data professionals : गृहशोभा के ‘यूनिवर्सिटी औफ लाइफ सेगमैंट’ में हमारे साथ डाटा वेयरहाउसिंग ऐंड डाटा ऐनालिटिक्स की फील्ड से चारू वशिष्ठ हैं. चारू मैक्स लाइफ इंश्योरैंस में एवीपी हैं. आज इस इंटरव्यू में वे अपनी कैरियर जर्नी और ऐक्सपीरियंस के आधार पर स्टूडैंट्स के लिए खासकर जिन्हें डाटा ऐनालिसिस के क्षेत्र में कैरियर बनाना है उन सभी के लिए बहुत सी गाइडैंस और एडवाइस साझा कर रही हैं:

स्कूल के वे सब्जैक्ट्स जो डाटा ऐनालिसिस डिगरी में काम आते हैं?

अगर स्टूडैंट्स इस कैरियर फील्ड में इंटरैस्ट है तो वे अपने मथेमैटिक्स और स्टैटिस्टिक्स पर ध्यान दें, साथ ही रीजनिंग और लौजिक पर भी, जो हमारे समय में स्कूल में नहीं पढ़ाए जाते थे. ही स्टूडैंट्स की अपनी पढ़ाई के साथ यहां स्कूल का भी रोल है कि वह इन विषयों को थोड़ा इंटरैस्टिंग तरीके से पढ़ाए सम?ाए. सिर्फ मोड, मीडियम निकाल दिया इतना काफी नहीं. उन्हें बताए कि रियल लाइफ में इन का क्या उपयोगिता है. थोड़ा रियल लाइफ उदाहरण दे.

कालेज डिगरी या फिर कोई आईटी कोर्स, बूटकैंप ही काफी है?

पहले तो ग्रैजुएशन में आप को इस फील्ड के हर विषय, टौपिक जैसे लौजिक, नैटवर्क, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज, वेयरहाउसिंग का थोड़ाथोड़ा नौलेज दिया जाता है. लेकिन डीप स्टडी, डिटेल नौलेज मास्टर में मिलता है क्योंकि यह एक स्पैशल फील्ड है. इसलिए डिगरी लेना जरूरी है. आप आईटी की डिगरी लें जैसे कंप्यूटर साइंस, नैटवर्किंग आदि. साथ ही इस के आईटी प्रोगामिंग के सर्टिफिकेशन कोर्स भी करते रहे.

अब रही बात सिर्फ बूटकैंप या कोई छोटा आईटी कोर्स कर लेने कि तो कोई भी बूटकैंप फौर्मल या ट्रैडिशनल डिगरी को रिप्लेस नहीं कर सकता. बूटकैंप एक बोनस की तरह है या न कि प्रौपर डिगरी.

मजबूत कैरियर में एक कालेज चौइस का क्या रोल रहता है?

पहले तो कालेज औप्शन आप की रैंक पर निर्भर करता है. लेकिन अगर आप को चयन करने का औप्शन मिलता है तो कालेज की ऐलुमनी बेस को देख कर करें. देखिए उस कालेज से पासआउट स्टूडैंट्स को क्या अवसर मिले हैं, क्या नहीं. दूसरा उस कालेज की फैकल्टी के ऐक्सपीरियंस, परफौर्मैंस, ऐजुकेशन को देखें. तीसरा अगर आप का स्पैशलाइज्ड सब्जैक्ट है तो देखें कि उस कालेज में वह कैसे पढ़ाया जा रहा है, वहां से क्या अवसर मिल रहे हैं.

सब से जरूरी बात यह कि अगर आप को आईआईटी, एनआईटी जैसी प्रीमियम यूनिवर्सिटी में एडमिशन मिल रहा है तो सोचें मत क्योंकि इन कालेजों की पढ़ाई, फैकल्टी, ऐन्वायरन्मैंट, कैंपस, सुविधाएं और प्लेसमैंट्स बहुत अच्छी रहती हैं. यहां पढ़ाई के साथ और बहुत कुछ है ऐक्सप्लोर करने को.

कौन से सर्टिफिकेशन और स्किल्स हैं जरूरी?

कालेज डिगरी पहली जौब में बहुत काम आती है. लेकिन उस के बाद आगे का कैरियर आप की परफौरर्मैंस पर निर्भर करेगा. इसलिए सीखते रहना बंद नहीं करना. जावा, ओरेकल, एडब्लूएस (अमेजन वैब सर्विसेज) क्लाउड, पाइथन, कोई भी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज सर्टिफिकेशन जरूर करें. चाहे आप कालेज स्टूडैंट हों, हाई लैवल जौब कर रहे हों या अभी स्कूल में ही हों अगर आप का इस फील्ड में इंटरैस्ट है, कैरियर बनाना है तो सर्टिफिकेशन जरूर करें. सर्टिफिकेशन के लिए कोई उम्र नहीं होती. अपनी पढ़ाई अपने काम के साथसाथ करते रहें. सर्टिफिकेशन हमेशा इस की मान्यता देते हैं कि आप को यह काम आता है, आप में यह स्किल और नौलेज है और सर्टिफिकेशन प्रोफैशन में आगे बढ़ने में बहुत काम आते हैं.

