नए साल का दांव भाग-1

आजवंदिता की ट्रेडमिल पर स्पीड रोज की तरह नहीं थी. कदमों में सुस्ती थी. हमेशा अच्छा वर्कआउट करने वाला जोश गायब था. वार्मअप भी ठीक से नहीं कर पाई थी. आंखों में रातभर जागने के बाद की थकान और उदासी थी. ऐक्सरसाइज नहीं कर पा रही थी, जबकि आज तक ऐसा नहीं हुआ था. उस की फिटनैस पूरी सोसाइटी की महिलाओं के लिए उदाहरण थी. बेहद स्मार्ट, सुंदर, स्लिम वंदिता अपने हंसमुख, बोल्ड स्वभाव के चलते सोसाइटी में सब को प्रिय थी. उस की सहेलियों की नजरें आज जिम में उसी पर थीं. सब उस की मनोस्थिति से अवगत थीं. सहेलियां भी उस की उदासी से उदास थीं.

वंदिता ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाल 2 घूंट पीए और फिर अमायरा से बोली, ‘‘आज नहीं हो पा रहा कुछ… चलती हूं.’’

वहीं साइकिल चलाती शिनी ने कहा, ‘‘तू आ गई आज हम तो इसी बात पर खुश हैं… प्राउड औफ यू… यार, बहुत स्ट्रौंग है तू. डौंट वरी… हम तेरे साथ हैं. कुछ करते हैं.’’

अमायरा, शिनी और सिम्मी ने भी ऐक्सरसाइज रोक कर अपनाअपना बैग उठा लिया. तीनों जिम से निकल कर क्लब हाउस में ही स्विमिंग पूल के किनारे रखी चेयर्स पर बैठ गई. सुबह के 11 बज रहे थे. हलकीहलकी धूप में तीनों ने वंदिता को प्यार से देखा. उस की भरी आंखें छलकने को तैयार थीं.

शिनी ने बात शुरू की, ‘‘वंदिता तेरे मैसेज तो रात में ही पढ़ लिए थे. अब यह बता जब कपिल रात को मोहना से न्यू ईयर प्लान डिसकस कर रहा था, तो तूने उसी समय उस की क्लास क्यों नहीं ली?’’

वंदिता ने गंभीर आवाज में कहा, ‘‘मैं ने पूछा था कि किस के साथ न्यू ईयर पर माथेरान जा रहे हो? तब उस ने बेशर्मी से कहा कि तुम्हारे साथ तो नहीं, बस इतना जानना तुम्हारे लिए काफी है… मैं ने फिर पूछा किस के साथ तो बोला कि क्यों पीछे पड़ी हो मेरे? बता दूंगा या अंदाजा क्यों नहीं लगाती हो? इतने बदतमीज, बेशर्म इंसान से जवान बच्चों के सामने और क्या बात करती? बच्चे भले ही दूसरे कमरे में थे पर फ्लैट में सब सुनाई देता है… कपिल इतना धीरे भी नहीं बोलता. वह डंके की चोट पर मोहना से जुड़ गया है. उसे अब किसी की परवाह नहीं.’’

अमायरा ने कहा, ‘‘मेरा मन होता है कपिल को पकड़ कर ऐसा इलाज करूं कि बच्चू याद रखे और वह मोहना उसे देख कर तो उस का मुंह नोचने का मन करता है. पति है, बच्चा है, कपिल से 10 साल छोटी है, फिर भी शर्म नहीं आ रही दोनों को रासलीला रचाते.’’

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सिम्मी बोली, ‘‘एक का नहीं, दोनों का कुसूर है, पर सोचो क्या किया जाए.’’ 1 घंटा सब यों ही बैठी रहीं. कोई रास्ता नहीं सू झ रहा था. अपने दिल की भड़ास निकाल कर सब अपनेअपने घर चली गईं. वंदिता भी घर आ कर नहाने चली गई. शावर के नीचे खड़ी देर तक रोती रही. आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे.

यह क्या हो गया, यह कब सोचा था, वह तो इतनी परफैक्ट वाइफ सम झती थी खुद को. कपिल इतना धोखा दे जाएगा, कभी नहीं सोचा था. कपिल आज ही सुबह दूर पर निकल गया था. दोनों बच्चे संजय और साक्षी अपनेअपने औफिस में थे. नहा कर वह चुपचाप बैड पर ढह सी गई. किसी तरह चैन नहीं आ रहा था. 28 साल की की गृहस्थी अपनी आंखों के सामने ढही जा रही थी. दिलफेंक, आशिकमिजाज कपिल ने दूसरी औरतों के साथ ऐसी हरकतें पहले भी की थीं.

