पति-पत्नी में अगर तनाव बढ़ने लगे तो करें ये काम

आज हर पुरुष और महिला अपनेअपने जीवन की प्राथमिकताओं को ले कर व्यस्त है और यही सब से बड़ा कारण है, जिस की वजह से शादी के बाद लोग तनाव के शिकार हो जाते हैं. वैसे जब 2 अनजान या एकदूसरे को जानने वाले व्यक्ति रिश्तों में बंध जाने का निर्णय लेते हैं, तो उन के इस फैसले के बाद उन की शादी उन के लिए असीम खुशियां ले कर आ सकती है तो निराशा, समस्या, गुस्सा और तनाव भरी जिंदगी में भी धकेल सकती है.

जाहिर है कि ऐसा अपने साथी द्वारा लगातार सताए जाने, आलोचना करने और नीचा दिखाने की भावना की वजह से होता है.

होता क्या है दरअसल, शादी के बाद आप के साथी की उम्मीदें आप से बढ़ने लग जाती हैं और आप अपने व्यस्त कार्यक्रमों की वजह से उन की ख्वाहिशें पूरी कर पाने में असमर्थ होती हैं. यह सिलसिला जारी रहता है और बाद में तब तनाव की वजह बन जाता है, जब कोई शादी की वजह से उपजी इन समस्याओं से निबटने के लिए शराब की मदद लेने लग जाता है, एकदूसरे से दूरी बनाने लगता है, एकदूसरे को नजरअंदाज करने लगता है या भड़ास निकालने के लिए गुस्सा करता है.

शादी 2 व्यक्तियों का मिलन है, जिस में दोनों एकदूसरे के पूरक होते हैं. हो सकता है कि दोनों में एक व्यक्ति अधिक खर्चीला हो, तो दूसरा खर्च करने से पहले सोचने की सलाह दे सकता है. या एक अंतर्मुखी हो तो दूसरा बहिर्मुखी हो सकता है. अगर ऐसा नहीं होगा तो पतिपत्नी दोनों ही जम कर खर्च करेंगे और वे कभी बचत या पूंजी निवेश नहीं कर पाएंगे.

इसी प्रकार एक व्यक्ति दूसरे की तुलना में भावनात्मक तौर पर ज्यादा जरूरतमंद हो सकता है और अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए अपनी भावनाओं को इस्तेमाल करने के ढंग से उस का अंदाजा लगाया जा सकता है. कुछ रिश्तों के मामले में यह सीखा हुआ व्यवहार हो सकता है जिस में बिना भावनात्मक दबाव के व्यक्ति की कोई इच्छा पूरी ही नहीं होती. ऐसा व्यक्ति शादी के बाद जल्दी ही इस का उपयोग करने लग जाता है.

इस का हल यह है कि दोनों लोग कुछ अच्छा समय मिल कर व्यतीत करें. ध्यान से एकदूसरे की बात सुनें और विचारों को महत्त्व दें. इस के अलावा घरेलू मुद्दों के प्रबंधन, बच्चों के भविष्य व वित्तीय मामलों की जिम्मेदारी मिल कर उठाएं.

इन बातों पर ध्यान नहीं दिए जाने की स्थिति में पतिपत्नी के बीच की खाई बढ़ती चली जाती है और धीरेधीरे यह शुरुआती चिड़चिड़ेपन की स्थिति से अलगाव में परिवर्तित हो जाती है. इस से चिंता, अवसाद, तनाव और नींद में कमी जैसे मानसिक विकार उभरने लगते हैं. इस का असर घर के माहौल पर भी पड़ता है और बच्चों में भी चिड़चिड़ापन, पढ़ाई के दौरान एकाग्रता में कमी, स्कूल से शिकायतें जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं.

देखने में यह भी आता है कि जैसेजैसे बच्चे आत्मनिर्भर होते चले जाते हैं तो जो मां पूरे वक्त उन बच्चों का खयाल रखने में व्यस्त रहती थी, अब उस के पास अचानक ही बहुत अधिक खाली वक्त हो जाता है और ऐसी स्थिति में उसे अपने पति से अधिक मदद व समय की जरूरत होती है. ऐसा संभव नहीं हो पाने की स्थिति में निराशा और चिड़चिड़ापन बढ़ने लग जाता है, परिणामस्वरूप वैवाहिक जीवन में कलह की शुरुआत हो जाती है.

ऐसी स्थिति में यह फिर से जरूरी हो जाता है कि दोनों कुछ समय मिल कर बिताएं और परेशानियों पर गौर करें. इस के अलावा महिला टहलना, व्यायाम या अध्ययन जैसी तनाव से राहत दिलाने वाली गतिविधियों में हिस्सा ले. यह भी जरूरी है कि अगर दूसरा साथी यदि किसी नई परियोजना या अपनी शौक की शुरुआत करना चाह रहा हो तो उस में मददगार बने.

संबंध सुधारने के सरल नुसखे

आगे बताए जा रहे हैं दांपत्य जीवन में आने वाले कुछ ऐसे हालात और उन के समाधान जिन का अनुसरण कर दांपत्य जीवन को तनावग्रस्त होने से बचाया जा सकता है और एकदूसरे के प्रति अपने लगाव को बढ़ाया जा सकता है.

खुद को दबा हुआ पाना

जब आप के मन में अपने सामने खड़े व्यक्ति से छोटा या कम ताकतवर होने की भावना उपजती है, तो तनाव उभर सकता है. ऐसा न हो इस के लिए आप को यह समझना चाहिए कि 2 वयस्कों के बीच प्यार के रिश्ते में साझा शक्ति ज्यादा बढि़या होती है. कार्यों को साथ मिल कर निबटाने के लिए हफ्ते में समय निश्चित करें. ऐसा भी हो सकता है कि 1 हफ्ता एक साथी अपनी पसंद का काम करे तो दूसरे हफ्ते दूसरा साथी अपनी पसंद का.

खुद की आलोचना महसूस होना

‘तुम्हारा बालों को इस तरह रखना मुझे पसंद नहीं.’, ‘तुम्हें यह स्वैटर नहीं खरीदना चाहिए था.’ जैसी आलोचनाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बजाय उस वक्त उन मुद्दों पर बातचीत करें जब दोनों का मन शांत हो. लेकिन ऐसी बातों को नजरअंदाज न करें.

साथी का आदेशात्मक रवैया

ऐसा रवैया हतोत्साहित करने वाला होता है. यहां तक कि सौम्य आदेश जैसे, ‘जाओ, मेरे लिए अखबार ला दो, हनी’ भी चिड़चिड़ेपन या तनाव को जाग्रत कर सकता है, क्योंकि हमें क्या करना है यह कोई दूसरा बताए, यह किसी को पसंद नहीं होता. इस से बेहतर पूछ लेना या अनुरोध करना होता है. अनुरोध का जवाब हां या नहीं में दिया जा सकता है, इसलिए घरेलू मुद्दों व वित्तीय मामलों जैसी जिम्मेदारियों व कर्तव्यों को आपस में बांटना भी किया जा सकता है. जैसे एक साथी सुबह की चाय तैयार करे तो दूसरा शाम की.

साथी द्वारा नियंत्रित करने की कोशिश

किस समय क्या करना है, खर्च पर नियंत्रण, दोस्ती किस से करो किस से नहीं और यहां तक कि अपने परिवार के पास कितनी बार जा सकती हो, ऐसे व्यवहार तनाव को आमंत्रित करने वाले होते हैं. जब आप का साथी आप के व्यक्तिगत फैसला लेने की ताकत छीन लेता है या आप के फैसले में भागीदार बनता है, तो तनाव उत्पन्न होना लाजिम है. ऐसे में रोजाना साथसाथ टहलने या व्यायाम करने साथ जा कर ऐसा बेहतर समय साथ मिल कर बिताएं और अपने साथी से अपने मन की बात करें.

