दिक्कतों के साथ क्यों जीएं- श्वेता तिवारी

टीवी और फिल्म अभिनेत्री श्वेता तिवारी 2 बच्चों की मां हैं और टीवी के साथसाथ फिल्मों में भी काम कर चुकी हैं. टीवी सीरियल ‘कसौटी जिंदगी की’ में निभाए गए प्रेरणा के किरदार से ये घरघर में पहचानी जाने लगीं. 2010 में बिग बॉस 4 की विजेता बन कर वे एक मजबूत एक्टर के रूप में उभरीं. अपने पहले पति राजा चौधरी से तलाक लेने के बाद श्वेता ने अभिनव कोहली से शादी की. श्वेता पिछले दिनों अपने दूसरे पति अभिनव कोहली के खिलाफ केस कराने को ले कर सुर्खियों में थीं.

बेटे के जन्म के 3 साल बाद अब श्वेता एक बार फिर से सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के दमदार शो ‘मेरे डैड की दुल्हन’ के साथ टीवी पर वापसी कर रही हैं. पेश है, हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक इवेंट के दौरान उन से की गई बातचीत के मुख्य अंश:

अपने बेटे रेयांश के जन्म के बाद यानी करीब 3 साल बाद आप टीवी पर वापसी कर रही हैं. कैसा लग रहा है?

बहुत अच्छा लग रहा है. मैं खुश हूं कि एक बहुत अच्छे विषय और बहुत अच्छे शो के साथ वापसी कर रही हूं. बहुत कम एक्टर्स ऐसे होते हैं जिन्हे मनचाहा विषय मिलता है.

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क्या बच्चे दूसरी शादी को सहजता से लेते हैं ?

भले ही लोग कहते हों कि बच्चों पर दूसरी शादी का बुरा असर पड़ता है पर वास्तव में बच्चे बहुत मजबूत होते हैं. वे अपनी मां या पिता की दूसरी शादी न सिर्फ स्वीकार करते हैं, बल्कि इसे पौज़िटिवली भी लेते हैं. वैसे भी हर किसी की जिंदगी में चुनौतियां हैं. बच्चे हों या बड़े, शादीशुदा हों या अविवाहित चुनौतियां तो आनी ही हैं.

मां बनने के बाद ब्रेक लेना कितना जरूरी है?

ब्रेक लेना बहुत जरूरी है. भले ही नई मां से कहा जाता है कि 3 से 6 महीने बाद वापस आ जाओ मगर यह उचित नहीं. उसे और समय मिलना जरुरी है. असली काम तो 6 महीने बाद शुरू होता है. शुरू के 5 साल मां न मिले तो बच्चे का भविष्य अच्छा नहीं होगा. बच्चों को 5 सालों तक मां की बहुत जरूरत होती है. 5 सालों में बच्चों ने जितना प्यार पा लिया, जितना समझ लिया वह उन के साथ उम्र भर रहेगा. संस्कार की जो नींव पड़नी होती है वह उन 5 सालों में ही पड़ती है और बच्चे को यह संस्कार एक मां ही दे सकती है नौकर नहीं. सरकार को थोड़ा जिम्मेदार होना चाहिए और नई मम्मियों को समय देना चाहिए.

रेयांश के साथ उसकी बहन पलक की बौन्डिंग कैसी है?

पलक रेयांश को बहुत प्यार करती है. उस के लिए टौयज खरीदती है, डायपर चेंज कर लेती है, साफ कर देती है पर फिर भी अभी वह बच्ची है. अभी उसे खाना खिलाना और सुलाना नहीं आता.

आप असल जिंदगी में खुद को स्ट्रांग कब महसूस करती हैं?

असल जिंदगी में सब से ज्यादा स्ट्रांग तब महसूस करती हूं जब मेरी बेटी कहती है कि कुछ नहीं ममा सब हो जाएगा. वास्तव में आप को कमजोर या मजबूत आप के अपने बच्चे और आप का परिवार ही बनाता है. मेरे बच्चे बहुत स्ट्रांग हैं इसलिए मैं भी स्ट्रांग हूं.

दूसरी शादी में अलग होना आसान है?

मेरा मानना यह है कि यदि इंसान को दूसरी क्या पांचवीं शादी में भी दिक्कत हो तो उसे अलग हो जाना चाहिए. सवाल यह उठता है कि हम भला दिक्कतों के साथ क्यों जीएं और ये नंबर्स हैं ही क्यों? आप कई अफेयर्स करें तो ठीक है फिर कई शादियां करने में दिक्कत क्यों ? गलत व्यक्ति तो आप को दूसरी या तीसरी शादी में भी मिल सकता है. ऐसे में एक ही व्यक्ति के साथ बारबार समस्याओं का सामना करने से अच्छा है कोई दूसरी समस्या डिस्कवर करो. जहाँ भी समस्या आये तो छोड़ो और आगे बढ़ो.

आपका फैशन फंडा क्या है?

मेरा फैशन फंडा है जिस में आप कम्फर्टेबल महसूस करें वही पहनें.

अपने इस शो के बारे में बताइये. इस में आप की भूमिका क्या है?

सोनी एंटरटेनमेंट चैनल में आने वाला धारावाहिक ‘मेरे डैड की दुल्हन’ एक आधुनिक कहानी है जो यह सवाल उठाती है कि क्या किसी को जीवनसाथी बनाने के लिए सिर्फ इसलिए एक निर्धारित उम्र होनी चाहिए कि लोग क्या कहेंगे? यह कहानी एक वयस्क युवती की भावनाएं दिखाती है जो अपने पिता की ज़रूरतों और उन की सलामती के प्रति संवेदनशील है और इसलिए उम्र के दायरे से परे प्यार और शादी के विचार को स्वीकार करती है. इस शो में बेटी ने अपने पिता को बातों में उलझा कर घर में किराएदार रखने के लिए राजी कर दिया है ताकि जब वह घर से दूर रहे तो उस के पिता को कंपनी मिल सके. मैं इसी किरायेदार यानी गुनीत की भूमिका निभा रही हूं.

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अगर आप की जिंदगी में सचमुच ऐसी परिस्थिति आई तो आप का रिएक्शन कैसा होगा?

मेरे जीवन में यदि वास्तव में ऐसा हुआ तो मैं उसे सहजता से लूंगी. जैसी परिस्थिति आएगी वैसा ही मेरा रिएक्शन होगा.

आप वास्तविक जिंदगी में गुनीत के कितने करीब हैं?

व्यक्तिगत तौर पर मैं गुनीत से बहुत अलग हूं लेकिन मैं इस किरदार से काफी कुछ सीख रही हूं.मैं इस से पहले ऐसे किसी इंसान से नहीं मिली जो गुनीत की तरह सकारात्मक और महत्वाकांक्षी हो लेकिन मुझे यकीन है कि ऐसे लोग होते हैं.

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