थे न किसी प्रपंच में पड़ते थे किंतु उस समय बेटी के ब्याह पर जैसा ताईजी ने कहा उन्होंने भी वैसा ही किया, शायद शिष्टतावश. लेकिन 21 वर्षीय, अंगरेजी में एमए पास मौडर्न कन्या को ताईजी की कोई बात फूटी आंख नहीं सुहाती थी.

गौर पूजा के समय ताईजी ने हुक्म दिया, ‘सिर धो कर नहाओ और सीधा बिना किसी को छुए, आंगन में बनी वेदी के पटरे पर बैठ जाओ.’ कन्या यानी मैं ने विद्रोह किया, शोर मचाया, ‘कल ही सिर धोया था.’  परंतु ताईजी ने एक नहीं सुनी, अम्मा सिर पर पल्ला रखे मुझे घूर रही थीं, मानो कह रही हों – मेरी इज्जत का फालूदा मत बना. झक मार कर मुझे दोबारा सिर धोना पड़ा और सफेद तौलिया बालों में लपेट कर आज्ञाकारी पुत्री का सा रोल अदा करने आंगन में बिछे पटरे पर बैठने का उपक्रम करने लगी. अभी आधी ही बैठी थी कि ताईजी ने झपट कर मेरे सिर पर बंधा तौलिया खींच कर खोल दिया, ‘अरे, घोर अपशुगन, सिर पर सफेद कपड़ा बांध कर क्यों बैठ गई?’ काटो तो खून नहीं, क्रोध से भुनभुनाती हुई कन्या वेदी से उठ खड़ी हुई,  ‘नहीं करनी मुझे ऐसी शादी, यह भी कोई तरीका है, कोई मैनर्स नहीं है? एक हजार टोनेटोटके लगा रखे हैं, तंग कर दिया.’

रिश्तेदारों में फुसफुसाहट शुरू हो गई, ‘हाय कैसी बेहया लड़की है,’  चाची, बूआ, पड़ोसिनों में यह ‘बे्रकिंग न्यूज’ की भांति करंट सी दौड़ गई. बड़ी मुश्किल से मौसी ने समझाबुझा कर गौरी पूजा की रस्म करवाई, सिर के गीले बालों पर गुलाबी दुपट्टा डाल कर. ऐसा लग रहा था जैसे सफेद तौलिया बांधने मात्र से मैं विधवा हो जाऊंगी. रीतिरिवाज, विवाहित जीवन में मंगल लाने वाली ‘इंश्योरैंस कंपनियों’ जैसी हैं कि प्रीमियम नहीं भरा तो विवाह टूट जाएगा. 33 करोड़ देवीदेवताओं को मनाना क्या इतना सरल होता है? कभी चंद्रमा को प्रसन्न किया जाता, कभी पुरखों को, कभी दीवार पर थापे, कभी गेहूं, हल्दी, चावल की शामत आती, शुभअशुभ नेग. पता नहीं कौन सी किताबों में ये सब लिखा था. और ताईजी को इतना याद कैसे रहता था? गांव से ताईजी बड़ेबडे पतीले, कड़ाही, ढेरों बरतनों के साथ रिकशा पर लद कर आई थीं.

मिसरानीजी, जिन का काम रसोई में चूल्हा मैनेज करना था और दूसरा उन का परमप्रिय काम था जब कोई शगुन का समय आया वे बेसुरी ढोलक बजाने बैठ जातीं. वे अपनी सफेद किनारी वाली धोती का पल्ला मुंह में दबा कर इतना बेसुरा गातीं कि उपस्थित श्रोता हंसी नहीं दबा पाते  मिसरानीजी से मजा लेने के लिए लड़केलड़कियां मनोरंजन करने की खातिर उन से फरमाइश करते. ‘मिसरानीजी, वह वाला गीत गाना.’ ले दे कर उन्हें एक ही तो ‘बन्नी’ आती थी और वे बड़ी खुश हो कर राग अलापने लगतीं. ‘पटरे पे बैठी लाड़ो भजन करे…’ और सब का हंसहंस कर बुरा हाल हो जाता. आखिर ‘लाड़ो’ अपनी शादी पर भजन क्यों कर रही होगी? कोई सोचे क्या संन्यास लेने जा रही थी? आखिर बरात आने का समय हुआ. दुलहन का इंस्पैक्शन करने ताईजी तथा पूरा प्रपंची स्त्री समाज नख से शिख तक बारीकी से जांच करने कमरे में आया. बड़े यत्न से मेरी प्रिय सखी ने मेरा शृंगार किया था. उस ने कहीं कोई कसर नहीं छोड़ी थी किंतु उसे क्या पता कि कमी किस कोने से टपक पड़ेगी.

