राजा शेरसिंह ने चंपकवन में प्लास्टिक के थैले के उपयोग पर रोक लगा दी. यह सुन कर टिटू तितली बहुत खुश हुई. उस की एक छोटी सी सिलाई की दुकान थी. प्लास्टिक पर रोक लगने के बाद चंपकवन के जानवरों को बाजार से सामान लाने के लिए थैले की जरूरत थी. टीटू ने कपड़े के थैले बनाने शुरू कर दिए.

एक दिन ब्लैकी भालू टीटू की दुकान पर आया. ‘‘क्या तुम मेरे लिए कुछ कपड़े के थैले बना सकती हो? मैं अपने ग्राहकों को अब कपड़े के थैले में ही सामान देना चाहता हूं,’’ ब्लैकी ने कहा.

टीटू तुरंत तैयार हो गई. ‘‘तो ठीक है, मुझे हर दिन 50 थैले चाहिए. दुकान ???पर थैले पहुंचते ही मैं उस की कीमत दे दूंगा,’’ ब्लैकी बोला.

टीटू खुश थी. उस ने तुरंत काम शुरू कर दिया. 50 थैले बनाने के लिए वह दिनभर कड़ी मेहनत करती रही. थैले बन जाने के बाद, वह ब्लैकी के दुकान पर पहुंचा आई. जंगल में सभी को टीटू का थैला बहुत पसंद आया. सभी ने टीटू से थैले खरीदने शुरू कर दिए. प्लास्टिक के थैले पर रोक लगने से बैडी लोमड़ को छोड़ कर सभी खुश थे.

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दरअसल, बैडी लोमड़ की प्लास्टिक की एक फैक्ट्री थी, जहां कवर्स बना कर वह चंपकवन के साथसाथ पड़ोसी वनों में भी बेचता था. इस से उस ने खूब रुपए कमाए थे. लेकिन प्लास्टिक पर रोक लगने के बाद उसे अपनी फैक्ट्री बंद करनी पड़ी. अब वह किसी और काम की तलाश में था. बैडी को शेरसिंह पर बहुत गुस्सा आ रहा था और टीटू तितली पर भी. वह सोचता था कि प्लास्टिक पर रोक के बाद भी यदि टीटू कपड़े के थैले नहीं बनाती, तो उस की दुकान बंद नहीं होती. बहुत सोचने के बाद उस ने टीटू की दुकान बंद करवाने की एक योजना बनाई.

एक दिन टीटू ने अपना काम खत्म कर सोचा कि पहले कुछ खा लिया जाए, फिर वह थैले ले कर ब्लैकी की दुकान पर जाएगी. यह सोच कर वह दुकान से बाहर कुछ खाने के लिए चली गई. बैडी ने टीटू को दुकान से बाहर जाते हुए देख लिया. वह तुरंत टीटू की दुकान में घुसा और सभी थैलों में छोटेछोटे छेद कर दिए. टीटू के आने से पहले वह दुकान से चला गया.

जब टीटू वापस लौटी, तो उसे कुछ पता नहीं चला. उस ने सारे थैले उठाए और ब्लैकी की दुकान की ओर चल पड़ी. दुकान पर जब ब्लैकी थैले को चैक करने लगा, तो उसे सभी थैलों में छेद नजर आए. ‘‘टीटू, सभी थैलों में छेद हैं. मेरी सलाह है कि ये सारे थैले ले जाओ और सभी के छेद की सिलाई कर कल ले आना,’’ ब्लैकी ने कहा.

टीटू बहुत निराश और हैरान थी. वह सोच रही थी कि सिलाई करते समय उसे इन थैलों के छेद क्यों नहीं नजर आए. वह सारे थैले ले कर वापस अपने घर की ओर लौट रही थी, तभी चीकू खरगोश मिल गया.

‘‘हैलो टीटू, क्या हुआ? तुम उदास क्यों हो?’’ चीकू ने पूछा. ‘‘चीकू, अन्य दिनों की तरह आज भी मैं कपड़े के थैले बना कर ब्लैकी की दुकान पर ले गई थी, लेकिन सभी में छेद थे. इसलिए ब्लैकी ने थैले नहीं खरीदे.

