शुक्रिया दोस्त: शालू ने क्या किया था

एसएससीकंपीटिशन ऐग्जाम के औनलाइन फार्म में परीक्षा केंद्र चुनने वाला औप्शन कौलम भरते समय शालू ने एक पल को कुछ सोचा और फिर जयपुर पर क्लिक कर दिया. हालांकि उस के  अपने शहर जोधपुर में भी परीक्षा केंद्र प्रस्तावित था, मगर शालू को तो एक बहाना चाहिए था साहिल से मिलने का और वह इस से बेहतर क्या हो सकता था. इस बहाने को तो मांपापा भी नकार नहीं सकते. मन ही मन अपने प्यार से मिलने की सुखद कल्पनाओं में खोई शालू ने फार्म भरने की बाकी प्रक्रिया पूरी की और एक बार फिर परीक्षा केंद्र जयपुर पर नजर डाल कर खुद को आश्वस्त किया और फार्म सबमिट कर दिया.

शालू ने यह बात किसी को नहीं बताई थी, साहिल को भी नहीं. लगभग 1 महीने बाद एसएससी की बैवसाइट पर ऐग्जाम से संबंधित सूचना अपलोड हुई तो वह खुशी से झम उठी. 4 सप्ताह के बाद यह कंपीटीशन होने वाला है और उस का परीक्षा केंद्र जैसाकि उस ने चाहा था, जयपुर ही आया है.

शाम को उस ने पापा को यह खबर दी तो उन्होंने तो कुछ नहीं कहा, मगर मां बोली, ‘‘जोधुपर में इस का सैंटर नहीं था क्या, जयपुर क्यों आया है?’’

शालू को कोई जवाब नहीं सूझ, मगर पापा ने अपने अनुभव के आधार पर कहा, ‘‘हो सकता है, यहां कैडिडेट ज्यादा हो गए हों, इसलिए सैंटर बदल दिया गया हो. कोई बात नहीं. जयपुर भी ज्यादा दूर नहीं है. तुम बस मन लगा कर तैयारी करो. सिर्फ फार्म भरने और परीक्षा देने से ही ऐग्जाम पास नहीं हुआ करते. कुछ बनने के लिए जीजान लगा देनी पड़ती है. दिनरात मेहनत करनी पड़ती है.’’

सुन कर शालू की जान में जान आई. पापा की बातों को उस ने एक कान से सुना और दूसरे से निकाल दिया. उसे तो इस ऐग्जाम से नहीं बल्कि जयपुर जाने से मतलब था.

यहां तक तो सबकुछ उस की प्लानिंग के हिसाब से हो गया था. एकांत पाते ही

उस ने साहिल को मैसेज कर दिया कि वह 4 सप्ताह बाद जयपुर आ रही है. सुन कर साहिल भी उस से मिलने के सपने संजोने लगा. अब यह देखना था कि कुछ ऐसा प्लान बनाया जाए कि मांपापा उसे अकेली जयपुर भेजने को तैयार हो जाएं वरना उस की सारी प्लानिंग पर पानी फिर जाएगा. शालू मन ही मन कामना करने लगी

कि अपने प्यार को पाने का यह अवसर उसे अवश्य मिले.

शालू और साहिल दोनों ने एक ही कालेज से एमबीए की डिगरी ली थी. जहां साहिल पढ़ने में बहुत तेज था वहीं शालू बला की खूबसूरत थी. दोनों को ही अपनीअपनी खूबियों का एहसास था और उन पर गुरूर भी. दोनों का ऐटीट्यूड देखते ही बनता था. शुरुआती नोकझेंक के बाद दोनों की दोस्ती हो गई जो साल बीततेबीतते आखिर प्यार में बदल ही गई. कालेज में उन की जोड़ी हिट थी.

शालू की इच्छा थी कि कालेज खत्म होने के बाद वे दोनों शादी के बंधन में बंध जाएं, इसलिए वह बारबार साहिल पर कैंपस इंटरव्यू में जाने और जौब चुनने के लिए दबाव बना रही थी. वहीं साहिल अपने लिए किसी बेहतर मुकाम की तलाश में जुटा था. वह कालेज के बाद प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ कर अपनी मेहनत को आजमाना चाहता था, इसलिए शालू की नाराजगी के बावजूद उस ने जयपुर के एक जानेमाने कोचिंग इंस्टिट्यूट में एडमिशन ले लिया.

