प्रोड्यूसर होना एक बच्चे को जन्म देने जैसा है– नेहा धूपिया

 साल 2002 में मिस युनिवर्स इंडिया की ताज पहन चुकी नेहा धूपिया को बचपन से ही कुछ अलग और चुनौतीपूर्ण काम करने की इच्छा थी. जिसमें साथ दिया उसकी माता पिता ने. साल 2003 में उसने फिल्म ‘क़यामत’ से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखी, पर इस फिल्म को अधिक सफलता नहीं मिली. उसे असल कामयाबी फिल्म जुली, शीशा, क्या कूल है हम, शूट आउट ऐट लोखंडवाला आदि फिल्मों से मिली.

नेहा ने फिल्मों के अलावा टीवी पर भी कई शो की एंकरिंग की है. वह एक अभिनेत्री ही नहीं, एक जानी-मानी मॉडल और एक बेटी मेहर धूपिया बेदी की माँ भी है. काम के दौरान उन्होंने अभिनेता अंगद बेदी से शादी की. नेहा स्पष्टभाषी है और इसका प्रभाव उसके कैरियर पर भी पड़ा, पर वह इसे अधिक महत्व नहीं देती. जियो सावन और बिग गर्ल प्रोडक्शन के साथ वर्क फ्रॉम होम एडिशन की शो ‘नो फ़िल्टर नेहा सीजन 5’ शुरू हो चुका है, जिसे लेकर नेहा बहुत खुश है,कैसे उन्होंने बच्चे के साथ इस शो को बनायीं है, आइये जाने उन्ही से.

सवाल-इस शो का 5वा सीजन कर रही है, कितनी उत्सुक है?

मुझे ये शो बहुत अच्छा लगता है, इसमें छोटी-छोटी बातें जिसे आज तक किसी ने जाना नहीं है उसके बारें में बात की जाती है, थोड़ी हंसी, थोड़ी मस्ती और कई विषयों पर बातें की जाती है, इसके अलावा इस शो के ज़रिये हम लोगों को डोनेट करने के लिए भी कहते है,ताकि गरीब बच्चियों की पढ़ाना,चाइल्ड मैरिज को रोकना, उनके सपनों को पूरा करना आदि कई विषयों का समाधान किया जा सकें.

सवाल-एक्ट्रेस होकर एक पत्रकार की तरह एंकरिंग करना कितना सहज और मुश्किल होता है?

मैं ऐसी शो पहले भी होस्ट कर चुकी हूं. किसी भी काम को करने से पहले उस पर रिसर्च करना हमेशा जरुरी होता है. पत्रकार भी किसी बात को लिखने से पहले शोध करते है. इसमें ह्युमन साइड को अधिक बताने की कोशिश की जाती है, फिर चाहे वह सौरभ गांगुली, सैफ अली खान, कबीर खान या सोनू सूद कोई भी हो उसकी जर्नी में जो सफलता मिली है उसकी छोटी-छोटी जानकारियाँ देने की कोशिश की जाती है. ये बातचीत होती है, न्यूज़ नहीं, लेकिन ये भी ध्यान रखा जाता है कि बातचीत रोचक और रियल हो.यही वजह है कि इसे लोग पसंद कर रहे है. अभी घर से सब हो रहा है, इसलिए खुद को ही सबकुछ करना पड़ता है, इसलिए मेहनत इतनी होती है कि एक रिकॉर्डिंग के बाद मैं थक जाती हूं, जबकि एक्टिंग में अपनी भूमिका निभाकर घर आ जाना पड़ता है जो आसान होता है.

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सवाल-आपके जीवन पर इस शो का प्रभाव क्या रहा और इस शो की यू एस पी क्या है?

इस शो के प्रोड्यूसर होने के नाते मुझे बहुत उत्साह मिला है. जिससे मुझे नई-नई चीजों को ट्राय करने का हौसला मिला. हमरे पास एक अच्छी टीम है. सारे यंग है और उनसे मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिलता है. इसके अलावा अगर मैं गेस्ट की बात करूँ तो वही इस शो की यू एस पी है, क्योंकि जब मैं उनके साथ बात करती हूं तो बहुत सारे शोध उनपर करने पड़ते है, जिससे मैं उनके बारें में छोटी-छोटी जानकारियाँ पाती हूं, जिसे मैं पहले नहीं जानती थी. इससे मुझे अनुशासन, दूसरों के लिए काम करने की इच्छा, नए लोगों से जुड़ना आदि सब मेरे अंदर आ गया  है. क्रिकेटर हरभजन सिंह के साथ मैंने बात की थी और आज भी उसके साथ जुडी हूं. नए लोगों के साथ जुड़ने का यह एक अच्छा मौका मुझे मिल जाता है. ये एक तरह से मेरे लिए एडवेंचर होता है, जो मुझे बहुत पसंद है.

सवाल-किसके साथ आपको बात करने में बहुत अच्छा लगा?

