समर में स्किन डार्क होने से परेशान हूं, मैं क्या करुं?

सवाल-

कहते हैं चेहरे पर बाल अगर डार्क हों तो ब्लीच करानी चाहिए. मेरे चेहरे पर बाल बिलकुल नहीं हैं पर मुझे अपनी स्किन थोड़ी डार्क नजर आने लग गई है. तो क्या मैं ब्लीच करा सकती हूं?

जवाब-

डार्क स्किन हो या बाल दोनों को ब्लीच किया जा सकता है और दोनों का रंग हलका किया जा सकता है. अगर चेहरे पर बाल नहीं हैं तो ब्लीच करते वक्त थोड़ा ज्यादा ध्यान ध्यान देने की जरूरत होती है. ब्लीच बहुत सौफ्ट और लाइट होनी चाहिए. जल्द ही रंग में फर्क आ जाता है.

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सवाल-

मैं वर्किंग लेडी हूं और रोज सुबहशाम धूप का सामना करती हूं, जिस से मेरा रंग काफी डार्क होता जा रहा है. कोई घरेलू उपाय बताएं जिस से कि मैं अपना रंग साफ कर सकूं?

जवाब-

सब से पहले मैं सज्जैस्ट करूंगी कि घर से निकलने से पहले हमेशा सनस्क्रीन लगा कर ही निकलें. अगर आप धूप में बहुत ज्यादा देर रहती हैं तो 3 घंटे बाद सनस्क्रीन दोबारा भी लगाएं क्योंकि 30 या 40 एसपीएफ का सनस्क्रीन 3-4 घंटे काम करता है.

अगर आप ज्यादा देर धूप में रहें तो दोबारा सनस्क्रीन लगाना बहुत जरूरी है. हो सके तो अंब्रेला का इस्तेमाल भी करें जो आप की स्किन को तो बचाएगा ही आप के बालों को भी सन के साइड इफैक्ट से बचाएगा. फेस की टैनिंग को खत्म करने के लिए गरमियों में ऐलोवेरा बहुत अच्छा काम करता है.

आप ऐलोवेरा का एक पत्ता ले लें. उस को धो कर नीचे से टेढ़ा काट कर 1/2 घंटे के लिए किसी गिलास में रख दें. उस में से पीले रंग का एक लिक्विड निकल जाएगा. उस के बाद उस को सैंटर से 1/2-1/2 कर के जैल को निकाल लें. इस जैल में कुछ बूंदें नीबू के रस की मिलाएं और कुछ ड्रौप्स शहद की मिला लें.

इस मिक्सर से फेस पर हर रोज रात को 2 मिनट मसाज करें और सुबह धो लें. ऐसा लगातार करने से सन टैनिंग का असर खत्म हो जाएगा और आप का रंग पहले जेसा गोरा हो जाएगा.

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अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz   सब्जेक्ट में लिखे…  गृहशोभा-व्यक्तिगत समस्याएं/ Personal Problem

समर में ब्लैकहैड्स और पिंपल्स से कैसे बचें?

सवाल-

गरमियां शुरू होते ही मेरे चेहरे पर ब्लैकहैड्स और पिंपल्स निकलने शुरू हो जाते हैं. मुझे क्या करना चाहिए?

जवाब-

गरमियों में स्किन ज्यादा औयल प्रोड्यूस करती है और उस के ऊपर धूलमिट्टी व गंदगी मिल कर ब्लैकहैड बन जाते हैं. अगर इन ब्लैकहैड्स को न निकाला जाए तो इन में इन्फैक्शन हो कर ये एक्ने में तबदील हो जाते हैं. सब से ज्यादा जरूरी है कि चेहरे को साफ रखा जाए. अगर एक्ने नहीं हैं सिर्फ ब्लैकहैड्स हैं तो फेस पर रोज स्क्रब करने से एक्ने होने के चांसेज कम हो जाते हैं और अगर ऐक्टिव एक्ने हो चुके हैं तो स्किन टोनर से फेस को साफ करती रहें.

नीम के पत्ते या पुदीने के पत्ते पीस कर हरे रंग का रस निकाल लें और उसे ऐक्टिव एक्ने पर दिन में

2 या 3 बार लगाएं. इस से एक्ने निकलने भी कम हो जाते हैं. ज्यादा मीठा खाने से बचें. जब भी आप खाएं आम खाएं, उस के साथ ठंडी लस्सी पीएं. गरमियों में आम खाने की वजह से भी एक्ने बढ़ जाते हैं. गरमियों में खूब पानी पीएं. नीबू पानी भी पीती रहें.

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बेदाग स्किन की चाह हर महिला रखती है. मगर यदि चेहरे पर एक भी पिंपल आ जाए तो सुंदरता में कमी आ जाती है. पिंपल्स दूर करने के लिए महिलाएं न जाने कितने प्रयास करती हैं पर रिजल्ट कोई खास नहीं निकलता. मगर अब आप को परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि हम आप को कुछ ऐसे होममेड फेस पैक की जानकारी दे रहे हैं, जो चेहरे पर दिखाई देने वाले दागों व जिद्दी पिंपल्स को जड़ से खत्म कर आप को देंगे चमकती-दमकती स्किन.

क्यों होते हैं मुंहासे

वैसे तो मुंहासों की समस्या तैलीय त्वचा पर ज्यादा होती है, लेकिन आजकल हरकोई मुंहासों से परेशान रहता है. इस का कारण है खराब लाइफस्टाइल, हारमोनल बदलाव और गलत व जल्दीजल्दी कौस्मैटिक प्रोडक्ट्स चेंज करना.

मुंहासे तब होते हैं जब स्किन के रोमछिद्रों में तेल व डैड स्किन इकट्ठी हो जाती है. यह मुंहासों का कारण बनती है. असल में सीबम औयल स्किन के रोमछिद्र में उत्पन्न होता है. सीबम खराब सैल्स को रोमछिद्र से बाहर लाने में मदद करता है, जिस से नए सैल्स बनते हैं. मगर कई बार हारमोंस की गड़बड़ी के कारण सीबम औयल ज्यादा मात्रा में बनने लगता है, जिस से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और मुंहासे हो जाते हैं.

