फिल्म ‘मिमी’ में सरोगेटेड मदर के रोल में नजर आएंगी कृति सैनन, ट्रेलर हुआ वायरल

पिछले 15 वर्षों से बॉलीवुड में कार्यरत निर्माता दिनेश वीजन  ठोस पारिवारिक मनोरंजन वाली फिल्में परोसते आए हैं. जिनमें ‘बीइंग सर्कस’,  ‘हाईजैक’, ‘लव आज कल’, ‘कॉकटेल’,  ‘लेकर हम दिल दीवाना’,  ‘हैप्पी एंडिंग’, ‘बदलापुर’, ‘हिंदी मीडियम’,  ‘लुका छुपी’जैसी कई सफल फिल्मों का समावेश है. अब ‘जियो स्टूडियो’’के साथ मिलकर दिनेश वीजन एक फिल्म ‘‘मिमी’’लेकर आ रहे हैं, जिसका ट्रेलर आज जारी किया जा चुका है.

फिल्म‘‘मिमी’की कहानी सरोगेट मदर’के इर्द गिर्द घूमती है. यह फिल्म सफल मराठी फिल्म‘‘मला आई व्हायच’’का हिंदी रूपांतरण है, जिसे लक्ष्मण उतेकर ने निर्देशित किया है और इसमें मुख्य किरदार में कृति सैनन हैं. इसके अलावा इसमें पंकज त्रिपाठी व साई ताम्हणकर भी हैं. ,

इस अद्भुत कहानी में हास्य और भावनाओं का एक दिलकश मिश्रण है. फिल्म का ट्रेलर हमें ना सिर्फ गुदगुदाता है, बल्कि हंसाकर लोट-पोट भी करता है. फिल्म के ट्रेलर में पंकज त्रिपाठी और कृति सैनन के बीच कुछ दमदार कॉमिक टाइमिंग का अहसास होता है. इनके बीच की नोकझोक और केमिस्ट्री आपको उत्साहित होने पर मजबूर कर देती है. यह हमें कहानी की एक दिलचस्प झलक भी देता है. ट्ेलर के अनुसार यह कहानी एक उत्साही और बेपरवाह लड़की की अद्वित्यीय कहानी है,  जो जल्दी पैसा कमाने के लिए सरोगेट मदर बन जाती है. जब उसकी योजना अंतिम क्षण में बिगड़ जाती है, तो क्या सब कुछ खत्म जाता है? आगे क्या होता है? मिमी का ट्रेलर हमें निश्चित रूप से फिल्म के बारे में  कई अनुमान लगाने के लिए मजबूर कर देता है!

ये भी पढ़ें- किंजल के बाद अनुपमा के खिलाफ पाखी को भड़काएगी काव्या, करेगी ये काम

फिल्म‘‘मिमी’’की चर्चा करते हुए निर्माता दिनेश विजन कहते है- “यह ट्रेलर फिल्म ‘मिमी’ की तरह ही गर्मजोशी,  उत्साह और हंसी से भरा है. यह हमारी पहली एक्सक्लूसिव ओटीटी रिलीज है, और सिनेमाघरों में परिवार के संग लौटने के लिए कुछ समय लग सकता है. ‘मिमी’ के साथ हम परिवारों के लिए उनके घरों में आराम से बैठकर देखने वाला एक अच्छा सिनेमा लाए हैं. हमें उम्मीद है कि कृति सैनन का प्यारा और हास्यपूर्ण अवतार ज्यादा से ज्यादा दर्शकों को खुशी देगा. इस फिल्म को ‘जियो सिनेमा’और ‘नेटफ्लिक्स’दो ओटीटी प्लेटफार्म एक साथ तीस जुलाई से स्ट्रीम करने वाले हैं. ’’

