साहित्यिक कृतियों को सेल्यूलाइड के परदे पर उतारते समय फिल्मकार किस तरह उसकी हत्या कर देते हैं,इसका जीता जागता नमूना है राहत काजमी की फिल्म ‘‘मंटोस्तान’’. देश के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर सआदत हसन मंटो लिखित चार रोंगटे खड़े कर देने वाली विवादास्पद कहानियों ‘‘ठंडा गोश्त’’, ‘‘खोल दो’’, ‘‘आखिरी सैल्यूट’’ और ‘‘असाइनमेंट’’ को मिलाकर फिल्मकार राहत काजमी ने फिल्म ‘‘मंटोस्तान’’ की पटकथा लिखी है. लेकिन जिन्होंने सआदत हसन मंटों व उनकी कहानियों को पढ़ा है, उन्हें पूरी फिल्म देखने के बाद अहसास होता है कि  साहित्यिक कृतियों के साथ पूरा न्याय करने में फिल्मकार विफल रहा है.

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