Interview: संचयिता वर्मा आज एक मजूबत लीडर है

Interview कभी दूसरों के काम को अपना मत बोलो. खुद हार्डवर्क करो और अपनी काबिलीयत सिद्ध करो. मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में 25 सालों के ऐक्सपीरियंस और हार्डवर्क के साथ संचयिता वर्मा आज एक मजूबत लीडर के रूप में देखी जाती हैं.

March 2, 2026

Interview कभी दूसरों के काम को अपना मत बोलो. खुद हार्डवर्क करो और अपनी काबिलीयत सिद्ध करो. मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में 25 सालों के ऐक्सपीरियंस और हार्डवर्क के साथ संचयिता वर्मा आज एक मजूबत लीडर के रूप में देखी जाती हैं. संचयिता ने दुनिया की बहुत बड़ी कंपनीज जैसे कैरट इंडिया, माइंडशेयर, जेडब्ल्यूटी आदि के साथ काम किया. संचयिता वर्मा हमेशा से नया करने, सीखने और सिखाने में खुद को बिजी रखती हैं. गृहशोभा उन की ऐजुकेशन और कैरियर जर्नी पर उन से बात कर स्कूल से कालेज की ओर बढ़ते हुए स्टूडेंट्स के लिए कुछ एडवाइस और गाइडेंस ले कर आई है:

फैमिली और बचपन की मीठी यादें

मेरा बचपन बहुत मीठी यादों से भरा है. मेरे पिता बैंकर थे तो उन का ट्रांसफर होता रहता था. मुझे याद है हम पहले गुवाहाटी में थे, फिर मुंबई और फिर दिल्ली गए. मुझे लगता है शहरों के बदलते रहने की वजह ने मुझ में चीजों को सिखना, वहां के वातावरण में ढलना सीखा दिया. मेरी मां हाउसमेकर थीं.

वे पढ़ने में बहुत तेज थीं. वे अपना पूरा ध्यान सिर्फ मुझ पर और मेरे भाई पर देती थीं. 70 के दशक में खेलने के इतने साधन नहीं थे जितने आज हैं. मैं और मेरा भाई अपने ही खेल बनाते थे. घर के बाहर की घास में खेलना, वहां छोटे से तालाब में मछलियां पकड़ना. मेरे बचपन में जो

बहुत बड़ी चीज थी वह थी मेरे मातापिता की सोच कि हमारे लिए लड़का और लड़की दोनों बराबर हैं. इस ने मुझे आगे बढ़ने में हमेशा मेरी मदद की. मेरे पिता के ट्रांसफर होते रहते थे, इसलिए मैं ने 5 स्कूल बदले. इस से मुझे कई बार जलन होती क्योंकि बहुत से बच्चों का केजी से 12 क्लास तक एक ही स्कूल होता था.

ऐजुकेशन और कैरियर चुनाव स्कूलिंग के समय मैं ऐक्स्ट्रा स्किल्स में भी रुचि लेती थी. 1 साल मैं ने क्राफ्ट सीखा, 1 साल गार्डनिंग किया. जादवपुर विश्वविद्यालय से मैं ने गणित में औनर्स किया. उस के बाद सोचा कि अब कैरियर में आगे क्या करना है. तब मेरे एक दोस्त ने एमबीए करने का सुझाव दिया.

उस समय मेरे दिमाग में था कि मुझे किसी संगठन में, व्यवसाय संगठन में काम करना है तो मास्टर औफ बिजनैस एडमिनिस्ट्रेशन करना सही रहेगा. मुझे बचपन से फिक्शन पढ़ने का बहुत शौक था. मैं लाइब्रेरी जाती थी और ब्लाइटन की बुक्स उठाती थी. वह स्टोरीटेलिंग मेरी इमेजिनेशन को बढ़ावा देता था.

मैं ने मैथेमैटिक्स लिया क्योंकि मुझे साइंस पसंद थी और जब एमबीए लिया तो मार्केटिंग का चयन किया क्योंकि मार्केटिंग में ऐनालिसिस के साथ लोगों को समझाना, अपने प्रोडक्ट्स के बारे में बताना था, जो एक तरह का स्टोरीटेलिंग जैसा ही था. इसलिए मैं ने आईएमटी, गाजियाबाद से मार्केटिंग में एमबीए किया.

मेरी यूनिवर्सिटी लाइफ में बहुत से अच्छे दोस्त बने जो एकदूसरे को हमेशा सपोर्ट करते थे, हौसला बढ़ाते
थे. साथ ही यूनिवर्सिटी के मँटर भी बहुत अच्छे और हमेशा हमें सपोर्ट करते थे. उस के बाद मुझे जेडब्ल्यूटी मीडिया के साथ काम करने का मौका मिला. मुझे लगता है मैं अपने परिवार की पहली प्रोफैशनल महिला बनी थी.