कृति सैनन अपने इंस्टाग्राम पर रिलीज की तारीख की घोषणा के साथ फिल्म का एक नया पोस्टर साझा कर चुकी हैं.  कृति सैनन कहती हैं-‘‘यह उपदेशात्मक या गंभीर नहीं है. ऐसा नहीं है कि आप सरोगेसी पर फिल्म देखने जा रहे हैं और यह एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म होगी. यह एक बहुत ही मनोरंजक फिल्म है,  जो हास्य से भरपूर है,  और बहुत सारे उतार-चढ़ाव से भरी है. मैंने जिस महिला की भूमिका निभाया है, उसकी तमन्ना फिल्म अभिनेत्री बनने की है. ’’

फिल्म‘‘मिमी’’में शामिल कई लोगों के पुनर्मिलन का प्रतीक है.  इस फिल्म में कृति सैनन,  पंकज त्रिपाठी,  निर्देशक लक्ष्मण उटेकर और निर्माता दिनेश विजान सफलतम रोमांटिक-कॉमेडी ‘लुका छुप्पी’ के बाद एक साथ आए हैं.

ये भी पढ़ें- 6 महीने की हुई Anushka Sharma और Virat Kohli की बेटी Vamika, ऐसे हुआ सेलिब्रेशन

‘जियो स्टूडियो ’ और दिनेश विजान की कंपनी मैडॉक फिल्म्स प्रोडक्शन निर्मित तथा लक्ष्मण उटेकर  निर्देशित फिल्म‘‘मिमी’’में कृति सैनन,  पंकज त्रिपाठी,  साई तम्हंकर,  सुप्रिया पाठक और मनोज पाहवा ने अभिनय किया है. लक्ष्मण उटेकर ने रोहन शंकर के साथ ‘मिमी’की कहानी और पटकथा लिखी है,  जिन्होंने संवाद भी लिखे हैं. यह फिल्म  30 जुलाई 2021 से जियो सिनेमा और नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होगी.

REVIEW: समाज के कड़वे सच को उभारती नवाजुद्दीन सिद्दिकी की फिल्म ‘सीरियस मेन’

रेटिंग: साढे़ तीन स्टार

निर्माता व निर्देशक: सुधीर मिश्रा
लेखक: भावेश मंडालिया
कलाकारः नवाजुद्दीन सिद्दिकी,  इंदिरा तिवारी, अक्षत दास, श्वेता बसु प्रसाद,  नासर, संजय नार्वेकर व अन्य
अवधिः एक घंटा 54 मिनट
ओटीटी प्लेटफार्मः नेटफ्लिक्स

जून 2010 में मनु जोसेफ का एक उपन्यास ‘‘सीरियस मेन’’ प्रकाशित हुआ था और देखते ही देखते यह काफी लोकप्रिय हो गया था. अब इसी उपन्यास पर इसी नाम से फिल्मकार सुधीर मिश्रा फिल्म लेकर आए हैं, जो कि दो अक्टूबर से ‘‘ओटीटी’’प्लेटफार्म नेटफ्लिक्स पर देखी जा सकती है. भारत के भविष्य को लेकर जो सपने दिखाए जा रहे हैं, उस पर यह फिल्म अति तीखा व्यंग है.

यह एक आम भारतीय की कहानी है, जो बेहतर जीवन जीने की आस को पूरा करने के लिए सारे नैतिक सिद्धांतो व मापदंडों की परवाह किए बगैर किसी भी हद तक जा सकता है.

कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में मुंबई के सिद्धांत और अनुसंधान संस्थान में एक ब्राह्मण खगोलशास्त्री डाॅ. अरविंद आचार्य (नासर)के सहायक के रूप में काम करने वाले मध्यम आयु के तमिल दलित अय्यन मणि(नवाजुद्दीन सिद्दिकी) के इर्द गिर्द घूमती है. जो कि मुंबई के वर्ली इलाके की बीडीडी चाल में किराए की खोली में अपनी पत्नी ओजा(इंदिरा तिवारी)और बेटे आदि के साथ रहता है. दलित होने के चलते उसने खेतों में काम करने वाले अपने माता पिता की तकलीफांे को देखा है. अपने समुदाय में वह पहला बालक था, जिसे पढ़ने का मौका मिला था. अब वह तय करता है कि जो कुछ उसके माता पिता या उसने इस समाज में झेला है,  वह सब वह अपने बेटे आदि(अक्षत दास)के जीवन में नही आने देगा.

