ब्राउनी भालू पेड़ की छांव में काफी देर से सो रहा था. जब उस की गीली नाक पर मक्खियां भिन्नभिनाने लगीं, तब जा कर उस की नींद टूटी. ‘‘उफ. इस भूख को भी अभी लगनी थी,’’ उस ने अपनी तोंद पर हाथ फेरते हुए कहा.

ब्राउनी बहुत आलसी था. काम करने के नाम पर उस के हाथपैर फूलने लगते थे. उसे सोना बहुत अच्छा लगता था. पहले तो उस ने फिर से सोने की कोशिश की, लेकिन जब पेट में चूहे ज्यादा उछलकूद करने लगे, तो वह खाने की तलाश में निकला. सामने काफी बड़ेबड़े पेड़ थे. कहीं आम के पेड़, तो कहीं बरगद, गुलमोहर के पेड़ थे. पर ब्राउनी को तो खाने की तलाश थी. अचानक उस की नजर एक पेड़ पर पड़ी, जहां मधुमक्खियां उड़ रही थीं.

‘‘वाह, लगता है कि इस पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता है,’’ ब्राउनी के चेहरे पर खुशी छा गई, ‘‘आज तो खूब शहद खाऊंगा.’’

उस पेड़ पर मधुमक्खियों का बड़ा सा छत्ता लटक रहा था. अब ब्राउनी उन मधुमक्खियों के वहां से जाने का इंतजार करने लगा. लेकिन मधुमक्खियां भला अपना घर छोड़ कर कहां जानेवाली थीं? कुछ जातीं, तो दूसरी आ जातीं, बेचारा ब्राउनी बड़ा परेशान हो गया. ‘‘अब बहुत हुआ. मैं और इंतजार नहीं कर सकता,’’ गुस्से से ब्राउनी ने कहा. उस ने आसपास नजर दौड़ाई. पास में ही एक लंबी सी बांस पड़ी हुई थी. उस ने वह बांस उठाया और शहद से भरे छत्ते पर दे मारा.

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छत्ता का एक हिस्सा जमीन पर आ गिरा. ब्राउनी उसे लेने के लिए जैसे ही दौड़ा कि मधुमक्खियों का झुंड उस पर टूट पड़ा. ‘‘हमारा शहद चुराता है. ठहर, अभी मजा चखाती हूं,’’ रानी मधुमक्खी आंखें लालपीली करती हुई बोलीं और इशारा किया तो अन्य मधुमक्खियों ने ब्राउनी को घेर लिया. कुछ उस के भूरे बालों से भरे शरीर में घुस कर काटने भी लगीं.

‘‘अरे, ये तो बहुत खतरनाक मधुमक्खियां हैं,’’ कांटा चुभते ही ब्राउनी बिलबिलाया. वह छत्ते को छोड़ कर अपनी जान बचाने के लिए भागा. मधुमक्खियां भी उस के पीछे भागीं. ब्राउनी काफी देर तक इधरउधर दौड़ता रहा. पहले तो उसे लगा कि मधुमक्खियां उस के पीछे कितना भागेंगी, जब वे थक जाएंगी, तब वह मजे से शहद खाएगा. लेकिन मधुमक्खियां इतनी आसानी से उस का पीछा नहीं छोड़ने वाली थीं.

भागतेभागते ब्राउनी का दम फूलने लगा था. इतने में उसे एक नदी दिखी. ब्राउनी की जान में जान आई. वह तुरंत नदी की ओर भागा. वह नदी के पानी में उतर गया. उस ने पीछे देखा कि मधुमक्खियों का झुंड भी नदी की ओर आ रहा है. ब्राउनी तुरंत पानी के अंदर चला गया. वह काफी देर तक पानी के अंदर ही रहा. फिर उस ने धीरे से अपना सिर बाहर निकाला. आसपास कहीं मधुमक्खियों को नहीं देख कर उस ने राहत की सांस ली.

लेकिन उसे क्या पता था कि मधुमक्खियां भी पेड़ के पीछे छिप कर उस का इंतजार कर रही थीं. ब्राउनी नदी से जैसे ही निकला, वे फिर उस के पीछे लग गईं. अब ब्राउनी के सामने भागने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा था. लेकिन उस का पूरा बदन भीग चुका था. लंबेलंबे बालों से पानी टपक रहा था. ऐसे में उस का वजन भी बढ़ गया था. वह तेजी से भाग नहीं पा रहा था.

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‘‘मुझे माफ कर दो,’’ दम लेते हुए ब्राउनी ने कहा, ‘‘मैं अब तुम्हारा शहद कभी नहीं चुराऊंगा. अब मेरा पीछा छोड़ दो. मैं बुरी तरह से थक चुका हूं.’’ ब्राउनी जब गिड़गिड़ाया, तो रानी मधुमक्खी को उस पर दया आ गई. ‘‘देखो ब्राउनी, अगर तुम भूखे हो तो हम तुम्हें शहद दे सकते हैं. वैसे भी वह गिरा हुआ छत्ता हमारे किसी काम का नहीं, हम रोज तुम्हें शहद देंगे. लेकिन इस के लिए तुम्हें मेहनत करनी पड़ेगी. किसी की चीज चुरा कर खाना गलत बात है.’’

‘‘तुम्हारी बात सही है, रानी. मगर काम करने से मैं बहुत घबराता हूं,’’ ब्राउनी ने अपनी मजबूरी बताई. इस बात पर हंसती हुई रानी मधुमक्खी बोली, ‘‘अरे ब्राउनी, तुम्हें ज्यादा मेहनत नहीं करनी होगी.

‘‘बस तुम हमारे छत्ते की पहरेदारी करना. उस पेड़ के नीचे रहना और देखना कोई हमारे छत्ते को नुकसान न पहुंचाए, बदले में तुम जितना शहद चाहो, हम देंगे.’’

‘‘सच, यह तो बहुत अच्छी बात है,’’ खुशी के मारे ब्राउनी के मुंह से निकला, ‘‘भागने से अच्छा तो एक जगह बैठ कर काम करना है.’’ यह सुन कर रानी मधुमक्खी के चेहरे पर भी हंसी दौड़ गई.

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