देखते ही ताईजी गरजीं, ‘नथ कहां है? नाक सूनी क्यों है? मामा के यहां से नथ आनी चाहिए थी?’ अब तो मानो कोहराम मच गया, एक बार फिर खुसुरफुसुर होने लगी, ‘हाय, नथ नहीं आई भात में?’ अम्मा के पीहर वालों को नीचा दिखाने का इस से बढि़या मौका और क्या हो सकता था. बेचारी अम्मा का चेहरा फक पड़ गया. अपनी सास को संकट में देख कर, रश्मि भाभी भाग कर अपनी नथ ले आईं और दुलहन को यानी मुझे पहना दी. सब ने राहत की सांस ली. उधर बैंडबाजे की आवाज कानों में पड़ते ही सब के सब बरात देखने भाग खड़े हुए. जैसेतैसे ब्याह पूर्ण हुआ और विदाई के गमगीन वातावरण के चलते जिसे देखो वही टसुए बहा रहा था. हमारे यहां लोगों को झूठमूठ का रोना खूब आता है. क्षणभर में रोने लगते हैं, क्षणभर में हंसने. विदा होती कन्या ने भी कुछ आंसू ताईजी के डर के मारे अपने नेत्रों से टपकाए. सोचा, रोना तो पड़ेगा वरना ताईजी कहेंगी, कैसी बेशर्म है. विदाई की तमाम रस्में खत्म हो चुकीं और मेरे पैर घर की दहलीज पार करने ही वाले थे कि एक क्षीण सी आवाज में किसी ने टोका, ‘रश्मि की नाक की नथ तो निकाल लो.’ यह सुनते ही ताईजी एकदम मैदानेजंग में आ खड़ी हुईं और बोलीं, ‘इस नथ में मुन्नी की भांवर पड़ गई है, अब यह इस की नाक से नहीं उतारी जा सकती.’

किस में इतना दमखम था कि हिटलरी ताईजी की अवज्ञा कर सकता. सो, मुन्नी यानी मेरी विदाई उसी नथ में हो गई. आज नथ को देखते ही मुन्नी को पूरी दास्तान-ए-नथ याद हो आई. व्यंग्य करते हुए मैं ने पति से कहा, ‘‘वाह रे ताईजी, वाह, आप का तर्क. इसी नथ में तो रश्मि भाभी के भी फेरे हुए होंगे, तब उसे पहनाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं हुई?’’ पति उवाच, ‘‘होती भी क्यों? रश्मि भाभी तो बहू ठहरीं. बहू का जेवर बेटी को पहनाने में उन्हें क्यों और कैसे एतराज होता?’’ मुझे अपने पर क्रोध आया. क्या मैं भी इन दकियानूसी अंधविश्वासों से ग्रसित थी? मैं ने तब क्यों विरोध नहीं किया था और अब तक क्यों नहीं नथ वापस की? ढेरों प्रश्न मुझे विचलित करने लगे. मेरे विवाह को आज 47 वर्ष हो गए हैं, आज उस नथ का खयाल आया? आज मैं चेती हूं? अपने को धिक्कारते हुए मैं ने निश्चय किया कि अगली बार जब भी रश्मि भाभी से मिलूंगी तो उन की नथ उन्हें लौटा दूंगी. कथा का समापन पतिदेव ने यों कह कर किया कि पिछले 47 वर्षों से रश्मि भाभी का और तुम्हारा, ‘सुहाग’ बैंक के घटाटोप छोटे से लौकर में बंद पड़ा रहा.

ये भी पढ़ें- ऊंची उड़ान: स्नेहा को क्या पता चली दुनिया की सच्चाई

दुल्हन की ज्वैलरी का सबसे खास हिस्सा है नाक की नथ

शादी का दिन वो दिन है जिस दिन हर लड़की दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की लगना चाहती है. इसलिए वो इस दिन सिर से पांव तक अपने ड्रेसअप को शानदार करना चाहती है. वेडिंग कलेक्शन में भी समय के साथ फैशन और ट्रेंड बदलते रहते हैं.

लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं जिन्हें पहनने की परंपरा कभी नहीं बदलती. चाहे सिर पर लगने वाली बिंदी हो, सोने का सेट हो या माथे का टीका. ये चीजें पहनने की परंपरा कभी खत्म नहीं होगी, चाहे ट्रेंड कितना ही बदले.

इसी तरह एक और चीज है जो हमेशा से दुल्हन के परिधान का हिस्सा रही है, वो है खूबसूरत नथ, जो कि एक रायल लुक देती है. नाक में पहने जाने वाली इस नथ के बिना दुल्हन का श्रृंगार अधूरा है. बदलते ट्रेंड के साथ, नथ का डिजाइन भी बदल गया है.

हम आपको बताते हैं शानदार नथ डिजाइन्स, जो शादी के दिन दुल्हन की खूबसूरती में चार चांद लगा देंगी.

बंगाली स्‍टाइल नथ

bangali

अगर आप बंगाली हैं या बंगाली लुक पाना चाहती हैं तो हल्‍के क्राफ्टवर्क वाले और चैन से जुड़ी हुई नथ आप पर बहुत जंचेगी.

ये भी पढ़ें- सिंपल गर्ल्स पर खूब जचेंगे ‘ये रिश्ते हैं प्यार के’ की ‘मिश्टी’ के ये ड्रेसेस

रिंग वाली नथ

ring

अगर आप बहुत सिम्‍पल सी नथ पहनना चाहती हैं तो रिंग वाली नथ ट्राई कर सकती हैं.

टेसल (लटकन) नथ

tesal

यदि आप लेटेस्ट ट्रेंड अपनाना चाहती हैं, तो यह नथ खास आपके लिए है. इसके बेस पर लटकन होती है, साथ ही इसके टौप पर बेहतर सी डिजाइन होती है जिस पर पक्षी की कारीगरी व जड़ाई होती है. प्लेन स्ट्रिंग पर छोटे मनके इसे और भी खूबसूरत बनाते हैं और इसे ट्रेंडी बनाते हैं.

जड़ाऊ नथ

jadau

राजस्थानी और मारवाड़ी दुल्हनों में इस नथ को पहनने का रिवाज है. जड़ी हुई नथ शादी के दिन बेहद खास लुक देती है. आप इसे जड़ाऊ लंहगे के साथ पहन सकती हैं.

मल्‍टीपल चेन वाली नथ

chain

ऐसी नथ खासकर साउथ इंडियन कल्चर में ज्यादा देखी जा सकती है. लेकिन अगर आप ज्वेलरी डिजाइन के साथ एक्सपेरिमेंट करना चाहती हैं तो तीन चेन वाली नथ को पहनकर देखिए यह आपके चेहरे का लुक ही बदल देगी. इसके साथ हेवी मांगटीका भी बहुत अच्‍छा लगता है.

ये भी पढ़ें- Birthday Special: शादी के बाद इतनी बदल गई हैं साउथ की ये एक्ट्रेस, बौलीवुड में कर चुकी हैं डेब्यू

आइडियल बीड्स लुक नथ

nath

परंपरागत तरीके से लगाए गए लाल और सफेद मनके इस नथ को ग्लैमर प्रदान करते हैं. थोड़ी भारी होने के कारण, इसे सफेद और लाल के मिश्रण को ध्यान में रखकर बनाया जाता है. इन मोतियों पर किनारे निकले होते हैं लेकिन कुन्दन की बारीकी इसे एथनिक टच देती है.

ब्रांज नथ

nath

राजस्‍थान का ही एक और लुक है इस नथ का ये खास डिजाइन. इसे प्योर गोल्‍ड से बनाया जाता है जो हल्‍का सा डल लुक देता है.

हूप नथ

nath

बड़ी सी नथ पहनने से अच्‍छा है कि आप छोटी सी ही नोज रिंग पहनें. यह पहनने और कैरी करने में आसान रहती है.

