संघर्ष आउटसाइडर को ही नहीं इनसाइडर की भी होती है – श्वेता त्रिपाठी

फिल्म ‘मसान’ से चर्चा में आने वाली अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी दिल्ली की है, उन्होंने अभिनय से पहले प्रोडक्शन असिस्टेंट और एसोसिएट डायरेक्टर का भी काम किया है. स्वभाव से हंसमुख और विनम्र श्वेता ने हमेशा कुछ नयी और चुनौतीपूर्ण काम करने की कोशिश की है. इसमें उनके परिवार का हमेशा सहयोग रहा है. अभी उनकी वेब सीरीज मिर्ज़ापुर 2 अमेजन प्राइम विडियो पर रिलीज होने वाली है, जिसे लेकर वह काफी उत्साहित है, पेश है उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

सवाल-इसमें आपके लिए क्या उत्साह पूर्ण है?

इसमें मुझे पहले सीजन की भूमिका को देखना पड़ा, क्योंकि दुसरे सीजन को आने में समय लगा. खुद की भूमिका के सारे हाव-भाव को देखना जरुरी होता है. जो मेरे लिए चुनौती होती है, उसे अगर नहीं किया गया, तो दर्शकों को ये सीजन अच्छा नहीं लगेगा. इसमें काफी ठहराव, ड्रामा, एक्शन आदि सब है.

सवाल-इस चरित्र से आप अपने आप को कितना रिलेट कर पाती है?

बिलकुल भी नहीं कर पाती, क्योंकि गोलू की दुनिया बिलकुल अलग है. मुझे तो उस भूमिका से नाईट मेयर आते है. बहुत ही मुश्किल और काम्प्लेक्स चरित्र है. अभी तक जो भी भूमिका मैंने निभाए है, उससे अलग, मुश्किल और संतुष्टि प्रदान करने वाला रहा है.

सवाल-खुद से अलग चरित्र निभाने में कितनी तैयारी करनी पड़ती है?

चरित्र की इमोशनल जर्नी को समझना सबसे अधिक मुश्किल होती है. इसके अलावा सही लेखक के साथ काम करने पर आधा काम आसान हो जाता है.

सवाल-फिल्म की सफलता में लेखक की भूमिका कितनी होती है?

सबसे अधिक उसकी ही भूमिका होती है. वे फाउंडेशन होते है, कहानी सही होने पर हर व्यक्ति उसके साथ जुड़ पाता है.

सवाल-वेब सीरीज की पकड़ को बनाये रखना कितना मुश्किल होता है?

फीचर फिल्म में आप एक थिएटर में जाकर उसे देखते है, जबकि वेब सीरीज में आप घर पर बैठकर एक के बाद एक एपिसोड देखते है अगर ये रुचिपूर्ण नहीं तो वे देखना नहीं चाहते. इसके अलावा कंटेंट भी 9 घंटे का होता है. यहां प्लाट और ट्विस्ट सबको रुचिकर बनाने की जरुरत होती है.

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सवाल-एक्टिंग में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली थी?

घर में तो कोई भी नहीं था. मैं दिल्ली में रहती थी और मेरे पिता प्रवीण कुमार त्रिपाठी आई ए एस ऑफिसर थे और माँ निशी त्रिपाठी टीचर थी, लेकिन क्रिएटिव चीजे सबको पसंद थी. मैंने बचपन से भरतनाट्यम और कथक सीखा है. इसका श्रेय पेरेंट्स को ही जाता है, क्योंकि उन्होंने कल्चरली बहुत अच्छा सहयोग दिया, जो इस क्षेत्र में जरुरी होता है. उन्होंने कभी मेरे सपनों पर नहीं हंसे, मुझे कभी निरुत्साहित नहीं किया. मेरी पहली डेब्यू आने में 8 साल लगे , लेकिन उन्होंने कभी मुझे टोका नहीं. ये सपोर्ट मीडिया से लेकर हर इन्सान को आज करने की जरुरत है, तभी देश की उन्नति होगी.

सवाल-पेरेंट्स की किस सीख को आप अपने जीवन में उतारना पसंद करती है?