अगर साथी न करे कोई काम

एक ऐसा साथी, जो रोजाना जीवन में प्यार से साथ मिल कर रहने के दौरान सक्रिय भूमिका निभाता है, वह दूसरे साथी को अच्छा लगता है. चाहे वह काम सुबहसुबह दोनों के लिए अंडे तलना हो या मेहमानों के आने से पहले फटाफट आसपास की सफाई करना. इन बातों से प्यार बढ़ता है. इस के विपरीत अगर कोई साथी अपनी तरफ से सक्रियता नहीं दिखाता या कोई काम नहीं करता तो यह भड़काने वाली स्थिति होती है. इस से आप के मन में उस के प्रति चिड़चिड़ापन और गुस्सा पनपता है.

नियंत्रण से बाहर होती ऐसी स्थिति में, जीवन में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए व्यक्तिगत तौर पर कुछ राहत पहुंचाने वाली गतिविधियों का सहारा लें. इस के लिए अपने पार्टनर से साथ इस पर विचार करें. परंतु ऐसा करते वक्त सावधानी बरतें. शिकायत या आलोचना जैसी हरकत आप के साथी में या तो तनाव पैदा कर सकती है या फिर आप के बीच लड़ाई की स्थिति पैदा कर सकती है. इसलिए साझा जीवन में नए नियमों के पालन हेतु साथी को राजी करने के लिए सब से अच्छे व विनम्र संचार माध्यम यानी मोबाइल वगैरह का सहारा लें और उस पर बातें ऐसी करें, जो आप के जीवन की निराशावादी तथ्यों को भगाने वाली व जीवन में खुशियां लाने वाली हों.

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सावधान: ज्यादा तनाव लेना सेहत पर पड़ेगा भारी

तनाव हमेशा बुरा नहीं होता. जब तनाव छोटे स्तर पर होता है तो यह दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने में आपकी मदद करता है, लेकिन यह काफी ज्यादा हो जाए तो आपकी सेहत के साथ आपका जीवनस्तर भी प्रभावित होता है. ज्यादा तनाव से औफिस या घर जीवन के हर क्षेत्र में आपका काम प्रभावित होगा और इससे आपके संबंध भी प्रभावित होंगे.

बार-बार सिर दर्द, बार-बार गुस्सा होने, ठीक से नींद न आने का संबंध तनाव से हो सकता है. ज्यादा तनाव के चलते व्यक्ति सहन करने की क्षमता खो देता है. इसके चलते उसका कामकाजी प्रदर्शन निचले स्तर पर चला जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव की लिमिट अलग-अलग व्यक्तियों, परिस्थितियों और व्यक्तिगत क्षमता (मानसिक और शारीरिक) के हिसाब से अलग-अलग होती है. आपका तनाव जब अपनी लिमिट को पार कर जाता है, तो यह आपके रोजमर्रा के काम को प्रभावित करने लगता है.

कैसे पहुंचाता है नुकसान

तनाव आपके सोचने-समझने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है. इसके सामान्य लक्षणों में बार-बार सिर दर्द होना, वजन घटना या बढ़ना, ठीक से नींद न आना, खाना-पीना ठीक से न होना, बार-बार बीमार पड़ना, ध्यान केंद्रित न कर पाना, मूड स्विंग होना और हाइपरएक्टिव और ओवरसेंसिटिव होना हैं. कुछ मामलों में तो डिप्रेशन भी हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘तनाव अक्सर आत्महत्या के विचारों के साथ आता है, खुद को या उसके परिजन को नुकसान पहुंचाने के विचारों को भी लाता है. इससे कोई व्यक्ति अपना आत्मसम्मान भी खो देता है. इससे बचने के लिए प्रोफेशनल्स की मदद लेनी चाहिए. यदि यह अपनी सीमा रेखा को पार कर जाता है, जिसमें कोई व्यक्ति इसे सहन नहीं कर सकता और दवाइयां काम नहीं करतीं, ऐसे में थेरेपिस्ट से कंसल्ट करना चाहिए.’

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लंबे समय तक तनाव में रहने से इम्‍युनिटी और हार्मोंस पर असर पड़ता है. नतीजतन आपको ज्यादा बेचैनी होती है और आपका ध्यान लगना कम हो जाता है. जब आपको तनाव होता है तब आप दफ्तर में मीटिंग्स, फोन पर बातचीत करने से बचते हैं. कई बार लोग जीवनसाथी से भी बात करने से बचने लगते हैं. उस समय वे खुद को असहाय पाते हैं.’

स्वास्थ्य पर असर

लंबे समय तक तनाव के रहने से दिल और ब्लड वेसल्स से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं. तनाव लंबे समय से परेशान कर रहा हो तो मस्क्युलोस्केलेटल सिस्टम, रेस्पिरेटरी सिस्टम, ओएसोफैगस बाउल मूवमेंट, नर्वस सिस्टम और रिप्राडक्टिव सिस्टम को प्रभावित करता है. इसके ज्यादा समय तक बने रहने से यह आपकी बौडी में स्ट्रेस हार्मोंस को बढ़ा देता है. कौर्टिकोस्टेरायड जैसे स्ट्रेस हार्मोंस ब्रेन के न्यूट्रान्स में केमिकल्स कम कर देते हैं, जिसके चलते याददाश्त कमजोर हो जाती है और आसपास की चीजों में व्यक्ति की दिलचस्पी कम होने लगती है. अगर आप घर या दफ्तर में कुछ खास स्थितियों से बचने की कोशिश कर रहे हों तो आप स्ट्रेस से परेशान हो सकते हैं

तनाव से निपटने का तरीका

– पिछले अनुभवों से मौजूदा कामकाज पर प्रभाव न पड़ने दें.

– असहायता, निराशा, विफलता को भूलकर अपनी ताकत पर फोकस करें.

– नियमित एक्सरसाइज, प्राणायाम और अच्छे खान-पान पर जोर दें.

– अपना बर्ताव बदलें, अवांछित चीजों के लिए ना कहना सीखें.

– कामकाज में प्राथमिकताएं तय कर उन्हें निपटाने का प्रयास करें.

– दोस्तों, परिवार के साथ अपनी बात साझा करें.

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बच्चों में बढ़ता तनाव कैसे निबटें

 चाइल्ड साइकोलौजी को समझें

काउंसलर रवि कुमार सरदाना बताते हैं कि वर्तमान समय  में बच्चों के अंदर पनप रहे तनाव, अवसाद व डर को दूर करने के लिए अभिभावकों की जिम्मेदारी अपने बच्चों के प्रति कई गुणा बढ़ गई है. उन्हें बच्चों को क्वालिटी टाइम देने के लिए गैजेट्स से थोड़ी दूरी बना कर चलना होगा, तभी वे बच्चों को समझ पाएंगे व उन्हें अपनी तरफ खींच पाएंगे. आप को बच्चा बन कर उन के साथ बच्चों जैसे खेल खेलने होंगे. चाइल्ड साइकोलौजी को समझना होगा. वे बड़ों के साथ न तो ज्यादा खेलना पसंद करते हैं और न ही उन से अपनी कोई बात साझा करना चाहते हैं. ऐसे में आप को उन को समझने के लिए उन जैसा बनना होगा, उन की चीजों में दिलचस्पी लेनी होगी. बच्चों को स्ट्रैस से दूर रखने के लिए उन्हें उन सब चीजों में इन्वौल्व करें, जिन में उन की रुचि हो क्योंकि मनपसंद चीज मिलने से वे खुश रहने लगेंगे, जो उन्हें तनाव से भी दूर रखेगा और साथ ही उन की कला को भी उभारने का काम करेगा.

कोरोना के टाइम में बच्चे घरों में बंद हैं. किसी से भी नहीं मिल पा रहे हैं. दोस्तों से खुले रूप में मिलनेजुलने  पर पाबंदियां जो हैं. खुद को हर समय चारदीवारी के पीछे पा कर अकेलापन महसूस कर रहे हैं. हर समय सब के घर में रहने के कारण घर का माहौल भी काफी तनावपूर्ण होता जा रहा है. घर में छोटीछोटी बातों पर नोकझोंक बच्चों के मन पर बहुत गहरा प्रभाव डाल रही है. ऐसे में इस नए बदलाव से उन्हें बाहर निकालने की जिम्मेदारी पेरैंट्स की है ताकि यह अकेलापन उन के मन पर इतना हावी न हो जाए कि आप के लिए बाद में उन्हें संभालना मुश्किल हो जाए. इसलिए समय रहते संभल जाएं और अपने बच्चों को भी संभालें.

आइए, आप को बताते हैं कि कैसे बच्चों में बढ़ते अकेलेपन और स्ट्रैस को कम करें:

बात नहीं सुनने पर डांटनामारना

हर बात का इलाज डांटने व मारने से नहीं निकलता है. कई बार प्यार से समझाई हुई बात भी बच्चों को वह सीख दे जाती है, जिस की आप ने उम्मीद भी नहीं की होती. कुछ घरों में यह आदत होती है कि वे बच्चों के मन में अपना डर पैदा करने के लिए उन्हें छोटीछोटी बातों पर भी डांटने लगते हैं.

यहां तक कि हाथ चलाने से भी बाज नहीं आते हैं, जिस से बच्चे खुल कर न तो पेरैंट्स से अपने मन की बात कह पाते हैं और न ही खुल कर चीजें कर पाते हैं, जो धीरेधीरे उन में अकेलेपन और तनाव का कारण बनता जाता है.

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बातबात पर शिकायत की आदत

बच्चे ने छोटी सी गलती करी नहीं कि उस की शिकायत कभी फ्रैंड्स से कर दी तो कभी परिवार में सब के सामने. ऐसा कर के भले ही आप बच्चों पर अपने बड़े होने का रोब झाड़ दें, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस से उन में हीनभावना पैदा होने लगती है? वे अंदर ही अंदर आप के इन सब कृत्यों की वजह से आप से इस कदर नफरत करने लगते हैं कि वे आप को ही अपना सब से बड़ा दुश्मन मान बैठते हैं.

आप से कोई भी बात शेयर करने से अच्छा वे बात को मन में रखना या दूसरों से शेयर करना बेहतर समझते हैं.

बच्चों के सामने पेरैंट्स की लड़ाई

डेटा की मानें तो पिछले 10 सालों की तुलना में कोविड-19 महामारी के दौरान लड़ाईझगड़ों के मामलों में काफी बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि काम का बढ़ता बोझ, खुल कर जीने पर पाबंदी, नौकरी से हाथ धोना या फिर पैसों की कमी, हर समय घर में रहना आदि कारणों से घर में हर समय क्लेश रहता है, जिस के कारण यहां तक नौबत आ जाती है कि पेरैंट्स एकदूसरे से बच्चों के सामने अभद्र व्यवहार करने में भी पीछे नहीं रहते हैं.

उन में यह समझ भी खत्म हो जाती है कि इस लड़ाईझगड़े का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा. ऐसे माहौल को देख कर बच्चे सहम जाते हैं, डर जाते हैं. यहां तक कि कई बार इस से उन की मानसिक हैल्थ भी प्रभावित होती है.

डरावनी मूवीज भी डर का कारण

आज हर जगह नैगेटिव माहौल है. ऐसे में हम घर में वही सब चीजें करना पसंद करते हैं, जो हमें अच्छी लगती हैं. हो सकता है कि आप को डरावनी मूवीज बहुत पसंद हों, लेकिन बच्चों का मन बहुत कोमल होता है. उस पर डरावनी मूवीज, डरावने वीडियोज का बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है. ऐसे में अगर आप उन के सामने ये सब देखेंगे तो भले ही वे आप के साथ उसे पूरे इंटरैस्ट के साथ देखें, लेकिन हो सकता है कि उन के मन में यह डर बैठ गया हो, जो उन की रातों की नींद को चुराने के साथसाथ इस से वे तनावग्रस्त भी होने लगें.

टीचर का डर

बच्चों में पढ़ाई व टीचर का डर बहुत ज्यादा होता है और अगर टीचर का व्यवहार बच्चों के प्रति दोस्ताना नहीं होता तो बच्चे अंदर से डरेसहमे रहते हैं. उन से न तो पढ़ाई के संबंध में कुछ पूछ पाते हैं और न ही खुल कर बात कर पाते हैं. उन्हें हर समय यही लगता रहता है कि पता नहीं कब किस बात पर डांट पड़ जाएगी. यह डर उन की क्रिएटिविटी को भी दबाने का काम करता है.

यहां तक कि कई बार औनलाइन क्लास के दौरान बच्चों के साथ कोई ऐसा मजाकिया वाकेआ हो जाता है, जिसे वे मन पर ले कर तनावग्रस्त हो जाते हैं.

बातें मनवाने के लिए डर बैठाना

अधिकांश परिवारों में बच्चों को कभी खाना खिलाने के लिए, कभी पढ़ाई करने के लिए, कभी टीवी बंद करने के लिए, कभी जल्दी सोने के लिए मजाकमजाक में कभी भूत का तो कभी किसी अन्य चीज का डर बैठाया जाता है, जिस से बच्चे प्रैशर में आ कर उस काम को कर तो लेते हैं, लेकिन उन के मन में वह डर इस कदर बैठ जाता है कि वे इस के चक्कर में डरने लगते हैं, जो उन में डर को पनपने के साथसाथ धीरेधीरे उन में तनाव का कारण भी बनने लगता है.

भले ही पेरैंट्स इसे अपना सामान्य व्यवहार समझ कर ऐसा करते हों, लेकिन आप ने अंदाजा भी नहीं लगाया होगा कि इस का आप के बच्चों पर कितना गहरा व गंभीर प्रभाव पड़ता है.

ऐसे में आप को बताते हैं कि आप अपने बच्चों को स्ट्रैस व डर के माहौल से बाहर निकालने के लिए किन बातों को अमल में लाएं:

दोस्ताना माहौल: बच्चों के स्ट्रैस में रहने का सब से बड़ा कारण यही होता है कि उन्हें घर व बाहर अच्छा माहौल नहीं मिल पाता है. ऐसे में पेरैंट्स जो अपने बच्चों के लिए रोल मौडल होते हैं, उन्हें बच्चों को दोस्ताना माहौल देना चाहिए ताकि जब भी उन के मन में किसी बात का भार हो, किसी ने उन का दिल दुखाया हो, तो वे उन्हें अपना पहला व सच्चा दोस्त मानते हुए उन से हर बात शेयर कर पाएं. जिस से उन्हें सही रास्ता मिलने के साथसाथ उन का तनाव भी कम हो.

घर में हो पौजिटिव माहौल: सभी इस बात से परिचित हैं कि जिन घरों में बच्चों के सामने लड़ाई, अभद्र शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, उन घरों के बच्चे ज्यादा डरे हुए होने के साथसाथ हो सकता है कि वे छोटी उम्र से ही आक्रामक भी हो जाएं. ऐसे में जरूरी है कि आप उन्हें घर में हैल्दी माहौल दें. उन के सामने अच्छीअच्छी बातें करें, छोटीछोटी बातों पर गुस्सा न हों, घर में हमेशा पौजिटिव माहौल बनाए रखें. किसी की भी आलोचना करने से बचें.

उन्हें खुद की बात रखने का मौका दें और उन्हें समझने की भी कोशिश करें. इस से उन में अच्छेबुरे की समझ विकसित होने के साथसाथ वे ऐसे माहौल में हमेशा खुद को खुश रख पाएंगे.

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तुलना न करें: अकसर बच्चों के आत्मसम्मान को तब ठेस पहुंचती है, जब उन की तुलना दूसरे बच्चों से की जाती है. इसलिए कभी भी उन्हें दूसरे बच्चों के सामने नीचा न दिखाएं और न ही कम नंबर लाने पर उन की तुलना दूसरे बच्चों से करें, बल्कि कम नंबर आने पर उन्हें समझाएं कि अब परेशान होने से कुछ नहीं होगा, बल्कि आगे से अच्छे तरह मन लगा कर और पढ़ाई करने की जरूरत है. हम तुम्हें हर तरह से गाइड करने के लिए हमेशा तैयार हैं. इस से उन का मनोबल बढ़ेगा.

डरावनी बातें न करें शेयर: परिवार में, दोस्तों में या फिर आसपास कई बार ऐसी घटनाएं घटित हो जाती हैं, जिन से हम बड़ों में ही इतना  डर पैदा हो जाता है कि हमें उस से बाहर निकलने में काफी वक्त लग जाता है. जरा सोचिए अगर आप का यह हाल होता है तो बच्चों का क्या होगा.

इसलिए बच्चों के सामने किसी भी तरह की दुखद घटना आदि शेयर करने से बचें और अगर किसी बहुत करीबी के साथ कुछ गलत हुआ है तो बच्चों को आप इस तरह समझाएं कि उन्हें समझ भी आ जाए और उन के मन में डर भी पैदा न हो क्योंकि बच्चे कब किस बात को किस तरह से लें, समझना मुश्किल है. ऐसे में आप की समझदारी ही यहां काम आएगी.

डर को निकालने की कोशिश: कई बार बच्चे स्कूल जाने से डरने लगते हैं, लोगों के सामने आने से कतराते हैं, अपने फैंड्स से भी दूरी बनाने लगते हैं. ऐसे में आप उन्हें डांटें नहीं, बल्कि आप की पेरैंट्स होने के नाते यह जिम्मेदारी बनती है कि आप बच्चों से इस संबंध में बात करें कि आखिर उन के डरने व लोगों को फेस नहीं करने का कारण क्या है.

अगर वजह पता चल जाए तो उस का समझदारी व प्यार से समाधान निकालने की कोशिश करें वरना आप इस संबंध में टीचर से बात करें. इस से आप अपने बच्चों की प्रौब्लम का समाधान निकाल पाएंगे और उन के मन से डर भी दूर होगा.

मोटीवेट करने वाले गेम्स: बच्चे घर में रहरह कर ऊब गए हैं, जो उन में अकेलेपन का कारण बन रहा है. ऐसे में अगर आप भी उन्हें टाइम नहीं देंगे, उन के साथ फनी ऐक्टिविटीज में शामिल नहीं होंगे, तो वे बोरियत व अकेलापन महसूस करने लगेंगे, जो उन की मैंटल हैल्थ को खराब कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि आप उन के साथ क्वालिटी टाइम बिताएं.

अगर नई चीजों को करने को ले कर उन की उत्सुकता कम होती जा रही है, तो उन्हें मोटीवेट करने के लिए उन्हें गेम्स खिलाएं ताकि जब वे अंदर से हैपी फील करने लगेंगे तो उन का मोटिवेशन भी खुदबखुद बढ़ने लगेगा.

आप भी उन्हें दोस्त मानें: अगर आप चाहते हैं कि आप के बच्चे आप के साथ हर बात शेयर करे, आप से कोई भी बात न छिपाएं तो आप को उन का दोस्त बनना होगा. इस के लिए आप उन से अपनी भी हर बात शेयर करें और उन से कहें कि यह बात मैं ने सब से पहले तुम से शेयर की है. इस से वे आप को अपना सब से अच्छा दोस्त समझने लगेंगे और अगर एक बार यह दोस्ती गहरी हो गई और इस में विश्वास ने जगह बना ली तो फिर आप के बच्चे आप को अपना बैस्ट दोस्त मानते हुए आप से हर बात शेयर करने लगेंगे.

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ऑलिव पत्तियों वाली चाय दिलाए स्ट्रेस से राहत

आज स्ट्रेस हमारे जीवन का हिस्सा बन गई है, क्योंकि आज वर्क फ्रॉम होम का बढ़ता चलन, बच्चे घरों में रहने पर मजबूर हैं, महिलाओं पर काम की ज्यादा जिम्मेदारी है. साथ ही बहुत सारी खबरें हमारे चारों तरफ फैली हुई हैं. हम इस बात से भी अनजान हैं कि बढ़ते स्ट्रेस के कारण हमारी इम्युनिटी कमजोर हो रही है. जो बाल झड़ने व दिल की समस्या के साथ सिर दर्द व तनाव का भी कारण बन रही है. कोई नहीं चाहता कि स्ट्रेस उस पर हावी हो और उसका सुकून छिन जाए. यही नहीं बल्कि आज लोग पहले के मुकाबले में ज्यादा हैल्थ कॉन्सियस हो गए हैं. वे हर सूरत में खुद को व अपनों को स्ट्रेस से दूर रखना चाहते हैं. इस के लिए अपनी डाइट में उन सभी चीजों को शामिल करते हैं, जिससे उनकी इम्युनिटी बूस्ट हो. वे स्ट्रेस से दूर रहने के लिए दिन में कई कप चाय व कॉफी का सेवन कर लेते हैं. लेकिन हम आपको एक ऐसी खास चाय के बारे में बताते हैं, जो ऑलिव की पत्तियों से युक्त है. जो आपकी इम्युनिटी को बूस्ट करने के साथसाथ आपके स्ट्रेस को भी कम करने में मददगार साबित हो सकती है.

क्यों है खास

आज के लाइफस्टाइल में स्ट्रेस से बचना शायद मुश्किल हो, लेकिन अगर आप रोजाना ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय का सेवन करेंगे, तो ये आपके दिमाग को रिलैक्स करने, नसों को शांत करने, आपके मूड को ठीक करने व आपकी स्लीप क्वालिटी को ठीक करने में मदद कर सकती है. यकीन मानिए आप खुद बदलाव महसूस करेंगे.

इम्युनिटी को बढ़ाए

हालिया अनेक अध्ययनों से यह साबित हुआ है कि ऑलिव की पत्तियों में पोलीफेनोल एन्टिऑक्सीडेंट होता है, जिसमें बहुत ज्यादा फ्री रेडिकल्स से लड़ने की क्षमता होती है. इसमें मुख्य फेनोल तत्व ओलियूरोपियन होता है, जो इम्युनिटी को बढ़ाने का काम करता है. साथ ही फेनोल के साथ फ्लेवोनोइड्स इसे और पावरफुल एन्टिऑक्सीडेंट बना देता है. इसमें ग्रीन टी की तुलना में दोगुने एन्टिऑक्सीडेंट भी होते हैं, जो इसे ग्रीन टी से खास बनाते हैं.

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ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखने में सहायक

इसमें ओलियूरोपियन तत्व होता है. जो नेचुरल तरीके से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का काम करता है. बता दें कि ब्लड प्रेशर व स्ट्रेस सीधे तौर पर एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. जबकि ऑलिव की पत्तियों को स्ट्रेस को कंट्रोल करने के लिए बहुत ही असरदार थेरेपी माना जाता है.

दिल को रखे सेहतमंद

अनेक अध्ययनों से यह पता चला है कि ऑलिव लीफ के नियमित सेवन से यह बैड कोलेस्ट्रॉल को आपकी रक्त धमनियों में जमने से रोक सकता है. जिससे शरीर में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. जिससे यह आपके दिल की सेहत का खास ध्यान रखने का काम करता है.

वजन का भी ध्यान

आज हमारे खराब लाइफस्टाइल की वजह से हम में से अधिकांश लोग मोटापे की समस्या से परेशान हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऑलिव की पत्तियों में पाया जाने वाला ओलियूरोपियन तत्व बॉडी के फैट को कम करने में सहायक है, साथ ही मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है. जिससे धीरेधीरे शरीर फिगर में आने लगता है, क्योंकि ये हमारी बारबार की भूख को शांत करके हमें ओवरईटिंग की आदत से दूर जो रखता  है.

डायबिटीज कंट्रोल करने में सहायक

आज बच्चों से लेकर बड़ों तक हर कोई डायबिटीज का शिकार हो रहा है. और इसके लिए हमारा खराब लाइफस्टाइल जिम्मेदार है. लेकिन ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय आपकी शुगर को भी कंट्रोल करने में मददगार हो सकती है. ये ब्लड में इंसुलिन के लेवल को रेगुलेट करता है, जिससे ब्लड शुगर को अच्छे से मैनेज कर पाता है.

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नो कैफीन ओरिजिनल फ्लेवर

हम खुद को स्ट्रेस से दूर रखने के लिए दिन में कईकई बार चाय, कॉफी व ग्रीन टी का सेवन करते हैं. जिससे भले ही आप खुद को तरोताजा और ऊर्जावान पाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके अधिक सेवन से आपको बेचैनी, नींद में खलल, सिरदर्द जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है. फिर चाहे बात हो ग्रीन टी की, क्योंकि इसमें भी कैफीन होता है, जिससे आपको इसकी लत पड़ जाती है. लेकिन ऑलिव की पत्तियों से युक्त चाय आपके पूरे दिन को फ्रैश बनाने का तो काम करेगी ही, साथ ही आपको बीमारियों से दूर रखकर आपके स्ट्रेस को भी कम करेगी. इसमें कैफिन भी नहीं होता. तो फिर हो जाए दिन की शुरुआत ऑलिव की पत्तियों की खूबियों से भरपूर चाय से.

फर्टिलिटी और जिंदगी को कैसे प्रभावित करता है तनाव? जानें यहां

श्रीमती नैना अरोरा फर्टिलिटी क्लीनिक में अपनी बारी आने का इन्तजार कर रही थी तभी उन्हें एक पोस्टर दिखा जिस पर समझदारी (माइंडफुलनेस) के मह्त्व के बारे में लिखा गया था. इसने अचानक से नैना का ध्यान अपनी ओर खींचा. वह पिछले 2 साल से गर्भधारण की कोशिश कर रही थी लेकिन दूसरे सेमेस्टर में ही उनका बच्चा पेट में ख़राब हो जाता था.  इसे लेकर वह बहुत चिंतित थी क्योंकि वह नही जानती थी कि इसका परिणाम क्या होगा. उसने उत्साहपूर्वक माइंडफुलनेस प्रोग्राम में यह सोचते हुए साइन इन किया कि इससे उसकी समस्या को हल करने में सहूलियत मिलेगी.

ऐसा समय जब अनिश्चितता और डर हर तरफ फैला हुआ है तो माइंडफुलनेस रोजमर्रा की जिंदगी का एक अभिन्न अंग बन गया है. तनाव के परिणामस्वरूप न केवल गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं, बल्कि कई फर्टिलिटी और फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं भी होती हैं. दुनिया भर के फर्टिलिटी एक्सपर्ट माइंडफुलनेस के लिए सलाह देते हैं जिसमें योग, मेडिटेशन और सीखने की व्यवहार तकनीक शामिल होती है.  इन तकनीको में इलाज के बेहतर परिणाम के लिए नकारात्मक विचारों पर काबू पाना शामिल होता है.

फर्टिलिटी और स्ट्रेस (तनाव) के पीछे का विज्ञान

इस बारें में कई स्टडी हुई है जिससे पता चला है कि महिला के जीवन में बहुत ज्यादा तनाव उनके गर्भवती होने की संभावनाओं को प्रभावित कर रहा है. हमारा शरीर भी तनाव के स्तर को समझता है. यही एक कारण है यह महिला के गर्भधारण की संभावना को प्रभावित करता है क्योंकि बच्चा पैदा करने के लिए तनाव अच्छा नही होता है. इसके अलावा, यह भी देखा गया है कि तनाव से पीड़ित महिला अक्सर कम इन्टीमेट होती है और जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए वह अक्सर शराब और तंबाकू का सेवन करने लगती है. और इस तरह की आदत महिला के गर्भवती होने की संभावना को और भी बदतर बना देता है.

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वहीं ग्रुप थेरेपी, व्यक्तिगत संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी, और गाइडेड इमेजरी जैसी रिलैक्सेशन तकनीकों से तनाव कम करने से कुछ माँ बनने में असफल  महिलाओं को गर्भवती होने में मदद मिली है. इसके पीछे कारण यह है कि कोर्टिसोल जैसे तनाव हार्मोन मस्तिष्क और अंडाशय के बीच सिग्नलिंग को बाधित करते हैं, जो ओव्यूलेशन को बढ़ा सकते हैं. लेकिन जब हम माइंडफुलनेस की प्रैक्टिस करते हैं तो इस समस्या से निजात पाई जा सकती है और इसका रिजल्ट सकारात्मक आ सकता है.

स्ट्रेस का निवारण करना

सीडीसी के अनुसार  माँ बनने की उम्र वाली 10 में से 1 महिला को गर्भवती होने में परेशानी महसूस होती है या बिना किसी परेशानी के वह गर्भधारण नहीं कर पाती है. वहीं जब महीनो के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पाता है तो फिर तनाव हावी होने लगता है. यह वही समय होता है जब दिमाग और शरीर को आराम देने वाले प्रोग्राम मददगार साबित होते हैं. इन प्रोग्राम का लक्ष्य विभिन्न एप्रोच के जरिये, जिसमे बातचीत करने की थेरेपी शामिल होती, तनाव को कम किया जाए. कई महिला इस नकारात्मक विचार से कि ‘वे कभी माँ नहीं बन सकती है’ से भी पीड़ित हो सकती है. इसके लिए वे खुद को दोष दे सकती है.

एक्सरसाइज

तनाव कम करने और प्रजनन क्षमता बढ़ाने के लिए शारीरिक रूप से एक्टिव रहना बहुत जरूरी होता है.  मध्यम रूप से काम करना – उदाहरण के लिए सप्ताह में 1 से 5 घंटे के लिए गतिविधियों में लिप्त रहने से गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है. साथ ही जो महिलाएं ज्यादा मेहनत वाला काम करती हैं उनमे भी गर्भवती होने की संभावना कम हो जाती है.

वजन

तनाव होने से हम भावनात्मक आराम के लिए बहुत ज्यादा चीजें खाने लगते हैं. ज्यादा वजन या मोटापा होने से गर्भवती होना मुश्किल हो जाता है. कुछ रिसर्च बताते हैं कि जो महिलाएं मोटापे से ग्रस्त हैं उन्हें गर्भधारण करने में अन्य महिलाओं की तुलना में तीन गुना ज्यादा परेशानी हो सकती है.

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स्वस्थ डाईट

हमारे तनावपूर्ण समय के दौरान हम प्रोसेस्स्डए शुगर से भरपूर खाद्य पदार्थों को खाने लगते हैं. लेकिन अध्ययनों ने साबित कर दिया है कि जो महिलाएं साबुत अनाज, ओमेगा-3 फैटी एसिड, मछली और सोया से भरपूर मेडीटेरियन डाईट का पालन करती हैं, उनके गर्भधारण की संभावना उन लोगों की तुलना में ज्यादा होती है जो बहुत ज्यादा फैट वाले, भारी प्रोसेस्स्ड डाईट खाती हैं.

नोवा आईवीऍफ़ फर्टिलिटी, नई दिल्ली के फर्टिलिटी कंसल्टेंट डॉ अस्वती नायर 

Health tips: तनाव दूर करने के 5 आसान टिप्स

आप वास्तव में स्वस्थ रहना चाहती हैं, तो शरीर के साथसाथ दिमाग को भी स्वस्थ रखें. कई दफा बीमारियां और शारीरिक पीड़ाएं मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक पहलू से भी जुड़ी होती हैं, जिन पर आमतौर पर हम ध्यान नहीं देते. उदाहरण के लिए फाइब्रोसाइटिस को ही ले लें. यह ऐसी स्थिति है जिस से मांसपेशियों में दर्द, नींद और मूड से संबंधित समस्याएं हो सकती है. यह समस्या पुरुषों से कहीं ज्यादा महिलाओं में दिखती है और यह ताउम्र भी रह सकती हैं. इस की कई वजहें हो सकती हैं जैसे आर्थ्राइटिस, संक्रमण या फिर व्यायाम की कमी. ऐसे में जरूरी है कि शरीर के साथसाथ मानसिक सेहत का भी खयाल रखा जाए.

स्वास्थ्य पर असर

मानसिक बीमारियों की शुरुआत डिप्रैशन से होती है. एक व्यक्ति जब किसी बात को ले कर थोड़े समय के लिए उदास होता है, तो उस के खतरनाक नतीजे नहीं होते. मगर जब उदासी लंबे समय तक बनी रहे तो यह डिप्रैशन में बदल जाती है और व्यक्ति हमेशा उदास, परेशान, तनहा रहने लगता है, नकारात्मक बातें करता है और दूसरों से मिलने से कतराता है. इस का असर उस के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है.

दिल्ली जैसे महानगरों में लोग डिप्रैशन के साथसाथ टैंशन के भी शिकार हो रहे हैं. एक तरफ अधिक से अधिक रुपए कमाने की जरूरत तो दूसरी ओर रिश्तों में बढ़ रहा तनाव और एकाकी जीवन लोगों में टैंशन यानी तनाव बढ़ा रहा है.

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वर्ल्ड हैल्थ और्गेनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक भारत में 35% से ज्यादा लोग ऐक्सरसाइज करने में आलस करते हैं. शारीरिक रूप से कम सक्रियता व्यक्ति के लिए दिल की बीमारियों, कैंसर, डायबिटीज और हड्डियों के रोगों के साथसाथ मानसिक रोगों का भी खतरा बढ़ाती है.

इन बातों का रखें खयाल

व्यायाम करें: व्यायाम करने से ऐंडोर्फिन हारमोन का संचार बढ़ता है. यह एक ऐसा हारमोन है जो दर्द और तनाव से लड़ता है और अच्छी नींद लाने में सहायक होता है. रोज स्ट्रैचिंग, वाकिंग, स्विमिंग, डांसिंग जैसे व्यायाम मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाते हैं.

सामाजिक बनें: अध्ययनों के मुताबिक जिन लोगों को सामाजिक सहयोग मिलता है वे तनाव, डिप्रैशन और दूसरे मानसिक रोगों से दूर रहते हैं. फिर अपनी समस्याओं को दूसरों से डिस्कस करने पर नए रास्ते भी मिलते हैं और तनाव भी घटता है.

पसंदीदा काम करें: अकसर लोग अपनी हौबी के लिए समय नहीं निकाल पाते, जो ठीक नहीं है. अपनी हौबी को अपनाएं. इस से जीवन के प्रति उत्साह बढ़ता है और सोच सकारात्मक होती है. अपने अंदर की रचनात्मकता को बाहर लाएं. यह कोई भी काम जैसे लेखन, बागबानी, कौमेडी, कुकिंग आदि कुछ भी हो सकता है.

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किसी के लिए कुछ कर के देखें: अपने लिए तो हम सभी जीते हैं, मगर कभीकभी दूसरों के लिए भी कुछ कर पाने की खुशी मन से मजबूत बनाती है. किसी की मदद करना, किसी अजनबी को कुछ देना या फिर अपनों के काम आना जैसे कार्य आप को आनंद से भर देंगे. यानी लोगों की तारीफ करें और उन्हें खुशी दें.

दूसरों की परवाह न करें: लोग क्या सोचेंगे, क्या कहेंगे जैसी बातें अकसर हमारे दिमाग के संतुलन को बिगाड़ देती हैं. इसलिए दूसरों की परवाह किए बगैर वह करें जो आप को सही लगे.

खुश रहें स्वस्थ रहें

आज के दौर में हर कोई किसी ना किसी परेशानी से जूझ रहा है. ये परेशानी तब और ज्यादा बढ़ गयी जब से कोरोना महामारी ने अपनी दस्तक दी. ऐसे में तनाव, चिंता और मूड को सही रखना भी जरूरी है. हमारे अंदर इमोशन ही तो हैं जो समय समय पर बदलते रहते हैं. तमाम विशेषज्ञों और उनकी शोध के मुताबिक हमारा व्यवहार, तनाव को नियंत्रित करने के लिए काफी मददगार होता है.

हम जब भी परेशानी में होते हैं तो उसमें ख़ुशी ढूंढना काफी मुश्किल काम है. परेशानी तनाव का सबसे बड़ा सबब बन सकती है. हमें ऐसे समय में खुश रहने की सबसे ज्यादा जरूरत है, जब चारों तरफ से नकारात्मकता हमारे ऊपर हावी हो रही हो. यकीन मानिये ये बिलकुल भी नामुमकिन नहीं है.
ये कैसे करना है, चलिए जानते हैं.

1. तनाव से रहें दूर-

तनाव हमारे लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है. अगर हम खुद को इससे जितना हो सके दूर रखेंगे उतना ही फायदा हमें ही मिलेगा. कोरोना महामारी के प्रकोप के बीच स्थितियां भी कुछ यूं हो गयी हैं कि तनाव पास ही आ रहा है. ऐसे में ब्लडप्रेशर को समान्य रखना भी काफी जरूरी है. इसलिए अच्छी हेल्थ और ख़ुशी के लिए डॉक्टर भी आपको तनाव से दूरी बनाने की अच्छी सलाह देंगे.

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2. कितना काम का ध्यान?-

काफी लोग होते हैं जो अपनी परेशानी के दौर में ध्यान लगाना पसंद करते हैं. लेकिन हर कोई ध्यान नहीं लगा सकता. कुछ लोग शांति का अभ्यास तो करते हैं लेकिन उनको सफलता नहीं मिलती. ऐसे में जरूरी है कि अगर आप भी ध्यान लगाने में अपना मन एकाग्र नहीं कर पाते तो कोई और रास्ता ढूंढें जो आपको शांति और ख़ुशी दे. आप उन बातों के बारे में ना सोचें जो आपको तनाव देती हैं.

3. ना छोड़ें उम्मीद-

उम्मीद ही तो मात्र एक ऐसी चीज होती है जिस पर पूरी दुनिया टिकी हुई है. उम्मीद के जरिये आप बड़ी से बड़ी मुश्किल परिस्थियों में खुद को ख़ुशी महसूस करा सकते हैं. अगर आपने नकारात्मक परिस्थिति में सब कुछ सकारात्मक बनाए की ठान लें तो आपको जीत जरुर मिलेगी.

4. कहीं ज्यादा सकारात्मकता ना पड़ जाए भार-

जी हां आगे आप हर वक्त सकारात्मकता के बारे में ज्यादा ध्यान देते हैं या खुश रहने के बारे में ही सोचते रहते हैं तो ये आर्टिफिशियल या बनावटी लग सकता है. कभी कभी इसका प्रभाव उल्टा भी पड़ सकता है. क्योंकि हम जितना ध्यान अपनी ख़ुशी की ओर केन्द्रित करते हैं उतना ही मन उदास होता है. और आप कभी कभी खुद के बारे में बुरा भी महसूस कर सकते हैं.

5. छोटी-छोटी चीजों पर दें ध्यान-

ये विकल्प आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है. कभी कभी हमें छोटी से छोटी चीजें भी वो ख़ुशी देती हैं, जो बड़ी चीजें नहीं दे पाती. विशेषज्ञों की मानें तो सकारात्मकता मनोविज्ञान पर आधारित होती है. हमारा छोटी सी चीज भी मूड बेहतर बना सकती है तो फिर खुद सोचिये किसी बड़ी ख़ुशी के पीछे भागने से क्या फायदा?

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6. खुद को खोजिये-

परेशानी के बीच इंसान खुद के अस्तित्व को भुलाने लगता है. ऐसे में आपको खुद को खोजना चाहिए. आप अपना समय घर की साफ़ सफाई में लगाइए. इससे आपका मन केन्द्रित रहेगा. क्योंकि एक गंदा कमरा भी कहीं ना कहीं सकारात्मकता पर असर डालता है. साथ ही गंदा रसोई आपके स्वाश्थ्य को खराब करता है. इसलिए अगर आप घर में अपना समय बिताते हैं तो अपना समय साफ़ सफाई में लगाएं. इससे आप संक्रमण से भी बचे रहेंगे और आपकी हेल्थ भी सही रहेगी.

7. सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर हो कंट्रोल-

इस बात से ऐतराज नहीं किया जा सकता कि सोशल मीडिया बुरी खबरों से भरा हुआ है. हालांकि आप इसके जरिये खुद को अपडेट रखने के साथ अपने दूर दराज के दोस्तों और परिजनों के साथ जुड़े रहने का मौका भी मिलता है. आप सोते वक्त सोशल मीडिया का इस्तेमाल ना करें. आप अपने परिवार वालों के साथ या उन लोगों के साथ समय बिताएं जो आपके अपने हैं और आपके करीब हैं. इससे आपको ख़ुशी मिलेगी.

तो ये कुछ ऐसी टिप्स हैं, जिनकी मदद से आप बड़ी से बड़ी परेशानी को हराकर अपने लिए ख़ुशी के दो पलों को चुरा सकते हैं. इस वक्त पूरा विश्व ऐसे दौर से गुजर रहा है जहां चारों ओर नकारात्मकता ही है. ऐसे में आपको अपना ख़ास ख्याल खुद ही रखना है. आप खुद को तनाव मुक्त तभी बना पाएंगे जब आप परेशानी से दूर रहेंगे. और आपको परेशानी से दूर कैसे रहना है उसके लिए आपकी मदद हमारा ये लेख करेगा.

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यह एक लंबा समय रहा है कि हम कोविड 19 जैसी महामारी के साथ रह रहे हैं, और हमारे राष्ट्र और प्रिय लोगों की स्थिति के साथ बुरे से बदतर होता देख , दुखी , तनावग्रस्त और उदास महसूस करना सामान्य है. ये समय आसान नहीं हैं, और ऐसे में खुद को यह विश्वास दिलाना की एक दिन सब बेहतर हो जाएगा , बहुत मुश्किल है. अगर आप भी तनाव महसूस कर रहे हैं और बेचैनी को झेलना मुश्किल हो रहा है, तो आप भी अपने मन को शांत करने के लिए एसेंशियल ऑयल की मदद ले सकते हैं.

स्ट्रेस दूर करने में काम आते हैं ये एसेंशियल ऑयल :

तनाव से भरा दिमाग़ शायद आजकल देशभर में एक आम बात हो गई है. कोरोना वायरस की महामारी से आज पूरी दुनिया जूझ रही है. ऐसे में हम आशा करते हैं कि सभी इस आपदा से मज़बूती से लड़ेंगे. आप जानते हैं कि तनाव, उदासी और डिप्रेशन आपके हार्मोन पर बहुत बुरा प्रभाव डाल सकते हैं और शारीरिक बीमारी और मानसिक बीमारी का कारण बन सकते हैं. ऐसे में  खुद को शांत करने के लिए एसेंशियल ऑयल का उपयोग करना चाहिए. अपने आप को आराम देने के लिए आप इन तेलों को अलग-अलग तरीकों से उपयोग में ला सकते हैं ,  जैसे कि  इसे अपने नहाने के पानी में उपयोग कर सकते हैं , या अपने पैरों पर लगा सकते हैं , या अपने कमरे में छिड़क सकते हैं. हमने उन तेलों की एक सूची तैयार की है , जिनका आपको इस समय में उपयोग करना चाहिए:

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1. चंदन का तेल

आपको तनाव से मुक्त करने के लिए सबसे अच्छा तेल चंदन का तेल है. आप इसे एक डिफ्यूज़र या अपने नहाने के पानी में डाल सकते हैं या हर दिन इत्र के रूप में उपयोग कर सकते हैं और यह निश्चित रूप से यह आपको तनाव मुक्त कर  देगा. यही कारण है कि लोग चंदन का उपयोग तिलक के रूप में करते हैं क्योंकि यह आपके दिमाग को तुरंत ठंडा कर देता है.

2. जैस्मीन ऑयल

एक अन्य तेल जो तनाव और डिप्रेशन से निपटने में बहुत मदद करता है, वह है जैस्मिन ऑयल. यह तेल शादियों और मंदिरों में बहुत उपयोग किया जाता है क्योंकि यह तेल आपको तुरंत शांत करता है और आपकी मसल्स को आराम देता है.

3. रोज़ ऑयल

चिंता का इलाज करने के लिए एक और  अद्भुत तेल है , वो है रोज़ ऑयल या गुलाब का तेल है. इस तेल का आप अपने नहाने के पानी में या इत्र के रूप में प्रयोग करें.

4. लैवेंडर ऑयल

हम सभी कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देख वास्तव में चिंतित हैं. वायरस से जुड़ी हर रोज़ आ रही ख़बरें हम सभी को काफी तनाव दे रही हैं जिससे रात में नींद आने में भी तकलीफ होती है , इसलिए नींद आने में मदद करने के लिए आप लैवेंडर ऑयल का उपयोग करें. यह तेल एक  एंटी-स्ट्रेस और एंटी-वायरल तेल है जो आपको सोने में मदद करता है. आप अपने मन को शांत करने के लिए इसे डिफ्यूज़र या अपने नहाने के पानी में इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर आप इसकी कुछ बूंदें लें और अपने पैरों के तलवों और हथेली पर मलें  जिससे आपको सोने में सहायता मिलेगी.

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5. इलंग इलंग ऑयल

अपने घर के बुजुर्गों की देखभाल करना महत्वपूर्ण है. उनके पास कई ऐसी समस्या होती है जिन्हे वे किसी से नहीं बताते. उनकी चिंता और डिप्रेशन को दूर करने में , उनकी मदद करने के लिए इलंग इलंग ऑयल का उपयोग करें. नहाने के बाद इसे उनके बालों पर लगाएं, या आप उनके  पैरों को इलंग इलंग के पानी में भिगो सकते हैं या वे इसे हर दिन इत्र के रूप में भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

तनाव इंसान की सेहत को किस हद तक बिगाड़ सकता है, यह बात किसी से छुपी नहीं है. स्ट्रेस से शरीर की सुंदरता को भी नुकसान पहुंचता है. यही वजह है कि सेहत सौंदर्य और खुशी के लिए तनाव दूर किया जाना बेहद जरूरी होता है. तो यह कुछ एसेंशनल ऑयल है जो जरूर आपको तनाव से मुक्त कर देंगे और आप फिर से अच्छा महसूस करेंगे.

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तनाव या कहें तो स्ट्रेस आज लोगों के बीच आम हो चुका है. अगर समय रहते इस समस्या को काबू नहीं किया गया तो इसके नतीजे बुरे हो सकते हैं. स्ट्रेस के कारण ना सिर्फ मानसिक अशांति होती है, बल्कि भूख, और नींद पर भी इसका असर होता है. इस खबर में हम आपको उन संकेतों के बारे में बताएंगे जिनसे आप स्ट्रेस के बारे में समझ पाएंगे.

आइए जाने उन संकेतों के बारे में…

1. नींद ना आना

जब आप तनाव में होते हैं, नींद नहीं आती. कई बार आप सोना चाहते हैं पर आपको नींद नहीं आती. रातभर जागना, मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से लोग पूरी नींद नहीं ले पाते है और इसका असर शरीर पर दिखता है.

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2. वजन का बढ़ना

जब आप ज्यादा तनाव में होते हैं, आपके हार्मोंस पर असर पड़ता है. इसका ये नतीजा ये होता है कि वजन बढ़ने लगता है.

3. पेट में दर्द और जलन

अगर आप ज्यादा बाथरूम जाते हैं. चिंता और तनाव की वजह से होता है कि आपको बार बार बाथरुम का चक्‍कर लगाना पड़ता है। पेट में दर्द होना और हार्ट बर्न होना भी इसकी समस्‍या है.

4. चिड़चिड़ाहट

तनाव में चिड़चिड़ाहट बेहद आम है. मरीज को छोटी छोटी बातों से काफी उलझन होती है. किसी से सही तरीके से बात नहीं करते है और हर छोटी सी बात पर परेशान हो जाते हैं. अगर लंबे समय तक आपको ऐसी परेशानी हो रही है तो सतर्क हो जाइए.

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5. गैरजरूरी बातों को सोचते रहना

अगर आप लगातार गैर जरूरी बातों को सोचते रहते हैं, तो समझ जाइए कि आप तनाव में हैं. ऐसा इस लिए होता है क्योंकि इस दौरान आप बहुत ज्यादा सोचने लगते हैं, आप चीजों पर फोकस नहीं कर पातें, जिसके बाद आपके दिमाग में गैरजरूरी बातें आने लगती हैं, आपका कौंफिडेंस भी कम होने लगता है.

6. सख्त होने लगते हैं मसल्स और ज्वाइंट्स

अक्सर ज्यादा स्ट्रेस लेने से कंधों में, जोड़ो में परेशानी होने लगती है. कभी कभी सर से ले कर पांव में एंठन होती है. ये सब ज्यादा तनाव के कारण होता है.

स्ट्रैस भी दूर करती है बुनाई

आंकड़ों के अनुसार 2020 में 80% भारतीय काम, हैल्थ व अन्य आर्थिक कारणों से स्ट्रैस की गिरफ्त में आए हैं. यही नहीं, दिनप्रतिदिन किसी न किसी कारण से हम स्ट्रैस का शिकार होते हैं, जिस से उबरने के लिए हम ऐंटीस्ट्रैस चीजें करने के बारे में सोचने को विवश हैं ताकि हम खुश रह सकें, प्रोडक्टिव सोच सकें व स्ट्रैस से खुद को बाहर निकाल सकें.

ऐसे में हाल के समय में बुनाई स्ट्रैस से बाहर निकालने का बहुत ही बेहतरीन विकल्प है, जबकि बुनाई को ले कर कुछ लोगों का मानना है कि इस से इंसान सुस्त, आलसी बनता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बुनाई से आप ऐक्टिव रहते हैं, चीजों पर अच्छी तरह फोकस कर पाते हैं, रिलैक्स मूड में रहते हैं, नैगेटिव चीजों से दूर रहते हैं, यह कहना भी ज्यादा नहीं होगा कि यह हमारे ब्रेन के लिए स्ट्रैस बस्टर का काम करती है.

जानते हैं, बुनाई से हमें क्याक्या फायदे मिलते हैं:

मैडिटेशन का काम करे

जिस तरह मैडिटेशन से आप का मन शांत हो कर आप खुद पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं, उसी तरह बुनाई से आप एक जगह ध्यान लगा कर यानी अपने बुनाई के लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर के खुद को तनाव से दूर रख पाते हैं.

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अनेक शोधों में यह साबित हुआ है कि बुनाई उन लोगों को तनाव से राहत देने का काम करती है, जो जल्दी उत्साहित हो जाते हैं, तनाव में आ जाते हैं या फिर छोटीछोटी बातों को ले कर टैंशन ले लेते हैं, यह उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ रखने में मदद करती है.

आप ने कई बार नोटिस किया होगा कि आप परेशान होने पर अपने हाथपैरों को हिलाते होंगे या फिर पेन से खेलते होंगे. आप में से कुछ लोगों ने इन संवेदनाओं को महसूस किया होगा या कुछ ने इस से मिलताजुलता किया होगा. जानेअनजाने में, हमारा ब्रेन इस तरह की गतिविधियों में शामिल हो कर हमारी परेशान होने वाली भावनाओं को कम करने में मदद करता है. उसी तरह जब हम बुनाई के जरीए एक ही चीज को बारबार दोहराते हैं तो उस से हमारे ब्रेन में हैप्पी हारमोंस सक्रिय हो कर हमें रिलैक्स करने के साथ ही हमें खुश करने का काम भी करते हैं.

बुनाई एक तरह से मैडिटेशन के समान है, क्योंकि जिस तरह आप मैडिटेशन के दौरान अपने पूरे ध्यान को सांस लेने पर केंद्रित करते हैं, उसी तरह बुनाई में भी ज्यादातर कार्य आप के हाथों पर केंद्रित होता है.

रखे प्रोडक्टिव

आलसी बने रहने व काम न करने के कारण भी हम धीरेधीरे स्ट्रैस की गिरफ्त में आने लगते हैं या यह कह सकते हैं कि यह स्ट्रैस का एक महत्त्वपूर्ण लक्षण है.

लेकिन जब हम बुनाई के जरीए एक ही चीज को बारबार दोहराते हैं तो हमें अच्छा महसूस होने के साथसाथ हमें यह भी लगता है कि हम ने आज कुछ बेहतर किया है, जिस की शायद हम ने उम्मीद भी न की हो. इस की खास बात यह भी है कि आप बुनाई करते हुए दूसरे काम भी कर सकते हैं. जैसे आप नैटफ्लिक्स या फिर टीवी पर अपना फैवरिट प्रोग्राम अथवा फिर सीरीज भी देख सकते हैं यानी एकसाथ दो काम.

बुरी आदतों से दूर रखे

हर समय स्ट्रैस में रहने से आप का मानसिक स्वास्थ्य बिगड़ने के साथसाथ अन्य मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं, जैसे गंभीर अवसाद, ज्यादा खाने की आदत, ऐनोरेक्सिया आदि जो आप की मुश्किलों को और बढ़ा सकते हैं, जबकि बुनाई एक सामान्य सी गतिविधि है, फिर भी आप को अन्य गंभीर विकारों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार करती है.

सेहत वाले लाभ

जो लोग दिल से संबंधित बीमारी या फिर अन्य समस्याएं जैसे पोस्ट ट्रोमैटिक स्ट्रैस डिसऔर्डर, तनाव, क्रोनिक पेन आदि समस्याओं से ग्रस्त होते हैं, उन के लिए अपने जीवन में स्ट्रैस को दूर करने के लिए कुछ स्ट्रैस से राहत देने वाली गतिविधियों को करना जरूरी होता है. ऐसे में बुनाई भी एक ऐसी गतिविधि है, जिसे इन स्थितियों में थेरैपिस्ट भी करने की सलाह देते हैं.

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इसलिए बिना किसी हिचकिचाहट आप बुनाई को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना लें और अपनी जिंदगी को तनावरहित हो कर जीएं.

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