टोटो कछुआ मैदान में बैठ कर धूप सेंक रहा था, तभी रौकी चीता लंबी छलांगें लगाते हुए वहां से गुजरा. टोटो उसे बस देखता रह गया.

‘काश, मैं भी रौकी की तरह तेज दौड़ पाता. फिर कोई भी मेरी धीमी चाल का मजाक नहीं उड़ाता,’ टोटो सोचने लगा.

टोटो अभी खुद से बातें कर रहा था कि तभी सामने से आती बूजी बिल्ली की नजर उदास टोटो पर पड़ी.

‘‘टोटो, तुम किस सोच में डूबे हो?’’ बूजी ने पूछा.

‘‘बूजी, मैं भी रौकी चीता की तरह तेज दौड़ना चाहता हूं. अपनी धीमी गति से मैं तंग आ गया हूं. लोग मुझे चिढ़ाते हैं,’’ टोटो ने उदास स्वर में कहा.

‘‘बस, इतनी सी बात. रौकी को तो दौड़ना मैं ने इसी मैदान में सिखाया है. वह मेरे ही खानदान का है. बिल्ली और चीता में ज्यादा फर्क नहीं है. उस ने लंबी छलांगें लगाना, शिकार करना?भी मुझ से ही सीखा है,’’ बूजी ने शेखी बघारी.

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‘‘क्या, सच? अगर ऐसी बात है तो क्या तुम मुझे भी ?तेज दौड़ना सिखा सकती हो?’’ टोटो ने उत्साह से पूछा.

कुछ सोच कर बूजी बोली, ‘‘तुम्हें सिखाना जरा मुश्किल है. तुम्हारी टांगें छोटी हैं. शरीर भी भारी है.’’

‘‘मौसी, तुम जो कहोगी, मैं करने को तैयार हूं. बस मुझे रौकी की तरह दौड़ना सिखा दो,’’ टोटो ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

‘‘ठीक है. तेज दौड़ने के लिए तुम्हें मुझ से ट्रेनिंग लेनी होगी. इस की फीस होगी 5000 रुपए,’’

बूजी ने शर्त रखी.

‘‘5000 तो ज्यादा हैं, कुछ कम करो न,’’ टोटो ने कहा.

‘‘नहीं, नहीं, एक रुपया भी कम नहीं होगा. अगर मंजूर हो तो कल सुबह रुपए ले कर यहीं आ जाना,’’ बूजी ने कहा.

टोटो के सिर पर तेज दौड़ने का भूत सवार था. वह राजी हो गया.

अगली सुबह रुपए ले कर टोटो मैदान में पहुंचा. थोड़ी देर बाद बूजी भी पहुंच गई.

रुपए गिन कर बूजी ने अपने पर्स में डाल लिए.

बूजी ने ट्रेनिंग शुरू की. ‘‘टोटो, तेज दौड़ने के लिए तुम्हें मेहनत करनी होगी. सब से पहले मैदान के 10 चक्कर लगाओ.’’

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टोटो धीरेधीरे मैदान के चक्कर लगाने लगा. बूजी आराम से छांव में बैठ कर सुस्ताने लगी.

10 चक्कर लगाने के बाद टोटो लौटा.

वह बुरी तरह हांफ रहा था. लंबी सांसें खींच कर बोला, ‘‘बूजी, अब आगे क्या करना है?’’

‘‘बस, आज के लिए इतना काफी है. कल सुबह फिर आ जाना,’’ बूजी बोली.

अगले दिन बूजी ने टोटो से फिर 10 चक्कर लगाने को कहा.

एक हफ्ते तक यह सिलसिला चलता रहा. मैदान के चक्कर लगा कर टोटो ऊब चुका था.

‘‘बूजी, मैदान के चक्कर लगा कर मैं बोर हो गया हूं. तेज दौड़ने की कुछ नई ट्रेनिंग दो,’’ टोटो ने कहा.

‘‘धैर्य से काम लो. समय आने पर मैं सब सिखा दूंगी. रौकी भी एक दिन में तेज दौड़ना नहीं सीख गया है,’’ बूजी गुस्सा हो कर बोली.

टोटो दोबारा चक्कर लगाने लगा.

मैदान के किनारे एक पेड़ था. बन्नू बंदर वहीं रहता था. वह रोज टोटो और बूजी को देखता रहता.

एक दिन बूजी के जाने बाद उस ने टोटो को पास बुलाया. ‘‘टोटो, पिछले 10 दिनों से तुम मैदान के चक्कर लगा रहे हो. क्या किसी दौड़ प्रतियोगिता में हिस्सा लेना है?’’

‘‘दरअसल, मैं रौकी चीता की तरह तेज दौड़ना चाहता हूं. बूजी मुझे तेज दौड़ने की ट्रेनिंग दे रही है,’’ टोटो ने बताया.

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‘‘तेज दौड़ने की ट्रेनिंग?’’ बन्नू हंस पड़ा. ‘‘बूजी खुद दौड़ कर एक चूहा नहीं पकड़ सकती. वह तुम्हें क्या ट्रेनिंग देगी?’’

‘‘बूजी ने रौकी चीता को इसी मैदान पर दौड़ना, लंबी छलांग लगाना और शिकार करना सिखाया है. खुद को चीता खानदान की वंशज बताती हैं. ट्रेनिंग के लिए उस ने मुझ से 5000 रुपए फीस भी ली है.’’