शुरुआती कैरियर में कालेज और मैंटर का रोल मुझे प्रोफैशन क्षेत्र में भी बहुत अच्छे टीचर्स मिले. उन्होंने मुझे जो बोला मैं ने वह किया क्योंकि मेरी सीखने की चाह थी. मुझे याद है जब मैं जेडब्ल्यूटी में थी, तब वहां मुझे सिखाया गया कि कभी किसी और के काम को अपना मत बोलो. यह मुझे हमेशा अच्छा करने में, आगे बढ़ने में इंस्पायर करता था.

मेरे जीवन के गुरु डा. डेसाकुइकेदा जो सोका सीखा कि जीवन कैसे जीना चाहिए. अगर हम मैनी बौडी वन माइंड हो कर काम करें यानी हम अगर एकजुट हो कर काम करें तो हमें सफलता मिलती है. दूसरा यह
सीखा कि घर पर या और कामों में हमें एक आदमी जितना काम करना चाहिए लेकिन अपने काम पर यानी प्रोफैशन में हमें 3 आदमी जितना काम करना चाहिए.

एडवरटाइजिंग और मार्केटिंग इंडस्ट्री एक क्रिएटिव इंडस्ट्री है, जहां हर रोज कुछ नया, कुछ अलग होता रहता है. इसलिए आप को हमेशा खुद को अपडेट रखना पड़ता है. कम समय में डैडलाइंस पूरी करनी पड़ती हैं. कई बार लास्ट पौइंट पर क्लाइंट के लिए चेंजिस करने पड़ते हैं जो एक तरह से चुनौती भी है.

मुझे याद है जादवपुर यूनिवर्सिटी में कालेज फैस्ट होते थे. मैं और मेरे दोस्तों का एक ग्रुप था. हम विभिन्न कंपनियों के पास नए व्यवसाय के लिए पिचिंग करने जाते थे, प्रेजैंटेशन देते थे. आईएमटी गाजियाबाद में हमारा फोकस ग्रुप डिस्कशन, ग्रुप एक्टिविटी, टीम पार्टिसिपेशन, इंटरग्रुप स्किल्स पर था जो एक फाउंडेशन बनाने के लिए बहुत जरूरी है.

साथ ही जब मैं ने काम करना शुरू किया तो फाइनैंशियल सिक्युरिटी जैसा कुछ नहीं था. हमारी सैलरी कम थी, मगर उस समय हमारी जरूरतें भी कम थीं. आज लाइफ में लोगों की बहुत सारी जरूरतें हैं.

क्या मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग स्टूडैंट्स के लिए खतरा है

आज मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में स्टूडैंट्स के लिए बहुत सारे स्कोप हैं. अगर आप इस इंडस्ट्री में इस वजह से आने से डर रहे हैं कि कहीं एआई आप की औपर्च्यूनिटी न छीन ले तो आप घबराओं नहीं और देखो कि आज के समय में एआई बहुत इंपोर्टेंट है. दूसरा ऐसा नहीं है कि इस के आने से एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री में बहुत कुछ खत्म हो जाएगा.

अगर हम 25 साल पहले से आज की ‘तुलना करें तो एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री बहुत बदली है. बहुत से काम जो हम हाथ से करते थे और उन में गलती के भी चांस रहते थे. आज एआई उसे बहुत जल्दी और आसानी से कर देता है. हां यह इरिटेटिंग भी है. मगर जब आप कोई नंबर वाला काम ऐक्सैल पर रहे हैं तो एआई
उसे फट से कर देता है.

आज सबकुछ डिजिटल हो रहा है, लेकिन आज भी बहुत सी चीजें सिंपल प्रिंसिपल पर हैं और आगे भी रहेंगी. जहां लोग ही काम करेंगे, आई नहीं. तो एआई से डरो नहीं. बल्कि उसे एक हैल्पिंग टूल की तरह देखो, उस पर काम करना सीखो. जैसे पहले मीडिया हाउस को, मैगजीन को अपनी टीआरपी जानने के लिए नंबर हाथ से गिनने पढ़ते थे, आज वह काम सौफ्टवेयर मशीन कर देती है.

लेकिन उस टैक्नोलोजी को चलाने वाले तो इंसान ही हैं तो टैक्नोलोजी के आने से हमारा काम और
ऐक्साइटिंग हो गया है. इसलिए टैक्नोलौजी को अपनाओ और सीखो. साथ यह भी समझें कि जिस तरह डाक्टर्स को अपनी प्रैक्टिस लाइसैंस बनाए रखने के लिए हर साल नया सर्टिफिकेशन लेना पड़ता है उसी
तरह हमारी इंडस्ट्री में भी न्यू सर्टिफिकेशन लेने पड़ते हैं.

एक बार डिगरी ले ली और हो गया. ऐसा नहीं होता हमेशा कुछ न कुछ सीखते रहना पड़ता है. स्टूडेंट्स के लिए कैरियर का चुनाव एक अच्छी डिगरी, एक अच्छा कालेज जरूर आप के कैरियर को शेप करने में मदद करता है. लेकिन अगर आप को एक अच्छे कालेज में एडमिशन नहीं मिला, यह नहीं पता कि क्या करना है, कहां जाना है, तो मैं यह कहूंगी, आप के पास जो है आप उस पर फोकस करो और खुद से कहो कि मैं जो भी करूंगा वह मेरे काम आएगा.