सभी के साथ बातचीत करने में अच्छा लगता है. सौरभ गांगुली की अगर बात करूँ तो मैं उसकी बहुत बड़ी फैन हूं. वह एक टीम के कैप्टेन रहे है. वे बहुत ही सुलझे हुए इंसान है. उन्होंने क्रिकेट को गोल्डन इरा में ले जाने में सफल हुए थे. उनके बारें में जानना मुझे बहुत अच्छा लगा. उनका क्रिकेट के अलावा फूटबाल को पसंद करना, शो को होस्ट करना आदि कई बातें है, जिसे हम सब नहीं जानते, यही वजह है कि इस शो को मैं बहुत एन्जॉय करती हूं.

सवाल-किस सेलेब्रिटी के लिए सबसे अधिक रिसर्च करना पड़ा? क्या प्रश्न पूछते समय ये भी ध्यान रखना पड़ता है कि सेलेब्रिटी आपके प्रश्न का उत्तर देने में असहज न हो?

सबके लिए बहुत रिसर्च करनी पड़ती है. राणा दूगुबाती के लिए काफी शोध करने पड़े, क्योंकि उनके बारें में जानकारियाँ कम थी. रणवीर सिंह, विद्या बालन और सोनाक्षी सिन्हा के लिए भी बहुत रिसर्च करने पड़े थे, क्योंकि कुछ लोग खुलकर बात करते है कुछ नहीं. कुछ तो जानकारी कहाँ से मिली इस बारें में भी पूछते है. इसलिए हर चीज को बहुत सावधानीपूर्वक करनी पड़ती है. ये ध्यान रखना पड़ता है और उसकी रुपरेखा पहले से ही तैयार कर ली जाती है और उन्हें शो का फॉर्मेट भी बता दिया जाता है. उनकी सहजता का ध्यान हमेशा रखा जाता है.

 

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सवाल-बच्चे के साथ काम करना कितना कितना मुश्किल था?

बहुत अधिक मुश्किल था, क्योंकि वह दो साल की होने वाली है, वह बार-बार शूट के फ्रेम में आ जाती है. ऑडियो, विडियो, एडिटिंग, मेकअप आदि सब बहुत मुश्किल था, लेकिन मैंने ये सब करते हुए ये जाना कि अगर आप किसी काम को करना चाहती है, तो कोई आपको रोक नहीं सकता. मैंने इस शो को करने से पहले भी 3 दिन तक सोचा था और अंत में करने को ठानी. इस शो को घर से करना आसान नहीं था, क्योंकि आप ऑफिस को घर पर ला रहे है, ऐसे में पूरा परिवार घर पर होता है. बेटी का बार-बार घूमना, मेरी बातों को बच्चे द्वारा नक़ल करना, बर्तनों की आवाज, अंगद का इधर-उधर जाना आदि कई समस्याएं आई, पर मैंने इन सबके बीच काम किया. मैं सुस्मिता सेन, शाहरुख़ खान और दिलजीत दोसांज को अपने शो में लाना चाहती हूं.

सवाल-क्या इस शो को करते हुए आपने अपने पुराने दिनों को याद किया?

मुझे पिक्चर खिचवाना बहुत पसंद था. इसके बाद मैं जब मिस इंडिया बनी तो तस्वीरों के खीचने की झड़ी लग गयी थी. वह दौर मेरे लिए सबसे अधिक सुनहरा था. ये सब मेरी यादगार पहलू है.

आज मेरे लिए उम्र कोई बड़ी बात नहीं होती. आप कैसे अपनी जिंदगी बिता रहे है वह अधिक मायने रखती है. जब आपको किसी काम को करने की इच्छा हो आप कर सकती है. इस शो के दौरान मैं नीना गुप्ता से बहुत प्रभावित हुई. उनकी कॉन्फिडेंस मुझे आगे बढ़ने में सहायता करती है.


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सवाल-प्रोड्यूसर होने का प्रेशर कितना रहता है?

एक्ट्रेस से प्रोड्यूसर होने का प्रेशर बहुत अधिक रहता है. प्रोड्यूसर होने का अर्थ एक बच्चे को जन्म देने की तरह होता है. मैं एक माँ भी हूं और जानती हूं कि एक बच्चे को जन्म देना कितना कठिन होता है. एक शो को लाने के लिए बहुत अधिक मेहनत और लगन की जरुरत होती है, क्योंकि आप दर्शकों से सीधे जुड़ते है और आप उस शो के जवाबदेही होते है. पूरे प्रोडक्ट का दायित्व आप पर होता है. एक्ट्रेस होने पर आपको इतना अधिक प्रेशर लेना नहीं पड़ता. सारी चीजे कई लोगों में बाँट दी जाती है. प्रोड्यूसर होने पर बहुत सारे चीजे आप सीखते है.

सवाल-इंडस्ट्री बहुत ख़राब दौर से गुजर रही है, इस बारें में आपकी सोच क्या है?

ओटीटी या सिनेमा कही जाने वाली नहीं है. कई बड़ी फिल्में आने वाली है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे है. कुछ दिनों बाद ये अवश्य ठीक होगा. कंटेंट किसी भी फॉर्म में अडॉप्ट किया जा सकता है. दर्शकों को क्या पसंद है, ये उन्हें ही तय करना होता है.

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