mustard oil benefits : हमारे घरों की रसोई में अगर कोई एक ऐसा तेल है जो बरसों से अपनी जगह बनाए हुए है तो वह है सरसों का तेल. इस की तीखी महक, अनोखा स्वाद और गहरा पीला रंग हमारी पहचान बन चुका है. आज भले ही बाजार में विज्ञापनों के चक्कर में तरहतरह के नए तेल और रिफाइंड बिक रहे हों लेकिन सेहत और स्वाद के मामले में सरसों के तेल का कोई मुकाबला नहीं है. इसे विज्ञान की भाषा में ब्रैसिका कैंपेस्ट्रिस कहते हैं जो सरसों के छोटेछोटे बीजों से तैयार होता है. हमारे देश में खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और हरियाणा में तो इस के बिना खाना पकाने की सोच भी नहीं सकते. यह सिर्फ खाना बनाने के काम ही नहीं आता बल्कि हमारे जीने के तरीके से भी जुड़ा हुआ है.
ठंड के दिनों में शरीर की मालिश करनी हो, छोटे बच्चों की मालिश कर के उन की हड्डियां मजबूत करनी हों, सर्दीखांसी में आराम के लिए इसे लहसुन के साथ गरम कर के छाती पर लगाना हो या फिर दीवाली पर दीए जलाने हों, यह हर जगह काम आता है.
बाजार में मिलने वाले सरसों के तेल को ले कर बहुत से लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि यह असली होता है या फिर मिलावटी. सच यह है कि बाजार में दोनों तरह के तेल मिलते हैं. एक होता है कच्ची घानी का तेल, जिसे बिना किसी कैमिकल या बिना ज्यादा गरम किए, बीजों को दबा कर निकाला जाता है. दूसरा होता है रिफाइंड तेल, जिसे फैक्टरियों में बहुत तेज आंच पर रसायनों की मदद से साफ किया जाता है.
असली पहचान
बहुत से लोग यह भी सोचते हैं कि पहले के समय में सरसों के तेल में एक तीखी गंध आती थी जो नाक और आंखों में लगती थी लेकिन आजकल का तेल बिना गंध के और हलके रंग का होता है. सरसों के तेल की वह असली पहचान और तीखापन उस में मौजूद एक प्राकृतिक तत्त्व की वजह से होता है. जब फैक्टरियों में कैमिकल डाल कर तेल को रिफाइन या साफ किया जाता है तो उस की वह महक तो गायब हो जाती है लेकिन उस के साथ ही तेल के सारे असली गुण, विटामिन और फायदे भी पूरी तरह खत्म हो जाते हैं. इसलिए सेहत के लिए हमेशा पारंपरिक तरीके से निकाला गया शुद्ध कच्ची घानी सरसों का तेल ही सब से अच्छा होता है, भले ही उस में तीखी महक हो क्योंकि वही असली और फायदेमंद है.
सेहत के लिहाज से देखें तो सरसों का तेल गुणों की खान है. इस में शरीर के लिए फायदेमंद अच्छे फैट्स (मूफा और पूफा) सही मात्रा में होते हैं, जो हमारे दिल को तंदुरुस्त रखते हैं. यह शरीर में अच्छे कोलैस्ट्रौल को बढ़ाता है और बुरे कोलैस्ट्रौल को कम करता है, जिस से दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक का खतरा बहुत कम हो जाता है.
लाभकारी तेल
इस के अलावा इस में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 भी पाए जाते हैं जो शरीर के अंदरूनी दर्द या सूजन को कम करने, दिमाग को तेज रखने और जोड़ों के दर्द से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इस तेल का तीखापन देने वाला तत्त्व कीटाणुओं और फंगस से लड़ने में बहुत असरदार होता है. यही वजह है कि जब हम सरसों के तेल में खाना बनाते हैं या आम और मिर्च का अचार डालते हैं तो वह सालोंसाल खराब नहीं होता और लंबे समय तक खाने लायक बना रहता है.
पेट और पाचन के लिए भी सरसों का तेल बहुत लाभकारी है. यह पेट के अंदर उन रसों को जगाता है जो खाना पचाने में मदद करते हैं, जिस से भूख अच्छी लगती है और अपच या गैस जैसी समस्याएं नहीं होतीं.