मेरी जो चॉइसेस है, ये उनकी वजह से है. मसान जैसी फिल्म मैंने की. मुझे हमेशा सिखाया गया है कि जाति, धर्म, लिंग आदि सब आपके जीवन में कोई महत्व नहीं रखती. आप जो करते है उसमें विश्वास करना सबसे अधिक जरुरी है. सबकी सुने पर करें वही, जो आपका दिल और दिमाग कहे.

सवाल-दिल्ली से मुंबई कैसे आना हुआ?

घर से बाहर निकलना बहुत आवश्यक था, ताकि आप दुनिया को समझ सकें. अलग-अलग ट्रेवल करने से ही आपकी ग्रोथ होती है. मुंबई भी वैसे ही आना हुआ. मैं नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैशन टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा कोर्स पढ़ रही थी. उस दौरान मुझे जॉब मिली और मैं मुंबई आ गई. फिर धीरे-धीरे सब होता गया.

सवाल-आउटसाइडर को बहुत संघर्ष करना पड़ता है, आप इस बात से कितनी सहमत है?

संघर्ष आउटसाइडर को ही नहीं इनसाइडर की भी होती है. लोग उस बारेंमें बात नहीं करते. लोग ग्लैमर को देखते है, पर मेरी लाइफ बहुत अच्छी रही है. मुझे इंडस्ट्री में काम करते हुए 10 साल हो गए है, जिस तरह की सहयोग और प्यार मुझे इंडस्ट्री से मिला है. मैं बहुत खुश हूं और अब मैं अपने आपको इनसाइडर ही मानती हूं. मैं चाहती हूं कि ये सहयोग सबको मिले, लेकिन सबकी जर्नी एक जैसी नहीं होती. आप एक दूसरे को नीचा दिखाए वगैर आगे बढ़िए. अभी इंडस्ट्री में बहुत तकलीफें है और आप उसमें अधिक जोड़े नहीं. त्रोलिंग कर नफरत फ़ैलाने के अलावा अगर प्यार घर में महिलाएं और पुरुष एक दूसरे को करें तो समाज में भी बदलाव आयेगा.

सवाल-आप अपने पति चैतन्य शर्मा से कैसे मिली?

हम एक प्ले के दौरान मिले थे. इसके बाद फ्लाइट में मिले वहां से बातें शुरू हुई है और आजतक चल रही है.

सवाल-सफल वैवाहिक जीवन का राज क्या मानती है?

एक दूसरे को स्पेस देना, सम्मान देना और एक दूसरे के सपनो को समझकर सहयोग देना. कोई बड़ा या छोटा नहीं होता. परिस्थिति के अनुसार अपने आप को ढालना और एक दूसरे के आलोचक बनना आदि कई है, जो रिश्ते को बनाए रखती है. एक कपल को साथ में ग्रो करना जरुरी है.

सवाल-आगे क्या-क्या आने वाला है?

मिर्ज़ापुर 2 के बाद दो प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है.

सवाल-तनाव होने पर क्या करती है?

आसपास के दोस्तों और परिवार से बात करती हूं, जिससे समाधान मिल जाता है. कोई समस्या बातचीत से ही सुलझती है. वोकल होना बहुत जरुरी है.

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सवाल-क्या आगे कोई ड्रीम है?

मैं हर तरह के दृश्य करना चाहती हूं, जो लोगों को हंसाये और रुलाये और कुछ सोचने पर मजबूर कर दें. पहले मुझे माफिया क्वीन की भूमिका निभाने की इच्छा थी, पर मैं अब अपने पति के साथ एक लव स्टोरी करना चाहती हूं. जहाँ दर्शक मुझे देखकर खुश हों.

सवाल-गृहशोभा के ज़रिये क्या मेसेज देना चाहती है?

कोई भी सपना बड़ा या छोटा नहीं होता आपको करना क्या है, इसे सोचे और एक दूसरे को सहयोग करें. पूरी दुनिया में जानवर से लेकर पेड़ पौधे और मनुष्य सबकी देखभाल करें.

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