दुल्हन की खूबसूरती पर चार-चांद लगाएंगे ये नथ के डिजाइन

शादी वो मौका होता है जब एक दुल्हन सबसे खूबसूरत दिखना चाहती है. इसके लिए होने वाली दुल्हन अपनी शादी की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती. उसके लहंगे से लेकर मेकअप और जूलरी कैसी होगी इसकी तैयारी वो महीनों पहले ही करना शुरू कर देती है. करे भी क्यों न ! ये पल ज़िन्दगी में सिर्फ एक बार ही आता है. दुल्हन के आउटफिट और मेकअप के अलावा जूलरी ही है जो उसकी खूबसूरती को बढ़ाती है और इसमें चार- चांद लगाती है दुल्हन की नथ. आप मानें- या न मानें मगर एक नथ से दुल्हन का पूरा लुक ही बदल जाता है. इसके लिए आपको ये पता होना ज़रूरी है कि आपके फेस पर छोटी या बड़ी किस तरह की नथ ज्यादा सुन्दर लगेगी.

नथ आपके पूरे लुक को बना भी सकती है और बिगाड़ भी सकती है. जूलरी चाहे कैसी भी हो, नथ की डिजाइन दुल्हन की खूबसूरती को चार- गुना बढ़ा देती है. ऐसे में अगर नथ मोतियों सी सुन्दर हो तो फिर क्या कहने.

कौन कहता है कि लाल जोड़े पर सिल्वर नथ नहीं अच्छी लगेगी. 

दुल्हन की सिल्वर नथ देखेंगे तो आपको भी यकीन हो जायेगा कि शादी के दिन पहनने के लिए सिल्वर जूलरी भी बुरी नहीं होती.

ये भी पढ़ें- डस्की स्किन के लिए ट्राय करें ये फैशन टिप्स

अपनी शादी में महारानियों सी दिखना चाहती हैं तो सिल्वर नथ आपके लिए परफेक्ट रहेगी. इसका लाइट वेट न सिर्फ आपको आराम देगा बल्कि खूबसूरत भी लगेगा.

कुंदन है बेस्ट

कुंदन की चमक दुल्हन की खूबसूरती को बढ़ा देती है. ऐसे में अगर आप कुंदन की जूलरी नहीं ले पायी हैं तो निराश होने की ज़रूरत बिलकुल भी नहीं हैं. जूलरी चाहे जैसी भी हो उसपर आप सिर्फ कुंदन की नथ पहन कर ही अपने लुक को कम्पलीट कर सकती हैं.

अगर आप एक राजस्थानी दुल्हन हैं या फिर आप अपने लुक में राजस्थानी अंदाज़ चाहती हैं तो राजस्थानी लुक  की नथ आपके लिए परफेक्ट रहेगी.

ये है ट्रेंडी

अगर आपको बड़ी नथ का शौक नहीं है तो इस तरह की छोटी सी नथ भी आप ले सकती हैं. इसमें लगी छोटी- छोटी मोतियों वाली दोनों लड़ें इसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बढ़ा रही हैं.

ये भी पढ़ें- 59 की उम्र में भी इतनी बोल्ड हैं आयुष्मान की ‘मम्मी’

हैवी जूलरी पहनने का शौक रखती हैं तो आपकी नथ भी जूलरी को मैच करती हुई होनी चाहिए. नथ की डिजाइन हैवी हो गर दिखने में उतनी ही रौयल भी .

 

View this post on Instagram

 

#jewellerygoals #jewellery #bridalshower #nosering #nathdesigns #bridaljewellerydesigns

A post shared by womenswear (@best_of_fashion11) on


गोल्ड लहंगे पर सिल्वर जूलरी भी एक यूनीक स्टाइल है. ऐसे में अगर दुल्हन की नथ में पंख फैलाए मोर का डिजाइन बना हो, तो बाकी जूलरी पर किसकी नजर जाएगी… है ना ये नथ दिखने में काफी स्टाइलिश.

 

DIWALI 2019: फेस्टिवल के लिए परफेक्ट हैं ये ज्वैलरी डिजाइन

1. नथ का अनोखा डिजाइन

नथ पहनना सभी लड़कियों को बेहद पसंद होता है. शादी-विवाह में महिलाएं नथ पहने जरूर नजर आती हैं. दुल्हन का तो नथ के बिना शृंगार ही अधूरा लगता है. यदि आप अपने या किसी खास के लिए नथ खरीदने का सोच रहीं हैं तो इस लेटैस्ट डिजाइन के नथों से मदद ले सकती हैं. मोर नथ- मोर के डिजाइन का बना यह नथ दुल्हन के लिए बिलकुल पर्फेक्ट है. अगर आप दुल्हन के लिए ज्वैलरी खरीदने का सोच रही हैं तो यह नथ अपने ज्वैलरी में जरूर शामिल करें. इसमें कई सारे डिजाइन आपको देखने को मिल जाएंगे, जैसे मीनाकारी मोर नथ, सिंगल, मयूर नथ. जितना खूबसूरत यह दिखने में लगता है इसको पहनने के बाद आपकी खूबसूरती उतनी ही बढ़ जाती है.