ऐक्नों से छुटकारा पाने वाले फेस पैक

1. ऐलोवेरा व नीबू का कौंबिनेशन

ऐलोवेरा में ऐंटीऔक्सीडैंट गुण होने के कारण यह डैमेज स्किन की रिपेयर करता है. विटामिन सी, ई और जिंक की मौजूदगी मुंहासों को खत्म करने के साथसाथ दागधब्बों को हटाने का भी काम करती है, जिस से स्किन क्लीयर व स्मूद नजर आती है.

Summer Special: गरमी में ऐसे करें स्किन केयर

सीनियर कंसल्टेंट डर्मेटौलोजिस्ट डा. नरेश भार्गव के अनुसार, गरमी हो या सर्दी हर मौसम में हमारी त्वचा को खास देखभाल की जरूरत होती है. गरमी में सूर्य की हानिकारक किरणों, धूलमिट्टी और तैलीय ग्रंथियों की अधिक सक्रियता का प्रभाव हमारी त्वचा पर सब से ज्यादा पड़ता है, जिस के कारण प्रिक्ली हीट, पिग्मैंटेंशन, फंगस, ब्लैकहैड्स, पिंपल, एक्ने, डैंड्रफ और स्किन ऐलर्जी आदि समस्याओं से रूबरू होना पड़ता है. लेकिन अगर हम कुछ खास बातों का ध्यान रखते हुए उन पर चलें तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है.

बचाव के उपाय

ठंडक का एहसास:

डा. भार्गव के अनुसार, गरमियों में त्वचा के रोगों के निदान के लिए शरीर को ठंडा रखना बेहद जरूरी है. इस के लिए दिन में 2 से 3 बार नहाना चाहिए तथा शरीर को ठंडक देने वाले पेयपदार्थ, जैसे लस्सी, दही, नीबूपानी, दूध आदि का सेवन करना चाहिए. साथ ही, धूप के संपर्क में कम से कम आना चाहिए. अंदरूनी हिस्सों की साफसफाई: डा. भार्गव के अनुसार, शरीर के अंदरूनी हिस्सों की साफसफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि शरीर के अंदरूनी हिस्सों, जैसे बगलों, घुटने, कुहनियां आदि में पसीने के कारण बैक्टीरिया पनपते हैं, जिस से शरीर में पसीने की दुर्गंध आने लगती है. इसलिए इन हिस्सों को अच्छी तरह साफ कर के और सुखा कर टैल्कम पाउडर लगाना चाहिए.

सही खाद्यपदार्थों का सेवन:

डा. भार्गव गरमियों में उचित खानपान की सलाह देते हैं. उन के अनुसार, गरमियों में तैलीय व गरिष्ठ भोजन की अपेक्षा ऐसा सादा एवं फलाहारी भोजन सब से उपयुक्त है, जो शरीर को उपयुक्त ऊर्जा व नमी प्रदान करे. इसलिए फलसब्जियों और पानी को अपने आहार में ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए और कैफीन वाली चीजों, जैसे चायकाफी आदि का इस्तेमाल जरूरी हो तो भी कम से कम करना चाहिए.

फेसवाश का प्रयोग:

गरमियों में आमतौर पर हर कोई 2 से 3 बार नहाता है. ऐसे में साबुन के अत्यधिक प्रयोग से उस की त्वचा रूखी व बेजान हो जाती है. इसलिए साबुन की जगह सौम्य फेसवाश और बौडी शैंपू के प्रयोग से अपनी त्वचा की नमी बरकरार रखें.

नियमित टोनिंग:

आप की त्वचा हमेशा जवां व खूबसूरत बनी रहे, इस के लिए नियमित रूप से क्लींजिंग, टोनिंग व मौइश्चराइजिंग करें. तैलीय त्वचा होने पर औयलफ्री मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. ज्यादा असर के लिए मौइश्चराइजर को फ्रिज में रखें. जब आप धूप से घर लौटें तो चेहरा धोने के बाद ठंडाठंडा मौइश्चराइजर चेहरे पर लगाएं और गरमी में ठंडक का एहसास पाएं.

सनस्क्रीन का प्रयोग:

त्वचा को खूबसूरत बनाए रखने के लिए टोनिंग के साथ सनस्क्रीन का प्रयोग जरूर व नियमित करें, क्योंकि धूप में निकलने पर सूर्य की हानिकारक किरणों के संपर्क में आने के कारण हमारी त्वचा पर सनबर्न, असमय झुर्रियां आदि समस्याएं उभर आती हैं. जबकि नियमित सनस्क्रीन के इस्तेमाल से इन समस्याओं की प्रक्रिया को धीमा किया जा सकता है तथा इन से बचा जा सकता है. इसलिए घर से बाहर निकलने से कम से कम आधा घंटा पहले इसे लगा लें तथा धूप में ज्यादा रहने की स्थिति होने पर 3 घंटे के बाद दोबारा सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें. सनस्क्रीन केवल चेहरे पर ही नहीं बल्कि शरीर के हर उस हिस्से पर लगाएं, जो धूप के सीधे संपर्क में आता है.

त्वचा के अनुसार सनस्क्रीन

डा. भार्गव के अनुसार, त्वचा के अनुरूप ही सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना चाहिए. जैसे:

नौर्मल और ड्राई स्किन:

नौर्मल और ड्राई स्किन के लिए नौर्मल 30+एसपीएफ का सनस्क्रीन उपयुक्त है, जो त्वचा पर सुरक्षा कवच का काम करता है.

तैलीय त्वचा:

इस प्रकार की त्वचा के लिए नौनऔयली 30 या 30+एसपीएफ सनस्क्रीन बेहतर व उपयुक्त है.

सैंसिटिव त्वचा:

नाजुक त्वचा के लिए न्यूट्रल सोप स्किन सनस्क्रीन अच्छा है.

ब्लैकहैड्स के लिए:

गरमियों में ब्लैकहैड्स की समस्या में बढ़ोतरी हो जाती है, जो आप की खूबसूरती में ग्रहण लगा देते हैं. इन से निबटने के लिए महीने में 2 बार किसी अच्छे पार्लर में जा कर फेस क्लीनिंग कराएं तथा इस के बाद टोनर का प्रयोग करें. ब्लैकहैड्स को कभी भी जबरदस्ती दबा कर निकालने की कोशिश न करें.

