मोतीचूर चकनाचूर फिल्म रिव्यू: लीड एक्टर्स की जानदार एक्टिंग

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः राजेश भाटिया,किरण भाटिया और वायकौम 18

निर्देशकः देबामित्रा बिस्वास  

कलाकारः नवाजुद्दीन सिद्दिकी, आथिया शेट्टी,नवनी परिहार,विभा छिब्बर.

अवधिः दो घंटे 15 मिनट

दहेज कुप्रथा के साथ  वर्तमान पीढ़ी की लड़कियों की विदेशी दूल्हों संग शादी करने की बढ़ती महत्वाकांक्षा पर कटाक्ष करने के साथ साथ छोटे शहरों में रहने वाली कुंठाओं को हास्य व्यंग के साथ फिल्मकार देबामित्रा विस्वास ने फिल्म ‘‘मोतीचूर चकनाचूर’’में पेश करने का प्रयास किया है.मगर फिल्म कई जगह बहुत ढीली होकर रह गयी है.

कहानीः

यह कहानी है बुंदेलखंड इलाके के निवासी परिवारों की, जो कि भोपाल में बसे हुए हैं. अवस्थी परिवार की बेटी एनी उर्फ अनीता (आथिया शेट्टी) से उसके माता इंदू (नवनी परिहार) व पिता बहुत परेशान हैं. एनी के सिर पर शादी करके विदेश में बसने का भूत सवार है. उसे ऐसे युवक से शादी करना है, जो कि लंदन, अमरीका या सिंगापुर सहित किसी देश में रह रहा हो. वह सोशल मीडिया पर अपने पति के साथ विदेशी धरती पर खींची गयी सेल्फी पोस्ट करना चाहती हैं. इसी के चलते ऐनी अब तक दस लड़कों को ठुकरा चुकी है.लंदन में रहने वाले लड़के के परिवार वालों को अपमानित करके भगा देती है, क्योंकि वह लड़का शादी के बाद पत्नी को अपने साथ लंदन नहीं ले जाएगा. तो वहीं अवस्थी परिवार के पड़ोस में त्यागी परिवार रहता है. जिसकी बड़ी बेटी हेमा से ऐनी की अच्छी दोस्ती है. दोनों परिवारों के बीच काफी आना जाना है. इस परिवार में दो बेटे व एक बेटी हैं. परिवार का बड़ा लड़का पुशपिंदर त्यागी (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) दुबई में नौकरी करता है. 36 साल की उम हो गयी, पर अब तक उसकी शादी नहीं हुई.पुशपिंदर की मां(विभा छिब्बर) को बेटे की शादी में दहेज 25 से तीस लाख रूप चाहिए. क्योंकि उनका बेटा दुबई मंे नौकरी करता है.बेटे की शादी मंे जो कुछ मिलेगा,वह सब वह बेटी हेमा की शादी में देना चाहती हैं. एक अति मोटी लड़की के साथ पुशंपिंदर शादी करने के लिए तैयार हो जाते हैं. क्योंकि अब उम्र के इस पड़ाव पर लड़की को लेकर उनकी कोई पसंद नहीं है.पर सगाई के बाद जैसे ही पुशपिंदर की मां दहेज की रकम बताती हैं, शादी टूट जाती है. इससे पुशंपिंदर बहुत दुःखी हो जाते हैं.

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उधर पुशपिंदर को देखकर ऐनी की मौसी (करूणा पांडे) उसे समझाती है कि पुशंपिंदर में एक अच्छा चरित्रवान व दुबई मे रहने वाला लड़का है. दुबई भी विदेश ही है. उसके बाद ऐनी बिना अपने माता पिता को बताए, पुशंपिंदर के सामने प्रेम का इजहार कर चुपचाप मंदिर में शादी कर लेती है,जिससे पुशपिंदर की मां विघ्न न डाल पाए.घर पहुंचने पर दोनों परिवार हक्के बक्के रह जाते हैं. बहरहाल, किसी तरह वह मान जाते हैं. पर समाज की नजरों में दोनो की पुनः रीतिरिवाज के साथ शादी होती है. मगर सुहागरात से पहले ही त्यागी परिवार के साथ ऐनी को भी पता चल जाता है कि पुशंपिंदर की दुबई की नौकरी छूट गयी है और उसे अब भोपाल में ही नौकरी मिल गयी है. फिर कई घटनाक्रम तेजी से बदलते हैं. अंततः पुशपिंदर की मां और ऐनी को भी बहुत कुछ समझ में आ जाता है.