सेहत के साथसाथ यह हमारी त्वचा और बालों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं है. इस में विटामिन ई होता है जो त्वचा को प्रदूषण से बचाता है, झुर्रियों को रोकता है और चेहरे पर चमक लाता है. बालों में इसे लगाने से बाल जड़ से मजबूत होते हैं, रूसी खत्म होती है और बालों का झड़ना रुक जाता है. चूंकि इस की तासीर गरम होती है, इसलिए सर्दियों में इस से मालिश करने पर खून का दौरा अच्छा होता है, मांसपेशियों का दर्द दूर होता है और शरीर में गरमाहट बनी रहती है.
एक और सब से बड़ी बात यह है कि सरसों का तेल बहुत तेज आंच पर भी जल्दी नहीं जलता. इस का मतलब है कि आप इसे तेज आंच पर गरम कर के पूरियां तल सकते हैं, पकौड़े तल सकते हैं या सब्जी भून सकते हैं, यह खराब नहीं होता और न ही सेहत को नुकसान पहुंचाता है. इस के उलट रिफाइंड तेलों को साफ करने के चक्कर में उस के सारे गुण पहले ही खत्म हो चुके होते हैं. पर्यावरण के लिए भी सरसों की खेती बहुत अच्छी है क्योंकि इसे उगाने में बहुत कम पानी और मेहनत की जरूरत होती है.
सेहत का खजाना
इस के साथ ही सरसों का तेल हमारी रसोई के बजट के लिए भी बहुत किफायती साबित होता है. बाजार में मिलने वाले दूसरे महंगे और विदेशी तेलों के मुकाबले यह काफी सस्ता और आसानी से मिल जाता है. सब से अच्छी बात यह है कि सब्जी बनाते समय यह बहुत कम मात्रा में लगता है क्योंकि यह दूसरे तेलों की तरह पतला नहीं बल्कि गाढ़ा और शुद्ध होता है. 1 चम्मच सरसों के तेल में जो स्वाद और खुशबू आ जाती है, उस के लिए दूसरे तेलों को बहुत ज्यादा डालना पड़ता है. इस तरह यह न केवल हमारी सेहत का खयाल रखता है बल्कि हमारे घर के खर्च को भी नियंत्रण में रखता है.
कुछ समय पहले सरसों के तेल को ले कर एक अफवाह उड़ी थी कि इस में पाया जाने वाला एक ऐसिड दिल के लिए ठीक नहीं है. लेकिन डाक्टरों और वैज्ञानिकों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय लोग सदियों से इस का इस्तेमाल कर रहे हैं और सीमित मात्रा में इसे खाना पूरी तरह सुरक्षित है. अब तो ऐसी नई किस्में भी आ गई हैं जिन में यह समस्या न के बराबर है. वैसे भी किसी भी तेल का बहुत ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए इसे सही मात्रा में ही खाना चाहिए. सब से अच्छी बात यह है कि जब हम शुद्ध सरसों का तेल खरीदते हैं तो हमारा पैसा सीधे हमारे देश के किसानों के पास जाता है, जिस से गांवों की तरक्की होती है.
स्वास्थ्य के लिए अच्छा
आज के समय में जब पूरी दुनिया फिर पुरानी और प्राकृतिक चीजों की तरफ लौट रही है तो हमें भी अपनी इस अनमोल धरोहर को नहीं भूलना चाहिए. हमारे पूर्वज बिना किसी बीमारी के लंबा और स्वस्थ जीवन जीते थे क्योंकि वे इसी तरह के शुद्ध और देशी खानपान का इस्तेमाल करते थे. पैकेटबंद और मशीनों से अत्यधिक साफ किए गए तेलों के पीछे भागने के बजाय अपनी रसोई में कच्ची घानी सरसों के तेल को वापस जगह देना हमारे स्वास्थ्य के लिए सब से बड़ा कदम होगा. यह तेल हमें हमारी मिट्टी की खुशबू से जोड़ता है और हमारे परिवार को एक सुरक्षित, मजबूत और निरोगी भविष्य देता है.
-डा. दीपक कोहली, विशेष सचिव

