चंपक वन में सभी जानवरों को डाकिया जंबो हाथी डाक बांट रहा था. वह सुबह से ही इस काम में लगा हुआ था. शाम हो चुकी थी. अंतिम पत्र चीकू खरगोश का था. उस ने चीकू को पत्र दिया और जमीन पर बैठ कर पानी पीने लगा. फिर अपने दोस्त के साथ कुछ देर आराम किया.

चीकू ने पूछा, ‘‘अभी भी तुम्हारे हाथ में किस का पत्र है?’’

‘‘यह पत्र मेरे लिए है,’’ तभी जंबो ने कहा.

‘‘तुम्हारा लिफाफा बिलकुल मेरे लिफाफे की तरह है. हम इन्हें खोल कर पढ़ते हैं.’’ चीकू भी हैरान था.

जंबो और चीकू पत्र खोल कर पढ़ने लगे. उस में लिखा था, ‘जंगल के पीछे की घाटी में होने वाली ग्रैंड पार्टी में आज रात दस बजे आप का हार्दिक स्वागत है. कृपया पधारें.’

‘‘हमें एक ही पार्टी के लिए निमंत्रण मिला है. मुझे लगता है कि यह किसी की शरारत है,’’ चीकू ने कहा.

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अन्य सभी जानवरों ने भी अपना लिफाफा खोल कर देखा. सभी को ग्रैंड पार्टी में बुलाया गया था.

मीकू चूहे ने जंपी को बताया, ‘‘मैं इस पार्टी में नहीं जाना चाहता हूं. मुझे अंधेरे से डर लगता है.’’

जंपी बोला, ‘‘हम एक लालटेन साथ में ले कर चलेंगे. यह पहला मौका है कि जब कोई पार्टी दे रहा है. हम अगर नहीं जाएंगे तो उसे बुरा लगेगा.’’

डमरू गधा खुशी से उछलकूद रहा था. ‘‘यह तो बहुत ही अच्छी खबर है. वहां पार्टी में खाने के लिए अच्छेअच्छे डिशेज होंगे. हम सभी नाचेंगे, गाएंगे और हमारे पास खुशियां मनाने के लिए बहुत समय होगा.’’

हर कोई पार्टी में जाने की तैयारी में व्यस्त हो गया. कोई अपने कपड़ों में इस्तिरी करने में व्यस्त था तो कोई अपने जूतों पर पौलिश करने में. टीटू तितली भी मेकअप के लिए ब्यूटीपार्लर गई थी.

चीकू घर में बैठा हैरान था कि जंगल के पीछे घाटी में 10 बजे रात में सभी जानवरों के लिए यह पार्टी, कुछ तो गड़बड़ जरूर है. वह यही सोच कर परेशान था.

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आठ बजे तक सभी जानवर कपड़े पहन कर तैयार हो गए थे. उन सभी ने घाटी की ओर एकसाथ जाने का निश्चय किया था. मीकू चूहा और डमरू गधे ने थोड़ी झपकी भी ले ली थी ताकि उन्हें पार्टी में कोई परेशानी महसूस न हो. नौ बजे सभी पार्टी के लिए चल पड़े.

सभी छोटेछोटे समूहों में, हाथों में लालटेन लिए चले जा रहे थे. चीकू का घर रास्ते में ही पड़ता था. जंबो ने उसे पुकारा लेकिन चीकू ने मना कर दिया और कहा, ‘‘मुझे दुख है कि मैं तुम्हारे साथ नहीं आ सकता. मुझे एक जरूरी काम से बाहर जाना है.’’

‘‘इस समय तुम कहां जा रहे हो?’’ जंबो ने पूछा. लेकिन चीकू ने जंबो की बात का कोई उत्तर नहीं दिया.

उन्हें घाटी तक पहुंचने में थोड़ा समय लगने वाला था. मीकू कांप रहा था. उस ने कहा, ‘‘मुझे घाटी से डरावनी आवाज आती सुनाई दे रही है.’’

जंपी ने उसे चुप कराया और कहा, ‘‘चुप रहो. 10 बजने को हैं. हम जल्दी ही वहां पहुंच जाएंगे.’’

आखिरकार सभी जानवर घाटी पहुंच गए. लेकिन वहां हर तरफ अंधेरा था. वहां लाइटें नहीं थीं. न नाच था, न गाना और न ही खाना.

‘‘किसी ने हमें बेवकूफ बनाया है,’’ जंपी ने कहा.

‘‘यहां कोई पार्टी नहीं है,’’ जंबो चिंघाड़ा. सभी जानवर मुड़े और वापस घर लौटने लगे. वहां सिर्फ एक ही रास्ता था और वे परेशान हो गए थे. अंत में सभी जानवर जंगल पहुंचे, चीकू अपने घर के बाहर बैठा था. वह उन का ही इंतजार कर रहा था.

गुस्से से लाल जंबो ने कहा, ‘‘ किसी ने हमें मूर्ख बनाया है.’’

‘‘मुझे पार्टी के बारे में शुरू से ही संदेह था. सभी पत्र एक जैसे ही थे. किसी भी लिफाफे पर पत्र भेजने वाले का नाम या पता लिखा नहीं था. इसलिए मैं ने निर्णय किया था कि तुम्हारे साथ न जाऊं,’’ चीकू ने कहा.

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‘‘हमें बताओ, तुम्हें क्या पता चला था?’’ टीटू तितली ने चीकू के कोट को खींचते हुए पूछा.

‘‘देखो, तुम सभी के चले जाने के बाद यहां कौन आया था,’’ उस ने कहा और अपने घर के बाहर का बल्ब जला दिया. बैड़ी लोमड़ और लपटू सियार जमीन पर बैठे थे. वे रस्सियों से बंधे थे.

‘‘इन दोनों ने तुम सभी को फर्जी निमंत्रण पत्र भेजा था और तुम सभी के घरों से चले जाने के बाद तुम्हारे घरों में चोरी करने की योजना बनाई.

‘‘जब तुम सभी घाटी की ओर चले गए. उस समय ये दोनों जंगल में चारों ओर टहल रह थे. मैं निकट से उन पर निगाह रखे हुए था. मैं दोनों को पकड़ कर यहां ले आया.’’

‘‘चीकू, तुम ने हम सभी को बचा लिया. हम तुम्हें धन्यवाद किस तरह दें. अगर तुम यहां नहीं होते तो वे अब तक हमारे कीमती सामान ले कर भाग गए होते. हम उसे कभी भी नहीं पकड़ पाते,’’ मीकू ने कहा.

‘‘अरे, मुझे धन्यवाद मत दो. घर जाओ और आराम करो. लेकिन एक बात हमेशा याद रखो कि किसी भी बात पर बिना अच्छी तरह सोचेविचारे आंखें बंद कर के विश्वास नहीं करना चाहिए,’’ चीकू ने कहा.

‘‘अब इन चोरों क्या करें?’’ टीटू ने पूछा. अचानक बैडी और लपटू जोर से हंसने लगे. सभी जानवर हैरान थे.

चीकू भी गुस्सा हो गया. उस ने कहा, ‘‘गलती मानने की जगह तुम दोनों हंस रहे हो?’’

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‘‘अरे, ऐसी बात नहीं है, जैसा कि तुम लोग सोच रहे हो,’’ उन्होंने कहा, ‘‘हम चोर नहीं हैं. हमें बताओ, आज कौन सी तारीख है?’’

चीकू ने कहा, ‘‘आज पहली अप्रैल है, लेकिन इस से क्या?’’

‘‘तुम सब अभी भी नहीं समझे, है न? हम जंगल में बोर हो गए थे. इसलिए हम ने निर्णय किया कि तुम सभी को अप्रैलफूल बनाएंगे. हमें उम्मीद है कि अब तुम सब सारी बात समझ गए होगे,’’ दोनों ने कहा.

सभी जानवरों को उन की बातों पर विश्वास हो गया. लपटू और बैडी ने माफी मांगी. लेकिन चीकू ने उन्हें समझाया कि इस तरह की शरारतें खतरनाक होती हैं. उन्होंने वादा किया कि वे फिर ऐसा नहीं करेंगे.

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