‘‘टोटो, मुझे तो दाल में कुछ काला लग रहा है. मैं ने तो कभी रौकी को यहां बूजी से ट्र्रेनिंग लेते नहीं देखा है. लगता है, बूजी तुम्हें बेवकूफ बना रही है,’’ बन्नू बोला.

‘‘अब क्या करें, बन्नू? मैं ने तो सारे रुपए उसे दे दिए हैं,’’ टोटो ने रोनी सूरत बना कर कहा.

‘‘टोटो, चिंता मत करो. मैं सचाई का पता लगाता हूं. अगर बूजी झूठ बोल रही है, तो उसे इस की सजा जरूर मिलेगी,’’ बन्नू ने भरोसा दिया.

अगले दिन टोटो ट्रेनिंग लेने मैदान में पहुंचा. उस के साथ बन्नू भी था. टोटो ने बन्नू का परिचय कराया, ‘‘बूजी, यह मेरा दोस्त बन्नू है. यह भी आप से लंबी छलांग लगाने की ट्रेनिंग लेना चाहता है.’’

‘‘हां, हां, क्यों नहीं. पर मेरी फीस के बारे में इसे बता दिया न?’’ बूजी ने पूछा.

‘‘हां, यह फीस के रुपए भी साथ लाया है,’’ टोटो ने जवाब दिया.

बन्नू ने रुपए निकाल कर कहा, ‘‘बूजी, इस से पहले क्या आप ने किसी को तेज दौड़ने की ट्रेनिंग दी है?’’

बूजी बोली, ‘‘अभी पिछले महीने रौकी को मैं ने ही ट्रेनिंग दी थी. आज वह वन में सब से तेज दौड़ता है.’’

‘‘मुझे तो विश्वास नहीं होता. रौकी तो बचपन से ही तेज दौड़ता है. वह आप से ट्रेनिंग क्यों लेगा?’’ बन्नू ने पूछा.

बन्नू का सवाल सुन कर बूजी थोड़ा घबराई.

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फिर खुद को संभालते हुए बोली, ‘‘बन्नू, तुम्हें यकीन हो या न हो पर रौकी को मैं ने ही दौड़ना सिखाया है.’’

तभी रौकी वहां आ पहुंचा.

रौकी को देख कर बूजी बुरी तरह घबरा गई. इस से पहले वह कुछ बोलती, रौकी गुर्राया, ‘‘बूजी, तुम्हें शर्म आनी चाहिए. मेरा नाम ले कर तुम भोलेभाले जानवरों को मूर्ख बना रही हो. उन से रुपए ऐंठ रही हो.’’

बूजी ने भागने की कोशिश की. पर रौकी ने अपने तेज पंजों में उसे दबोच लिया. ‘‘बूजी, तुम मुझ से तेज नहीं भाग सकती. तुम ने टोटो और बन्नू को ठगने की कोशिश की है. मैं तुम्हें राजा लियो शेरसिंह के पास ले जाऊंगा. वह तुम्हें गलती की सजा देंगे.’’

‘‘मुझे माफ कर दो, रौकी. मैं अपनी गलती मानती हूं. मैं ने टोटो से झूठ कहा था. मैं न तो रौकी की वंशज हूं और न ही उसे तेज दौड़ना सिखाया है. मैं टोटो को मूर्ख बना रही थी. रुपए के लालच में मैं ने तुम्हारे नाम का इस्तेमाल किया, आइंदा ऐसी गलती मैं नहीं दोहराऊंगा,’’ बूजी ने रोते हुए कहा.

‘‘एक शर्त पर तुम्हें माफ कर सकता हूं. तुम्हें टोटो को पूरे रुपए लौटाने होंगे,’’ रौकी बोला.

‘‘मैं टोटो के सारे रुपए लौटा दूंगी. मुझे लियो के पास मत ले जाओ, नहीं तो वे मुझे वन से बाहर निकाल देंगे.’’ बूजी गिड़गिड़ा रही थी.

रौकी ने पंजे की पकड़ ढीली की. बूजी की जान में जान आई. उस ने टोटो से माफी मांगी और उस के रुपए वापस लौटा दिए.

रौकी ने टोटो को समझाया. ‘‘टोटो, बन्नू की होशियारी की वजह से बूजी की असलियत सामने आई. कल शाम इस ने मुझे सारी बातें बताईं और मदद मांगी. किसी से भी ट्रेनिंग लेने से पहले उस की सचाई जान लेना जरूरी है. अगर तुम ने पहले ही मुझ से आ कर बात कर ली होती?? तो बूजी तुम्हें मूर्ख नहीं बना पाती. रही बात तेज दौड़ने की तो यह असंभव है. हम दोनों के शरीर की बनावट अलग है. तुम चाह कर भी मेरे जैसे तेज नहीं दौड़ सकते. तुम्हें अपनी धीमी चाल पर शर्मिंदा नही ंहोना चाहिए. तुम्हारे अंदर कई ऐसे गुण है जो दूसरों में नहीं. इसलिए तुम्हें खुद पर गर्व होना चाहिए और खुश रहना चाहिए.’’

‘‘रौकी, मैं तुम्हारी बात समझ गया. आइंदा मैं दूसरे की नकल नहीं करूंगा. अपनी अच्छाइयों पर गर्व करूंगा,’’ टोटो ने मुसकराते हुए कहा.

VIDEO : जियोमेट्रिक स्ट्राइप्स नेल आर्ट

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