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‘‘कुछ बनूंगा तभी तो तुम्हें बेहतर कल दे पाऊंगा न,’’ साहिलका अपना तर्क था, जिस ने शालू को चुप करवा दिया और फिर साहिल उसे अपनी यादों के सहारे छोड़ कर जयपुर चला गया.

हालांकि फोन और सोशल मीडिया पर वे लगातार जुड़े हुए थे, मगर शालू को इतने भर से सब्र नहीं होता था. शालू के लिए जब साहिल से दूरी सहन करना मुश्किल होने लगा तो उस ने भी जयपुर जा कर कोचिंग करने की, जिद अपने पापा से की मगर लाख सिर पटकने के बाद भी उस के घर वाले इस बात के लिए राजी नहीं हुए. हां उसे वहीं जोधपुर में ही एक इंस्टिट्यूट में एडमिशन जरूर दिला दिया गया.

अब शालू के पास साहिल से मिलने का कोई और तरीका नहीं था, इसलिए उस ने यह तरकीब लगाई. अगले ही संडे शालू का ऐग्जाम था. शायद कुदरत ने उस की प्रार्थना सुन ली थी. 2 दिन बाद अचानक पापा का बीपी हाई हो

गया और डाक्टर ने उन्हें कंप्लीट बैडरैस्ट की सलाह दी तो मां का भी उन के  पास रुकना जरूरी हो गया.

‘‘रहने दे ऐग्जाम. वैसे भी कोई तैयारी तो तुम ने की नहीं. क्यों बिना मतलब समय और पैसा बरबाद कर रही हो,’’ मां ने कहा तो शालू रोंआसी हो गई.

‘‘अकेली मैनेज कर लोगी सब?’’ पापा थोड़े पिघले.

‘‘हांहां पापा, क्यों नहीं. फिर मेरी सहेली रिया भी तो वहीं जयपुर में ही है. मैं वहां उस

के पास चली जाऊंगी… एक ही दिन की तो बात है. शनिवार की रात को जाऊंगी और सोमवार

को सुबह वापस पहुंच जाऊंगी,’’ शालू अपनी योजना की कामयाबी पर मन ही मन खुश होती हुई बोली.

तय कार्यक्रम के अनुसार शालू रविवार सुबह लगभग 5 बजे जयपुर पहुंच गई. साहिल उसे लेने स्टेशन आया था. उसे देखते ही शालू के सब्र का बांध टूट गया और वह बिना किसी की परवाह किए उस से लिपट गई.

साहिल ने घबरा के इधरउधर देखा और उसे अपने से अलग किया. औटो से दोनों रिया के कमरे पर पहुंचे. रास्ते भर शालू साहिल से चिपक कर बैठी थी. कभी उस के कंधे पर सिर रखती

तो कभी उस का हाथ अपने हाथ में ले कर सहलाने लगती. साहिल बहुत असहज हो रहा

था. वह शालू को रिया के कमरे पर छोड़ कर

9 बजे वापस आने का वादा कर के अपने हास्टल चला गया.

दोपहर 2 बजे ऐग्जाम खत्म होने पर साहिल और शालू वापस रिया के कमरे पर आ गए. रिया उन की तड़प समझ रही थी इसलिए वह अपने फ्रैंड्स के साथ मूवी देखने का बहाना बना कर बाहर चली गई. अब शालू और साहिल दोनों कमरे में अकेले थे. एकांत पाते ही शालू फिर से साहिल से लिपट गई. अब साहिल का भी अपनेआप से निमंत्रण खत्म हो चुका था और फिर 2 जवान दिलों का 1 होने में वक्त ही कितना लगता है. आज दोनों के बीच की वह दीवार भी ढह गई थी जिसे दोनों ने शादी तक के लिए बचा कर रखा था. दोनों को होश तब आया जब दिन ढलने पर रिया वापस आई.

