ताजपुर जंगल में गरमी का मौसम शुरू हो गया था. अब सभी पक्षी और जानवर गरमी से बेहाल थे. जंगल के चारों दिशाओं में 1-1 तालाब था.

गरमी इतनी थी कि तालाबों का पानी सूखने लगा और जानवर पानी के लिए तरसने लगे. जिस दिशा के तालाब का पानी सूखता उस दिशा के जानवर दूसरी दिशा के तालाब पर जा कर पानी पीते, जिस से वहां पर पानी पीने वाले जानवरों को परेशानी होने लगती और लड़ाईझगड़े का माहौल बन जाता.

अब ताजपुर जंगल के जानवर कम पानी होने की वजह से एकदूसरे से लड़ने लगे थे, ताकि वे पानी पर अपना अधिकार जमा ?सकें. ताजपुर जंगल में कम पानी की वजह से अराजकता फैल गई थी. मानसून की बरसात होने में अभी करीब 2 महीने बचे थे.

बात जंगल के राजा शेरसिंह तक भी पहुंची. राजा शेरसिंह ने आपात बैठक बुलाई. राजा शेरसिंह ने जंगल के हर पक्षी और जानवर से इस मुसीबत से छुटकारा पाने के उपाय बताने को कहा. बैठक में कोई कुछ नहीं बता पा रहा था क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इस कम पानी की मुसीबत से कैसे छुटकारा पाया जाए.

सभी जानवर चुपचाप सिर झुकाए बैठे थे, तभी सभा में चीनू चूहा खड़ा हुआ और बोला, ‘‘महाराज, आप आज्ञा दें तो एक सुझाव देना चाहता हूं जिस से पानी की समस्या खत्म हो जाएगी.’’

राजा शेरसिंह कुछ बोलते उस से पहले ही सब जानवर कहने लगे कि इतना छोटा चूहा क्या सुझाव देगा, जब कि बड़े और समझदार जानवर कुछ नहीं बता पा रहे. सब ने चीनू चूहे को चुपचाप बैठ जाने को कहा.

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