पिछले वर्ष 26 दिसम्बर को ईकौमर्स में एफडीआई से जुड़ी की गई सरकार की घोषणा से अमेरिकी ईकौमर्स कंपनी एमेजौन और अमेरिका की वौलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट ज्यादा ही टेंशन में हैं. हालांकि, इन के आलावा दूसरी सभी ईकौमर्स कंपनिया भी टेंशन में हैं.

दरअसल, इस वर्ष के चौथे महीने यानी अप्रैल में देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी को आम चुनाव का सामना करना है. सत्ता का उस का कार्यकाल 14 पूरा हो जाएगा. ऐसे में उसे वोटबैंक की चिंता सताने लगी है क्योंकि वह अपने कार्यकाल में जनहित के कार्यों को लागू नहीं कर पाई है. उलटे, उस के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायन्स (एनडीए) सरकार ने जो कदम उठाए, वे जनहित नहीं बल्कि जनअहित के रहे. नतीजतन, देश के मतदाता एनडीए व उस की सारकार से नाराज हैं.  इस की एक बानगी हालिया हुए 5 राज्यों की विधानसभाओं के चुनावों में देखने को मिली जब भाजपा कहीं भी सरकार न बना सकी. उसे हर जगह हार का स्वाद चखना पड़ा.

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