ये भी पढ़ें-  बिना सच जाने किसी को दोषी मानना ठीक नहीं – शमीन मन्नान

मुंबई के सिद्धांत और अनुसंधान संस्थान में अय्यान अपने ब्राह्मण बाॅस डाॅ. आचार्य को खुश करने के लिए जितना अधिक प्रयास करता है, उतना ही उसे अप्रिय व्यवहार मिलता है. अय्यान इसे डाॅ.  आचार्य की बेवकूफी मानता है.

अय्यन एक अंग्रेजी माध्यम के स्कूल में अपने बेटे के प्रवेश के लिए डाॅ.  आचार्य का पत्र लेकर जाता है, मगर पता चलता है कि डाॅ. आचार्य ने स्कूल के प्रबंधक से कह दिया कि पत्र को नजरंदाज कर मैरिट पर ही प्रवेश दिया जाए. परिणामतः आदि को स्कूल मंे प्रवेश नही मिलता है. अय्यन को लगता है कि वह दलित है,  इसलिए ब्राम्हण कुल के डाॅ. आचार्य ने इस तरह उसका अपमान किया है. अपने अपमान में जल रहे अय्यन अपनी अपमान जनक कहानी विकसित कर अपने 10 वर्षीय साधारण बुद्धि के बेटे आदि को झूठ का सहारा लेकर एक गणितीय प्रतिभा के रूप में समाज के सामने लाता हैै. आदि को सिंगापुर के विज्ञान संस्थान से पुरस्कृत किया जाता है, तब उसी स्कूल की प्रिंसिपल खुद आदि को बुलाकर अपने स्कूल में प्रवेश देती है. अय्यन अपने बेटे आदि को हथियार बना, उसे रटाते हुए शिक्षकों को भी मात देता रहता है, तो वहीं आदि अपने आश्चर्यजनक गणित- सुलझाने के कौशल के साथ प्रिंसिपल का संरक्षण प्राप्त करता है. इधर अय्यन अपने तरीके से आदि को गणित व विज्ञान में महारथी साबित करता रहता है,  जिसके चलते एक दिन स्कूल की प्रिंसिपल, अय्यान से कहती है कि वह अपने संस्थान के चपरासी की तरह क्रिश्चियन धर्म को स्वीकार कर ले, तो उसे कई तरह की आर्थिक व अन्य सुविधाएं मिल सकती हैं. पर अय्यन इसे ठुकरा देता है.  अच्छी शिक्षा और प्रतिभा इंसान को न सिर्फ बेहतर जीवन जीने योग्य बनाती है, बल्कि उसे जातिवाद के चक्रब्यूह को भी तोड़ने में मदद करती है. मगर अय्यन तो कुछ और ही सोच के साथ कदम आगे बढ़ता है.

अय्यन को पता है कि पीड़ित कार्ड को खेलकर वह क्या कर सकता है,  पर इसी खेल में वह खुद को कब वास्तविकताओं से कोसो दूर लेकर चला जाता है, इसका अहसास उसे भी नहीं हो पाता. आदि की बनावटी प्रतिभा कौशल का प्रभाव मीडिया और राजनेताओ पर भी है. क्षेत्र के नेता केशव(संजय नार्वेकर) और उनकी एमबीए पास बेटी अनुजा (श्वेता बसु प्रसाद )अपने निजी स्वार्थ के चलते आदि के कौशल का उपयोग करते हैं. एक दिन ऐसा आता है, जब अय्यन,  बदले की आग में जलते हुए डां आचार्य को नौैकरी से निकलवाने में कामयाब हो जाते हैं. क्योंकि डाॅं आचार्य का माइक्रो एलियन व ब्लैक होल की खोज भी झूठ का पुलंदा ही होता है.  उसके बाद कहानी में कई मोड़ आते हैं. अंततः एक दिन यह झूठ अय्यन मणि व आदि दोनांे के नियंत्रण से बाहर हो जाता है.

