सवाल
मैं 18 वर्षीय कालेज में पढ़ने वाली छात्रा हूं. मेरी समस्या यह है कि मेरे मम्मी पापा हर वक्त मुझ पर शक करते हैं. हर समय मुझ पर निगरानी रखते हैं कि मैं फोन पर किस से बात कर रही हूं. बात बात में जानने की कोशिश करती हैं कि कालेज में मैं किन दोस्तों के साथ रहती हूं. मेरे कितने दोस्त लड़के हैं और वे कौन हैं? मुझे उन का यह व्यवहार परेशान करता है. मैं क्या करूं कि वे मुझ पर शक न करें?
जवाब
देखिए, एक माता पिता होने के नाते आप के बारे में जानना आप के माता पिता का हक व जिम्मेदारी भी है. आप अपनी समस्या के समाधान के लिए उन से अपनी हर बात शेयर करें, अपने दोस्तों को उन से मिलवाएं, उन से कुछ भी छिपाएं नहीं. जब ऐसा होगा तो वे आप पर विश्वास करने लगेंगे और बात बात पर आप पर निगरानी नहीं रखेंगे. दरअसल वे आप की परवाह करते हैं इसलिए आप पर निगरानी रखते हैं.
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फोन पर ‘हैलो’ सुनते ही अंजलि ने अपने पति राजेश की आवाज पहचान ली.
राजेश ने अपनी बेटी शिखा का हालचाल जानने के बाद तनाव भरे स्वर में पूछा, ‘‘तुम यहां कब लौट रही हो?’’
‘‘मेरा जवाब आप को मालूम है,’’ अंजलि की आवाज में दुख, शिकायत और गुस्से के मिलेजुले भाव उभरे.
‘‘तुम अपनी मूर्खता छोड़ दो.’’
‘‘आप ही मेरी भावनाओं को समझ कर सही कदम क्यों नहीं उठा लेते हो?’’
‘‘तुम्हारे दिमाग में घुसे बेबुनियाद शक का इलाज कर ने को मैं गलत कदम नहीं उठाऊंगा…अपने बिजनेस को चौपट नहीं करूंगा, अंजलि.’’
‘‘मेरा शक बेबुनियाद नहीं है. मैं जो कहती हूं, उसे सारी दुनिया सच मानती है.’’
‘‘तो तुम नहीं लौट रही हो?’’ राजेश चिढ़ कर बोला.
‘‘नहीं, जब तक…’’
‘‘तब मेरी चेतावनी भी ध्यान से सुनो, अंजलि,’’ उसे बीच में टोकते हुए राजेश की आवाज में धमकी के भाव उभरे, ‘‘मैं ज्यादा देर तक तुम्हारा इंतजार नहीं करूंगा. अगर तुम फौरन नहीं लौटीं तो…तो मैं कोर्ट में तलाक के लिए अर्जी दे दूंगा. आखिर, इनसान की सहने की भी एक सीमा…’’
अंजलि ने फोन रख कर संबंधविच्छेद कर दिया. राजेश ने पहली बार तलाक लेने की धमकी दी थी. उस की आंखों में अपनी बेबसी को महसूस करते हुए आंसू आ गए. वह चाहती भी तो आगे राजेश से वार्तालाप न कर पाती क्योंकि उस के रुंधे गले से आवाज नहीं निकलती.
शिखा अपनी एक सहेली के घर गई हुई थी. अंजलि के मातापिता अपने कमरे में आराम कर रहे थे. अपनी चिंता, दुख और शिकायत भरी नाराजगी से प्रभावित हो कर वह बिना किसी रुकावट के कुछ देर खूब रोई.