पैडिक्योर:

गरमियों में पैरों की उंगलियों के बीच में नियमित सफाई नहीं होने के कारण फंगस की समस्या उत्पन्न हो जाती है. इस से बचने के लिए उचित साफसफाई का ध्यान रखते हुए महीने में 1 या 2 बार पार्लर जा कर पैडिक्योर करवाएं.

वैक्सिंग:

वैक्सिंग करवाने से अनचाहे बालों से छुटकारा तो मिलता ही है, त्वचा की डैडस्किन भी निकलती है. इसलिए नियमित रूप से बालों की ग्रोथ के हिसाब से वैक्सिंग जरूर करवाएं.

उचित मेकअप प्रोडक्ट का चुनाव:

प्रसिद्ध मेकअप आर्टिस्ट सोनिया बत्रा के अनुसार, गरमियों में मैट मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करना चाहिए तथा शाइनी लुक के लिए मैट प्रोडक्ट पर शिमर या शाइनर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इस के अलावा क्रीमी बेस प्रोडक्ट की जगह वाटरबेस प्रोडक्ट का इस्तेमाल करें. इस के साथ आजकल न्यूड मेकअप फैशन में है, इसलिए मेकअप लाइट ही रखें.

मेकअप उतारना:

गरमियों में रात को सोने से पहले मेकअप उतारना बहुत जरूरी होता है ताकि आप की त्वचा खुल के सांस ले सके. मेकअप उतारने के लिए क्लींजिंग मिल्क या मेकअप रिमूवर का इस्तेमाल करें.

फेशियल:

गरमियों के मौसम और त्वचा के अनुसार आप फेशियल जरूर करवाएं ताकि आप का चेहरा हर पल खिलाखिला रहे. गरमियों के मौसम में आप ग्लाइकोलिक पीलिंग या स्पा फेशियल करवा सकती हैं.

बालों की देखभाल:

गरमियों में लगातार पसीने के कारण बाल बहुत चिपचिपे हो जाते हैं. अत: इन की नियमित सफाई पर ध्यान दें. आजकल मार्केट में कई प्रकार के शैंपू उपलब्ध हैं, जिन के नियमित इस्तेमाल से बालों पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है. लेकिन इन्हें खरीदते समय अपने बालों की प्रकृति का विशेष ध्यान रखें.

तनमन महके:

गरमियों में पसीने की गंध से छुटकारा पाने के लिए नहाने के पानी में कुछ बूंदें एसेंशियल औयल की या फिर गुलाबजल की डाल कर नहाएं. इस के अलावा बौडी डियोड्रैंट, बौडी स्प्रे या परफ्यूम का इस्तेमाल जरूर करें. ध्यान रखें कि परफ्यूम हमेशा बौडी के वार्म पौइंट्स, जैसे गरदन और कलाइयों पर ही लगाना चाहिए.

घरेलू फेसपैक:

गरमियों में घरेलू फेसपैक बनाने के लिए दही व मुलतानी मिट्टी में थोड़ा सा शहद मिला कर चेहरे पर लगाएं. यह पैक गरमियों के लिए अति उत्तम है.

योग एक वरदान:

नियमित रूप से योग को अपने दैनिक कार्यों में सम्मिलित करें. स्वस्थ तनमन के लिए योग से बेहतर अन्य कोई साधन नहीं है.

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Summer Special: तेज धूप से Skin को बचाएं ऐसे

गरमी में खुद को सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचा कर रखना जरूरी होता है. अब काम तो रुकते नहीं. घर से बाहर निकलना ही पड़ता है. ऐसे में त्वचा पर तेज धूप की वजह से रैशेज पड़ जाते हैं. धूप का प्रभाव मुख्य रूप से चेहरे, गरदन और बांहों पर पड़ता है, क्योंकि शरीर के यही हिस्से हमेशा खुले रहते हैं. इन्हें धूप के असर से बचाने के लिए आप क्या सावधानियां बरतें, आइए जानें:

  1. घर से बाहर छतरी के बिना न निकलें और अच्छे ब्रैंड के साबुन से दिन में 2 बार नहाएं.
  2. दिन में 2 बार सनब्लौक क्रीम का उपयोग करें. यह क्रीम यूवी किरणों से त्वचा की रक्षा करती है.
  3. सूती वस्त्रों का प्रयोग करें और सारे शरीर को ढक कर रखें.
  4. सनब्लौक क्रीम खरीदते समय सनप्रोटैक्शन फैक्टर यानी एसपीएफ की जांच कर लें.

कपड़ों का चुनाव

  1. कपड़े हमेशा हलके रंग के पहनें. इस से गरमी भी कम लगती है और व्यक्तित्व भी आकर्षक लगता है.
  2. इन दिनों टाइट कपड़े नहीं पहनने चाहिए. पैंट या स्कर्ट अथवा साड़ी तो डार्क कलर की हो सकती है, लेकिन ध्यान रहे कि कमर से ऊपर के कपड़े हलके रंग के होने चाहिए.
  3. काम पर जाती हैं, तो सूती कपड़ों का ही प्रयोग करें.
  4. वैसे जहां तक हो सके शिफौन, क्रैप और जौर्जेट का इस्तेमाल अधिक करें. बड़ेबड़े फूलों वाले और पोल्का परिधान भी इस मौसम में सुकून देते हैं.
  5. ग्रेसफुल दिखने के लिए कौटन के साथ शिफौन का उपयोग कर सकती हैं.
  6. एक और फैब्रिक है, लिनेन. इस का क्रिस्पीपन इसे खास बनाता है.
  7. फैब्रिक्स का बेताज बादशाह है डैनिम. इस का हर मौसम के अनुकूल होना ही इसे खास बनाता है. लेकिन इस मौसम में पहना जाने वाला डैनिम पतला होना चाहिए. मोटा डैनिम सर्दियों में पहना जाता है.