‘‘अब मुझे सारे थैले नए बनाने पड़ेंगे. लेकिन मुझे समझ नहीं आया कि थैलों में छेद कैसे हो गए, जबकि थैले बनाते समय मैं बहुत ध्यान रखती हूं,’’ टीटू ने कहा. ‘‘ओह, जरा थैले दिखाना,’’ कह कर चीकू टीटू के थैले को गौर से देखने लगा.

‘‘टीटू, छेद को देख कर लगता है कि किसी ने कैंची से जानबूझ कर ऐसा किया है. तुम तो ऐसा कर ही नहीं सकती,’’ चीकू बोला. ‘‘मैं क्यों करूंगी. दिन भर इतनी मेहनत से सिलाई करती हूं, फिर मैं छेद क्यों करूंगी,’’ टीटू बोली.

‘‘क्या आज दुकान पर तुम्हारे साथ कोई और भी था?’’ चीकू ने पूछा. ‘‘नहीं, लेकिन खाने के लिए मैं थोड़ी देर दुकान से बाहर गई थी,’’ टीटू ने याद करते हुए कहा.

कुछ देर सोचने के बाद चीकू बोला, ‘‘हम्म… चिंता मत करो. मैं ने एक योजना बनाई है.’’ दूसरे दिन टीटू ने सभी थैलों के छेद बंद किए और कुछ नए थैले भी सिलती रही.

‘‘मैं बहुत थक गई हूं. बाहर से कुछ खा कर आती हूं,’’ टीटू जोर से बोली और दुकान से बाहर चली गई. दुकान के बगल में ही बैडी छिपा हुआ था. वह धीरे से दुकान में घुस गया. उस ने जैसे ही थैले को काटना शुरू किया, तभी दुकान में छिपा हुआ चीकू बाहर आ गया. उस ने बैडी को पकड़ लिया. टीटू भी वहां पहुंच गई.

‘‘अच्छा, तो तुम थे, बैडी. लेकिन तुम ने ऐसा क्यों किया?’’ टीटू ने पूछा. ‘‘क्योंकि तुम्हारी वजह से मेरी फैक्ट्री बंद हो गई थी. इसलिए मैं तुम्हारी दुकान भी बंद करवाना चाहता था,’’ बैडी ने गुस्से में कहा.

‘‘लेकिन प्लास्टिक पर रोक तो शेरसिंह ने लगवाई थी, फिर मैं इस बात के लिए जिम्मेदार कैसे हो गई. वैसे भी प्लास्टिक पर रोक तो हमारे साथसाथ पर्यावरण के लिए भी बहुत जरूरी है,’’ टीटू बोली. ‘‘लेकिन इस से तो हमारा नुकसान हो गया. हमारा काम ही बंद हो गया. अब हम क्या करेंगे?’’ बैडी ने कहा.

‘‘तो तुम कोई और चीज क्यों नहीं बनाना शुरू कर देते? तुम अपनी फैक्ट्री में बेकार प्लास्टिक को रिसाइकिल कर डस्टबिन और अन्य चीजें बनाना क्यों नहीं शुरू कर देते. इस से पर्यावरण भी अच्छा और स्वच्छ बना रहेगा,’’ चीकू ने सलाह दी. बैडी को चीकू की बात समझ में आ गई. ‘‘हां, तुम सही कह रहे हो. मैं अब ऐसा ही करूंगा,’’ बैडी ने कहा. इस के बाद उस ने टीटू से कहा, ‘‘माफ कर दो टीटू, मेरे गुस्से ने मुझे अंधा कर दिया था. मैं ने कुछ नया करने के बजाए तुम्हारा नुकसान कर दिया.’’

‘‘ठीक है, बैडी. मैं खुश हूं कि तुम्हें अपनी गलती का एहसास हो गया और अब तुम बेकार प्लास्टिक को रिसाइकिल कर के वन से बेकार प्लास्टिक को हटा दोगे,’’ टीटू बोली. उस के बाद टीटू और बैडी अपनाअपना काम मेहनत से करने लगे.

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