निर्देशनः

बतौर निर्देशक सुधीर मिश्रा ने लंबे सम बाद पुनः वापसी की है और वह एक बार फिर इस बात को साबित करने में सफल हो रहे हैं कि उनके अंदर की आगे ठंडी नही हुई है. उन्हे आज भी सामाजिक बुराइयों और भेदभाव का अहसास है, जिस पर वह कटाक्ष करने से नहीं चुकेंगे. सुधीर मिश्रा उन फिल्म फिल्मकारों में से हैं, जिन्हे राजनीति की अच्छी समझ है. जाति-आधारित आरक्षण, पिता पुत्र का संबंध, राजनीति सहित हर मुद्दे पर सुधीर मिश्रा ने अपनी विचारधाराओं को अच्छी तरह से गढ़ने में सफल रहे हैं. अपनी पिछली फिल्मों के ही तर्ज पर ‘‘सीरियस मेन’’उन्होने एक बार फिर गरीब व बीडीडी चाल की खोली में रहने वालों की महत्वाकांक्षाओं और उनके दमन को रेखांकित किया है. वहीं निर्देशक ने अपनी फिल्म के माध्यम से सवाल उठाया है कि अपनी महत्वाकांक्षाओ व खुशी को पाने के लिए अपने बेटे के बचपन को हथियार के तौर पर उपयोग करना कितना जायज है?यह सुधीर मिश्रा के निर्देशन की ही खूबी है कि फिल्म संदेश देेने के साथ ही मनोरंजन भी करती है.

फिल्म की एक खासियत यह है कि क्रूर समाज का सर्वाधिक प्रभाव झेलने वाला आदि अंततः लड़खड़ाने लगता है, पर वह अपने चरित्र दोष को बचाने का प्रयास नही करता.

फिल्म में अनावश्यक रूप से सेक्स दृश्य व कुछ अवांछित अश्लील संवादों को पिरोया गया है, यदि फिल्मकार इससे ख्ुाद को बचा लेते तो यह फिल्म पूरे परिवार के साथ देखी जा सकती.
फिल्म में कुछ प्रतीकात्मक दृश्य काफी बेहतरीन बन पड़े हैं. मसलन-अय्यन द्वारा कब्जा किए हुए कबूतरों को पिंजड़े से मुक्त करना, पर भारी बारिश के चलते कबूतरों का पुनः वापस आ जाना. यह दृष्श् इस बात का प्रतीक है कि कैसे खुद को मुक्त करने के बावजूद अय्यन मणि अभी भी फंसे हुए हैं.

ये भी पढ़े- सुशांत से ब्रेकअप पर बोलीं सारा अली खान, करते थे ये डिमांड

अभिनयः

नवाजुद्दीन सिद्दीकी बेहतरीन अभिनेता हैं, इसमें कोई षक नही रहा. अय्यान के गुस्से को जिस तरह से वह परदे पर उकेरते हैं, उससे हर किसी को उनसे हमदर्दी हो जाती है. ओजा के किरदार में इंदिरा तिवारी का अभिनय भी अच्छा है. वैसे इंदिरा तिवारी के हिस्से फिल्म में करने के लिए बहुत कम आया है. बाल कलाकार अक्षय दास ने आदि के किरदार में जान डाल दी है. फिल्म का असली स्टार तो वही है.  डाॅ. अरविंद आचार्य के किरदार में नासर याद रह जाते हैं. राजनेता केशव के किरदार में संजय नार्वेकर और उनकी बेटी अनुजा के किरदार में श्वेता बसुप्रसाद अपने अभिनय की छाप छोड़ जाते हैं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें