सफलता के लिए जरुरी है दृढ़ संकल्पी होना

इस दुनिया में अनेको  ऐसे लोग हैं जिन्होंने अपने दृढ़ संकल्प के बल पर मनचाही सफलता प्राप्त  की है . बिना विचलित हुए दृढ़ संकल्प और कर्म कर अनगिनत लोगों ने आश्चर्यजनक सुपरिणाम हासिल किये हैं. किसी परेशानी, मुसीबत और बाधा से उनके कदम रुके नहीं. वे अपने संकल्प को ध्यान में रख जुटे रहे और सफल हुए. सफल होने वाले व्यक्ति किसी और ग्रह के वासी या हाड़-मांस के अलावा किसी और चीज के बने नहीं होते.

वे सिर्फ यह जानते थे कि दृढ़ संकल्प के बल पर ही अपना लक्ष्य पाप्त किया जा सकता हैं. यह भी महत्वपूर्ण है कि केवल दृढ़ संकल्प से काम चलने वाला नहीं है. लक्ष्य पाप्ति के लिए निराशा से मुक्ति पाकर हर अनुकूल-पतिकूल स्थिति में अपना उत्साह बनाए रखना, समय का एक पल भी नष्ट न करना, परिश्रम से न घबराना, धैर्य बनाए रखना, समुचित कार्ययोजना बनाकर अमल में लाना आदि पर ध्यान केन्दित करना आवश्यक है.यदि आप किसी व्यक्ति की सफलता का रहस्य पूछें तो वह यही बताएगा कि उसने “ान लिया था कि वह ऐसा कर के या बन के रहेगा, चाहे कुछ भी हो जाए और इसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े. दुनिया की कोई शक्ति उसे विचलित नहीं कर सकती. किसी व्यक्ति को हो सकता है सफलता आसानी से या संयोगवश मिल गयी हो. ऐसा अपवाद स्वरूप ही हो सकता है. इस पकार के किसी संयोग का इन्तजार में भाग्य के भरोसे  सफलता पाने की सोचना मूर्खता के सिवा कुछ और नहीं. हां, उपयुक्त अवसर को कभी छोड़ना नहीं चाहिए. इसकी पहचान अपने विवेक और दूरदृष्टि से की जा सकती है.

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इच्छाशक्ति संकल्प जैसे बहुमूल्य सिक्के का दूसरा पहलू है. यह हमारे संकल्प को दृढ़ता पदान करती है. इसलिए अपनी इच्छाशक्ति को कभी कमजोर नहीं होने देना चाहिए. इससे हमें निराशा जैसी नकारात्मक स्थिति से भी छुटकारा मिलता है. ईश्वर ने मनुष्य को बुद्धि और अनेकानेक संसाधनों के अलावा संकल्प करने की क्षमता भी पदान की है. संकल्प कर लेने के बाद अपने पिछले कार्यों, व्यवहार, अभ्यास, आदतों आदि पर स्वयं अपने आलोचक बनकर दृष्टि डालनी चाहिए. संकल्प कर्म के बिना व्यर्थ है. गलत ढंग से और बिना कार्य योजना के कर्म करते जाना भी व्यर्थ है. स्वयं अपने पति, अपने संकल्प के पति और अपने पयासों के पति ईमानदार रहना बेहद जरूरी है.

शिक्षा और कॅरियर ही नहीं व्यवहार व आदतों के मामले में भी संकल्प महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. संकल्प तथा कर्म से मिली सफलता किसी पैमाने से नापना व्यर्थ है. कोई सफलता छोटी या बड़ी नहीं.

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सफलता के लिए पांच “स’ का करें पालन

सफलता के लिए स का पांच रूप का नित्य पालन करे, सफलता आपके कदमो में होगी. हरेक व्यक्ति को जिंदगी में कभी न कभी खास बनने के अवसर आते हैं लेकिन अक्सर वे गलतफहमी या फिर खुद को कम आंकने के कारण मंजिल नहीं पाते. जिन्दगी के हर मूड पर हर मुश्किलों को आसन करने वाले पांच ’स‘ को अपने जीवन में उतारे, और अपने जीवन को सफल बनाये.

