सनशाइन वुड्स कचरे के घर में बदल गया था. यह पहले हरियाली वाला वन था, धीरेधीरे सूखा, बंजर बन गया था.

जानवरों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी. वन के किनारे स्थित लूना झील का पानी भी तेजी से सूखता जा रहा था.

राजा शेरा बहुत चिंतित थे. उन्होंने अपने मंत्रियों की आपात मीटिंग बुलाई. ‘‘हमें पानी बचाने और वन की हरियाली को फिर से वापस लाने के बारे में सोचना होगा.’’

मंत्रियों ने यह पता लगाने का निश्चय किया कि वन की हरियाली आखिर क्यों गायब होती जा रही है. कुछ दिनों के बाद चारों मंत्री अपनीअपनी रिपोर्ट ले कर आए.?

‘‘जंबो हाथी झील का पानी बरबाद कर रहा है.

व अपनी सूंड़ में पानी भर कर उधर से आनेजाने वाले जानवरों पर फेंकता रहता है,’’ रौब खरगोश ने कहा.

‘‘मैं वन के कुछ घरों में गया. कई जानवर प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं, जिसे जैव तरीके से नष्ट नहीं किया जा सकता. वे प्लास्टिक के कचरे को खानेपीने के कचरों में मिला देते हैं और इधरउधर फेंक देते हैं,’’ जूनी जेब्रा बोला. मैं ने बैंडी और ट्रैंडी भेडि़ए को अकसर कचरे के घर के पास छिप कर बैठे हुए देखा. है. वे वहां बैठ कर शिकार का इंतजार करते रहते हैं. इसलिए जानवर डर से अपना कचरा फेंक कर भाग जाते हैं,’’ भोलू भालू बोला.

‘‘कुछ दिनों पहले एक रात बहुत ठंड थी. कुछ जानवर प्लास्टिक के कचरे को जला कर बैठे थे. तभी उन्हें जले हुए प्लास्टिक के हानिकारक धुएं की वजह से खांसी होने लगी. वहीं कुछ चींटियों के घर भी थे. आग की वजह से उन के घर भी बरबाद हो गए. अब चीटिंयों ने मिट्टियों में काम करने से मना कर दिया है,’’ समझदार कैरा कौए ने कहा.

राजा शेरा ने सभी मंत्रियों की बात ध्यान से सुनी. उन्होंने पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी. उन्होंने वन में हरियाली वापस लाने का एक रास्ता बताया.

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मंत्रियों ने हंसते हुए अपना सिर हिलाया. राजा शेरा ने ताली बजाई, तो मिंटी लोमड़ी और पोर्की सूअर आ गए, जो सिपाही थे.

‘‘जंबो, बैंडी, ट्रैंडी और चीटिंयो के सरदार से कहो कि वे कल सुबह 9 बजे तक मुझ से मिलें,’’ राजा शेरा ने कहा.

इसी बीच मंत्री भोलू भालू वन के सब से लंबे पेड़ पर चढ़ कर कुछ एनांउस कर रहा था. सभी जानवर अपनेअपने घरों से बाहर आ कर भोलू की बात सुनने लगे.

‘‘राजा शेरा के आदेश से अब कोई भी जानवर प्लास्टिक के कचरे को खानेपीने वाले कचरे से नहीं मिलाएगा. कृपया दोनों कचरों के लिए अलगअलग डस्टबिन का प्रयोग करें. जो इस आदेश का पालन नहीं करेगा, उसे सजा दी जाएगी,’’

भोलू ने कहा.

अब जानवरों के पास कोई रास्ता नहीं था, इसलिए वे राजा शेरा के आदेश पर अमल करने लगे.

दूसरी सुबह शेरा के दरबार में 4 जानवर आए.

‘‘बैंडी और ट्रैंडी.’’ शेरा ने कहा तो दोनों सीधे खड़े हो कर शेरा की ओर देखने लगे.

‘‘तुम्हारे लिए एक नया काम है. तुम्हारे घर के पास जो कचरे का ढ़ेर है, उन में से प्लास्टिक के कचरे को अलग करो. फिर उसे उठा कर वन के उत्तरपश्चिमी इलाके में ले जा कर गड्ढे को भरने का काम करो,’’ शेरा ने आदेश दिया.

इस के बाद शेरा ने चींटियों के सरदार की ओर देखा. ‘‘बंजर जमीन पौधे उगाने के लिए ठीक नहीं हैं. ट्रैंडी और बैंडी जब प्लास्टिक कचरे को अलग कर लेंगे तो बचा हुआ कचरा कुछ दिनों में खाद बन जाएगा.

इसे पौधों की वृद्धि के लिए उपयोग में लाया जा सकता है. तुम बीज ला कर इस में लगाओगे,’’ शेरा ने कहा.

चींटियों के सरदार ने अपना सिर हिलाया. सरदार और अन्य चींटे बिना काम के बहुत बोरिंग महसूस कर रहे थे. वे खुश थे क्योंकि अब उन्हें काम मिल गया था.

अब शेरा जंबो की ओर मुड़े, जिस की आंखें बंद थीं.

‘‘जंबो, मैं जानता हूं कि तुम दिन भर क्या करते रहते हो, दूसरों पर पानी फेंकने के बजाए अब तुम बंजर जमीन पर पानी डालो, जहां हमारे चींटे दोस्त काम करने जा रहे हैं,’’ शेरा ने आदेश दिया.

जंबो ने खुशी से अपना सिर हिला दिया. उसे अब भी आखिर पानी फेंकने का ही काम मिला था.

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थोड़े ही दिनों बाद सनशाइन वुड्स फिर से हराभरा हो गया था. बंजर जमीन फिर से उपजाऊ और हरी हो गई. चींटे की कड़ी मेहनत का यह फल था और जंबो द्वारा लगातार पानी दिए जाने का परिणाम भी.

पेडपौधों के फलनेफूलने, बढ़ने के लिए काफी मात्रा में खाद भी बन गए थे. इस के लिए बैंडी और ट्रैंडी ने बहुत मेहनत की थी.

खाली जगहों को प्लास्टिक के कचरे से भर देने के बाद जानवरों ने वहां खेलने का एक छोटा सा पार्क बना दिया था. सभी बच्चे वहां खेलने लगे थे.

वन के जानवरों ने यह साबित कर दिया था कि यदि सब मिल जुल कर समझदारी से काम लें तो पर्यावरण को स्वच्छ बना कर रखा जा सकता है.

VIDEO : पीकौक फेदर नेल आर्ट

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