नए साल का दांव भाग-3

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काफी बहस हुई पर सुधीर ने दोनों की बोलती बंद कर दी और वार्निंग दे कर चला गया. अमायरा ने अपने फ्लैट की बालकनी से अपने बेटे को स्कूल जाते हुए बाय करते समय सुधीर को आते देख लिया था सो मोहना के फ्लैट के पास खड़े हो कर पूरी बात सुन कर अपने घर चली गई थी.

खुशी के मारे उस की आवाज वंदिता को फोन पर बताते हुए कांप गई, ‘‘बस,

अब तो यह यहां से चली जाएगी… एक मुश्किल तो, खत्म हुई.’’

वंदिता ने शांत स्वर में कहा, ‘‘यह तो तुम लोगों ने बहुत अच्छा किया पर अब कपिल पर मु झे कभी विश्वास नहीं होगा. अब मेरे दिल में उस के लिए कोई जगह नहीं… यह चली जाएगी कोई और आ जाएगी. यही होता रहा है. खैर, थैंक्स यार.’’

उस दिन जब चारों जिम में मिलीं तो सब खुश थीं. वंदिता हंसी, ‘‘तो अमायरा ने मोहना को भगा ही दिया.’’

शिनी ने कहा, ‘‘अब तुम से पार्टी चाहिए.’’

वंदिता जोर से हंसी, ‘‘शर्म करो तुम लोग. इस बात की पार्टी कौन मागता है?’’

‘‘अरे, हम आज की मौडर्न फ्रैंड्स हैं.झ्र ऐसी बातों से निबटेंगे, तो पार्टी तो बनती ही है यार.’’

‘‘ठीक है, पहले इसे आने तो दो.’’

‘‘ठीक है.’’

कपिल 1 हफ्ते के लिए टूर पर था. अब जब तक कुछ बहुत ही जरूरी न हो, उस की और वंदिता की बात ही नहीं होती थी. इस बार जब कपिल टूर से आया तो उस का मूड बहुत ही खराब था. वंदिता ने अंदाजा लगा लिया कि उसे मोहना के फ्लैट खाली करने की टैशन है. कपिल औफिस न गया. बस बैड पर था. कोई काम नहीं कर रहा था. लगातार चैट कर रहा था… मोहना से फोन पर धीरेधीरे बातें कर रहा था. वंदिता प्रत्क्षत: अपने रोज के कामों में व्यस्त थी… ट्यूशन पढ़ा रही थी पर उस की नजरें लगातार कपिल की हरकतों पर थीं. इस आदमी ने उसे बहुत मानसिक कष्ट दिया था. फिर भी उस ने बहुत धैर्य बनाए रख था.

15 दिनों में मोहना ने फ्लैट खाली कर दिया. उस की मेड से ही अमायरा को पता चला कि अब उस ने काफी दूर एक छोटी सी सोसाइटी में एक छोटा सस्ता फ्लैट किराए पर लिया. जिस दिन मोहना का सामान गया, कपिल बैड से उठा ही नहीं. वंदिता ने भी कुछ नहीं पूछा.

चारों सहेलियां मिलीं तो वंदिता ने कहा, ‘‘थैंक्स दोस्तो, तुम लोग सच में मेरी दोस्त हैं.’’

सिम्मी ने कहा, ‘‘पार्टी कब दे रही है?’’

‘‘चलो, अब हम लोग न्यू ईयर पर 2 रातों के लिए माथेरान चलते हैं. आनाजाना, होटल, खानापीना सब मेरी तरफ से. न्यू ईयर पर वहीं धमाल कर के आते हैं. एक चेंज की मु झे सख्त जरूरत है.’’

सब चौंक पड़ी, ‘‘सच?’’

‘‘और क्या, तुम लोग अपनी फैमिली से न्यू ईयर पर छुट्टी ले लो.’’

‘‘हां यार, अब बच्चे बड़े हैं… हमारे हस्बैंड तो जानते ही हैं तुम किस दौर से गुजरी हो.