समुचित शिक्षा:-

शिक्षा किसी को भी महान बनती है, एक श्रेष्ठ विचार के लिए शिक्षित व्यक्ति का होना आवश्यक है. अच्छी और पूरी शिक्षा सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. बदलती दुनिया, बदलती तकनीक, आइडिया, अपरच्युनिटी और इनवायरमेंट काफी अहम है. इसलिए अलग-अलग गुण हासिल करने में खुद को लचीला बनाएं. अच्छी शिक्षा कभी व्र्यथ नहीं जाती. पढ़ने और सिखाने का कोई उम्र नही होता, इसलिए आपको जहाँ भी मौका मिले ज्ञान बटोरने में कंजूसी ना कीजिये.

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सर्वर्श्रेष्ठ प्रदर्शन :-

आप जहां भी, जैसे भी काम कर रहे हैं, अपना र्सवश्रेष्ठ प्र्रदशित करें. आप जहां भी काम कर रहे हैं, गहरी जानकारी रखें. सबकुछ सीखने की कोशिश करें, भले ही आपने किसी क्षेत्र में स्पेशलाइजेशन की हो. इससे आप पूरे आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगे.

समय प्रबंधन : –

समय प्रबंधन आपके हर काम को सफल बनाने में 50 प्रतिशत तक मददगार होती है. सफल और असफल लोगों के समय में काफी अंतर होता है. फुर्तीले, समय के साथ व्यवस्थित रहने वाले के कदम सफलता हमेशा चूमती है. हर काम को चुनौती के तौर पर लेना सफल लोगों का शगल होता है जिसे वे बेहतर प्रबंधन के जरिए अंजाम देते हैं. अगर जिंदगी के हर मोड़ पर सफल होना है, तो समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना होगा.

संवाद :-

आपका संवाद आपके सोच का दर्पण होता है. अपने विचार प्रकट करना और दूसरे के विचार सुनना अहम गुण हैं. संवाद के लिए तीन बातें महत्वपूर्ण हैं- कंटेंट, प्लानिंग और प्रजेंटेशन. किसी भी विषय पर अपनी बात रखने से पहले उस विषय का गहन अध्ययन जरूरी है. इसके बाद कंटेंट तैयार कर बोलने का अभ्यास करें. पत्र-पत्रिकाओं के अलावा किताबें पढ़ना भी एक कला है. हल्के-फुल्के उपन्यास, कथा साहित्य के साथ विभिन्न ज्ञानर्वधक चैनल से काफी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं.

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संयम: –

जिंदगी के हर मोड़ पर मुश्किलों का पहाड़ो का सामना करना पड़ता है, जो हमारी सफलता हो निश्चित करती है, इसमें हमारा संयम हम सभी को एक नई शक्ति प्रदान करती है,जिसके मदद से हर समस्या को दूसरों के नजरिए से देखने समझने की कोशिश करते है. मुश्किलों के समय निम्न बातो का ध्यान रखते हुए अपने आप को सदा संयम में रखे.अपनी तारीफ खुद कभी न करें. हमेशा ऐसे काम करें कि दूसरी आपकी तारीफ करें. ऐसे मामलों में संयम बरतें. घर-परिवार से लेकर ऑफिस की छोटी-छोटी बातें को तूल न दें. दूसरों की बातें भी मानें. इस बात से कोई र्फक नहीं पड़ता, यदि आपसे जूनियर या सीनियर ने आपको कुछ कह दिया. दूसरों की छोटी-छोटी बातों को मानकर और छोटी-छोटी गलतियों को माफ कर आप उनकी नजरों में महान बनते हैं. दूसरों को खुशी देने से आप भी खुद खुश रहेंगे.

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