मेकअप

  1. जैलयुक्त फाउंडेशन का इस्तेमाल करें. इस से चेहरा चमकता है.
  2. गालों पर क्रीमी चीजों का इस्तेमाल करें, लेकिन यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि वे ग्रीसी न हों. इस मौसम में हलके गुलाबी या जामुनी रंग का इस्तेमाल सुंदरता को बढ़ाता है.
  3. इस मौसम में चांदी और मोती के बने गहने ही पहनें.

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Summer Special: पसीने की बदबू को कहें बायबाय

झुलसाती गरमी में स्किन और स्वास्थ्य संबंधी नईनई समस्याएं सिर उठाने लगती हैं. इन में बड़ी समस्या पसीना आने की होती है. सब से ज्यादा पसीना बांहों के नीचे यानी कांखों, तलवों और हथेलियों में आता है. हालांकि ज्यादातर लोगों को थोड़ा ही पसीना आता है, लेकिन कुछ को बहुत ज्यादा पसीना आता है. कुछ लोगों को गरमी के साथसाथ पसीने की ग्रंथियों के ओवर ऐक्टिव होने के चलते भी अधिक पसीना आता है जिसे हम हाइपरहाइड्रोसिस सिंड्रोम कहते हैं. बहुत ज्यादा पसीना आने की वजह से न सिर्फ शरीर में असहजता महसूस होती है, बल्कि पसीने की दुर्गंध भी बढ़ जाती है. इस से व्यक्ति का आत्मविश्वास डगमगा जाता है.

अंतर्राष्ट्रीय हाइपरहाइड्रोसिस सोसाइटी के मुताबिक हमारे पूरे शरीर में 3 से 4 मिलियिन पसीने की ग्रंथियां होती हैं. इन में से अधिकतर एन्काइन ग्रंथियां होती हैं, जो सब से ज्यादा तलवों, हथेलियों, माथे, गालों और बांहों के निचले हिस्सों यानी कांखों में होती हैं. एन्काइन ग्रंथियां साफ और दुर्गंधरहित तरल छोड़ती हैं जिस से शरीर को वाष्पीकरण प्रक्रिया से ठंडक प्रदान करने में मदद मिलती है. अन्य प्रकार की पसीने की ग्रंथियों को ऐपोन्काइन कहते हैं. ये ग्रंथियां कांखों और जननांगों के आसपास होती हैं. ये गं्रथियां गाढ़ा तरल बनाती हैं. जब यह तरल स्किन की सतह पर जमे बैक्टीरिया के साथ मिलता है तब दुर्गंध उत्पन्न होती है.

पसीने और उस की दुर्गंध पर ऐसे पाएं काबू

साफसफाई का विशेष ध्यान रखें: पसीना अपनेआप में दुर्गंध की वजह नहीं है. शरीर से दुर्गंध आने की समस्या तब होती है जब यह पसीना बैक्टीरिया के साथ मिलता है. यही वजह है कि नहाने के तुरंत बाद पसीना आने से हमारे शरीर में कभी दुर्गंध नहीं आती. दुर्गंध आनी तब शुरू होती है जब बारबार पसीना आता है और सूखता रहता है. पसीने की वजह से स्किन गीली रहती है और ऐसे में उस पर बैक्टीरिया को पनपने का अनुकूल माहौल मिलता है. अगर आप स्किन को सूखा और साफ रखें तो पसीने के दुर्गंध की समस्या से काफी हद तक बच सकती हैं.

स्ट्रौंग डियोड्रैंट और ऐंटीपर्सपिरैंट का इस्तेमाल करें: हालांकि डियोड्रैंट पसीना आने से नहीं रोक सकता है, लेकिन यह शरीर से आने वाली दुर्गंध को रोकने में मददगार हो सकता है. स्ट्रौंग पर्सपिरैंट पसीने के छिद्रों को बंद कर सकते हैं, जिस से पसीनाकम आता है. जब आप के शरीर की इंद्रियों को यह महसूस हो जाता है कि पसीने के छिद्र बंद हैं तो वे अंदर से पसीना छोड़ना बंद कर देती हैं. ये ऐंटीपर्सपिरैंट अधिकतम 24 घंटे तक कारगर रहते हैं. अगर इन का इस्तेमाल करते समय इन पर लिखे निर्देशों का पालन न किया जाए तो ये स्किन के इरिटेशन की वजह भी बन सकते हैं. ऐसे में कोई भी ऐंटीपर्सपिरैंट इस्तेमाल करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लें.

लोंटोफोरेसिस: यह तकनीक आमतौर पर उन लोगों पर इस्तेमाल की जाती है, जो हलके ऐंटीपर्सपिरैंट इस्तेमाल कर चुके होते हैं, लेकिन उन्हें इस से कोई फायदा नहीं होता है. इस तकनीक से आयनोटोफोरेसिस नामक मैडिकल डिवाइस का इस्तेमाल किया जाता है, जिस के माध्यम से पानी वाले किसी बरतन या ट्यूब में हलके इलैक्ट्रिक करंट डाले जाते हैं और फिर प्रभावित व्यक्ति को इस में हाथ डालने के लिए कहा जाता है. यह करंट स्किन की सतह के माध्यम से भी प्रवेश करता है. इस से पैरों और हाथों में पसीना आने की समस्या बेहद कम हो जाती है. लेकिन कांखों के नीचे अधिक पसीना आने की समस्या को ठीक करने के लिए यह तरीका उपयुक्त नहीं होता है.

मैसोबोटोक्स: बांहों के नीचे बेहद ज्यादा पसीना आना न सिर्फ दुर्गंध की वजह बनता है, बल्कि आप की ड्रैस भी खराब कर सकता है. इस के इलाज हेतु कांखों में प्यूरिफाइड बोटुलिनम टौक्सिन की मामूली डोज इंजैक्शन के माध्यम से दी जाती है, जिस से पसीने की नर्व्ज अस्थायी रूप से बंद हो जाती हैं. इस का असर 4 से 6 महीने तक रहता है. माथे और चेहरे पर जरूरत से ज्यादा पसीना आने की समस्या के उपचार हेतु मैसोबोटोक्स एक बेहतरीन समाधान साबित होता है, इस में पसीना आना कम करने के लिए डाइल्युटेड बोटोक्स को इंजेक्शन के जरीए स्किन  में लगाया जाता है. खानपान पर भी रखें ध्यान: खानपान की कुछ चीजों से भी पसीना अधिक आ सकता है. उदाहरण के तौर पर गरममसाले जैसेकि कालीमिर्च ज्यादा पसीना ला सकती है. इसी तरह से अलकोहल और कैफीन का अधिक इस्तेमाल पसीने के छिद्रों को ज्यादा खोल सकता हैं. इस के साथ ही प्याज के अधिक इस्तेमाल से पसीने की दुर्गंध बढ़ सकती है. गरमी के दिनों में इन चीजों के अधिक इस्तेमाल से बचें.

 –डा. इंदू बालानी डर्मैटोलौजिस्ट, दिल्ली

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Holi Special: गरमी में भी खूबसूरत दिखेगी स्किन

गरमी के मौसम में त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं उत्पन्न होती हैं. इन में सनबर्न के कारण चेहरे की रौनक खो जाती है. झुलसाती गरमी में त्वचा की नमी धीरेधीरे कम होने लगती है. इस दौरान महिलाओं को अपनी व्यस्त दिनचर्या से समय निकाल कर चेहरे की रौनक वापस पाने के लिए ब्यूटीपार्लर जाना भी मुमकिन नहीं हो पाता है. ऐसे में वे कुछ आसान उपायों से चेहरे की सुंदरता दोबारा पा सकती हैं. इन के अलावा रैस्टिलेन विटाल जैसे स्किनबूस्टर्स भी उपलब्ध हैं, जो उन के लिए कारगर हो सकते हैं. स्किनबूस्टर रैस्टिलेन विटाल चंद मिनटों में ही और बहुत आसान तरीके से चमत्कारी परिणाम देता है. सब से अच्छी बात यह है कि इस का असर काफी समय तक रहता है.

हाइड्रोफिलिक ह्यालुरोनिक ऐसिड जैल, जिस में पर्याप्त जल बचाए रखने की क्षमता होती है, से त्वचा को मिलने वाली चमक तथा कोमलता 1 साल तक बनी रहती है. त्वचा की ऊपरी परत पर इंजैक्ट करने के बाद रैस्टिलेन विटाल त्वचा को गहराई तक नमीयुक्त बनाता है और उस का पोषण करता है. ह्यालुरोनिक ऐसिड जैल को माइक्रोइंजैक्शन की सहायता से त्वचा की बाहरी परतों में पिरोया जाता है. यह त्वचा को अंदर से नमीयुक्त बनाए रखने के लिए प्राकृतिक रूप से काम करता है. इस से त्वचा निखर उठती है.

महिलाओं को त्वचा की देखभाल अपनी त्वचा के प्रकार के अनुसार करनी चाहिए.

ड्राय त्वचा के लिए

ठंडे पानी की बौछार लें: तैलीय त्वचा पाने के लिए गरम पानी से न नहाएं, बल्कि कुछ देर तक ठंडे पानी की बौछारें लें. नहाने से पहले पूरे शरीर की बादाम के तेल से मालिश करें.

ग्लिसरीन: सोने से पहले पूरे चेहरे पर ग्लिसरीन लगाएं और उसे पूरी रात लगाए रखें.

हनी मसाज: चेहरे पर शहद का लेप लगाएं और 3-4 मिनट तक मालिश करने के बाद धो लें. त्वचा का अनिवार्य तेल वापस लाने के लिए इस प्रक्रिया को रोज अपनाएं.

जौ और खीरे का फेस मास्क: 3 चम्मच जौ या जई का पाउडर, 1 चम्मच खीरे का रस और 1 चम्मच दही को अच्छी तरह मिला लें. इस लेप को चेहरे पर लगा कर सूखने दें. उस के बाद सादे पानी से चेहरा धो लें.

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तैलीय त्वचा के लिए

क्लींजिंग: त्वचा को तेल मुक्त बनाने के लिए चेहरे को दिन में 2-3 बार क्लींजर से धोएं.

स्क्रबिंग: नाक और गालों के पास की मृत कोशिकाओं और ब्लैकहैड्स मिटाने के लिए इन हिस्सों को स्क्रब से अच्छी तरह रगड़ें.

सप्ताह में 1 बार फेस मास्क प्रयोग करें: फेस मास्क आसानी से त्वचा का अतिरिक्त तेल सोख लेता है. आप घर पर भी खुद मास्क बना सकती हैं. नीबू, सेब और अम्लीय औषधि: एक बरतन में थोड़ा पानी ले कर उस में कटे सेब को तब तक पीसें जब तक कि वह नरम न हो जाए. सेब पीसने के बाद उस में 1 चम्मच नीबू का रस और लैवेंडर या पिपरमिंट की सूखी पत्तियों का 1 चम्मच चूर्ण मिलाएं. इस मिश्रण को चेहरे पर लगा कर 15-20 मिनट छोड़ दें. फिर कुनकुने पानी से चेहरे को धो लें.

नाजुक त्वचा के लिए

क्लींजिंग: चेहरे को किसी ऐसे सौम्य क्लींजर से धोएं, जो आप की त्वचा को नुकसान न पहुंचाए.

प्रतिदिन मौइश्चराइज करें: नाजुक त्वचा वाले ऐंटीऔक्सीडेंट युक्त मौइश्चराइजर का इस्तेमाल करें. इस से त्वचा जलयुक्त बनी रहेगी.

सनस्क्रीन: घर से बाहर निकलने से 20 मिनट पहले जिंक औक्साइड और टाइटेनियम डाईऔक्साइड के तत्त्वों तथा एसपीएफ वाले सनस्क्रीन का इस्तेमाल करें.    

– डा. इंदु बलानी

डर्मैटोलौजिस्ट, दिल्ली

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Summer Special: औयली स्किन से छुटकारा दिलाएंगे ये 5 होममेड फेस पैक

औयली (तैलीय) त्वचा वाली महिलाओं को कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ता है. त्वचा पर मौजूद अधिक तेल चेहरे को चिपचिपा बना देता हे, जिस से चेहरे पर कीलमुंहासे होने का डर बना रहता है, लेकिन अब इस डर को घर में बनाए जाने वाले फेस पैक, जिन्हें घरेलू फेस पैक के नाम से भी जानते हैं, का इस्तेमाल कर दूर किया जा सकता है.

डा. दीपाली भारद्वाज, त्वचा रोग विशेषज्ञा बताती हैं कि तैलीय त्वचा से परेशान बहुत सी महिलाएं उन के पास आती हैं, जो विभिन्न क्रीमों व अन्य चिकित्सीय उपचार ले चुकी होती हैं, लेकिन डा. दीपाली के मुताबिक घरेलू उपचार से बेहतर कोई इलाज नहीं.

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इन 5 घरेलू उपचारों का प्रयोग कर आप औयली त्वचा की परेशानियों से छुटकारा पा सकती हैं:

1 केला, शहद और लैमन फेस पैक: केला सेहत के लिए तो फायदेमंद होता ही है, साथ ही यह त्वचा से अतिरिक्त तेल निकालने में भी मदद करता है. केले के साथ शहद और नीबू भी कमाल के गुणों से भरपूर होते हैं. आप को अपने लिए फेस पैक बनाने के लिए बस इतना करना है कि एक केले को मैश कर उस में 1 चम्मच शहद और नीबू का रस मिला कर इस मिश्रण को चेहरे पर तब तक लगाए रखना है जब तक कि यह सूख न जाए. फिर चेहरे को कुनकुने पानी से धो लें.

2 पपीता व लैमन फेस पैक: पपीता एक ऐसा फल है, जो कहीं भी आसानी से मिल जाता है. तैलीय त्वचा के लिए यह अद्भुत विकल्प है. पपीते का फेस पैक बनाने के लिए इसे अच्छी तरह मैश कर के इस में नीबू का रस मिलाएं और फिर करीब 20 मिनट तक चेहरे पर लगाए रखने के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लें.

3 मुल्तानी मिट्टी व गुलाबजल: तैलीय त्वचा के लिए मुलतानी मिट्टी किसी वरदान से कम नहीं है. यह एक प्रकार की औषधीय मिट्टी है. इस में गुलाबजल मिला कर चेहरे पर लगाने से त्वचा से औयल भी निकल जाता है और वह कोमल भी बन जाती है.

4 ऐलोवेरा: ऐलोवेरा जहां पेट के लिए काफी फायदेमंद होता है वहीं यह तैलीय त्वचा के लिए भी काफी उपयोगी होता है. तैलीय त्वचा से छुटकारा पाने के लिए आप ऐलोवेरा में शहद मिला कर चेहरे पर लगाएं. यह फेस पैक यकीनन लाभकारी सिद्ध होगा.

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5 अंडा: अंडा प्रोटीन, विटामिन और विभिन्न मिनरल्स से भरपूर होता है, जो त्वचा को पूरी तरह स्वस्थ रखने का काम करता है. औयली त्वचा से छुटकारा पाने के लिए इस फेस पैक को जरूर ट्राई करें. यह पैक बनाना बहुत आसान है. 1 चम्मच शहद में अंडे की सफेदी मिला कर चेहरे पर लगाएं. 8-10 मिनट लगा रहने के बाद चेहरे को धो लें.

-पूजा

औयली फेस के कारण तेज धूप में चेहरा काला सा दिखने लगता है, मैं क्या करुं?

सवाल

मेरी उम्र 19 साल है. मेरी स्किन बहुत औयली है. तेज धूप में तो चेहरा मेकअप के 1-2 घंटे बाद ही काला सा दिखने लगता है. इस के अलावा बहुत चिपचिपा भी हो जाता है. कृपया कोई घरेलू उपाय बताएं?

जवाब

आप मेकअप के केवल वाटरप्रूफ प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करें. इस से मेकअप बहेगा नहीं और चेहरा भी बिलकुल फ्रैश दिखाई देगा. इस के अलावा पर्स में टू वे केक या लूज पाउडर को भी टचअप के लिए रख सकती हैं. 1 चम्मच मुलतानी मिट्टी में नारियल पानी डाल कर पेस्ट बनाएं और चेहरे पर लगाएं. इस पैक से पोर्स बंद हो जाएंगे और पसीना भी नहीं आएगा.

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हमारी त्‍वचा में औयल ग्‍लैंड होता है जो प्राकृतिक रुप से त्‍वचा को नमी प्रदान करने के लिए तेल प्रड्यूस करता है. पर जब यह ग्रंथी हाइपर एक्‍टिव हो जाती है तो इससे ज्‍यादा मात्रा में तेल निकलने लगता है जिससे चेहराऔयली हो जाता है.

औयली स्‍किन दूसरी त्‍वचा के मुकाबले काफी संवेदनशील होती है जिसकी देखभाल करने की बहुत जरुरत होती है. मुंह पर ज्‍यादा तेल होने से त्‍वचा के रोम छिद्र बंद हो जाते हैं जिससे उन में गंदगी भर जाती है. आज हम आपको कुछ ऐसे फेस पैक बताएंगे जिसको बना कर लगाने से औयली त्‍वचा से छुटकारा पाया जा सकता है.

ऐसे तैयार करें फेस पैक

1. स्‍ट्राबेरी-दही:

एक कटोरे में साफ और पकी हुई स्‍ट्राबेरी लें और उसे कूंट लें. इसके बाद इसमें एक चम्‍मच ताजी दही मिलाएं और दोनों को पेस्‍ट बना लें. इसको चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगा रहने दें और सूखने के बाद हल्‍के गरम पानी से धो लें. यह फेस पैक आपकी डेड स्‍किन को निकालेगा और चेहरे को चमकदार बना देगा.

पूरी खबर पढ़ने के लिए- औयली स्किन के लिए फायदेमंद हैं ये 4 फेस पैक

अगर आपकी भी ऐसी ही कोई समस्या है तो हमें इस ईमेल आईडी पर भेजें- submit.rachna@delhipress.biz
 
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Summer Cracked स्किन को ठीक करने के लिए अपनाएं ये 10 आसान टिप्स

क्रैक्ड स्किन आमतौर पर तब दिखाई देती है जब किसी भी कारण किसी भी प्रकार के स्किन बैरियर से समझौता किया जाता है. यह ड्राई और इर्रिटेटेड स्किन का लक्षण है, लेकिन विशेष रूप से कई संभावित कारण जैसे गर्मियों में टेम्परेचर का बढ़ना क्रैक्ड स्किन के मुख्य कारण हैं. पैर, हाथ और होंठ अन्य भागों की तुलना में अधिक क्रैक्ड की संभावना होती है. फटी या क्रैक्ड स्किन पर कोई भी रैशेस, कट्स या निशान आमतौर पर तब होते हैं जब किसी व्यक्ति की स्किन ड्राई और इर्रिटेटेड होती है. ड्राई और फटी स्किन में इचिंग,फ्लैकी और खून की मात्रा ज्यादा होती है. क्रैक्ड स्किन के लिए किसी भी स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करते समय आप अनप्लीजेंट सेंसेशन महसूस कर सकते हैं. इस स्थिति में स्किन भी पानी के टेम्परेचर और घरेलू क्लीनिंग प्रोडक्ट्स के प्रति अधिक सेंसिटिव महसूस करती है.

क्रैक्ड स्किन बॉडी के किसी भी हिस्से पर दिखाई दे सकती है, लेकिन वैसे हिस्से जो ज्यादा
एक्सपोज्ड होते है या सूरज की किरणों के संपर्क में ज्यादा आते है, वहाँ ज्यादा दिखाई देते है और उनपर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है. यह स्किन में होने वाली सबसे आम समस्या है जिसका सामना लोग गर्मियों के दौरान करते हैं. ज़रूरत से ज्यादा धोने से हाथ और कलाई का सूखना एक ऐसी स्थिति है जो क्रैक्ड स्किन के होने का मुख्य कारण होते है. इसकी उपस्थिति को रोकने के लिए, हर

बार हाथ धोने के बाद मॉइस्चराइज़र का उपयोग करने की आवश्यकता होती है. कुछ मामलों में, क्रैक्ड स्किन एक अंडरलाइंग मेडिकल कंडीशन के सिम्पटम्स भी हो सकते है. कुछ लोगों में, स्किन की स्थिति के कारण क्रैक्ड स्किन की स्थिति हो सकती है, जैसे कि एक्जिमा या सोरायसिस, या क्योंकि स्किन एक इर्रिटेटिंग सब्सटांस के कांटेक्ट में आई थी. स्मूद और हाइड्रेटेड स्किन में, स्किन की लेयर में मौजूद नेचुरल ऑयल मॉइस्चर को बरकरार रखते हुए स्किन को सूखने से रोकते हैं.

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लेकिन अगर स्किन में पर्याप्त ऑयल नहीं है तो यह मॉइस्चर खो देता है. जो स्किन को ड्राई और सिकुड़ देता है जिससे क्रैक्ड स्किन की समस्या पैदा होती है जो खासकर गर्मियों में ज़्यादा होती है.

अगर आपकी हालत बहुत गंभीर है तो ऐसे कई तरीके हैं जिनसे आप घर पर ही अपनी क्रैक्ड स्किन का इलाज कर सकते हैं. क्रैक्ड स्किन से छुटकारा कैसे पाएं ये बता रहें हैं, डॉ. अजय राणा, डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन, संस्थापक और निदेशक, आईएलएएमईडी.

क्रैक्ड स्किन से छुटकारा पाने के लिए इन टिप्स का प्रयोग कर सकते है :

1. मॉइस्चराइजिंग मरहम या क्रीम – क्योंकि ड्राई स्किन क्रैक्ड स्किन का कारण बन सकती है और ज्यादातर मामलों में यह खराब हो सकती है , इसलिए आपकी स्किन को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखना महत्वपूर्ण है. क्रैक्ड स्किन वाले एरिया में आप हमेशा मॉइस्चराइज़र का इस्तेमाल करें.

2. ऐसे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का उपयोग करें जिनमें जोजोबा तेल, नारियल तेल, जैतून का तेल और शीया बटर जैसे इंग्रीडिएंट्स शामिल हो.

3. गर्म पानी से हाथ धोने से बचें. हॉट बाथ और शॉवर लेने से स्किन की स्थिति ड्राई या क्रैक्ड हो सकती है.

4. टॉपिकल हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम का उपयोग करें जो क्रैक्ड स्किन के लिए एक अच्छा उपाय है, जो क्रैक्ड स्किन के कारण होने वाले रेड पैचेज और इचिंग को कम करने में मदद करता है. इसमें कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स होते हैं, जो किसी भी तरह की जलन और सूजन को कम करते हैं.

5. अपनी स्किन को नियमित रूप से एक्सफोलिएट करें. जेंटल एक्सफोलिएशन स्किन की लेयर से डेड और ड्राई सेल्स को हटाने में मदद करता है. यह उपाय सबसे प्रभावी है जो फ़टे पैर और एड़ी के लिए कारगर साबित होता है.

6. गर्मियों में होने वाले क्रैक्ड स्किन से बचने के लिए आप ऐंटिफंगल दवा भी ले सकते हैं, यदि आपको लगता है कि आपके पास एथलीट फुट जैसे टेरीबिनाफिन (लैमिसिल) है, और इसे पैरों पर अफेक्टेड एरिया पर उपयोग करें.

7. क्रैक्ड स्किन को थोड़ी मात्रा में सौम्य खुशबू वाले क्लींजर से धोएं.

8. कुछ कपड़े ड्राई स्किन को परेशान कर सकते हैं. इसीलिए हमेशा स्मूद और ब्रिदेबल फैब्रिक्स जैसे कॉटन और सिल्क पहने और टेक्सचरड मैटेरियल्स के कपड़े पहनने से बचें. किसी भी तरह के हाइपोएलर्जेनिक डिटर्जेंट और फैब्रिक सॉफ्टनर का उपयोग करने से भी क्रैक्ड स्किन के कारण होने वाली जलन को कम करने में मदद मिल सकती है.

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9. गहरी क्रैक्ड स्किन का इलाज करने के लिए एक लिक्विड स्किन बैंडेज एक अच्छा ऑप्शन है. यह ओटीसी ट्रीटमेंट क्रैक्ड स्किन को एक साथ रखता है, जो स्किन की हीलिंग प्रोसेस को बढ़ाता है. इस उपलब्ध लिक्विड स्किन बैंडेज में एक छोटे ब्रश के साथ लिक्विड को स्किन में लगाए. लिक्विड सूख जाएगा और स्किन को सील कर देगा.

10. पेट्रोलियम जेली स्किन को सील और प्रोटेक्ट करके क्रैक्ड स्किन का इलाज करती है. यह स्किन को मॉइस्चर में लॉक करके, क्रैक्ड स्किन को ठीक करने में मदद करता है.

इन 5 Rules को फॉलो कर गर्मी में रखें स्किन का ख्याल

गरमियों में स्किन को ऐक्स्ट्रा केयर की जरूरत होती है. लेकिन अपनी भागदौड़ वाली जिंदगी में हम अपनी स्किन की तरफ ध्यान ही नहीं दे पाते हैं, जिस का नतीजा यह होता है कि हमारी स्किन डल, बेजान सी दिखने लगती है. ऐसे में अगर रोज अपनी स्किन की कुछ मिनट ही सही से केयर कर लेंगे तो आप की स्किन गरमियों में भी दमक उठेगी.

जानते हैं, उन जरूरी चीजों के बारे में, जिन पर गौर कर आप इस समर में फ्रैश स्किन पा सकती हैं:

1. फ्रैश स्टार्ट:

अगर आप की स्किन सुबह फ्रैश फील देती है तो आप को खुद तो तरोताजा महसूस होता ही है, साथ ही आप का कौन्फिडैंस भी बढ़ता है. आप ज्यादा ऐनर्जेटिक हो कर काम कर पाती हैं. इस के लिए आप अपने मौर्निंग स्किन केयर रूटीन में अयूर का बौडी वाश शामिल जरूर करें. इस से स्किन पर जो धूलमिट्टी के कारण गंदगी जमा हो जाती है, वह रिमूव हो कर आप की स्किन सौफ्ट फील देने लगेगी, साथ ही यह स्किन के नैचुरल औयल को भी मैंटेन रखने का काम करेगा. इस से स्किन पर नैचुरल मौइस्चर भी बैलेंस में रहेगा.

2. मौइस्चराइज जरूर करें:

कई महिलाओं को यह समस्या होती है कि नहाने के बाद उन की स्किन ड्राई होने लगती है. इस का कारण है कि वे स्किन को मौइस्चर करना जरूरी नहीं सम झतीं, जिस से स्किन खिंचीखिंची व ड्राई सी लगने लगती है, जो उन्हें पूरे दिन असहज महसूस करवाने का काम करती है. इस के लिए जरूरी है कि आप नहाने के बाद अपनी स्किन को अच्छी तरह मौइस्चराइज जरूर करें. इस बात का भी खास ध्यान रखें कि जिस भी मौइस्चराइजर का चयन करें  वह नैचुरल इन्ग्रीडिएंट्स से बना हो, क्योंकि इस से स्किन को काफी फायदा मिलता है. कोशिश करें कि आप के मौइस्चराइजर में गुलाब, ऐलोवेरा, खीरे जैसे तत्त्व हों, जो गरमियों में स्किन को कूलिंग इफैक्ट देने के साथसाथ स्किन को टैनिंग व डलनैस से भी बचाने का काम करते हैं, जबकि कैमिकल्स वाले प्रोडक्ट्स का स्किन पर ज्यादा इस्तेमाल करने से स्किन के डैमेज होने का डर बना रहता है.

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3. सन प्रोटैक्शन जरूरी:

मौइस्चराइजर के बाद स्किन को सन प्रोटैक्शन देना बहुत जरूरी होता है वरना सूर्य की हानिकारक किरणें धीरेधीरे स्किन को पिगमैंट करने के साथसाथ स्किन की नैचुरल ब्यूटी को चुरा लेती हैं. इसलिए अपनी स्किन के टाइप के हिसाब से सन प्रोटैक्शन का इस्तेमाल करें. इस बात का भी ध्यान रखें कि आप बाहर के संपर्क में कितनी देर रहती हैं, इसे ध्यान में रख कर एसपीएफ का चयन करें ताकि आप को सनस्क्रीन का सही फायदा मिल सके. इस के लिए आप अयूर हर्बल ऐंटी सन टैन का इस्तेमाल कर सकती हैं. इस से आप की स्किन में ग्लो भी नजर आएगा.

4. सीटीएम रूटीन करे स्किन रिलैक्स:

सीटीएम यानी स्किन की क्लींजिंग, टोनिंग व मौइस्चराइजिंग से स्किन को रिलैक्स करना. गरमी, धूलमिट्टी व प्रदूषण के कारण हमारी स्किन का अट्रैक्शन धीरेधीरे कम होने लगता है, जिस के लिए सीटीएम रूटीन का पालन करना बहुत जरूरी होता है. यह स्किन की डीप मसाज कर के उसे क्लीन करने का काम करता है. इस से स्किन फिर से खिल उठती है और आप को अपने मुर झाए चेहरे से छुटकारा मिल जाता है. इस के लिए आप ऐसे इन्ग्रीडिएंट्स वाले प्रोडक्ट्स खरीद सकती हैं, जिन में नीम, चारकोल और पपाया जैसे तत्त्व शामिल हों, क्योंकि ये स्किन पर बहुत थोड़े समय में ही बेहतर रिजल्ट देने का काम करते हैं.

5. पोर्स को करे टाइट:

अकसर क्लींजिंग के बाद स्किन का तो अट्रैक्शन बढ़ जाता है, लेकिन इस के चक्कर में स्किन के पोर्स खुल जाते हैं, जो न तो दिखने में अच्छे लगते हैं और न ही स्किन के लिए अच्छे माने जाते हैं. इस के लिए क्लींजिंग के बाद आप को स्किन पर टोनर जरूर अप्लाई करना चाहिए, क्योंकि यह स्किन पर गुलाबी ग्लो लाने के साथसाथ पोर्स को भी छोटा करने का काम करता है. इस से स्किन लचीली  भी बनी रहती है.  इस के बाद स्किन पर हर्बल मौइस्चराइजर अप्लाई करना न भूलें. यकीनन कुछ ही दिनों में आप की स्किन फिर से यंग व फ्रैश दिखने लगेगी.

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