लेखन व निर्देशनः

कथानक के स्तर पर नवीनता न होते हुए भी फिल्म की प्रस्तुतिकरण कमाल की है.फिल्म में छोटे शहरों और संयुक्त परिवार के जीवन मूल्यों को बेहतरीन भी उकेरा गया है. फिल्म में ह्यूमर के साथ साथ दहेज व वैवाहिक जीवन को सफल बनाने सहित कई सामाजिक संदेश भी अच्छे ढंग से बिना भाषणबाजी के परोसे गए हैं. मगर इंटरवल तक फिल्म की गति काफी धीमी है. इंटरवल के बाद फिल्म तेज गति से दर्शकों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ने का प्रयास करती है, मगर यहां भी कुछ ज्यादा ही खींच दिया गया. क्लायमेक्स में नवाजुद्दीन सिद्दिकी और आथिया शेट्टी के बीच एक दूसरे से मिलने के उतावले पन के दृश्य को इस कदर खींचा गया कि दर्शक कह उठता है कि अब बस भी करो. फिल्म को एडीटिंग टेबल पर कसने की जरुरत थी.

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अभिनयः

गंभीर किस्म की भूमिकां निभाने में महारत रखने वाले नवाजुद्दीन सिद्दिकी ने इसमें हलकी फुलकी भूमिका में बेहतरीन अभिनय किया है. वह भावनात्मक दृश्यों में छा जाते हैं. आथिया शेट्टी ने ऐनी के किरदार में जान डाल दी है. पहली फिल्म ‘हीरो’ की असफलता का दंश झेल रही आथिया शेट्टी के करियर को इस फिल्म से नई गति मिलेगी. नवनी परिहार, विभा छिब्बर व करूणा पांडे ने भी ठीक ठाक अभिनय किया है.

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साधारण कद काठी के अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने अभिनय बल पर यह सिद्ध कर दिया है कि कलाकार को सिर्फ अभिनय का मौका मिलना बहुत आवश्यक  है, ताकि वह अपनी प्रतिभा को आगे ला सकें. हालांकि इसके लिए उन्होंने सालों बहुत मेहनत किये, पर आज वे अपनी कामयाबी से खुश है और नयी-नयी भूमिकाएं करने की चुनौती को स्वीकार रहे है. किसान परिवार में जन्में नवाज को बचपन से ही अभिनय का शौक था और इसके लिए उन्होंने हर तरह का प्रशिक्षण लिया और अभिनय क्षेत्र की ओर मुड़े. देर से ही सही पर आज उनका नाम नामचीन अभिनेताओं की सूची में शामिल हो चुका है. उनके हिसाब से वक़्त बदलता है, पर इंडस्ट्री कभी नहीं बदलती. नवाज ने कई ग्रे शेड के अभिनय किये और सफल रहे, पर अब उन्होंने रोमांटिक कौमेडी ड्रामा फिल्म ‘मोतीचूर चकनाचूर’ में पुष्पिंदर त्यागी की भूमिका निभा रहे है, उनसे मिलकर बात करना रोचक था, पेश है अंश.

सवाल-फिल्म में आपने दिखाया है कि शादी को लेकर आप चूजी नहीं, किसी भी लड़की से आपकी शादी हो जानी चाहिए, क्या रियल लाइफ में आप ऐसे ही थे?

मैंने अपनी शादी को लेकर बहुत अधिक सोचा नहीं था,क्योंकि काम और कैरियर को लेकर मैं बहुत व्यस्त था. संघर्ष ही कर रहा था, ताकि कुछ अच्छा काम मिले, ऐसे में विवाह को लेकर अधिक चिंता नहीं थी.

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सवाल-शादीशुदा जिंदगी में सामंजस्य रखना कितना जरुरी है?

शादी में एक दूसरे के काम को समझना और उसे सम्मान देना बहुत जरुरी है. मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से हूं, जहाँ मेहनत काम के लिए करना पड़ता है. कई बार काम करते हुए रात भी हो जाती है, समय का पता नहीं चलता, ऐसे में घर पर रहने वाले व्यक्ति को समझने की बहुत जरुरत होती है.

सवाल-फिल्म इंडस्ट्री में शादी लोग जल्दी नहीं कर पाते, क्योंकि कैरियर की बात होती है, आपकी सोच इस बारें में क्या है? किस उम्र में शादी कर लेना सही होता है?