कभी इग्नोर कर के, कभी डांटडपट कर, तो कभी प्यार से कपिल को सही रास्ते पर ले आती थी, पर जो अब हो रहा था वह तो कभी नहीं हुआ था. 2 साल पहले सोसइटी की ही एक बिल्डिंग में मोहना अपने पति विनय और छोटे बच्चे यश के साथ किराए पर रहने आई थी.

यह एक पौश सोसाइटी थी. अच्छे रोचक प्रोग्राम होते रहते थे. ऐसे ही एक प्रोग्राम में वंदिता और मोहना की दोस्ती हो गई. दोनों की यह दोस्ती पारिवारिक दोस्ती में बदल गई. दोनों के परिवार वीकैंड में साथ बैठते, खातेपीते. वंदिता को पता ही नहीं चला कि कब मोहना और कपिल सब की नजरें बचा कर एकदूसरे के

इतने करीब आ गए कि वंदिता की गृहस्थी की नींव इतनी जोर से हिली कि संभालना मुश्किल हो गया. विनय अपना बिजनैस शराब, जुए में गंवा चुका था. सारी बुरी आदतों में डूबा कईकई दिन तक घर से बाहर रहता. वह तो वंदिता ने एक दिन कपिल के वाशरूम जाने पर उस का फोन चैक कर लिया. इस से पहले कोई किसी का फोन छूता नहीं था. शायद इसीलिए उस ने कोई सावधानी नहीं बरती थी. कपिल और मोहना की सारी चैट पढ़ कर वंदिता के पैरों तले की जमीन खिसक गई. सबकुछ क्लियर था. दोनों सारी सीमाएं पार कर चुके थे. कई बार शारीरिक संबंध बना चुके थे. विनय और यश की गैरमौजूदगी में दोनों को साथ समय बिताने पर जो आनंद आया था, चैट में खुल कर कई इमोजी के साथ खुशी जाहिर की गई थी. यहां तक कि मोहना के कई खर्चे भी कपिल उठा रहा था. सबकुछ साफ था. शक की कोई गुंजाइश ही नहीं थी.

कपिल जब नहा कर निकला, वंदिता ने चैट दिखा कर पूछा, ‘‘यह सब क्या और क्यों चल रहा है कपिल?’’

कपिल चौंका, फिर सम झ गया कि पोल खुल चुकी है. पलभर में वह इस स्थिति से निबटने के लिए तैयार हो गया. बेशर्मी से बोला, ‘‘हां, वह मेरी दोस्त है और रोजरोज की किचकिच से अच्छा है मैं तुम्हें आज ही बता दूं कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं उसे नहीं छोड़ूगा.’’

‘‘इतने बड़े बच्चे हैं हमारे… सालों का साथ है… मैं ने तुम्हारी कई गलतियां माफ की हैं. अब नहीं करूंगी… यह कुछ ज्यादा ही हो गया है.’’

‘‘मैं माफी मांग भी नहीं रहा हूं और मु झे इस में कोई ड्रामा भी नहीं चाहिए.’’

वंदिता को रोना आ गया, ‘‘यह तुम ने अच्छा नहीं किया कपिल.’’

‘‘तुम्हें मेरे साथ रहना है तो रहो… मैं मोहना को नहीं छोड़ूंगा, जो करना है कर लो.’’

कपिल अपना फोन ले कर जा चुका था. उस दिन से आज तक जैसे वह रोज अंगारों पर चल रही थी, सोसाइटी बड़ी थी. मोहना की बिल्डिंग कुछ ही दूरी पर थी. वंदिता की कई सहेलियां मोहना की बिल्डिंग में रहती थीं. उन्होंने कपिल को कई बार मोहना के फ्लैट में जाते देखा था.

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उन्होंने वंदिता को बताया तो वंदिता ने फिर कपिल से बात की, ‘‘क्यों हम सब की बेइज्जती करवा रहे हो? कुछ तो लिहाज करो.’’

‘‘नहीं, मु झे कोई फर्क नहीं पड़ता. जो कर सकती हो कर लो.’’

वंदिता अब बहुत परेशान रहने लगी. क्या करे, हालात काबू से बाहर थे.

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