तुम्हारे साथ न्यू ईयर की ऐसी शुरुआत करने से हमें कोई नहीं रोकेगा पर कपिल का क्या होगा?’’

‘‘उसे माशूका के जाने का दुख मनाने दो. संजय गोवा और साक्षी महाबालेश्वर

जा रही हैं. वे भी न्यू ईयर पर फ्रैंड्स के ही साथ हैं. उन्हें पूरी बात बताई तो वे बहुत खुश हुए.

असल में तुम लोगों के साथ मेरा यह ट्रिप वे दोनों ही स्पौंसर कर रहे हैं. वे चाहते हैं कि मैं तुम लोगों के साथ ऐंजौय कर के जाऊं.’’

‘‘वाह, क्या बात है. मतलब आशिक साहब अकेले रहेंगे. वह है ही इसी लायक.’’

वंदिता बच्चों के साथ अब खूब खुश रहती. कपिल सूजा मुंह ले कर घूमता. वंदिता नाश्ता, खाना चुपचाप टेबल पर रख देती. वह खा कर चला जाता. रात को फिर ऐसे ही खा कर टीवी देखने बैठ जाता.

कभीकभी रात देर से लौटता. वंदिता अंदाजा लगाती मोहना से मिलने गया होगा. पर कपिल अब परेशान था. उस ने मोहना के साथ बहुत रंगरलियां मनाई थीं. अब वह जिस फ्लैट में गई थी, वह वन बैडरूम ही था. यहां वाला टू बैडरूम था.

विनय के बाहर जाने पर यश को दूसरे रूम में सुला कर रातभर मस्ती की जाती थी. अब इस फ्लैट में जगह बहुत कम थी. फ्लोर पर भी प्राइवेसी नहीं थी. मोहना चिढ़ीचिढ़ी रहने लगी थी. वह नाराज भी थी कि कपिल ने ही उस का किराया क्यों नहीं भर दिया था. कपिल उस पर खर्च तो खूब करता था पर किराए की रकम हर महीने क्व32 हजार देना आसाना नहीं था.

मोहना कपिल से अब बहुत कम मिलने लगी थी. यहां से जाने के बाद दोनों के रिश्ते में ठंडापन भर रहा था जो कपिल को बरदाश्त नहीं हो रहा था. इधर वंदिता का केयर फ्री अंदाज उसे और चिढ़ा रहा था. 31 दिसंबर को वंदिता को बैग पैक करते देख कपिल बुरी तरह चौंका, ‘‘कहां जा रही हो?’’

‘‘माथेरान.’’

‘‘क्या?’’ करंट सा लगा कपिल को, ‘‘क्यों? किस के साथ?’’

‘‘तुम भी तो जा रहे न, पर चिंता मत करो, मैं तुम्हें वहां डिस्टर्ब नहीं करूंगी और न ही पूछूंगी किस के साथ जा रहे हो? हां, मैं तुम्हें बता सकती हूं कि मैं किस के साथ जा रही हूं… अपनी सहेलियों के साथ जा रही हूं.’’

कपिल का चेहरा देखने लायक था. कुछ बोल ही नहीं पाया. तभी संजय और साक्षी भी अपनाअपना बैग ले कर आ गए. वंदिता को गले लगा कर खूब प्यार किया और कहा, ‘‘मम्मी, खूब ऐंजौय करना. हम टच में तो रहेंगे ही,’’ और फिर तीनों घूमने निकल गए.

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संजय ने चारों सहेलियों के लिए अच्छे होटल में 2 रूम बुक करवा दिए थे. चारों ने जीभर कर ऐंजौय किया. न्यू ईयर की रात

होटल में ही खूब मस्ती की. होटल के खुले गार्डन में म्यूजिक, डांस का आयोजन था. सब ने खूब डांस किया. शानदार खाने का लुत्फ उठाया. कपिल की 2 मिस्ड कौल्स देख चारों खूब हंसीं. वंदिता ने कपिल को वापस फोन नहीं किया.