शादी की उम्र से कोई लेना-देना नहीं होनी चाहिए. जब आपको अपना मनपसंद साथी मिले, आप शादी कर सकते है. कैरियर को सेट करने के बाद शादी करना अच्छा होता है.

सवाल-इस फिल्म में आपको खास क्या लगा?

मेरी फिल्मों को पूरा परिवार कभी नहीं देख सकते थे, क्योंकि मेरी फिल्मों में एडल्ट कन्टेन अधिक रहता था. ग्रे, डार्क या इंटेंस फिल्में होती थी, जिसमें रोमांस की कोई जगह नहीं होती थी. ये फिल्म रोमकौम फिल्म है, जिसे पूरा परिवार साथ बैठकर देख सकते है. ये मेरी पहली ऐसी फिल्म है और इसे करने में भी बहुत मज़ा आया. अभी मेरी बेटी शोरा 9 साल की हो गयी है और वह मेरी फिल्में नहीं देख पाती थी, अब मैंने उसका ख्याल रखा है. ये कॉमेडी और गुदगुदाने वाली फिल्म है. किसी प्रकार के वल्गर जोक्स इसमें नहीं है. इसे करते हुए बहुत अच्छा लगा. इसके अलावा इस फिल्म के लिए अधिक तैयारियां भी नहीं करनी पड़ी,क्योंकि यह एक आम लडके की कहानी है.

सवाल-अथिया शेट्टी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

अथिया ने इस फिल्म के लिए पिछले 3 महीने से मेहनत की है. उसने सारे संवाद अच्छी तरह से याद किये और उसी लहजे में बोले है,जो अच्छी लगी.

सवाल-लोग विदेश जाने को लेकर बहुत उतावले रहते है, पहली बार आप विदेश कब गए? आपकी रिएक्शन क्या थी?

विदेश जाना हर कोई पसंद करता है. मैं पहली बार दुबई एक्टिंग की वर्कशौप लेने गया था.

सवाल-आपने एक सफल कैरियर तय किया है, क्या कोई मलाल अभी बाकी है?

मैंने इंटेंस भूमिका बहुत निभाई है और अब लव स्टोरी करने की इच्छा है. मैं लाइट स्टोरी पर ध्यान देना चाहता हूं. इंटेंस भूमिका करने पर दिमाग पर बहुत जोर लगता है. बहुत डिटेल चरित्र में जाना पड़ता है. इस तरह की फिल्मों में अधिक डिटेल में जाना नहीं पड़ता .लोग इन्हें जानते है और मैं भी आसपास में ऐसे कई चरित्र को देखता हूं.

सवाल- कोई ऐसा चरित्र जिससे निकलने में समय लगा हो?

मंटो और ठाकरे ऐसी ही फिल्में थी ,जिससे निकलने में मुझे महीनों लगे थे. उस चरित्र से बाहर निकलना ही पड़ता है नहीं तो आप उस कॉम्फोर्ट जोन में चले जाते है. सेल्फिश होकर उससे अपने दिल से निकालना पड़ता है, क्योंकि ऐसा न करने पर अगले चरित्र में भी उसकी झलक देखने को मिलती है. नए भूमिका को हमेशा जीरो लेवल से ही शुरू करना अच्छा होता है.

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सवाल-आप लक या हार्डवर्क किस पर अधिक विश्वास करते है?

मैं लक पर नहीं मेहनत, पर अधिक विश्वास करता हूं.  मैं एक प्रशिक्षित कलाकार हूं और अच्छी अभिनय की हमेशा कोशिश करता हूं.

सवाल-अवार्ड आपके लिए कितना महत्व रखते हूं?

अवार्ड का महत्व तब होता है जब उसका आकलन सही तरीके से हो. मेरा उसपर अधिक विश्वास नहीं है. अगर पुरस्कार स्किल और एबिलिटी को देखकर दिया जाय, तो अच्छा लगता है.

सवाल-आपकी आगे आने वाली फिल्में कौन सी है?

मेरे भाई एक फिल्म मेरे साथ बना रहे है. बहुत ही इंटेंस लव स्टोरी है. इसके अलावा बांग्लादेश के लिए ‘मुस्तफा फारुखी’ एक फिल्म कर रहा हूं. जिसकी शूटिंग न्यूयार्क और सिडनी में होने वाली है. अलग-अलग भाषा में काम करते हुए मुझे बहुर ख़ुशी होती है और ये एक कलाकार के लिए जरुरी होता है. इससे आप बहुत कुछ सीखते है.

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