2. सिंपल फ्लोरल नथ

अधिकतर लड़कियों को सिंपल नथ ज्यादा पसंद आता हैं. लेकिन बिलकुल नथ इतना अच्छा नहीं लगता अगर उस पर कोई सिंगल फूल बना हुआ तो वह ज्यादा एट्रेक्टिव लगता है.

ये भी पढ़ें- DIWALI 2019: फेस्टिवल में ट्राय करें ये ट्रेंडी झुमके

3. मीनाकारी नथ

मीनाकारी नथ काफी समय से चलता आ रहा है और इसका फैशन अभी भी बरकरार है. यदि आप मीनाकारी नथ में डिजाइन ढूंढ़ रही हैं तो यह डिजाइन जरूर देखें.मीनाकारी में मयूर डिजाइन नथ भी बेहद खूबसूरत लगता हैं. मीनाकारी में आप अपनी पसंद का भी डिजाइन दिखा कर उस पर मीना करवा सकती हैं.

4. सिंगल नथ

आज कल सिंगल नथ भी फैशन में हैं. इसमें अलग से चैन नहीं लगी होती. महिलाओं व लड़कियों दोनों पर ही बेहद खूबसूरत लगता हैं.

5. ट्रैंडी नेकलेस डिजाइन

हर साल ज्वैलरी के ट्रैंड में तो बदलाव आता ही रहता है, लेकिन हर बार अपने लिए कुछ नया लें, यह भी संभव नहीं है. इसलिए ऐसी ज्वेलरी खरीदें, जो न सिर्फ आपकी खूबसूरती को बढ़ाए, बल्कि आप उसे ज्यादा-से-ज्यादा मौके पर पहन भी सकें. यानी ज्वेलरी की ऐसी डिजाइन चुनें, जो हमेशा फैशन में बनी रहे. बात अगर नेकलेस की करे तो इसके पेटर्न में ज्यादा बदलाव देखनों को नहीं मिलता. लेकिन अपने नेकलेस खरीदने का मन बना लिया है तो इन ट्रैंडी डिज़ाइन्स को जरूर देखें.

6. चोकर

चोकर आजकल फैशन में छाया हुआ है. गले से चिपके होने के साथ ये आपकी खूबसूरती को निखारते भी हैं. अलग-अलग रंग में मिलने वाले चोकर में बीड्स, क्रिस्टल, कुंदन की खूबसूरती भी देखने लायक है.चोकर में कई वैरायटीज देखने को मिल जाएंगी. सेमी-प्रेशियस स्टोन वाला चोकर, मीना डिजाइन चोकर, कुन्दन डिजाइन चोकर. इसमें मल्टी लेयर डिजाइन भी बहुत अनोखा लगता है.

7. फ्लोरल नेकलेस

यह डिजाइन ज्वैलरी में सदाबहार है. इसका डिजाइन फूलों का होता है,जिसे पहनने के बाद गले की खूबसूरती तो बढ़ती ही हैं साथ ही चेहरे की खूबसूरती पर भी चार चंद लग जाता है.

ये भी पढ़ें- DIWALI 2019: सिल्क की साड़ियों की इन खूबियों को जानकर हैरान रह जाएंगे आप

8. पाजेब नेकलेस

सिंपल के साथ जब एलीगेंट दिखना हो तो पाजेब नेकलेस से बेहतर कोई ऑप्शन हो ही नहीं सकता. इसका डिजाइन बहुत सिंपल और स्टाइलिश होता है. पाजेब की तरह पतली चैन जब गले में सजेगी तो खूबसूरती निखर कर आएगी. इसके अलावे कई और नेकलेस फैशन में हैं, जैसे पर्ल नेकलेस जो ज़्यादातर दुल्हन पहनती हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें