बढ़ती उम्र में भी खूबसूरती को बनाए रखना महिलाओं के लिए चुनौती भरा काम होता है. खासतौर पर उम्र के 30वें पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाएं अपनी त्वचा में होने वाले ढीलेपन और झुर्रियों से काफी परेशान रहती हैं. दरअसल, 30 की उम्र के बाद त्वचा में प्राकृतिक मौइश्चराइजर बनना बंद हो जाता है, जिसकी वजह से त्वचा में वह कसाव नहीं रहता है जो 30 की उम्र से पहले रहता है. चौकलेट फेशियल उम्र के 30वें पड़ाव पर पहुंच चुकी ही महिलाओं को लाभ पहुंचने के लिए ही है.

गृहशोभा फेब मीटिंग में फेशियल पर हुए स्पैशल सैशन में ब्यूटी ऐक्सपर्ट, मीनू अरोड़ा भी इस बात पर अपनी सहमति जताते हुए कहती हैं, ‘‘चौकलेट में ऐंटीऔक्सीडैंट और ऐंटीएजिंग प्रौपर्टीज होती हैं, जो लिंफैटिक ड्रैनेज के साथ त्वचा पर चढ़ी डैड सैल्स की परत को निकाल देती हैं और त्वचा पर कसाव के साथसाथ निखार और चमक भी लाती हैं.’’

चौकलेट फेशियल कराता है रिलैक्स फील

वैज्ञानिक तथ्य बताते हैं कि चौकलेट की सुगंध और स्वाद दोनों से ही मानव शरीर में हैप्पी हारमोन रिलीज होते हैं, जो मानसिक तनाव को कम करते हैं और खुशी का अनुभव कराते हैं. चौकलेट फेशियल का काम भी कुछ ऐसा ही है, क्योंकि यह फेशियल रक्त में मौजूद सैरोटेनिन यौगिक को बढ़ा देता है, जो तनाव को कम करने में मदद करता है.

सही स्क्रबिंग देती है सही इफैक्ट

चौकलेट फेशियल की शुरुआत दूध से चेहरे की क्लींजिंग करने से होती है. इस के बाद चेहरे को ओटमील, डिस्प्रिन की टैबलेट, शुगर फ्री चौकलेट के पिघले टुकड़े, 1 चम्मच कौफी पाउडर और शहद से स्क्रब किया जाता है.

स्क्रबिंग का सही तरीका बताते हुए मीनू कहती हैं, ‘‘कभी भी स्क्रब लगाते हुए चेहरे को रगड़ना नहीं चाहिए, बल्कि कुछ देर चेहरे पर स्क्रब लगा रहने देना चाहिए. फिर धीरेधीरे उंगलियों को सरकुलेशन मोशन में घुमाते हुए स्क्रबिंग करनी चाहिए. इस से रक्त संचार सुचारु हो जाता है और त्वचा के डैड सैल्स निकल जाते हैं.’’

कोल्ड कंप्रैशर भी जरूरी

स्क्रबिंग के बाद त्वचा को हौट कंप्रैशर देने के लिए स्टीम की जगह पानी में बोरिक ऐसिड मिला कर इस मिश्रण में रूमाल भिगो कर चेहरे पर कुछ देर रखा जाता है. हौट कंप्रैशर त्वचा के पोर्स खोल देता है और उन के आकार को बड़ा कर देता है. बड़े पोर्स बेहद भद्दे लगते हैं, इसलिए हौट कंप्रैशर के तुरंत बाद कोल्ड कंप्रैशर देना जरूरी होता है. इस के लिए ठंडे पानी या बर्फ का इस्तेमाल किया जाता है.

मसाज का महत्त्व

त्वचा को पैनीट्रेट करने के लिए चौकलेट के पिघले टुकड़ों को ऐलोवेरा जैल में मिला कर त्वचा पर लगाया जाता है और नारियल पानी के साथ अल्ट्रासोनिक मसाज दी जाती है. यदि त्वचा औयली है, तो जैल की सामग्री में चुटकी भर सी साल्ट डाल कर त्वचा को मसाज दी जाती है. दरअसल, सीसाल्ट अतिरिक्त तेल को त्वचा से खींच लेता है.

ऐंटीएजिंग फेशियल का सब से प्रमुख हिस्सा होता है स्किन टाइटनिंग क्रीम से चेहरे को दी गई मसाज. इस से त्वचा में कसाव और चमक दोनों आ जाती हैं. मीनू बताती हैं कि इस मसाज में चेहरे के खास प्रैशर पौइंट्स को दबाया जाता है, इस से रक्त संचार बढ़ता है और बहुत ही रिलैक्स महसूस होता है.

फेशियल का आखिरी चरण

सबसे आखिर में ग्लो पैक में पिघली चौकलेट को डाल कर 5 मिनट के लिए चेहरे पर लगाया जाता है. इस के बाद एक बार फिर चेहरे को हौट कंप्रैशर और कोल्ड कंप्रैशर दिया जाता है.

चौकलेट फेशियल के बाद चेहरे को साफ पानी से जरूर साफ कर लें, क्योंकि चेहरे पर चौकलेट की चिपचिपाहट रह जाती है. बिना एसपीएफ क्रीम लगाए धूप में न निकलें, क्योंकि फेशियल के बाद त्वचा में पतलापन आ जाता है और तेज धूप से पतली त्वचा झुलस सकती है.

चौकलेट फेशियल के फायदे

– चौकलेट फेशियल किसी भी प्रकार के स्किन टाइप पर किया जा सकता है.

– चौकलेट में मौजूद ऐंटीऔक्सीडैंट्स त्वचा को फ्री रैडिकल डैमेज से भी बचाते हैं.

– चौकलेट में त्वचा को टैनिंग से बचाने की क्षमता भी होती है.

– यह स्किन को हाइड्रेट भी करता है, जिस से त्वचा की कोमलता बरकरार रहती है.

द्य चौकलेट फेशियल त्वचा में तेजी से कोलोजन बनाता है, जिस से त्वचा की इलास्टिसिटी बनी रहती है.

फेशियल से पहले ध्यान रखें

– फेशियल से पहले ब्लीच न कराएं, क्योंकि ब्लीच त्वचा पर कैमिकल की एक परत चढ़ा देती है, जिस से फेशियल का असर त्वचा पर कम दिखता है.

– फेशियल से 2 घंटे पहले कुछ भी न खाएं, क्योंकि शरीर एक समय एक ही कार्य कर सकता है यानी या तो खाना पचा सकता है या फिर मानसिक थकावट को कम कर रक्त संचार बढ़ा सकता है.

– यदि चेहरे पर पिंपल्स हैं या पके दाने हैं, तो पहले उन का ट्रीटमैंट करें. फेशियल कराने के हफ्ता भर पहले कच्चे दूध में लौंग भिगो कर मिश्रण को दानों पर लगाएं. 3 दिन में दाने सूख जाएंगे.

– हर 25 दिन में ही फेशियल कराएं. यदि इस से पहले कराएंगी तो त्वचा के डैड सैल्स के साथ ऐक्टिव सैल्स भी निकल जाते हैं, जो त्वचा के लिए हानिकारक है.

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