इस के साथ ही अपनी सौफ्ट स्किल्स पर भी काम करें जैसेकि कम्युनिकेशन स्किल्स. इस में अपनी स्पीकिंग और लिसनिंग दोनों स्किल्स पर काम करें ताकि दूसरे के सामने अपनी बात अच्छे से रख पाएं और उन की बात को अच्छे से सुनें भी. दूसरा खुद में ऐंपथी यानी संवेदना भी रखें ताकि आप दूसरों के साथ मिल कर काम कर सकें. कलीग्स के साथ टीम प्लेयर होना जरूरी है, आप हर काम अकेले नहीं कर सकते.

कालेज प्रोजैक्ट्स और इंटर्नशिप का क्या महत्त्व रहता है?

प्रोजैक्ट्स करते समय 2 बातों पर ध्यान दें, एक उस का आइडिया यूनीक हो और दूसरा वह रियल लाइफ प्रौब्लम सौल्वर होना चाहिए. तभी वह एक डिफरैंस क्रिएट कर सकता है. आज एआई भी प्रोजैक्ट्स बना देते हैं जैसे कोई पेंटिंग. अब वह पेंटिंग तो बना देगा लेकिन क्या उस में औरिजिनैलिटी आएगी? इसलिए अपने प्रोजैक्ट्स में यूनिक आईडिया और रियल वर्ल्ड प्रौब्लम सौल्विंग का कौंसैप्ट लाएं जैसे कोई एप जो रियल लाइफ प्रौब्लम को टैकल करता हो.

अपने प्रोजैक्ट्स अच्छे से पूरा करें इसलिए नहीं कि मार्क्स अच्छे मिलेंगे बल्कि इसलिए कि आप को सीखने को मिलेगा. इसलिए प्रोजैक्ट्स को अच्छे से पूरा करें और उन्हें अपने रिज्यूम में मैंशन करें ताकि इंटर्नशिप के समय आप को काम देने वाले इंप्लौयर को पता हो कि आप ने ऐसे प्रोजैक्ट्स किए हैं, आप को यह काम आता है. प्रोजैक्ट्स और सर्टिफिकेशन आप के रिज्यूम में वजन देते हैं.

हां, यह बात भी सही है कि आजकल अच्छी इंटर्नशिप मिलना भी मुश्किल है. इसलिए अपनी फील्ड की कंपनी शौर्टलिस्ट करें और उन्हें विजिट करें.

यह मत सोचें कि सैलरी क्या है. आप पहले काम पकड़ें क्योंकि यह काम सीखने का समय है. जितना हो सके उतना सीखे. काम करतेकरते मार्केट लीडर्स में भी अप्लाई करते रहो. मार्केट लीडर्स जैसे हमारी ही कंपनी मैक्स लाइफ इंश्योरैंस और अमेरिकन ऐक्सप्रैंस, आरबीएस आदि कंपनीज इंटर्नशिप देती हैं.

आगे के वर्षों में डाटा प्रोफैशनल्स का क्या स्कोप दिखता है?

डाटा प्रोफैशनल्स की आज हर जगह मांग है. आप कोई भी कंज्यूमरफोकस्ड कंपनी देख लीजिए, आप को हर जगह कंज्यूमर डाटा पर काम करते लोग मिलेंगे जो यह देखते कि उन का कंज्यूमर कौन है, उसे क्या पसंद है, कहां से आ रहे हैं और भी बहुत कुछ. छोटेछोटे डैमोग्राफिक भी फर्क पैदा करते हैं. उन इन्फौरमेशन को स्टोर करना, ऐनालाइज करना यह सब डाटा प्रोफैशनलिज्म में ही तो आता है, जिस से पता चलता है कि कंज्यूमर के लिए और क्या किया जा सकता है या हम कहां उसे मिस कर रहे हैं. तो डाटा प्रोफैशनल्स के लिए हर कंज्यूमर सैक्टर में बहुत स्कोप हैं जैसेकि बैंकिंग, फाइनैंसियल सर्विसेज और इंश्योरैंस.

क्या एआई टैक्नोलौजी इस सैक्टर में जौब कम कर देगी?

आज एआई बहुत बढ़ गया है. यह आप को रिपोर्ट्स तो बना के दे देगा लकिन जो डिसीजन मेकिंग है, उस का प्रोसैस है, जो स्ट्रैटेजी है उस के लिए तो आप को लोग ही चाहिए. एआई आप का हार्डवर्क थोड़ा कम कर देगा लेकिन डिटेलिंग, सौल्यूशन, डिसीजन यह सब तो आप को ही करना है. तो यहां आप को अपने इंटैलिजैंस पर फोकस करना है कि आप कैसे एआई को यूज करें या उस पर काम करें.

कैरियर टिप्स

अपने प्रोजैक्ट्स में यूनिक आईडिया और रियल वर्ल्ड प्रौब्लम सौल्विंग का कौंसैप्ट लाएं.

अपनी फील्ड को एक्सप्लोर करो, कुछ न कुछ नया सीखते रहो, किताबें पढ़ो.

डाटा की फील्ड में सर्टिफिकेशन का बहुत महत्त्व है इसलिए प्रोग्रामिंग सर्टिफिकेशन और स्किल्स पर फोकस रहे.