संजय, साक्षी और वंदिता अपनेअपने फ्रैंड्स के साथ न्यू ईयर का टाइम ऐंजौय कर के जब वापस घर आए तो कपिल बुरी तरह खी झता हुआ टीवी देख रहा था. वे तीनों दूसरे कमरे में नए साल पर कई गई मस्ती शेयर कर रहे थे. उन के खिलखिलाने की आवाजों से कपिल के कान जैसे फट रहे थे. जब तक की अपनी हरकतें वह भी जानता था, कुछ कहने का मुंह था ही नहीं. पैर पटकते हुए उन लोगों के कमरे का दरवाजा बंद कर आया ताकि उन सब के हंसने की आवाजें उसे सुनाई न दें.

कहां कपिल मोहना के साथ न्यू ईयर पर माथेरान जा कर जश्न मनाने वाला था,

पर अकेला खी झता,  झुं झलाता घर में बैठा रह गया था. अकेला होने पर उस ने मोहना को घर आने के लिए बहुत कहा, पर वह नहीं आई. उसे नया आशिक मिल चुका था. कपिल उसे किसी और पुरुष के साथ 1-2 जगह देख चुका था. मोहना ने बहुत जल्दी उसे भुला दिया. अब वह घर में अपनी बिगड़ी स्थिति कैसे संभाले, इसी उधेड़बुन में बेचैन था. वंदिता नए साल के इस दांव से बहुत खुश, उत्साहित हो कर जीवन में आगे बढ़ने के लिए एकदम तैयार थी.

‘‘नितिन ने उसे सब बता दिया कि मोहना का

सोसाइटी के ही किसी पुरुष से संबंध हैं और वह

पुरुष रातदिन खूब आताजाता है…’’

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नए साल का दांव भाग-2

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कपिल बच्चों पर बिना बात के चिल्लाता रहता. वंदिता की बातबात में इंसल्ट करता. खाने की थाली उठा कर फेंक देता. वंदिता ने दिल्ली में रहने वाले अपने भाई और मां से यह दुख शेयर किया तो उन्होंने फौरन कपिल को छोड़ कर आने की सलाह दी. वे बेहद नाराज हुए. उन्होंने कपिल से बात की तो कपिल ने उन की खूब इंसल्ट करते हुए जवाब दिए. संजय और साक्षी सब जान चुके थे. दोनों ने गुस्से में कपिल से बात करना बंद कर दिया था.

उस दिन वंदिता ने सारी स्थिति पर ठंडे दिमाग से सोचा. हर बात पर बारीकी से ध्यान दिया. उस ने सोचा कपिल को छोड़ कर मायके जाना तो समस्या का हल नहीं है. वह कोई नौकरी तो करती नहीं है… वहां जा कर भाई और मां कितने दिन खुशीखुशी उसे सहारा देंगे और वह स्वयं को इतनी कमजोर, मजबूर क्यों सम झ रही है? कपिल बेवफाई कर गया, इस की सजा वह क्यों परेशान, दुखी रह कर भुगते? वह क्यों अपनी हैल्थ इस धोखेबाज के लिए खराब करे और बच्चे? दोनों सुबह के गए रात को आते हैं. व्यस्त हैं, अपने पैरों पर खड़े हैं. नई जौब है. कपिल से नाराज रह कर उन का काम चल ही रहा है. कपिल अपनी ऐयाशियों में मस्त है, सिर्फ वही क्यों इस पीड़ा का दंश सहे?