इस उम्र में बहुतों को नहीं पता होता की क्या करें, क्या नहीं. तो मैं कहूंगी कि आप अच्छे रोल मौडल देखें, अच्छी बुक्स पढ़ें. जो स्टूडेंट्स अपना लक्ष्य, अपना सब्जैक्ट डिसाइड कर चुके हैं मैं उन ने कहूंगी कि सिर्फ
अपने विषय तक सीमित नहीं रहें. मल्टीस्किल्ड बनें और भी चीजें ऐक्स्प्लोर करें, उन्हें सीखें.

जैसे एक अच्छा क्रिकेटर सिर्फ क्रिकेट ही नहीं खेलता रहता, वह कभीकभी फुटबाल भी खेलता है, टैनिस भी खेलता है, बुक्स भी पढ़ता है. ठीक उसी तरह तुम भी कुछ न कुछ सीखते रहो. साथ ही स्टूडेंट्स को बोलूंगी कि कभी भी निराशा हाथ आए तो परेशान न हों. कोशिश करते रहो, जो चीजें तुम्हें इंस्पायर करती हैं, उन में लगे रहो.

देखना एक दिन तुम अपना बैस्ट करोगे. हमारे समय में था कि सिर्फ डाक्टर या इंजीनियर का ही भविष्य है. लेकिन आज सबकुछ बदल चुका है. आप के पास बहुत सारे विकल्प हैं तो जो आप को पसंद है वह करो, अपना पूरा हार्डवर्क करो, आगे बढ़ने के लिए खुद को पुश करते रहो, खुद पर विश्वास करो और थोड़ा चैलेंज भी करो. फीयरलैस बनो.

मैसेज टू गर्ल्स पेरेंट्स

गर्ल्स पेरेंट्स को समझना चाहिए कि लड़कीलड़का सब बराबर हैं. जो छूट, जो अधिकार लड़के के हैं वे लड़की के भी हैं. मुझे याद है मेरे पेरेंट्स ने मुझ से कहा था कि पहले पढ़ाई उस के बाद कुछ और. और मुझे हर वह मौका दिया जो मेरे भाई के पास था. मैं ने ऐसी बहुत सी मांएं देखी हैं, जिन्होंने अपने लड़कों को घर का हर काम करना सिखाया है क्योंकि उन के लिए भी लड़का लड़की एक हैं तो दोनों को सारे काम आने चाहिए, इसलिए पेरेंट्स अपनी बेटियों को मौका दें, उन्हें उन की पसंद का सब्जेक्ट, कैरियर चुनने दें और उन्हें सैल्फ डिपेंडेंट बनाएं, कुछ महत्त्वपूर्ण सीख

• खुद पर विश्वास करो, कल क्या हुआ, आगे क्या होने वाला है, इस के बारे में मत सोचो. यह टाइम है खुद को बिल्ड करने का, डैवलप करने का और पेरेंट्स अपने बच्चों को जरूरत से ज्यादा प्रोटैक्ट न करें क्योंकि कोई बच्चा बहुत ही पैंपर्ड ऐन्वायरन्मेंट में ग्रो नहीं कर सकता. स्टूडेंट्स भी बहुत इजी पाथ न चुनें
क्योंकि जब वे चैलेंज नहीं लेंगे, हार्डवर्क नहीं करेंगे, डिफरैंट ऐन्वायरन्मेंट में नहीं जाएंगे, काम
नहीं करेंगे तो कैसे सक्सैसफुल बनेंगे, कैसे ग्रो करेंगे. याद रखें कि एक पत्थर को भी डायमंड बनने के लिए हाई प्रेशर से गुजरना पड़ता है.

• मैं यह भी कहना चाहूंगी कि इंडिया विल राइज, व्हेन यूथ विल राइज और हमारे यहां लोग मेहनती हैं. मैं चाहती हूं स्टूडेंट्स और अच्छा पढ़ेंसीखें, ग्रो करें ताकि न्यू इंडिया ऐंड न्यू ग्लोबल सिविलाइजेशन क्रिएट हो. जहां सब  एकदूसरे का सम्मान करें, साथ दें.

• अपने मातापिता और गुरुजनों के संघर्ष से सीख लें. ऐसा मैं ने भी सीखा. मेरे मातापिता हमेशा से बहुत हार्डवर्किंग थे. आज मेरे पिता 86 साल के और मां 77 साल के होने के बावजूद दोनों कुछ न कुछ करते रहते हैं.

बॉक्स

जन्मस्थान: कोलकाता
ऐजुकेशन: स्कूलिंग- मदर्स इंटरनैशनल
स्कूल- दिल्ली, एमबी गर्ल्स स्कूल
कोलकाता, बालिका शिक्षा सदन-
कोलकाता. ग्रैजुएशन जादवपुर
यूनिवर्सिटी, कोलकाता, एमबीए-
आईएमटी, गाजियाबाद.
प्रोफैशन: लीडर इन मार्केटिंग ऐंड एडवरटाइजिंग इंडस्ट्री, फौर्मर सीईओ कैरट इंडिया.