साहिल ने रात स्टेशन पर आने का वादा कर के शालू से विदा ली.

‘‘सखी, ये आंखें इतनी लाल क्यों हैं?’’ रिया ने उस के जाते ही चुटकी ली.

‘‘थैंक्स रिया. आज तुहारी वजह से मुझे जो खुशी मिली है उसे मैं बयां नहीं कर सकती. तुम ने मुझे जिंदगीभर का कर्जदार बना लिया,’’ शालू ने रिया के हाथ को कस कर थाम लिया.

‘‘दोस्त, किसी पर एहसान नहीं किया करते. वक्त आने पर वसूल लिया करते हैं,’’ रिया हंस दी तो शालू भी मुसकरा दी.

‘‘और सुना क्याक्या गुजरी जब मिल बैठे थे दीवाने?’’ रिया ने फिर शालू को छेड़ा.

‘‘चल यार. तू भी क्या याद रखेगी. यह देख,’’ कहते हुए शालू ने अपने मोबाइल को औन किया और एक वीडियो रिया को दिखाया. देखते ही रिया की आंखें फटी की फटी रह गईं. यह शालू और साहिल के अंतरंग पलों का वीडियो था. रिया ने देखा शालू का चेहरा अब भी शर्म से लाल हो उठा था.

‘‘यह कैसे?’’ रिया के मुंह से शब्द ही नहीं निकल रहे थे.

‘‘मैं ने सामने टेबल पर मोबाइल सैट कर रख दिया था. इसे मैं अपने प्यार की निशानी के रूप में साथ ले जा रही हूं. जब भी साहिल की याद आएगी, मैं इसे देख कर अपनी प्यास बुझ लिया करूंगी,’’ साहिल के प्यार में आंकठ डूबी शालू ने खोईखोई आवाज में कहा.

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‘‘सोच लो शालू. कहीं तुम्हारी यह नादानी तुम्हें किसी मुसीबत में न डाल दे,’’ रिया ने उसे चेताया, मगर शालू ने उस पर कान नहीं दिए.

सबकुछ वैसा ही हुआ जैसा शालू ने सोचा था. साहिल से निर्विघ्न

मिल कर वह आसमान में उड़ी जा रही थी. जोधपुर आ कर वह भी अपनी पढ़ाई में जुट गई. एक दिन व्हाट्सऐप पर रिया का भेजा वीडिया देख कर शालू के होश उड़ गए. यह उस का और साहिल का वही वीडियो था जो उस ने रिया को दिखाया था.

‘‘रिया, तुम तो छिपी रूस्तम निकली.

आंखों से यह काजल कब चुराया,’’ शालू ने अपनी आवाज को नौर्मल करते हुए रिया को

फोन लगाया.

‘‘बस तभी जब तुम चेंज करने बाथरूम में गई थी. खैर, ये सब छोड़… सुन मुझे अर्जैंट कुछ रुपयों की जरूरत है. यही कोई 5 हजार. तू प्लीज जल्दी व्यवस्था कर के भिजवा दे,’’ रिया बिना वक्त गंवाए असली मुद्दे पर आ गई थी.

शालू सब समझ गई कि वह ब्लैकमेलिंग का शिकार हो चुकी है. वह उस वक्त को

कोसने लगी जब उस ने यह आत्मघाती कदम उठाया था.

हालांकि जयपुर से लौटने के बाद खुद शालू ने भी कई बार अपनेआप को इस कृत्य के लिए कठघरे में खड़ा किया था. कोसा था उस घड़ी को जब वह अपनेआप पर काबू नहीं रख पाई थी. काश उस ने अपना कौमार्य पहली रात को समर्पित करने के लिए संभाल कर रखा होता. बेशक उस ने साहिल को भावी पति के रूप में देख कर ही यह कदम उठाया था, मगर क्या ही अच्छा होता यदि यह खास तोहफा अपने साहिल को उसी रात दिया होता.

यह तो शुक्र है कि गर्भ ठहरने जैसी किसी आपात स्थिति में नहीं पहुंची वरना क्या करती वह. कैसे अपने घर वालों का सामना करती. हो सकता है वह आत्महत्या जैसा कायरतापूर्ण कदम ही उठा लेती. साहिल के पास भी किस मुंह से जाती, वह खुद भी कहां अपने पैरों पर खड़ा था जो समाज से लड़ लेता.

शालू को यों तो साहिल पर पूरा भरोसा था, मगर खुदा न खास्ता कहीं दगा दे दिया

तो? कहीं समाज और परिवार के दबाव में आ कर उसे कहीं और शादी करनी पड़ी तो? कहीं उस के भावी पति को भनक लग गई कि वह वर्जिन

नहीं है तो? शालू जितना सोचती उतना ही उलझती जा रही थी.

जो किया वह तो क्षणिक ज्वार था, मगर यह वीडियो बनाने की नासमझ वह कैसे कर बैठी. और तो और खुद ही रिया

के सामने वायरल भी कर दिया. उस से बड़ा बेवकूफ शायद ही कोई और हो. यह वीडियो

अब शालू के लिए गले की हड्डी बनने लगा था जिसे न डिलीट करते बन रहा था और न ही मोबाइल में रखते. कहीं किसी और के हाथ लग गया तो… इज्जत का फलूदा बन जाएगा. वह कोई निर्णय ले पाती इस से पहले ही रिया ने उसे एहसास करा दिया कि वह कितनी बड़ी मुसीबत में फंस चुकी है.

शालू को अपनेआप पर बहुत गुस्सा आ रहा था. एक तो उस ने ऐसी बचकानी हरकत की थी तिस पर भी ‘आ बैल मुझे मार’ वाली कहावत सच कर डाली. अरे, क्या जरूरत थी वह वीडियो रिया को दिखाने की? मगर अब क्या हो सकता है. अब तो तीर कमान से निकल चुका है. कुछ समझदारी से ही काम लेना पड़ेगा वरना यह मुसीबत और भी बढ़ सकती है. शालू के दिमाग में योजनाएं बनतीबिगड़ती जा रही थीं.

शालू ने जैसेतैसे कर के रिया को 5 हजार रुपए दिए, मगर वह जानती थी कि बात यहीं खत्म नहीं हुई है. अब रिया उसे सोने का अंडा देने वाली मुरगी समझने लगेगी. अपने पैरों पर कुल्हाड़ी वह खुद ही मार चुकी है. अब इस

कटे हुए पैर पर इलाज भी खुद ही करना पड़ेगा और वह भी इन्फैक्शन फैलने से पहले. उसे कोई ऐसा ठोस कदम उठाना पड़ेगा जिस से सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. कैसे भी कर के यह वीडियो रिया के मोबाइल से डिलीट करना

ही पड़ेगा.

शालू ने रिया की मां को फोन कर के पता लगाया कि वह इस संडे घर आने वाली हैं. शालू उस से मिलने पहुंच गई.

‘‘अरे शालू तुम? मैं तुम्हें ही याद कर रही थी,’’ उसे देख कर रिया चौंकी. हालांकि उस ने विडियो का कोई जिक्र नहीं किया. शालू भी अनजान बनते हुए उस से गरमजोशी से मिली. शालू ने पानी मांगा तो रिया उठ कर अंदर गई. शालू ने फौरन उस का मोबाइल उठाकर देखा मगर यह क्या? मोबाइल तो पासवर्ड से लौक

था. शालू निराश हो गई. मगर तभी कुछ सोच

कर उस ने मोबाइल से मैमोरी कार्ड निकाल

कर अपने पर्स में रख लिया. अब तक रिया पानी ले कर आ गई थी. शालू ने थोड़ी देर इधरउधर की बातें कीं और चलने को हुई.

‘‘शालू, यार मुझे 3 हजार रुपए और चाहिए. मैं परसों वापस जा रही हूं, तू प्लीज. कल तक इंतजाम कर देना,’’ रिया ने कहा.

‘‘कोशिश करती हूं. कल शाम तू घर आ जाना, रुपए वहीं दे दूंगी,’’ शालू बुझे मन से हामी भर कर बोली.

शालू ने घर जा कर रिया का मैमोरी कार्ड चैक किया, मगर उस में वह वीडियो नहीं था जिस की उसे तलाश थी. इस का मतलब है कि वीडियो उस के मोबाइल की हार्ड डिस्क में है. अगर किसी तरह वह मोबाइल फौर्मेट कर दिया जाए तो बात बन सकती है. शालू ने मन ही मन कुछ सोच लिया.

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अगले दिन शाम को रिया तय समय पर शालू के घर पहुंची. शालू उसे अपने कमरे में बैठा कर चाय बनाने रसोई में चली गई. रिया टाइम पास करने के लिए अपने मोबाइल में कोई गेम खेलने लगी.

‘‘रिया, वहां अकेली बोर हो रही हो, यहीं रसोई में आ जाओ,’’ शालू ने आवाज लगाई.

रिया उठ कर शालू के पास चली गई. वह मोबाइल के गेम में इतनी खोई हुई थी कि शालू के पास खड़ीखड़ी भी कीबोर्ड पर उंगलियां ही चला रही थी. शालू ने कनखियों से देखा और अचानक ही रिया को कुहनी मार दी. रिया के हाथ से छिटक कर मोबाइल नीचे गिर गया. शालू अफसोस करते हुए ‘सौरीसौरी’ कहने लगी और लपक कर मोबाइल को चाय के पतीले में खौलते हुए पानी में डाल दिया.

रिया ने तुरंत आंच बंद कर के मोबाइल को पानी से बाहर निकाला, मगर बहुत कोशिश करने पर भी वह औन नहीं हुआ.

‘‘अब इसे ठीक करवाने के चार्जेज भी तुम्हें ही देने होंगे,’’ रिया ने खा जाने वाली नजरों से शालू को घूरा.

‘‘सौरी यार. चल पास ही मोबाइल रिपेयर की शौप है, इसे अभी ठीक करवा लेते हैं,’’ शालू ने सहानुभूति जताते हुए कहा.

वह रिया को ले कर शौप पर गई. मोबाइल को चैक करने के बाद मोबाइल मैकेनिक

ने उन्हें बताया कि उबलते पानी में गिरने के कारण मोबाइल की आईसी खराब हो गई है

और इसे बदलना पड़ेगा. इस के साथ ही इस

के अंदर स्टोर किया हुआ सारा डाटा भी करप्ट

हो गया.

शालू के कान यही तो सुनने के लिए

तरस रहे थे. वहीं रिया के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं.

‘‘सौरी यार. मेरी वजह से तुम्हारा मोबाइल खराब हो गया. मुझे बहुत बुरा लग रहा है, तुम्हारी सोने का अंडा देने वाली मुरगी मर गई,’’ शालू मुसकराई.

‘‘ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है, वह वीडियो मेरे मैमोरी कार्ड में था, इस में नहीं,’’ रिया ने अपना आखिरी तीर छोड़ा, तो शालू ने पर्स में से मैमोरीकार्ड निकाल कर उस के 2 टुकड़े किए और हवा में उछाल दिए और कहा, ‘‘बेचारा, मैमोरी कार्ड. यह भी गया.’’

रिया देखती रह गई.

‘‘रिया, तुम चाहे जैसी भी हो, मेरी गुरु हो. तुम ने मुझे कई बातें सिखाई हैं जैसेकि ऐसी बेवकूफियां नहीं करनी चाहिए जो यह कि कभी भी किसी पर आंख बंद कर भरोसा नहीं करना चाहिए, यह कि अपने राज अपनेआप से भी छिपा कर रखने चाहिए आदिआदि. शुक्रिया दोस्त,’’ कह कर शालू मुसकरा दी.

फिर शालू ने कुछ पल सोचा और फिर अपने मोबाइल में सेव वह वीडियो भी डिलीट कर के समस्या की जड़ को ही खत्म कर दिया. न रहेगा बांस न बजेगी बांसुरी और रिया को वहीं असमंजस में छोड़ कर शालू चली गई.

रिया अब भी वहीं खड़ी उसे आत्मविश्वास के साथ जाते हुए देख रही थी.

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