वह 12वीं कक्षा तक के बच्चों को मैथ की ट्यूशन पढ़ती थी. पूरी सोसाइटी में उस के जैसी मैथ की टीचर नहीं थी. बच्चों से घिरी इतने रोचक ढंग से पढ़ाती कि बच्चों को मैथ जैसा विषय कभी मुश्किल ही न लगता उन के पेरैंट्स भी बहुत खुश रहते. मैथ की ट्यूशन की फीस भी उसे अच्छी मिलती. दिन के 4 घंटे तो उस के ट्यूशन में ही बीतते थे. अपनी जरूरतों के लिए वह इन पैसों को आराम से खर्च करती. नहीं,

वह रोरो कर तो नहीं जाएगी. यह जीवन बारबार नहीं मिलता. वह छोड़ कर कहीं नहीं जाएगी,

जो गलत काम कर रहा है. वह दुखी रहे. वह खुश रहेगी.

हफ्ते में 2 दिन सुबह 6 बजे वंदिता सोसाइटी में ही चलने वाले जिम में जाती थी, वहां उस का एक अलग ही ग्रुप था. सुबह सब के साथ व्यायाम करना उस के मन को खूब भाता था. शिनी भी उस के साथ रहती थी.

अगले दिन जिम में मिलने पर वंदिता के रिलैक्स्ड चेहरे को देख कर शिनी हंसी, ‘‘वाह, क्या बात है… बड़ी खुश लग रही हो… कपिल से कुछ बात हुई क्या?’’

वंदिता खुल कर हंसी, सुबहसुबह किस का नाम ले दिया? वह तो टूर पर गया है.’’

‘‘तो इतनी रिलैक्स्ड क्यों लग रही हो?’’

‘‘बाद में बताऊंगी. आज अमायरा और सिम्मी नहीं आई हैं.’’

‘‘ठीक है,’’ शिनी बोली.

वंदिता घर आई तो बच्चे औफिस के लिए तैयार हो रहे थे. मां को आज खुश देख साक्षी ने कहा, ‘‘मम्मी, पापा आजकल टूर पर जाते हैं तो अच्छा लगता है न?’’

वंदिता हंस पड़ी, ‘‘हां, बहुत.’’

संजय बोला, ‘‘मेरा मन ही नहीं होता उन से बात करने का. आप कैसे बरदाश्त कर रही हैं, मम्मा?’’

‘‘छोड़ो बच्चो, मैं अब उस पर अपनी ऐनर्जी वेस्ट करने वाली नहीं.

मैं ने सोच लिया है कि मु झे कैसे जीना है. वह चाहे कुछ भी करे, मैं अपना मैंटल पीस खत्म नहीं होने दूंगी.

मैं ने कुछ गलत नहीं किया न, फिर दुखी मैं क्यों रहूं?’’

बच्चों ने उसे गले लगा लिया, ‘‘प्राउड औफ यू मम्मी.’’ उस दिन बढि़या

वर्कआउट करने के बाद चारों सहेलियां क्लब हाउस के एक कोने में बैठ गई. सिम्मी ने कहा, ‘‘यार, तू कुछ बदलीबदली सी अच्छी लग रही है.’’

‘‘हां, मैं अब कपिल में उल झ कर दुखी नहीं रहने वाली और भी बहु कुछ है मेरी लाइफ में जिसे मैं ऐंजौय कर सकती हूं… अब बैठ कर एक बेवफा के लिए तो हरगिज नहीं रोऊंगी. जितना रोना था रो ली, अब नहीं. अब तक उस पर मेरे रोने का न असर हुआ है न होगा, उलटा वह धोखेबाज इंसान मु झे रोते देख मेरा मजाक उड़ाता है.’’

अमायरा ने खुश हो कर कहा, ‘‘प्राउड औफ यू यार, आज मोहना का लैंडलौर्ड सुधीर सुबह आया था. कुछ गुस्से में दिख रहा था. कुछ तेज आवाजें आ रही थीं,’’ अमायरा मोहना के फ्लोर के सामने वाले फ्लोर पर रहती थी.

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शिनी चौंकी, ‘‘अच्छा?’’

‘‘हां, कुछ ऐसा सुना कि किराया टाइम पर नहीं दिया गया है.’’

