चाहे शादी ब्याह हो या पूजा पाठ,पार्टी या कोई अन्य फंक्शन मिठाइयों के बिना पूरा हो ही नहीं सकता.मिठाई किसी भी अवसरों की जान होती है. और अगर इन अवसरों पर अच्छी क्वालिटी की मिठाई न मिले तो समझ लीजिए कि अवसर का का मजा किरकिरा हो गया.

भारतीय खाने की तरह भारतीय मिठाइयों में भी बहुत विविधता है. बंगाली मिठाइयों में छेने की प्रमुखता है तो पंजाबी मिठाइयों में खोये की. उत्तर भारत की मिठाइयों में दूध की प्रमुखता है तो दक्षिण भारत की मिठाइयों में अन्न और नारियल की. बेशक त्योहारों व दूसरे अनुष्ठानों में मिठाई का बहुत महत्व होता है और हममे से अधिकतर लोग बाहर की मिलावटी मिठाइयों को उसके नकारात्मक परिणाम को जाने बिना खरीदकर घर लाते हैं, और बच्चे व परिवार के सभी लोग उसे स्वाद से खाते भी हैं.
पर क्या आप जानते है त्योहार के समय मिलावट चरम पर होती है, क्योंकि दूध, मावे की मांग काफी होती है और इससे व्यापारियों को मुनाफा होता है. इसलिए वो अक्सर मिठाईयों को मिलावटी मावे के साथ-साथ सस्ते और हानिकारक रंगों का इस्तेमाल कर, बाजार में सजाकर और आकर्षक बनाकर बेचते है .जिसका परिणाम आपके और आपके परिवार के लिए बेहद घातक साबित हो सकता हैं.
तो क्यों न हम इन मिठाइयों को घर पर बनाने की कोशिश करे.हो सकता है वो बाहर की मिठाइयों की तुलना में देखने में ज्यादा आकर्षक न लगे लेकिन उनसे हमे और हमारे अपनों को कोई नुक्सान नहीं होगा.

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