सिम्मी ने कहा, ‘‘मु झे अभीअभी आइडिया आया है. यह मोहना ही इस सोसाइटी से चली जाए तो अच्छा रहेगा न? इसे ही भगाते हैं. अमायरा. तुम इस के लैंडलौर्ड को जानती हो?’’

‘‘हां, मोहना को फ्लैट देने के समय काम करवाने कई बार यहां आता था. हमारी उम्र का ही होगा. मेरे पति नितिन से आमनासामना होने पर अच्छी जानपहचान हो गई है. भला इंसान है.’’

‘‘उस का फोन नंबर है?’’

‘‘हां, नितिन के पास है. मेरे सामने ही उस ने अपना नंबर दिया था.’’

फिर चारों सिर जोड़े बहुत देर तक प्लानिंग करतीं रहीं. उस के बाद संतुष्ट हो कर अपनेअपने घर चली गई.

उसी रात सुधीर को नितिन ने फोन किया. दोस्ताना लहजे में हालचाल पूछा  फिर कहा, ‘‘तुम्हारा फ्लैट तो मशहूर हो गया.’’

‘‘कैसे?’’

नितिन ने उसे सब बता दिया कि मोहना का सोसाइटी के ही किसी पुरुष से संबंध हैं

और वह पुरुष रातदिन खूब आताजाता है और मोहना के फ्लैट से काफी डिस्टरबैंस सी रहने लगी हैं.

सुधीर बहुत सभ्य आदमी था, वह आजकल वैसे ही किराया समय पर न मिलने से परेशान था. विनय उस का फोन उठाता नहीं था. 2 महीने का किराया इकट्ठा हो चुका था. नितिन ने यह भी बताया कि विनय का कोई काम है ही नहीं. हर समय शराब में डूबा रहता है. मोहना ही पैसा ऐंठने का काम करती है, किसी से भी. वह तो अच्छा था, सुधीर ने ऐडवांस में डिपौजिट लिया हुआ था. सारी बात सुन कर सुधीर ने एक फैसला ले लिया.

अगले दिन सुबह ही सुधीर को घर आया देख विनय और मोहना हड़बड़ा गए. सुधीर ने कहा, ‘‘1 हफ्ते के अंदर मु झे अपना फ्लैट खाली चाहिए.’’

मोहना गुर्राई, ‘‘यह कोई रूल नहीं है… ऐडवांस नोटिस क्यों नहीं दिया?’’

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‘‘रूल की बात तो करना मत तुम लोग… गैर के साथ रातदिन रंगरलियां मनाने वाली रूल की बात करेगी? विनय, आप अपने नशे में इन बातों से आंखें बचा सकते हैं, बिल्डिंग में रहने वाले इन चीजों को बरदाश्त नहीं करेंगे और मु झे इतना भी शरीफ मत सम झ लेना… 1 हफ्ते में फ्लैट खाली नहीं किया तो सामान उठवा कर बाहर फिंकवा दूंगा.’’

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नए साल का दांव भाग-1

आजवंदिता की ट्रेडमिल पर स्पीड रोज की तरह नहीं थी. कदमों में सुस्ती थी. हमेशा अच्छा वर्कआउट करने वाला जोश गायब था. वार्मअप भी ठीक से नहीं कर पाई थी. आंखों में रातभर जागने के बाद की थकान और उदासी थी. ऐक्सरसाइज नहीं कर पा रही थी, जबकि आज तक ऐसा नहीं हुआ था. उस की फिटनैस पूरी सोसाइटी की महिलाओं के लिए उदाहरण थी. बेहद स्मार्ट, सुंदर, स्लिम वंदिता अपने हंसमुख, बोल्ड स्वभाव के चलते सोसाइटी में सब को प्रिय थी. उस की सहेलियों की नजरें आज जिम में उसी पर थीं. सब उस की मनोस्थिति से अवगत थीं. सहेलियां भी उस की उदासी से उदास थीं.

वंदिता ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाल 2 घूंट पीए और फिर अमायरा से बोली, ‘‘आज नहीं हो पा रहा कुछ… चलती हूं.’’

वहीं साइकिल चलाती शिनी ने कहा, ‘‘तू आ गई आज हम तो इसी बात पर खुश हैं… प्राउड औफ यू… यार, बहुत स्ट्रौंग है तू. डौंट वरी… हम तेरे साथ हैं. कुछ करते हैं.’’

अमायरा, शिनी और सिम्मी ने भी ऐक्सरसाइज रोक कर अपनाअपना बैग उठा लिया. तीनों जिम से निकल कर क्लब हाउस में ही स्विमिंग पूल के किनारे रखी चेयर्स पर बैठ गई. सुबह के 11 बज रहे थे. हलकीहलकी धूप में तीनों ने वंदिता को प्यार से देखा. उस की भरी आंखें छलकने को तैयार थीं.

शिनी ने बात शुरू की, ‘‘वंदिता तेरे मैसेज तो रात में ही पढ़ लिए थे. अब यह बता जब कपिल रात को मोहना से न्यू ईयर प्लान डिसकस कर रहा था, तो तूने उसी समय उस की क्लास क्यों नहीं ली?’’

वंदिता ने गंभीर आवाज में कहा, ‘‘मैं ने पूछा था कि किस के साथ न्यू ईयर पर माथेरान जा रहे हो? तब उस ने बेशर्मी से कहा कि तुम्हारे साथ तो नहीं, बस इतना जानना तुम्हारे लिए काफी है… मैं ने फिर पूछा किस के साथ तो बोला कि क्यों पीछे पड़ी हो मेरे? बता दूंगा या अंदाजा क्यों नहीं लगाती हो? इतने बदतमीज, बेशर्म इंसान से जवान बच्चों के सामने और क्या बात करती? बच्चे भले ही दूसरे कमरे में थे पर फ्लैट में सब सुनाई देता है… कपिल इतना धीरे भी नहीं बोलता. वह डंके की चोट पर मोहना से जुड़ गया है. उसे अब किसी की परवाह नहीं.’’

अमायरा ने कहा, ‘‘मेरा मन होता है कपिल को पकड़ कर ऐसा इलाज करूं कि बच्चू याद रखे और वह मोहना उसे देख कर तो उस का मुंह नोचने का मन करता है. पति है, बच्चा है, कपिल से 10 साल छोटी है, फिर भी शर्म नहीं आ रही दोनों को रासलीला रचाते.’’

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सिम्मी बोली, ‘‘एक का नहीं, दोनों का कुसूर है, पर सोचो क्या किया जाए.’’ 1 घंटा सब यों ही बैठी रहीं. कोई रास्ता नहीं सू झ रहा था. अपने दिल की भड़ास निकाल कर सब अपनेअपने घर चली गईं. वंदिता भी घर आ कर नहाने चली गई. शावर के नीचे खड़ी देर तक रोती रही. आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

यह क्या हो गया, यह कब सोचा था, वह तो इतनी परफैक्ट वाइफ सम झती थी खुद को. कपिल इतना धोखा दे जाएगा, कभी नहीं सोचा था. कपिल आज ही सुबह दूर पर निकल गया था. दोनों बच्चे संजय और साक्षी अपनेअपने औफिस में थे. नहा कर वह चुपचाप बैड पर ढह सी गई. किसी तरह चैन नहीं आ रहा था. 28 साल की की गृहस्थी अपनी आंखों के सामने ढही जा रही थी. दिलफेंक, आशिकमिजाज कपिल ने दूसरी औरतों के साथ ऐसी हरकतें पहले भी की थीं.

कभी इग्नोर कर के, कभी डांटडपट कर, तो कभी प्यार से कपिल को सही रास्ते पर ले आती थी, पर जो अब हो रहा था वह तो कभी नहीं हुआ था. 2 साल पहले सोसइटी की ही एक बिल्डिंग में मोहना अपने पति विनय और छोटे बच्चे यश के साथ किराए पर रहने आई थी.

यह एक पौश सोसाइटी थी. अच्छे रोचक प्रोग्राम होते रहते थे. ऐसे ही एक प्रोग्राम में वंदिता और मोहना की दोस्ती हो गई. दोनों की यह दोस्ती पारिवारिक दोस्ती में बदल गई. दोनों के परिवार वीकैंड में साथ बैठते, खातेपीते. वंदिता को पता ही नहीं चला कि कब मोहना और कपिल सब की नजरें बचा कर एकदूसरे के

इतने करीब आ गए कि वंदिता की गृहस्थी की नींव इतनी जोर से हिली कि संभालना मुश्किल हो गया. विनय अपना बिजनैस शराब, जुए में गंवा चुका था. सारी बुरी आदतों में डूबा कईकई दिन तक घर से बाहर रहता. वह तो वंदिता ने एक दिन कपिल के वाशरूम जाने पर उस का फोन चैक कर लिया. इस से पहले कोई किसी का फोन छूता नहीं था. शायद इसीलिए उस ने कोई सावधानी नहीं बरती थी. कपिल और मोहना की सारी चैट पढ़ कर वंदिता के पैरों तले की जमीन खिसक गई. सबकुछ क्लियर था. दोनों सारी सीमाएं पार कर चुके थे. कई बार शारीरिक संबंध बना चुके थे. विनय और यश की गैरमौजूदगी में दोनों को साथ समय बिताने पर जो आनंद आया था, चैट में खुल कर कई इमोजी के साथ खुशी जाहिर की गई थी. यहां तक कि मोहना के कई खर्चे भी कपिल उठा रहा था. सबकुछ साफ था. शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी.

कपिल जब नहा कर निकला, वंदिता ने चैट दिखा कर पूछा, ‘‘यह सब क्या और क्यों चल रहा है कपिल?’’

कपिल चौंका, फिर सम झ गया कि पोल खुल चुकी है. पलभर में वह इस स्थिति से निबटने के लिए तैयार हो गया. बेशर्मी से बोला, ‘‘हां, वह मेरी दोस्त है और रोजरोज की किचकिच से अच्छा है मैं तुम्हें आज ही बता दूं कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं उसे नहीं छोड़ूगा.’’

‘‘इतने बड़े बच्चे हैं हमारे… सालों का साथ है… मैं ने तुम्हारी कई गलतियां माफ की हैं. अब नहीं करूंगी… यह कुछ ज्यादा ही हो गया है.’’

‘‘मैं माफी मांग भी नहीं रहा हूं और मु झे इस में कोई ड्रामा भी नहीं चाहिए.’’

वंदिता को रोना आ गया, ‘‘यह तुम ने अच्छा नहीं किया कपिल.’’

‘‘तुम्हें मेरे साथ रहना है तो रहो… मैं मोहना को नहीं छोड़ूंगा, जो करना है कर लो.’’

कपिल अपना फोन ले कर जा चुका था. उस दिन से आज तक जैसे वह रोज अंगारों पर चल रही थी, सोसाइटी बड़ी थी. मोहना की बिल्डिंग कुछ ही दूरी पर थी. वंदिता की कई सहेलियां मोहना की बिल्डिंग में रहती थीं. उन्होंने कपिल को कई बार मोहना के फ्लैट में जाते देखा था.

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उन्होंने वंदिता को बताया तो वंदिता ने फिर कपिल से बात की, ‘‘क्यों हम सब की बेइज्जती करवा रहे हो? कुछ तो लिहाज करो.’’

‘‘नहीं, मु झे कोई फर्क नहीं पड़ता. जो कर सकती हो कर लो.’’

वंदिता अब बहुत परेशान रहने लगी. क्या करे, हालात काबू से बाहर थे.

आगे पढ़ें- वंदिता ने दिल्ली में रहने वाले अपने…

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